WRITINGS


 मेरे अल्फाज ✍️  शायरी खामोशियों की जुबाँ से 

 



किसी ना किसी की कमी महसूस होगी 

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है 

समझाऊँ भी कैसे दिल को,समझाना मुश्किल है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ 

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं 

इश्क़ में अजीब सी ये  बेबसी लिए बैठे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था 

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे 

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तू ही बता की ये मेरे किस काम की हैं 

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का 

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके खयालों का 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है 

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है 

 ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं 

फिर इन साजिशों को ये लोग प्यार कहते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत पूछना मुझसे तुम की किसका यहाँ कैसा किरदार है 

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है की ये शख़्स ग़द्दार है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तलब थी हमें जिस शख्स की उसी ने हमसे किनारा किया था 

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुजारा किया था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को 

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं 

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना 

हो चुकी है जो खता उसे मत दोहराने देना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी है 

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं 

यूँ हीं तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए 

फिर उसके बाद जो मर्जी आप इल्ज़ाम दीजिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तजुर्बा इतना है की नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ 

किस अंदाज़ से कौन पेश आयेगा मैं उसकी जरूरत पहचान लेता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


टूट गईं वो उम्मीदें जो मैने उससे रखी थी

उसमें वफ़ा की कमी थी बाकी लड़की वो अच्छी थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वक्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं 

वरना यहां तो बस ताने पेश किए जाते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


देखा है मैने यहां सबकी शराफ़त को 

शरीफों को और उनकी आदत को 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कितनी ख्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूं 

इश्क़ में आखिर में  मैं हार के बैठा हूं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कहीं न कहीं कमी रह जाती है 

कितना भी हो यकीं गलतफहमी रह जाती है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

की देकर झूठी उमीदें हमें तबाह किया गया है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसकी समझ से परे हैं हम 

इसलिए उसने समझा की बुरे हैं हम 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


यादें आज भी उसकी बरकार हैं 

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में 

गुज़र गए जमाने उसको मनाने में 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फसलों की दूरी है 

इसलिए घबराना क्यों जब दोनों ही जरूरी हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आदत ही छोड़ दी हमने रूठने मनाने की 

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सोचा था तुम्हें मेरे जज्बातों की गहराई दिखायेंगे 

दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब तुम्हें वो खायी दिखायेंगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा 

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विस्वास हो जाएगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

  

हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है 

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं 

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया 

खता ये थी मेरी की उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया 

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर 

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं 

इश्क़ में अजीब सी ये  बेबसी लिए बैठे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


मर्ज़ी का मालिक और जरा सा मसखरे मिज़ाज का हूँ 

बाक़ी तुम जो भी समझों मैं तो मेरे अंदाज़ का हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये 

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था 

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल 

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


नहीं है आसान इस दिल को समझना 

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ 

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है 

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके 

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है 

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे 

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है 

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का 

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो जो मेरी खिलाफत में था मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा 

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं 

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हमने तो हमारी हारी है 

अब ये बाजी तुम्हारी है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये 

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

सामने हो वो जब भी मेरे मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ 

इकलौता वो शख़्स है मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर 

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं 

शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं 

कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें 

दिल में तुम्हारें भी है जख्म जानते हैं 

तुम ना कहो चाहे हालात लफ्जों से 

मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं 

इनकी हर जुबाँ हम जानते हैं 

तुम ही सोचते हो अजनबी हमें

की तुम्हें हम कम जानते हैं 

तुम कहो न कहो मग़र तुम्हारी 

तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के 

दरमियाँ हम जानते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं करनी मुझे किसी से बराबरी 

मैं सबसे पीछे ही रह लूंगा 

मुबारक हो आपको आपकी ऊँचाई 

मेरा क्या है मैं सबसे नीचे भी रह लूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ग़ुमराह रही है ये जिंदगी 

क्यूंकि मैं झाँसों में जीता रहा 

तोड़ गए जो यकीन मैं उन्हीं के 

दिलाशों में जीता रहा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं 

यही वजह है जो इश्क़ में घबराये हुए हैं 

रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं 

जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने 

उसी की खातिर आज हम पराए हुए हैं 

नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें 

क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का 

जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जो पहले ना बदले वो 

इस बार बदल गए 

इसी तरह ही कितनों के 

किरदार बदल गए 

तलब भी बदल गई और 

तलबगार भी बदल गए 

वफ़ाओं के करते थे जो दावे,दिखावे 

वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए 

होने लगीं हैं अब तो मोहब्बतें भी फर्जी 

जो सच्ची मोहब्बतों के 

अब वो उम्मीदवार बदल गए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ख़्वाहिशों से समझौता और खामोशियों में मलाल चल रहा है 

उलझी हुई है ज़िंदगी, कोई ना कोई जेहन में सवाल चल रहा है 

मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा वो तो बेहाल चल रहा है 

जिंदगी चल रही बेबसी में अभी तो यही फिलहाल चल रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ना जाने क्यों मैं खामोशी में ख्यालों को बुनता रहता हूँ 

कोई कुछ भी बोले मैं खामोशी से सुनता रहता हूँ 

ऐतराज अफ़सोस या कहूँ की परवाह ही नहीं मुझे इस जमाने की 

मस्त मौला शख़्स मैं खुदकी ख़ामियों 

और खूबियों को ख़ुद में ही बुनता रहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई तो ऐसा भी होगा जिसे हम पसंद आयेंगे 

हमारे लहजे और हमारे हर ग़म पसंद आयेंगे 

परहेज ना होगा जिसे हमारे किरदार से 

कितने भी हों हम बेशर्म उसे पसंद आयेंगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में आँखे डाल कर 

मैंने पूछा था उससे की बता क्या है 

की हर बात पर मेरी यूँ खामोश है क्यों 

मुझे भी बता ना मेरी खता क्या है 


 ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तकलीफ़ बस इस बात की है 

की अब वो मुझे पहचानता नहीं है 

ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ 

वो कहता है की मुझको जानता नहीं है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

 

सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं वो बातें 

जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

घड़ी है ये इम्तिहान की 

सो इम्तिहान दे रहे हैं 

वो माँगता है जब भी 

तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं 

किसी से न की कभी उसकी शिकायत 

ना ही कभी उस रब से हम 

ये सब बयान कर रहे हैं 

उसके एक इशारे पर हम अपनी 

हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर 

साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर 

इरादा पक्का कर चुके हो क्या 

यूँ मुझको तुम सताने का 

जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर 

अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर 

और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जरूरी था क्या दिल में आकर जाना 

या फिर दिल को दुखाना जरूरी था 

ठुकराना ही था आख़िर में अगर 

तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था 

वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था

तो फिर ये बताओ की क्या वो बहाना जरूरी था 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

नहीं है कोई तुम जैसा हसीन 

तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा 

क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का 

या हम जैसा कोई बदनसीब होगा

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

मत पूछो इश्क़ की तुम 

मै भी वहाँ से होकर आया हूँ 

लूट गए मेरे ख़्वाब सभी 

और खाकर वहाँ से ठोकर आया हूँ 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में 

एक दफ़ा फिर से सुधार कर के वो गुलाब लाया हूँ 

किराए की हैं ये नींदें और उधार के वो ख़्वाब लाया हूँ 

हर पन्ने पर जिसमें लिखी हुई है वफ़ा-ए इश्क़ 

बड़ी ही मशक़्क़त से ढूँड कर के वो किताब लाया हूँ 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

मत पूछ मुझसे पहेलियों में 

जो भी कहना है तुझे

तू वो साफ़ साफ़ कह दे न 

जरूरी नहीं हर बात मेरे ही हक़ की हो 

तुझे जो कहना है मेरे ख़िलाफ़ तो कह दे न 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

आँखें पढ़ कर देखिए कभी 

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे 

ना हो सके जो खामोशियों में बयाँ 

वो दिल के अल्फ़ाज़ मालूम हो जाएँगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


लाख नारजगी है उसको मुझसे 

मगर वह इन सब के बावजूद रहती है 

ढूंड सको तो ढूँड लेना तुम उसे 

वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा 

तुम तो जा चुके थे मगर तुम्हारे लौटने की 

मैं फ़रियाद करता रहा 

हँसी आई ख़ुद पर और 

दिल पर रोना आया  की क्यों ही बेवजह 

मैं वक्त बर्बाद करता रहा 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

कितना भी गहरा क्यों ना हो 

इसको छुपाना पड़ता है 

इश्क़ में आख़िरकार पछताना पड़ता है 

ठुकराये जाने पर भी जाना पड़ता है 

अपने ही दिल को सताना पड़ता है 

दिल तोड़ कर इश्क़ में दिखाना पड़ता है 

अजीब है ये रस्म मगर निभाना पड़ता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता 

कितना भी करूँ मैं मगर 

उससे फ़ासला नहीं हो सकता 

यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो 

यहाँ से तो कभी वो लापता नहीं हो सकता 

इश्क़ तो दिल की एक सौगात है 

ये कोई मसला नहीं हो सकता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं ख्वाहिशें तेरे पास लेकर 

उम्मीदों भरी निगाहें और दिल में विश्वास लेकर 

आया था कुछ यादें तेरी साथ अपने खास लेकर 

बातें वो तेरी मीठी मीठी और तेरे ही एहसास लेकर 

आया था मैं पास तेरे हिस्से की अपनी साँस ले कर 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तोड़ तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को 

मैं बर्बाद करता रहा 

बेक़सूर था ये मासूम दिल 

उसके बाद भी मैं इसे बर्बाद करता रहा 

छीन लिया मैंने इससे वो सारे जज़्बात प्यार के 

और तेरी यादों को इस दिल से मैं आजाद करता रहा 

हैरानी है मुझको इसकी इस बात पर की 

टुकड़ों टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल

बावजूद उसके ये तुझको ही याद करता रहा 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

