" क्या हूँ मैं और कैसा हूँ मैं आखिर ये तहकीकात क्यों करनी है... "

2 Liner


|| कागज़ के जज़्बात ||





ख़ता ये तुम्हारी नहीं गुनाहगार तो हम थे

बेरुख़ी तुम्हारी तो शुरू से थी तलबगार तो तुम्हारे हम थे


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कोई तुमसा हमें प्यारा ना मिला

हम ढूँडते रहे कोई दोबारा ना मिला


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जायज है मेरा सवाल तुम्हें जवाब देना चाहिए

कितने तोड़े हो मेरे ख़्वाब तुम्हें हिसाब देना चाहिए


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तकलीफ़ थी बस इस बात की

वो ख़्वाब थी महज़ एक रात की


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ज़र्रा ज़र्रा तो यहाँ तेरे नाम हो चुका है

किस्से करूँ मैं गिला हर शख़्स तेरा ग़ुलाम हो