कभी एक संकल्प थी तुम मेरी

 मगर अब मात्र एक कल्पना हो तुम

ठुकरा चुका हूँ अब तुम्हारी

 सारी लावारिस उन यादों को 

मेरी खातिर अब मात्र एक सपना हो तुम

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

बहुत कुछ बचा है अभी भी जो तुझको कभी बताना था 

बातें वो जो तू कभी समझी नहीं वो भी तुझको समझाना था 

लक़ीरों में ना थी ना ही तक़दीरों में तू मिली 

कह भी ना सका तुझे कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ 

फिर भी ना जाने किस बात पर मैं इतराता रहता हूँ 

मुद्दतों से मुद्दा वो खामोशियों में दफ़्न था 

जिसकी दास्ताँ मैं सभी को बतलाता रहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चलने दो आज ये कलम 

मुझे हर बात लिखनी है 

खामोशियों तले दफ़्न थी जो मेरे 

अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर 

वो वारदात लिखनी है 

डर नहीं रहा मुझे अब उसकी जुदायी का 

इसलिए उससे जो मिली है 

वो रिहाई की सौगात लिखनी है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

ज़िन्दगी ये मेरी अभी उदास चल रही है 

धड़कनों से ख़फ़ा ये मेरी साँस चल रही है 

नहीं रहा मैं अब मुझमें मौजूद कहीं 

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

विश्वास ही टूटा हो जहाँ 

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं 

और आँखें ही रूठीं हों ख्वाबों से अगर 

तो नींदें भी  क्या कर सकती हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ग़ैरों की अमानत थी वो जो दो पल की ख़ुशी मिली थी 

आख़िरकार उसे मोड़ कर आना था 

और वो यादें जो दो पल थी साथ मेरे उसे भी यार छोड़ कर आना था 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ 

तू मान ना मान मगर मैं तेरा हूँ 

तू चमकती चाँदनी है अगर उस चाँद की 

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ 

सो हमने तो हार मान ली  

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर 

हमारी तो निगाहें भी हैं क़ुसूरवार हमने मान ली 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

किसी और जहाँ की है वो 

की उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा 

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

क़लम का सिपाही हूँ 

मैं कलम की बात लिखता हूँ 

लिखते होंगे लोग मसख़रे 

मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

पूछो कभी उससे भी वो दिल में अपने 

तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है 

समझते हो तुम तो उसके इशारे 

मगर वो भी क्या तुम्हारी खामोशियों की 

मुक़्क़मल मालूमात रखती है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं 

वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

सीख रहा हूँ अभी 

की कैसे प्यार किया जाता है 

करके गुमराह दिल को कैसे 

इस झूठ का कारोबार किया जाता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में 

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ 

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं ही शामिल नहीं हूँ 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं 

यादों की ये आवाज लिए ठहरे होते हैं 

पाबंदियाँ होतीं हैं खामोशियों में 

की कुछ भी बयाँ ना हो सके जुबान से 

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखने लग जाते हैं 

उसकी यादें उसकी बातें हम सुबह शाम लिखने लग जाते हैं 

इक वो है जिसको मेरे ख्याल तक नहीं आते 

इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुदको 

उसके नाम लिखने लग जाते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पूरा शहर ही तेरे नाम हो चुका है 

किससे करूँ मैं शिकायत तेरी 

ये शहर जो तेरा ग़ुलाम हो चुका है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मुरझाना ही था उसे आख़िर में 

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया 

हाथ में सबक़े छुरे थे यहाँ 

लिहाज़ा सबसे मिलना ही छोड़ दिया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई इस पागल दिल को 

समझाने वाला नहीं है 

कैसे समझाऊँ मैं इसको 

की अब वो आनेवाला नहीं है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में बस नमीं रह गई थी 

उसके बाद तो बस उसकी कमीं रह गई थी 

कह ना सके हम उससे कुछ भी उसके जाने पर 

जुबान जो मेरी होठों में बस जमीं रह गई थी 

आँखें खुली होठ खामोश और 

धड़कने भी ये थमीं रह गई थी


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कहने दो ना मुझे जो उसको पैग़ाम कहना है 

अरसों से दिल मैं क़ैद हैं जो वो बातें उससे तमाम कहना है 

नहीं हो सकेंगी बयाँ मुझसे मेरी ये ख़ामोशियाँ 

सो इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अभी भी तेरी यादों का 

मैं बोझ लिए घूम रहा हूँ 

एक तू ही तो है जिसकी यादें

 मैं हर रोज़ लिए घूम रहा हूँ 

तेरे ही इंतज़ार में मैंने हर लम्हा गुज़ारा है 

मगर तुझे ख़बर ही कहाँ की कितनी शिद्दत से 

मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में अश्क़ होना चाहिए 

ऐसा नहीं है की हर शख़्स रोना चाहिए 

हो जाती हैं साफ़ नज़र और 

दिल साफ़ हो जाता है अगर 

तो फिर जायज़ है आँखें भिगोना चाहिए 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

उनकी याद आती रहती है 

उनसे मिलने की इस दिल से 

फ़रियाद आती रहती है 

क्या थी कमी हम में 

जो छोड़ गए वो हमें 

हर ख़बर हमें उनकी 

उनके बाद आती रहती है 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

टूट गईं हैं नींदें तो क्या 

नींदें तो टूटती रहती हैं 

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या 

उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

सायर तो सारे के सारे झूठे होते हैं 

उनकी उम्मीदें और उनके सहारे भी झूठे होते हैं 

करते हैं वो बातें बयां अपनी इशारों में 

मगर उनके तो सारे  इशारे भी झूठे होते हैं

कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे 

सच की वजह से ही तो वे बेचारे टूटे होते हैं 

यूं हैं नहीं सारे सायर झूठे होते हैं

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

आ गए हम भी इश्क में हार कर 

कर्ज़ उनकी ख्वाहिशों का उतार कर 

और अपने ख्वाबों को इन्हीं हाथों से  उजाड़ कर


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कितनी तो सिफारिस की थी तब उसने बारिश की थी 

कैसे कहूँ की मेरा हमदर्द है वो खुदा

 जिसने मेरे ख़िलाफ़ इतनी साज़िश की थी


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो कहता है की सब समझता है 

खुदको वो रब समझता है 

मायूसी मेरी आँखों की 

और मेरी खामोशियों का 

मतलब समझता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नाज़ुक होती हैं 

जज्बातों की डोर 

इसलिए इन पर 

इतना जोर नहीं करते 

जाने दे ऐ दिल 

इतना गौर नहीं करते 

यूँ छोटी छोटी बातों पर 

इतना शोर नहीं करते 

हांसिल नहीं होती हैं 

कुछ ख्वाहिशें भी 

इसलिए खुदको 

इतना कमज़ोर नहीं करते 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

मेरी बातों को मुलाक़ातों को ऐसे भुलाना नहीं था 

तुम्हें जाना ही था अगर तो ऐसे जाना नहीं था 

क्यूंकि तुम ही तो थे मंजिल मेरी मेरा 

तुम्हारे सिवा कोई और ठिकाना नहीं था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसे आज़माना भी था अगर हमें 

तो हम इम्तिहान भी देने वाले थे 

एक इशारा भी उसका काफ़ी था 

उसकी ख़ातिर हम तो अपनी जान भी देने वाले थे


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुझे खोने का इस दिल में मलाल चल रहा है 

तेरी यादों का सिलसिला अब तो फ़िलहाल चल रहा है 

अजीब सी है कश्मकश और अजीब सी हैं ये मजबूरियाँ 

की वक़्त भी बड़ी तेज़ी से अपनी चाल बदल रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो कहती तो है की 

वो कहीं नहीं जाएगी

मगर फिर भी वो  

उसकी बेरुखी सही नहीं जाएगी


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कैसे करूँ बयाँ मैं वो शब्द 

जो मेरे दिल में अधूरे रह गए 

पसंद आ गया उसको ये सारा जमाना 

एक हम ही उसकी ख़ातिर बुरे रह गए 

 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

 बदल गए हैं सब किरदार 

और अब कहानी भी बदल गई है

नहीं रहे अब वो राजा और

  अब रानी भी बदल गई है 

❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀

 

चुभती है खामोशी 

और साये भी चुभने लगे हैं 

हालात अभी ऐसे हैं 

की अपने तो अपने 

पराये भी चुभने लगे हैं 

✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ 

किस हिसाब का है ये जमाना इस बार उसको हमने आजमाने दिया 

उससे ना वफ़ा हुई ना प्यार सो इस बार उसको हमने जाने दिया 

एक दफ़ा नहीं जाने कितनी दफ़ा हमने उसको सब कुछ दोहराने दिया 

उससे ना वफ़ा हुई ना ही प्यार फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया 

✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ 

हमारे जज्बातों की  जहाँ हिफ़ाज़त नहीं है 

ऐसी महफ़िलों की हमको चाहत नहीं है 

मुंह फेर कर हम भीड़ से अक्सर तनहा चलते हैं 

क्यूंकि भीड़ में हमें चलने की आदत नहीं है 

                        ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ ✿ 


उसकी गली से निकलकर आया हूँ मैं 

यकीन करो मैं चाँद से मिलकर आया हूँ 

उसकी याद में संजोय हैं मैंने ख़्वाब 

उसकी ख़ातिर अपनी ख्वाहिशें मैं सिलकर लाया हूँ 


✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾ ✾✾✾✾


ख़रीद फ़रोश जो हुई ख्वाहिशों की

तो इस बार मैं होशियारी करूँगा 

बेच दूँगा मैं अपने हर ग़म फिर 

दिल खोल के ख़रीददारी करूँगा 

नहीं रहेगी अब कोई कशिश ना ख़लिश

इसबार मैं इतनी समझदारी करूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ 

जो तुझे ना पसंद आए हर वो आदत मैं सुधारता रहता हूँ 

मगर फिर भी तुझे ना नज़र आई ये मेरी आशिक़ी 

की किस तरह तेरी ही ख़ातिर मैं खुदको सँवारता रहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सहेज़ कर मैं उसकी यादें उसके एहसास लिखता हूँ

किस क़दर है वो इस ज़िंदगी में ख़ास लिखता हूँ 

उसके नाम से है धड़कन और उसी के नाम से है हर साँस मैं लिखता हूँ 

बेरुख़ी भी उसी की और उसी की तलाश मैं लिखता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


किसी की ख़ातिर सवाल हूँ मैं 

कोई कहता है की कमाल हूँ मैं

फ़रेब हूँ किसी की नज़र का 

तो किसी कि ख़ातिर इस्तकबाल हूँ मैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत झांको मेरी आँखों में तुम मेरे हालात नहीं पढ़ पाओगे 

इन आँखों की गहराई में जो दफ़्न हैं वो जज़्बात नहीं पढ़ पाओगे 

मत ढूँड़ो तुम मेरे दिल की बात नहीं पढ़ पाओगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में 

उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए 

नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई 

की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए 

गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में

वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा 

मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा 

ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ 

तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा 

जो आज तू मेरे लिए है 

कल वो तू बदल जाएगा 

मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई 

ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई 

जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई 

सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक दफ़ा हमसे भी ये गुनाह हुआ था 

जाने अनजाने में किसी से इश्क़ बेपनाह हुआ था 

नहीं रही अब उसकी ख्वाहिश इस दिल में 

ये दिल जिसके इश्क़ में कभी तबाह हुआ था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में इश्क़ का दावा करते हैं 

जज्बातों से अक्सर ये छलावा करते हैं 

वफ़ायें तो इनसे होती नहीं 

ये वफ़ाओं का महज़ दिखावा करते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम्हें चाहूँगा तो इस क़दर चाहूँगा 

की छोड़ मैं इस जमाने की फ़िकर चाहूँगा 

सौंप कर ये ज़िंदगी तुझको सदक़े में 

मेरा वादा है तुझको उम्र भर चाहूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं चाहिए मुझे शर्तों में मोहब्बत 

तुम चाहो तो किनारा कर लेना 

हर फ़ैसला तुम्हारा मंज़ूर है मुझे 

 जो किनारा भी करना है अगर तुम्हें 

 तो बस तुम एक इशारा कर देना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम्हें समझ नहीं आएगी ये बात पुरानी है 

खामोशियों में कहीं दफ़्न एक ज़िंदगानी है 

इन ख़ामोशियों को मेरी बेवजह जो समझो 

तो फिर ये तुम्हारे दिल की नादानी है 

हर लफ्ज़ जो मेरा ख़ामोश है 

हर लफ्ज़ में एक कहानी है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


छोटी सी अहमियत है जो छोटा ही क़िरदार है 

मग़र ख़ुदगर्ज़ी नहीं ये दिल ख़ुद्दार है 

नफ़रत नहीं किसी से और ना ही किसी से प्यार है 

ख़ुदगर्ज़ी हैं लोग यहाँ और कुछ यहाँ ग़द्दार हैं 

इसलिए उम्मीद और विश्वास ये दोनों ही यहाँ बेकार है 


✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾ ✾✾✾✾


हर घड़ी मैं तेरे इश्क़ में तेरा ख़्याल बुनता रहता हूँ 

अजीब हूँ मैं जो सवाल पर सवाल बुनता रहता हूँ 

सिलसिला ये मोहब्बत का महज़ कश्मकश में गुज़र गया जो 

तुझसे मिलने को तारीख़ मैं हर साल चुनता रहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


किराए की है ये ज़िन्दगी 

जो कभी तो ये चुकाना पड़ेगा 

कितनी भी हो नाम पर वसीयत 

सब यहीं पर छोड़ कर जाना पड़ेगा 

रिश्ते कितनी भी ख़ास क्यों ना हों 

मगर वो जो रिश्ता मौत से है 

वो तो निभाना पड़ेगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दर्द-ए-दिल हर किसी से जताया नहीं जाता

दिल तोड़ कर हर किसी को दिखाया नहीं जाता

रखनी पड़तीं हैं कितनी बातें खामोशियों में समेट कर

यूँ बेवजह हर किसी को बताया नहीं जाता

फ़िक्र भी होनी चाहिए जज्बातों की इश्क़ में

करके मज़बूर किसी को इश्क़ में सताया नहीं जाता


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ख़ामोश रही ज़ुबान मगर आँखों ने अपना काम कर दिया 

छुपा कर रखा था मैंने जो हाल-ए-दिल मेरा इसने वो सरे-आम कर दिया 

ढेरो ख़्वाहिशों और ढेरों उम्मीदों को इसने आज नीलाम कर दिया 

नहीं रहा अब ये दिल महफ़ूज़ इन आँखो ने इसे बदनाम कर दिया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तोड़ कर रख देंगे तेरे ख्याल या फिर वो सवाल 

या फिर इन आँखों में तेरे बाद  बस नमी होगी 

बंजर होगी तेरे बाद ये जिंदगी ना फिर इस तरह की ये सरज़मीं होगी 

वसवसे होंगे वहाँ तेरी यादों के या हर बखत तेरी कमी होगी 

मत पूछ तू मेरी तबियत को की कैसे रहूँगा मैं तेरे बग़ैर 

जो तू ही ना रही तो ये सांस भी क्या लाज़मी होगी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


माना तेरे यार बहुत हैं 

इश्क़ में तेरे हक़दार बहुत हैं 

चहेते तेरी मुस्कान के 

या फिर अश्कों के तेरे दावेदार बहुत हैं 

ख़रीद सकें जो तेरे ग़म 

ख़रीददार बहुत हैं 

फिर भी तू रहना जरा संभल कर 

जो यहाँ पर लोग ग़द्दार बहुत हैं

क़ातिल जज्बातों के 

या इश्क़ में गुनहगार बहुत हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं समझ सका तू वो लहजा 

जो तुझको मैं समझाने आया था 

कितना बदल चुका हूँ  

कितनी शिद्दत से तुझको मैं बताने आया था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उससे बिछड़ने की कोई ख़ास वजह नहीं थी

ख़ुद मैं ही लौट आया हूँ उसके दिल से 

जो उतनी वहाँ पर जगह नहीं थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई इश्क़ में वफ़ा करता है 

तो कोई दिलासे देकर जफ़ा करता है 

किसी से हमदर्दी बड़ी शिद्दत से होती है

तो इश्क़ में कोई जुल्म हर दफ़ा करता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो चला गया लेकिन

उसके एहसास छोड़ गया है 

यादें वो अपनी मेरे पास छोड़ गया है 

ढूंड रहा हूँ मैं आज भी उसको उसके वादों में कहीं 

जो देकर वो मुझको झूठी आस छोड़ गया है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अपने दिल में तुम मुझे पनाह दोगे 

और अपने ख़्वाबों में कहीं तुम मुझे जगह दोगे 

निभाओगे हर रस्म तुम वफ़ाओं की और 

मुझे उम्मीद है की इश्क़ तुम मुझे बेपनाह दोगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सिलसिला ये इश्क़ में आम हो गया है 

इश्क़ में सितम सरेआम हो गया है 

नहीं रही अब इश्क़ में जज्बातों की हिफ़ाज़त

जो ये बेवफ़ाई का पेशा और 

बेवफ़ाओ का इंतज़ाम हो गया है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


क़लम मेरी तुम्हें लिख रही है 

और मैं भी तुम्हें लिखना सीख रहा हूँ 

हर लफ्ज़ में तुम्हें मैं लिखता हूँ 

जितना भी मैं लिखना सीख रहा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अहसास तब होगा जब ठोकर खाओगे 

इश्क़ में एक रोज़ जब रोकर आओगे 

अहमियत तब होगी तुम्हें भी मेरी 

एक मोड़ पर मुझे जब खोकर आओगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


खामोशियाँ मैं अपनी तुम्हारे साथ कहना चाह रहा था 

जुटा कर मैं हौसला हालात कहना चाह रहा था 

तुम भी ना  समझ सके मैं जो बात कहना चाह रहा था 

पहली दफ़ा तो मैं जज़्बात कहना चाह रहा था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सर्दियों में सवेरे की नींद सी हो तुम 

ज़िन्दगी की आख़िरी उम्मीद सी हो तुम 

गुनाह भी हो मेरे इश्क़ का तुम

और इस गुनाह की इकलौती चश्मदीद भी हो तुम 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कुछ तो बात है तुझमें 

जो ये बागवत कर रहा है 

दिल मेरा मेरी ख़िलाफ़त कर रहा 

नहीं रही अब इसको क़दर मेरी 

कम्बख़्त ये सिर्फ़ 

तेरी हिफ़ाज़त कर रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


या तन्हाई में उसको याद करता हूँ 

नफ़रत भी उसी से है मुझे 

हर रोज़ मैं जिसकी फ़रियाद करता हूँ 

बदल चुकी है वो या अब वो हालात ना रहे 

फिर भी उसकी याद में  मैं अपना हर वक्त बर्बाद करता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मेरे इश्क़ का अभाव बनके  रह गई हो 

या कहूँ तुम दिल का लगाव बनके रह गई हो 

नज़दीकियाँ तुमसे इस कदर हुई हैं की 

इश्क़ में तुम पहला पड़ाव बनके रह गई हो 

गहराई ना नापो तुम दिल की मेरे 

ग़मों के समंदर में तुम मेरी नाव बनके रह गई हो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सोचा था कि उससे मैं इस बार कह दूँगा 

दिल्लगी उसकी और अपना मैं ख़ुमार कह दूँगा 

बेचैन हूँ मैं उसके इंतज़ार में कह दूँगा 

इश्क़ में कितना हूँ उसके बेक़रार मैं कह दूँगा 

कश्मकश मैं जिंदगी की या मेरे दिल का ग़ुबार मैं कह दूँगा 

सोचता हूँ मैं हर बार की इस बार मैं कह दूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ये सच है की मुझे बहाना नहीं आता 

बातें भी क्या कहूँ बताना नहीं आता 

नज़रबंद ही हूँ जो नज़र आना नहीं आता 

दिल की बात होठों पर आ जाती है 

जो मुझे कुछ भी छुपाना नहीं आता 

आशिक़ी भी हम से ना हो सकेगी कमबख़्त 

जो अभी भी मुझको हक़ जताना नहीं आता

झूठी हमदर्दी दिखाना नहीं आता 

अव्वल नहीं हूँ मैं इश्क़ में 

जो मुझको बातें बनाना नहीं आता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मोहब्बत मुझे तन्हाइयों का सफ़र लगता है 

फ़लसफ़ा दिल्लगी का या गलतफहमियों का घर लगता है 

टूट ना जाए कहीं ये दिल सो इस निस्बत से मुझे डर लगता है 

पहले पहल तो सब ठीक मगर बाद में फिर सब ज़हर लगता है 

कितना भी दो तुम मुझे इश्क़ की सफ़ाई मगर इश्क़ मुझे क़हर लगता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इस दिल के क़ैदख़ाने से तेरी ज़मानत है 

तुझे जाना  है अगर तो जा तुझे इजाज़त है 

गलती नहीं तेरी की बेवफ़ा है तू 

जज्बातों से खेलने की तो तेरी पुरानी आदत है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ख्वाहिशों का ख़ज़ाना और यादों की जायदाद हो तुम 

मेरे दिल की दुआ और इस रूह की मुराद हो तुम 

धड़कने भी करती हैं हर रोज़ तुम्हें सज़दा 

मेरी साँसों की हर सुबह की फ़रियाद हो तुम 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो मुड़ कर नहीं आई ये मलाल रह गया है 

होठों पर ख़ामोशी और ज़हन में ये सवाल रह गया है 

खता उसकी है या मेरी ये कश्मकश फ़िलहाल रह गया है 

बयाँ ना हो सका मेरा ग़म , मेरा दिल ये बेहाल रह गया है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत पूछो हमको हमसे 

हम इश्क़ में खुदको मार चुके हैं

तुम्हें महसूस हुआ या नहीं

हम इश्क़ में हार चुके हैं


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक दफ़ा की मुलाक़ात 

मैं एक दफ़ा चाहता हूँ 

एक दफ़ा ही मिले एक दफ़ा ही सही 

मैं वफ़ा के बदले वफ़ा चाहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ठुकराया गया हूँ मैं 

बाक़ी ख़ास कोई वजह नहीं थी 

उसने अपनाया नहीं मुझे

जो उसके दिल में कहीं 

शायद जगह नहीं थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है 

इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है 

घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है 

इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ 

ये उसी का कमाल चल रहा है 


✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾✾ ✾✾✾✾


 पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ 
तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ 
शायरी है तू मेरे ख्यालों की
तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मुज़रिम हूँ क्या कोई मैं 

जो मेरे साथ में 

तुम ऐसा बर्ताव कर रहे हो 

हर बात को तुम 

मेरी नजरअंदाज करके 

क्यों मुझसे ही तुम 

भेदभाव कर रहे हो 

क्या नहीं है अब तुम्हें 

मुझसे हमदर्दी 

जो ग़ैरों से अब 

इतना लगाव कर रहे हो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पूछोगे तुम उसका नाम 

फिर उसको बदनाम करोगे 

महफूज है इस दिल में जो मासूम 

उसका तुम कत्लेआम करोग़े 

संजीदा साज़िशें तुम उसकी ख़ातिर 

या फिर उसकी ख़िलाफ़त में 

ख़ुराफ़ातें तुम तमाम करोगे 

छीन कर उसका सुकून 

उसका जीना तुम हराम करोगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मुसाफ़िर हूँ मैं एक सफ़र का 

बस चलता ही जा रहा हूँ 

ठोकरों भरी है सड़क मैं 

बस संभलता ही जा रहा हूँ 

बदल दी हैं मैंने कितनी मंज़िलें 

और कितनी बदलता ही जा रहा हूँ

उजड़ी हुई यादों और 

उजड़े हुए ख्वाबों के जाल से 

फ़िलहाल मैं निकलता ही जा रहा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इतने चेहरों में एक चेहरा बेनक़ाब ढूँड़ते रहे 

कल शाम ही वो मिला फिर उसका ख़्वाब ढूँड़ते रहे 

झील सी गहरी उसकी आँखें 

और उसकी खामोशी थी सवालों की किताब 

जिसका हम जवाब ढूँड़ते रहे 

ताल्लुक़ नहीं था कोई उससे 

मगर उसकी एक झलक से हुए 

हम बेताब इसीलिए उसे ढूँड़ते रहे


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दर बदर से ठुकराया ये इश्क़ का मारा बन गया है 

उसे भी अहमियत नहीं थी जिसकी तलब में ये आवारा बन गया है 

क़त्ल कर कर के अपनी ही ख्वाहिशों का ये बेचारा बन गया है 

उजाड़ कर खुदका ही घर  कम्बख़्त ये दिल मेरा बंजारा बन गया है  


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀



उसने ही अपनाया था उसकी खातिर अब अनजान हो गए 

बिखर गए मेरे जज़्बात उसकी इसी बेरुख़ी से हम बेजान हो गए 

खाक हो गईं मेरी सब ख्वाहिशें और दफ़्न मेरे सब अरमान हो गए 

हासिल कुछ ना होना था  फिर भी उसके इश्क़ में हम क़ुर्बान हो गए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जाने दे उसे ऐ दिल अब और बहाने नहीं चाहिए 

अपनाया ही नहीं जब किसी ने तो फिर ये बेगाने भी नहीं चाहिए 

झूठी हमदर्दी इन ख़ुदग़र्ज़ियों की और इश्क़ के झूठे फ़साने नहीं चाहिए 

नहीं चाहिए अब दिलासे भी और वो फलाने भी नहीं चाहिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


शिकायतें भी उसी से और उसी से प्यार है 

बेरुखी भी उसी से और उसी का इंतेजार है 

ख्वाहिश भी उसकी और उसी से दरकिनार है 

परहेज है उसी से और उसका ही खुमार है 

तलब नहीं किसी की अब वो ही बेशुमार है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में शिकस्त कोई खाया हुआ हो 

या यूँ समझो की इश्क़ में कोई सताया हुआ हो

क्या उसका कोई वजूद नहीं जो जो इश्क़ में ठुकराया हुआ हो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जो दिल के क़रीब हो उससे किनारा कैसे हो सकता है 

कभी सोचा है की वो इतना प्यारा कैसे हो सकता है 

फ़ुर्सत नहीं है उससे रूबरू होने की 

मगर उसके बिना कहीं गुजारा कैसे हो सकता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक बात पर उसकी हम करार कर बैठे 

खुदसे नफ़रत कर ली और उससे प्यार कर बैठे 

अपनी इस नासमझी से अपना जीना दुस्वार कर बैठे 

अपनी हर ख्वाहिश को उसकी ख़ातिर तार-तार कर बैठे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हँसने मुस्कुराने का ये जो मेरा तरीका है 

ये तुमसे मिलकर मैंने तुमसे सीखा है 

तुमसे मिलकर मुझको मिली है ख़ुशी 

तुमसे प्यार जताने का भी ये मेरा पहला सलीक़ा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आयेगा जो कोई मेरी तलाश में 

तो हूँ मैं गुमसुदा उसे तुम कह देना 

ढूँडे जो कोई मुझे उसके पास में 

तो उसके एहसास में हूँ गुम कह देना


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अब तो मुझे भी ये महसूस होने लगा है 

की ये दिल मेरा कंजूस होने लगा है

उसकी तरफदारी उसकी हर बात पर 

ये कम्बख़्त उसका जासूस होने लगा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


जख्म भी मलहम लगने लगते हैं 

जब दिल में हर ग़म सुलगने लगते हैं 

लगती है जिंदगी भी ज़हर 

दिल में जब जख्म चुभने लगते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बहुत हो चुकी इश्क़ में दरियादिली

अब उसे दिल की बेरहमी दिखाऊँगा 

न होगी उससे कोई तहज़ीब से बात अब

हर बात पर मैं अपनी बेशर्मी दिखाऊँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


रूठते हम उससे रहे जो मनाने वाला नहीं था 

ढूँडते हम उसे रहे जो आने वाला नहीं था 

कमी थी उसकी या ग़लतफ़हमी थी उसकी 

मुझको ये कोई समझानेवाला नहीं था 

इंसानियत तो थी दर बदर 

मगर कोई निभानेवाला नहीं था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बेशक़ थोड़ा मन मुटाव रहता है

मग़र तुम्ही से मेरा लगाव रहता है 

तुम से ही हैं ये खुशियाँ मेरी 

वरना तो हर पहर तनाव रहता है 

बंजर से दिल में कहीं न कहीं 

ख्वाहिशों का बिखराव रहता है 

यही वजह है जो मेरी आँखों में 

 कहीं मेरे अश्कों का जलभराव रहता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई कलम उठायेगा तो अपना ख़ुमार लिखेगा 

इश्क़ वो अपना बेशुमार लिखेगा 

कुछ पल की बेचैनी या फिर फिर वो इंतज़ार लिखेगा 

हाल - ऐ - दिल ना होगा उससे बयाँ 

वो तनहाइयाँ ही बार बार लिखेगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हमने ही की थी गुस्ताखी इश्क़ की

सो उसके जो भी हों इल्ज़ाम 

वो तुम मेरे नाम कर देना 

क़ुसूर नहीं था इसमें उसका कोई 

सो उसके बदले मुझे तुम बदनाम कर देना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ये आँखें उसका इंतज़ार कर रहीं थीं 

उसी का ये ज़िक्र हर बार कर रहीं थीं 

वो तो मुकर गया अपने वादों से 

जिसके वादों पर ये कम्बख़्त 

एतबार कर रहीं थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मिलों चला हूँ गिर गिर कर 

तब कहीं चलना सीखा है 

ख़ुद को हालातों से लड़ कर 

मैंने बदलना सीखा है 

आसान नहीं था हर सबक़ ज़िंदगी में 

कितनी ठोकरें ख़ाकर मैंने सँभलना सीखा है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उस गली से गुज़रने को ये दिल बेताब रहता था 

ढल जाती थी जब शामें तो इन आँखों में उसका ख़्वाब रहता था 

उसकी तलब इस क़दर थी दिल को 

की उससे मिलने को ये दिल बेहिसाब रहता था 

ढूँड़ता था उसे ख्वाबों में दिल जो हाथों में इसके गुलाब रहता था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हम ना मिलेंगे हमारे अल्फ़ाज़ मिल जायेंगे 

हमारी खामोशियों में जो क़ैद थे तुम्हें वो राज़ मिल जायेंगे 

ना कर सके जो बयाँ हम अब तलक तुम्हें वो हमारे अल्फ़ाज़ मिल जायेंगे 

ढूंड रहे हो जिन सवालों के जवाब तुम इतने दिनों से 

मेरी आँखों में तो देखो तुम्हें वो सारे आज मिल जाएँगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम आँखों से बताया करो 

नाराज़गी हो भी अगर 

तो इशारों में जताया करो

नहीं लगता ये दिल 

तुमसे दूर हो कर 

कितनी भी हो तुम ख़फ़ा 

यूँ छोड़ कर ना जाया करो  


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मुक़्क़मल ना हो सक़ी 

वो दास्ताँ अधूरी रह गई 

कर भी ना सके हम 

वो बयाँ जो मज़बूरी रह गई 

अक्स थी जो मेरी रूह की 

उससे ही मिलों की दूरी हो गई 

नफ़रत थी जिन तनहाइयों से 

वही अब ज़रूरी हो गई 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कितनी भी कर लो जासूसी 

मगर तुम समझ नहीं पाओगे 

कितनी है मायूसी मेरी ख़ामोसी में  

तुम समझ नहीं पाओगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


देर से ही सही

एक रोज़ तुम आओगे 

अपनी उस खता पर 

एक रोज तुम पछताओगे 

ढूंड लो चाहे कहीं भी कोई भी ठिकाना 

पर देखना तुम आशियाना तो 

इस दिल में ही बनाओगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक अधूरी सी आस 

अभी भी बाक़ी है 

उसकी यादें उसके अहसास

 अभी भी बाक़ी है 

मौज़ूद है वो मेरे अक्स में 

ज़ब तलक मेरे सीने में 

साँस कहीं बाक़ी है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसकी नफ़रत कैसी होनी चाहिए 

या फिर उसका प्यार कैसा होना चाहिए

तुम्हारी समझ से बताओ की 

हर शख़्स का किरदार कैसा होना चाहिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसको देख कर हैरानी होती है 

की यार ऐसा कैसे हो सकता है 

अरसों बाद मिला वो अजनबी 

हम जैसा कैसे हो सकता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ये तय था की फ़ासला ही मुक्कमल होगा 

लेकिन ये फ़ैसला तय नहीं था 

की आज होगा या कल होगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम जैसा कोई और नहीं 

हम जैसे मालूम हैं बहुत हैं 

उनसे नहीं होती है जालसाज़ी 

हम जैसे मासूम बहुत हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत करना मेरा इंतज़ार तुम 

मैं आ नहीं सकूँगा 

कैसी उलझन में फँसा हूँ

मैं आकर समझा नहीं सकूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


गुनगुनाते रहना हर पल इसे ये जिंदगी भी एक गाना है 

साज है ये खुशियों का और ग़मों का ये तराना है 

मंजिल नहीं है इस सफ़र की ना ही कोई ठिकाना है 

महफ़िल है ये चार दिन की फिर इसे छोड़ कर जाना है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम जमाने की बातों में मत आया करो 

बातें जो भी हों तुम्हारे दिल में

बामोहलत उसे तुम आ कर बताया करो 

शक से ढह जाते हैं ढाँचे इश्क़ के 

इसलिए जिस बात पर हो एतराज तुम्हें 

वो बात तुम ख़ुद ही आकर समझाया करो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


लिखता हूँ जब भी मैं चुन चुन कर उसके एहसास लिखता हूँ 

यादें पिरो कर उसकी अल्फ़ाज़ों में 

हर लफ्ज़ बेहद खास लिखता हूँ

तुममें नहीं है समझ समझने की बस 

वरना मैं तो प्यार से प्यार का सरांस लिखता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में मूँद लेते हो कितनी रातें 

और खामोशियों में कितनी बातें बंद कर देते हो 

कहाँ से सीखा है ये नायाब तरीका जरा मुझे भी बताओ ना 

कैसे इन आँखों  में इतनी बरसातें नज़रबंद कर लेते हो


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


लफ्ज़ ख़ामोश रह गए वो अल्फ़ाज़ न बन सके 

लाख कोशिशों के बावज़ूद वो मेरी आवाज़ न बन सके 

कैसे करते हम बयाँ हाल-ए-दिल उनसे 

जिनको भी अपनाया वो मेरे हमराज़ न बन सके 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अजीब था मैं जो उसमें कहीं मेरा क़िरदार ढूँड रहा था 

बेतुक़ी सी एक कहानी का मैं सार ढूंड रहा था 

उसकी आँखों में तो नफ़रत ही नफ़रत भरी थी 

जिसकी आँखों में कहीं मैं प्यार ढूंड रहा था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


फिर कुछ खास होने लगा था 

मौजूद थी वो मुझमें कहीं

उसके वजूद का एहसास होने लगा था 

मिटने लगे थे फिर फ़ासले सभी 

वो इतनी पास होने लगा था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


झूठी तसल्ली ना देना हमें 

बेशक तुम चाहो तो मार देना 

खंजर चलाना तुम सीने में अगर

तो नक़ाब ये हमदर्दियों का तुम उतार देना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तेरी यादों की गिरप्त में 

मेरे दिन रात कट रहे हैं 

उसपर ये तेरी बेरुखी 

जिसकी हथकड़ियों में जकड़ कर 

मेरे जज़्बात सिमट रहे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तेरे आग़ोश में आकर मैं बेहोश सा हो जाता हूँ 

या यूँ कहूँ की तेरी मदहोशी में मैं भी मदहोश सा हो जाता हूँ 

हो जाता हूँ आवारा तेरे इश्क़ में और ख़ानाबदोश हो जाता हूँ 

इक पल भी तू जो होती है मायूस तो ख़ुद मैं भी ख़ामोश हो जाता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में हारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं

बेशक आवारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं

तुम समंदर हो अगर

तो किनारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हिस्से में तुम्हारे बेशक यार बहुत थे 

हर कमीं में तुम्हारी बेशक तलबगार बहुत थे 

समझते थे जो इशारे तुम्हारे समझदार बहुत थे 

फिर भी तुम मायूस क्यों हो तुम्हारे तो प्यार बहुत थे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत पूछ मेरे दिल का क्या 

हाल चल रहा है 

उसकी बेरुखी का ही हर पहर 

मलाल चल रहा है 

बरस रही हैं आँखे ये उसका ही 

कमाल चल रहा है 

उसकी यादों की चिंगारी से 

मेरा दिल फ़िलहाल जल रहा है 

मन ही मन में मेरे बस 

एक ही सवाल चल रहा है 

की वो बेवफ़ा भी है अगर 

तो इसमें इतना क्यों बवाल चल रहा है 

इश्क़ भी तो एक सतरंज ही है 

जिसमें बाजी उसकी है 

वो अपनी चाल चल रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम्हारी ख़ुशी है इसमें यही सोच कर 

मैं अपना जीना दुश्वार कर लेता हूँ 

मालूम हैं वो सारे झाँसे हैं और झूठे दिलासे हैं 

मगर फिर भी मैं उसपर ऐतबार कर लेता हूँ 

कितनी भी फ़रेबी बेरहमी या बेवफ़ा हो तुम 

दिल इस कदर तुम पर फ़िदा है की 

मैं भुला तुम्हारी हर खता तुमसे प्यार कर लेता हूँ 

कोई कितनी भी दे सफ़ाई या गवाही ख़िलाफ़त में तुम्हारे 

मैं आँख मीच कर सभी को इनकार कर देता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


क्या ही कहूँ की तेरा इश्क़ में क्या अंजाम होगा 

बेक़सूर निकलेगी वो , तेरे सर पर सारा इल्ज़ाम होगा 

इश्क़ में तू उसके बेवजह ही बदनाम होगा 

ज़लील होगा हर दफ़ा तू इश्क़ में 

बस इतना ही तेरा काम होगा 

ख्वाहिशें खुदकी तू दफ़ना कर 

उसकी ख्वाहिशों की ख़ातिर तू नीलाम होगा 

छोड़ देगी तुझे एक रोज़ वो एक मोड़ पर 

उसके बाद तेरा जीना हराम होगा 

रातों में रोना आँखें भीगोना 

उसके बाद  ये तो आम होगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चंद लफ्ज़ कहने दो मैं पूरी बात कह जाऊँगा 

तुम सुनो जो अगर तो मैं पूरी वारदात कह जाऊँगा 

किस्से कहानी में जो सिमट कर रह गई 

मैं वो अधूरी मुलाक़ात कह जाऊँगा 

कब कैसे क्यों बिगड़े थे उससे 

मैं ताल्लुक़ात कह जाऊँगा 

दिलचस्पी है जो तुम्हें जरा भी सुनने में 

तो मेरी आँखों में भरी है कैसे 

मैं ये बरसात कह जाऊँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिल में बेहद ग़म भरे हुए हैं 

हाल ए दिल बताने से डरता हूँ मैं 

जो जमाने में बेहद बेरहम भरे हुए हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दूर होकर हमारी यादों से 

सच बताओ क्या गुजारा मुमकिन है 

हम भी कर लेंगे बसर 

जो अगर तुम्हारा मुमकिन है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हर पल मुझे तेरी कमीं महसूस हो रही है 

यही वो वजह है जो आँखों में नमी महसूस हो रही है

सहमी हुई हैं ये धड़कने और ये साँसे मायूस हो रही हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में दरबदर से हम ठुकराये हुए हैं

यही वजह है जो इश्क़ से हम घबराए हुए हैं 

मुक़्क़मल नहीं होतीं यहाँ दुआएँ साहब 

ख़ाली हाथ ही हर दफ़ा वहाँ से आए हुए हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मिल जाऊँगा किसी मोड़ पर

मैं इसी आस में रहता हूँ 

खुदसे ही क्यों हैं इतने फ़ासले 

जबकि मैं खुदके पास रहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिल ने कहा चल जाने दे 

जो छोड़ गए वो बेगाने थे 

वफ़ा नहीं थी दिल में उनके

नियत में साफ़ बहाने थे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


फ़ुर्सत में मिले कोई मुझे 

तो उसको मैं एक काम दूँगा 

गुमसुदा हूँ मैं ,ढूँड़ना है बस मुझे 

जो मिल गया कहीं 

तो उसे मैं इनाम दूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पूछने दो मुझसे हाल ऐ दिल मेरा 

कई और नहीं अब ये हक़ भी अदा करने को

ख़ुद ही मलाल ख़ुद ही सवाल 

कोई और नहीं यहाँ अब शक अदा करने को


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं चाहिए मुझे दस्तावेज़ लिखत में 

मैं तो तुम्हारी आँखों से जवाब मांगूँगा 

न्ही चाहिए तुम्हारे हमदर्दी भी 

मैं तो मेरे उजड़े हुए उन ख्वाबों का हिसाब माँगूँगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मंज़िल एक है तो बहाना क्या 

मौत मुक़र्रर है तो घबराना क्या 

चाहत है जो शिद्दत की 

तो रूह भी उसको सौंप दूँ 

पर बेरुख़ी जो हुई उससे 

तो कौन जाने फलाना क्या 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बातें बनाना या फिर छुपाना कोई तुमसे सीखे 

इश्क़ में बहाना या ठुकराना कोई तुमसे सीखे 

झूठे दिलासे या फिर झूठा फ़साना कोई तुमसे सीखे 

इश्क़ में साज़िशें या सताना कोई तुमसे सीखे 

झूठ को सच सा बताना कोई तुमसे सीखे 

बेवफ़ाई में तुम हो सबसे अव्वल 

बेवफ़ाई का हलफ़नामा कोई तुमसे सीखे 

हमदर्दियों का झूठा नजराना कोई तुमसे सीखे 

करके गुमराह छोड़ कर जाना कोई तुमसे सीखे


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अजीब हूँ मैं जो हर शख़्स पर 

ऐतवार कर लेता हूँ

वो आए ना आए 

मैं इंतज़ार कर लेता हूँ 

नहीं है मुझमें कोई ग़ुरूर या ख़लिश 

कोई नफ़रत भी करे मुझसे 

तो उससे मैं प्यार कर लेता हूँ 

मेरे अपने तौर तरीके हैं ज़िन्दगी के 

इन्हीं तौर तरीकों से मैं 

अपनी ज़िंदगी गुजार लेता हूँ 

कभी समझौते से काम चल जाता है 

तो कभी ख्वाहिशें अपनी मैं मार देता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक तो तुम्हारी बेरुखी 

और दूसरी हम ये अफ़वाह बनाये बैठे थे 

तुम्हारी बग़ैर इजाज़त 

दिल में तुम्हारी जगह बनाये बैठे थे 

नहीं हो सकती वो  मुक़्क़मल 

जो ख्वाहिशें हम बेवजह बनाये बैठे थे 

मन ही मन हम तुमसे मिलने की चाह बनाये बैठे थे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अहमियत ना थी मेरी वहाँ 

इसलिए मैंने जाना छोड़ दिया 

मुड़ कर ना पड़े फिर क़दम 

जहाँ का मैंने ठिकाना छोड़ दिया 

बेरुख़ी इस क़दर थी तुम्हारी 

की हाल ए दिल मेरा मैंने जताना छोड़ दिया 

मुंह फेर लिया मैंने तुम्हारे साये से 

और तुमसे दिल लगाना छोड़ दिया

नहीं रहा मेरा अब तुमसे कोई ताल्लुक 

इसलिए तुमको मैंने कुछ भी बताना छोड़ दिया 

छोड़ दी आशिक़ी और वो वहम पुराना छोड़ दिया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक क़लमकार हूँ मैं सो  क़लमकारी करता हूँ 

पिरो कर जज्बातों को 

अल्फाजों में अदाकारी करता हूँ 

फ़ैसला तुम पर है ये तय करो 

की क्या मैं समझदारी करता हूँ 

बेच कर मैं अपनी समूची ख़्वाहिशें 

चंद पलों की इश्क़ में ख़रीददारी करता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कैसे होतीं इश्क़ में उससे नज़दीकियाँ 

वो तो ख़ुद ही हमसे दूरियाँ बनाये बैठा था 

कैसे मनाता मैं भला उसे 

वो जो बेवजह ही मुंह फुलाये बैठा था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम मेरे हो मैं ये दावा नहीं कर सकता 

हक़ीक़त यही मैं दिखावा नहीं कर सकता 

तुम समझो बात को मेरी 

मैं छलावा नहीं कर सकता 

तुम ही हो अगर मेरे तो इश्क़ भी 

तुम्हारे अलावा नहीं कर सकता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आज़माता रहा वो मुझे 

और मैं भी इम्तिहान देता रहा 

उसकी चंद ख्वाहिशों की ख़ातिर 

मैं खुदकी जान देता रहा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


भारत तो झूठे झाँसों का देश है 

झूठी उम्मीदें झूठे दिलाशों का देश है 

उन्नति के नाम पर बस वहम है यहाँ 

ये देश महज़ खेल तमाशों का देश है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एहसानमंद समझ लो या ख़ुदगर्ज़ी समझ लो

ख़ुद्दार समझ लो या फ़र्जी समझ लो 

कोई एतराज नहीं मुझको तुम्हारे समझने से

जैसा समझ आये तुम्हारी मर्ज़ी समझ लो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कभी फ़ुरसत मिले तो तुम मेरा एक काम कर देना 

नहीं बिक रहा है.तुम मेरा ये ग़म नीलाम कर देना 

लौटा दूँगा मैं तुमको तुम्हारी मोहब्बत भी 

बस मेरा दिल तुम मेरे नाम कर देना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ना हो सकीं बयाँ खामोशियाँ 

वो राज राज ही रहे 

नहीं समझ सके तुम जज़्बात इनमें 

ये अल्फाज़ अल्फ़ाज़ ही रहे


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक शख़्स पर खुदको फ़ना कर बैठा था

उसकी बग़ैर मर्जी मैं इश्क़ बेपनाह कर बैठा था 

कायदे से कहूँ तो मैं गुनाह कर बैठा था 

जो बहवाजह ही इश्क़ मैं इस तरह कर बैठा था i


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ख़ुराफ़ातें हैं मेरी ख़ामोशियों की 

जो आज अल्फ़ाज़ों में उतर आयीं हैं

ज़्यादा मत करना गौर तुम

इन लफ़्ज़ों में खाई सी गहराई है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


महफ़ूज़ हैं हम अकेले ही

ये इश्क़ का चस्का मत लगाओ 

बाक़ी बातें तो बाद में

यूँ हर बात में मस्का मत लगाओ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


छूट कर तुझसे तेरी यादों में जी रहा है 

अजीब है ये अभी भी तेरे वादों में जी रहा है 

नक़ाब ओढ़ कर इश्क़ का 

ये फर्जी लबादों में जी रहा है 

इश्क़ का मारा ये कमबख़्त 

तेरी फ़रियादों में जी रहा है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं थमेगा लम्हा 

ये अफ़साने यूँ ही चलते रहेंगे 

होंगी बयानबाज़ियाँ भी इश्क़ में मगर

ये बहाने यूँ ही चलते रहेंगे 

हिस्सेदार हैं सरकार ही  मयखानों की 

इसलिए बंद होंगी दवाईयां 

मगर मयखाने यूँ ही चलते रहेंगे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ये आख़िरी बार मैं पुकार रहा हूँ 

ऐ जिंदगी मैं हार रहा हूँ 

नहीं चाहिए मुझे ये बोझ अब और 

मैं अपनी ख्वाहिशें भी मार रहा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है 

इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है 

घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है 

इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ 

ये उसी का कमाल चल रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कभी सहमति उसके सवालों पर तो कभी नाराज़गी रहती है 

उसे शिकायत है क्यों मेरे किरदार में इतनी सादगी रहती है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हमने देखा है की अब इश्क़ में वफ़ाओं का उसूल नहीं है

इसलिए इन बेवफ़ाओ का ये इश्क़ हमें कबुल नहीं है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हाँ भी कहना होता है अगर तो मैं ना कह देता हूँ 

मसला इश्क़ का हो अगर तो मैं मना कर देता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ करिए तो उसको आप हिफ़ाज़त से रखिए 

रिश्तों को निभाने की चाहत से रखिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नफ़रत है मुझे दिखावे से इसलिए मैं दिखावे नहीं करता 

करता हूँ मैं वफ़ाए बड़ी शिद्दत से मगर मैं दावे नहीं करता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो एक दफ़ा जो कह दे तो ताउम्र हारता ही रहूँ 

वो है वो सुकून जिसे  बस निहारता ही रहूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम मुझे अपना समझ कर आना 

अश्क हूँ तुम्हारा इतना समझ कर आना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ढूंड लाया हूँ मैं खुदको बड़ी मशक़्क़त के बाद उसकी यादों से 

गुमराह ही कर रखा था मुझको उसके वादों ने


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


निकालकर वो मुझमें कमी दूर हो गई 

चलो इसी बहाने वो ग़लतफ़हमीं जो थी दूर हो गई 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मत पूछ किस तरह ये दिन गुज़र रहे हैं 

तेरे ख़ातिर बेचैन तेरे बिन गुज़र रहे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दो मुहे लोग हैं ज़नाब 

मुंह पर भाई पीठ पर बुराई वाली फ़ितरत रखते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उम्मीदें टूट गईं मेरी उसकी ना के बाद 

मैंने रास्ता भी छोड़ दिया उसका उसकी मना के बाद 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इतनी तफ़तीश के बावजूद कोई कसर नज़र नहीं आती 

वो बेख़बर है भी तो बेख़बर नज़र नहीं आती 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बेकार की है दुनियादारी और रंग भेद भी सब बेवजह है 

मुसाफ़िर सब एक सफ़र के हैं और जाना एक ही जगह है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वाक़िफ़ तो थे तुम मेरे इरादों से

सख़्त नफ़रत है मुझे झूठे वादों से 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


परवाह नहीं थी किसीको की कोई उसकी चाह में मर गया 

इश्क़ में एक सिलसिला तो  इसी तरह से गुज़र गया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तरक़ीब ना सिखाओ मुझे की प्यार कैसे किया जाता है

मुझमें ये समझ ही नहीं की झूठों पर एतबार कैसे किया जाता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में हम कभी अव्वल ना हुए 

जो अफ़साने थे हमारे इश्क़ में मुक़्क़मल ना हुए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बस आख़िरी बार एक और तहक़ीक़ात करनी थी 

मुझे उस लापता से ज़रूरी एक बात करनी थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोशिश तो पूरी की है तुझको भुलाने की 

बस वो हिम्मत ही ना जुटा सका मैं जो जुटानी थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


झूठी हमदर्दी या झूठे दावे करता है 

किनारा रखता हूँ मैं उससे जो दिखावे करता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चाहूँ भी तो क्या... उससे बेहतर कोई है ही नहीं 

तुम्हारी समझ से कोई होगा मगर मेरी समझ से कोई है ही नहीं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक लंबी तहक़ीक़ात के बाद इसमें इसकी रज़ा मिलती है 

आँखें करती हैं गुस्ताखियाँ और दिल को सजा मिलती हैं


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई आया इन आँखों में सपने दे गया

छीन कर वो मेरे अपने दे गया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दर-बदर मैं भटक कर उसका पता ढूंड रहा था 

अरसों से मैं था लापता मगर उसे ढूँडता रहा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


सारे सवालों के जवाब मेरे मुझे तुझसे मिल जाते हैं 

तू बता ना बता मुझे खुदसे मिल जाते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


झूठी तसल्ली ना दो झूठे दिलासे ना दो 

दे दो मौत बेशक मगर हमको ये झाँसे ना दो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


समझ से तुम्हारी तो बेफ़िज़ुल की बातों का है

मगर जो तुम समझ सको तो ये मसला जज्बातों का है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आशिक़ी में तेरी ये इतरा उठते हैं 

तेरा नाम जब भी मैं पुकारूँ ये होठ मुस्कुरा उठते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ज़िन्दगी ये कम्बख़्त ज़िम्मेदारी में गुज़र गई 

संभालते संभालते ये ख्वाहिशों की खरीददारी में उजड़ गई 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


संभाल कर रखा है उसको मैंने मेरे दिल में हिफ़ाज़त से

सजदा करता हूँ हर रोज़ मैं उसका बड़े शिद्दत की नज़ाकत से


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


यही सोच सोच कर दिल को बुरा लग रहा था 

कुछ अधूरा नहीं था मग़र अधूरा लग रहा था


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


एक शख़्स की शख़्सियत मुझे परखनी थी

उसकी बातों से उसकी हैसियत मुझे परखनी थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँखों में तुम्हारे हम जो राज़ देखते हैं 

ख़ुद वो तुम क्यों नहीं कहते जो हम अल्फ़ाज़ देखते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


क़ैद होठों की सलाख़ों में रह गई 

कितनी ख्वाहिशें आज भी आँखों में रह गईं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


वो इश्क़ में वफ़ाओं के दावे करते हैं 

उन्हें जज्बातों की समझ ही नहीं वो महज़ दिखावे करते हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कितना भी कर तू सितम ऐ सनम मैं इंतक़ाम नहीं लूंगा 

कोई कितना भी पूछेगा मुझसे मैं तेरा नाम नहीं लूंगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


यादें उसकी उधार की हैं जो वापस उसे लौटाना पड़ेगा 

समेट लो अब तुम ख्वाहिशें अपनी जो ख्वाबों से वापस भी आना पड़ेगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बनावटी हैं सभी रिश्ते यहाँ और रिश्तेदार भी सब बनावटी हैं 

ख़ुदगर्ज़ी हैं सभी फ़रिश्ते यहाँ और प्यार भी अब दिखावटी है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


खामोशियों में क़ैद मुझे ख्वाहिशों के दर किनार रहने दो

मत पूछो तुम मेरी ख़्वाहिशें यार रहने दो


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


यूँ ही नहीं सच्ची मोहब्बत अफ़वाह बन चुकी है 

कितने घरों को ये तबाह कर चुकी है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


क़ायदा ही नहीं है मुझमें मेरी बात कहने का 

किसी अपने से अपने हालात कहने का 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसकी मोहब्बत में उसकी नफ़रत अच्छी लगती हैं 

झूठ बोलती उसकी आँखें बेमुरौवत सच्ची लगती हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


हाल ए दिल कोई सुनने को तैयार न हुआ 

यही वजह है जो इस दिल को कभी प्यार न हुआ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम ही थे एकलौते मैं जिसकी तलाश में था 

वरना तो हर सुकून मेरे पास में था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आँशु पोछने के लिए या साथ में रोने के लिए

कुछ तो होना चाहिए उसमें कुछ होने के लिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसकी बातों को मैं नज़रंदाज़ नहीं कर पाया 

उसने तो की थी नज़रंदाज़ी मगर मैं ऐतराज नहीं कर पाया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बीते लोग बिती बातों से आप वास्ता न रखिए 

ये लौट कर वापस नहीं आते आप रास्ता न ताकिये 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तस्वीरे झूठीं हैं मेरी जो मुझे मुस्कुराता दिखा रही हैं 

ज़रा पूछो मेरे आईने से कितने ग़म मैं छुपा कर बैठा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


माँगते क्या मदद हमसे इशारे ना हो सके 

सो डूब गए उसकी आँखों में हम किनारे ना हो सके 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तुम्हें अपनाना है तो अपना लीजिए

वरना मेरी ख्वाहिशों को कहीं दफ़ना दीजिए


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बेचैनियाँ भर चुकी हैं अब तो मेरी साँस में 

सब छोड़ कर क्यों आते नहीं तुम मेरे पास में 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


 

मुद्दतों से मेरी एक मुश्किल का हाल नहीं मिल रहा है

सब्र कर रहा हूँ मैं कबसे मगर फल नहीं मिल रहा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसके हर शौक को हमने सिर आँखों पर रखा है 

मगर उसने हमारी अहमियत ना समझी हमको सलाख़ों पर रखा है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पूरे सफ़र में हर शख़्स एक ही सवाल पूछता गया

मुझसे मेरे शब्दों में तेरा हाल पूछता गया 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं चाहिए तुम और तुम्हारी ये खैरात नहीं चाहिए 

ले जाओ समेटकर तुम अपने ख़्वाब और मुझको ये सौगात नहीं चाहिए 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चाहत थी जिसे पाने की मिला वही नहीं था 

सच कहूँ तो मेरा मुक्कद्दर सही नहीं था 

ढूँड़ने पर मिल जाते हैं भगवान एक कहावत है 

मैंने भी ढूँडा मगर वो कहीं नहीं था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


पूछते ही नहीं हो तुम और मैं बताता भी नहीं हूँ 

टुकड़ों में बिखर रहा हूँ मैं मगर जताता नहीं हूँ 

बेरुख़ी नहीं है मेरी और नहीं है कोई ख़फ़ा नाराज़गी तुमसे 

बस चाहत ही है इतनी की तुम्हें सताता नहीं हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


रास्ते तो और भी थे तुझे पाने के

हक़ तुझपर अपना जताने के 

मग़र दिल ने कहा चल जाने दे 

टूटने दे तू तेरी ख्वाहिशें 

और वो ख़्वाब भी तू जल जाने दे 

नहीं हो सकती अब उससे वफ़ा 

सो उसे इस दफा तू बदल जाने दे 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


घुटने नहीं टेके अभी मैंने हालातों के ख़िलाफ़ 

तो हर दफ़ा मैदान ए जंग मैं लड़ा हुआ हूँ 

कैसे मान लूँ हार जब इन ठोकरों से ही मैं खड़ा हुआ हूँ 

कहाँ सता सकीं हैं मुझको ये ठोकरें 

इन ठोकरों को सता कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


ज़िन्दगी वो गुलज़ार है 

जहाँ कोई फूल बनकर आता है 

कोई फ़िज़ूल बन कर आता है 

किसी की फ़ितरत में होती है बेवफ़ाई 

तो कोई वफ़ाओं का उसूल बन कर आता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


बेरहम सी हैं ये धड़कने जो हर पल मुझको सताती रहती हैं 

मालिकाना हक़ ये हर किसी पर जताती रहती हैं 

बोर हो गया हूँ मैं अब इस जिंदगी की बेरुखी से 

बड़ी बेमुरौत है ये जिंदगी जो हर मोड़ पर जुल्म ढाती रहती है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मायूसी भरी आँखों में टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

समेटकर मैं दर्द दिल में उसकी ख़ातिर गुलाब लेकर बैठा हूँ 

नहीं रहा मैं हिस्सा अब उसकी यादों का 

मगर उसकी मैं यादों की किताब लेकर बैठा हूँ 

पूछे तो कोई मुझसे मेरी मोहब्बत 

जोड़ जोड़ कर मैं पूरा हिसाब लिए बैठा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


फिर एक भूल हम इस बार कर बैठे हैं 

बेफ़िज़ुल में हम जो तुमसे प्यार कर बैठे हैं 

नहीं हो सकती अब इसमें कोई रियायत 

इश्क़ में जो हम इकरार कर बैठे हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


मेहरबानी करके तुम ये सवाल मत पूछना 

की हमसे हमारा तुम हाल मत पूछना 

कितनी मशक्कत से गुजारा तुम ये साल मत पूछना 

किस किस ने बिछाया था तुम जाल मत पूछना 

क्या ,क्यों ,कौन तुम ये फ़िलहाल मत पूछना 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई इतना बेवफ़ा कैसे हो सकता है 

या इस क़दर वो ख़फ़ा कैसे हो सकता है 

समझता है ना वो मुझे 

और मेरी खामोशी को

तो फिर देकर मुझे वो मायसी 

ऐसे दफ़ा कैसे हो सकता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इश्क़ में मुक़्क़मल कोई मुक़ाम नहीं होता 

वसवसे हैं बस यहाँ बेसब्री के 

जिसका मुक़्क़मल कोई अंजाम नहीं होता 

टूट जाती हैं यहाँ नींदें और उम्मीदें भी बिखर जाती हैं

इसके सिवा इश्क़ में और कोई काम नहीं होता 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तकलीफ़ होती है 

ज़ब दिल तोड़ कर 

यूँ ही ज़ख्म लाईलाज दिया जाता है 

करके गुमराह फिर इश्क़ में 

इसको नज़रंदाज़ किया जाता है 

उजाड़ कर हर ख्वाहिश 

इस दिल की इसको बेआवाज़ किया जाता है 

इसी बेरहमी या ग़लतफ़हमी 

को इश्क़ में नाम-ए-रिवाज़ दिया जाता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


अफ़सोस इस बात का है 

की हम उनके खास नहीं हैं 

नज़दीकियाँ मात्र हैं उनसे 

उनके इतने भी पास नहीं हैं 

तलब सुकून या समझो की 

हम उनकी तलाश नहीं हैं 

फिर भी हौसला है बुलंद उन्हें पाने का 

उनकी तमाम बेरुखी के 

बावजूद भी हम हताश नहीं हैं 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


किस कदर है इस दिल को तुम्हारी

 मैं तलाश लिखने लग जाता हूँ 

हाथ में कलम लेकर तुम्हारे

 मैं एहसास लिखने लग जाता हूँ 

साथ में बिताए वो लम्हें और 

ख्वाहिशों की मैं दरख़वास लिखने लग जाता हूँ 

लिखता हूँ तुम्हारी मैं यादें और 

बातें खासमखास लिखना लग जाता हूँ 

मूँदता हूँ अपनी आँखें और 

तुमको अपने पास लिखने लग जाता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कलम उठा कर उसे मैं 

आख़िरी सलाम लिखना चाहता हूँ 

हाल ऐ दिल नहीं मेरा मैं उसको 

बस ये पैग़ाम लिखना चाहता हूँ 

वो मेरा ना हो सका ये बदनसीबी है मेरी 

मगर उसका हूँ मैं उसे ये पयाम लिखना चाहता हूँ 

हर लफ़्ज़ हर नब्ज़ और ये नफ़्ज़ 

मैं अपनी उसी के नाम लिखना चाहता हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


शोर ना करें कहीं ये खामोशियाँ

इसलिए लिखना पड़ता है

हाल ऐ दिल पिरोना लफ़्ज़ों में

सीखना पड़ता है

कुछ दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता

तो फिर मज़बूर होकर चीखना पड़ता है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उसके हर लहज़े का हमने ख्याल रखा है 

उसकी ज़्यादती को भी हमने संभाल रखा है 

अहमियत दी है उसकी ख्वाहिशों को अक्सर 

अपनी ख्वाहिशों को मैने अभी टाल रखा है 

इश्क़ ये उसका अजीब ही कश्मकश है 

और मैं भी अजीब हूँ जो खुदको ही 

मैंने इस कश्मकश में डाल रखा है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


चल दिए ठुकरा कर तुम हमें 

एक दफ़ा तुम्हें ठहरना चाहिए था 

किस हालत में था मेरा दिल 

हाल ए दिल मेरा

तुम्हें समझना चाहिए था 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


आया हूँ अधूरी सी मैं बात लेकर 

आँखों में अधूरी मैं रात लेकर 

मालूम है तुम पूछोगे सबूत मुझसे 

इसलिए आया हूँ मैं वो काग़ज़ात लेकर 

साथ में हुई थी जो वारदात लेकर 

जर्जर जो हो चुके थे वो जज़्बात लेकर 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


तेरे एहसास में जी रहा हूँ 

या तेरी तलाश में जी रहा हूँ 

सहेज कर तेरी ख्वाहिशों 

तेरी आस में जी रहा हूँ 

एक दिलासा दे रखा है दिल को मैंने 

इसी झाँसे से की तेरे पास में जी रहा हूँ 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


इकलौता मैं नहीं था उसके दिल में

वहाँ तो पूरी आशिक़ों की आबादी थी 

ग़ुमराह कर रखा था उसने सबको 

उसका शौक़ ही आशिक़ों की बर्बादी थी 

फ़ना थे सब बेख़बर उस बेरहम पर 

यही वजह है की उसे दिल तोड़ने की आज़ादी थी 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


फ़िसलन भरा है रास्ता 

यहाँ ख़ुद को संभालना पड़ता है 

बदलती नहीं हैं परिस्थितियाँ 

यहाँ ख़ुद को ढालना पड़ता है 

कितने ही हों पेंचीदा ये रास्ते 

यहाँ रास्ता ख़ुद को निकालना पड़ता है 

मंजिल इतनी आसान नहीं 

यहाँ ख़ुद को जोखिम में डालना पड़ता है 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिखावा मत करना सबकी तरह तुम 

करना तो मुक्कमल मुझसे प्यार करना 

इशारों की समझ इतनी नहीं है मुझमें 

इसलिए मेरा हाथ पकड़ कर 

अपने होठों से इज़हार करना तुम 

साज़िशें तो जरा भी पसंद नहीं मुझको

सीधा सीने पर वार करना तुम 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


कोई तो होगा जो मेरे अल्फ़ाज़ समझता होगा 

लिखता हूँ मैं कितनी शिद्दत से 

वो मेरा लिहाज समझता होगा 

समझ होगी उसे जज्बातों की 

जो इश्क़ में वफ़ाओं का रिवाज समझता होगा 

हर किसी में नहीं है समझ जो समझ सके 

खामोशियों की ज़ुबान मगर कोई तो होगा 

जो खामोशियों के हर राज समझता होगा 

क्या कहती हैं खामोशियाँ

जो खामोशियों के अंदाज़ समझता होगा 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


उजाड़ कर मेरी खुशियाँ 

मुझे इश्क़ में बंजर किया गया है 

लफ़्ज़ों में ना हो सकेगा वो बयाँ 

जो मेरे साथ में मंजर की गया है 

अँधेरे में रखकर झूठे दिलासों में 

मेरे जज्बातों को 

इश्क़ में जर्ज़र किया गया है 

अपना समझ कर जिसको मैंने दिल में बसाया था

उसी के हाथों हमें आज बेघर किया गया है 

तौफ़े में हमने दिया था गुलाब जिनको 

उनकी तरफ़ से हमें तौफ़े में 

आज ये ख़ंजर दिया गया है


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


दिल के करीब है वो अगर 

तो उसे जाने मत दो 

जाना ही चाहता है अगर वो 

तो उसे अब बहाने मत दो 

ये दिल तुम्हारी अमानत है 

इसे महफ़ूज़ रखो तुम 

उसे सताने मत दो 

राब्ता रखो उससे 

मगर चंद फ़ासलों पर 

ज़्यादा क़रीब उसे तुम आने मत दो 

हमदर्दी इस जमाने में एक ग़लतफ़हमी है 

सो इसे बेवजह किसी और  को जताने मत दो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀


नहीं समझ सकता कोई तुम्हें 

और किसको समझाना चाहते हो तुम 

ये नासमझ लोग नहीं समझते इशारे तुम्हारे 

 तुम इशारों में जो भी जताना चाहते हो 

क्या है कमी तुम्हारी जिंदगी में 

जो बिलावजह तुम वो फलाना चाहते हो 

क्या वाजिब नहीं वो शुकून जिसे तुम 

बेवजह गँवाना चाहते हो 

क़ातिल हैं ये लोग जज्बातों के 

झूठी बातों में इनकी क्यों तुम आना चाहते हो 

और समझ से परे हैं इनके रश्म-ओ-रिवाज इश्क़ के 

किस वहम से तुम इश्क़ सूफियाना चाहते हो 


❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ 


फ़ितरत तू तेरी हर बार बदलता रहा 

नज़रों से छुप छुप कर 

तू किरदार बदलता रहा 

हर वादे से मुकर गया तेरे 

तू यार हर बार बदलता रहा 

बदलने लगे तेरे तरीके सभी 

और तेरा हर वार बदलता रहा 

जायज़ थी इश्क़ में बेवफ़ाई 

जो इश्क़ में हर रोज़ 

यहाँ उम्मीदवार बदलता रहा 

मुद्दतों से हमने तो कपड़े भी ना बदले 

जिस तरह हर रोज़ 

तू अपना प्यार बदलता रहा


Comments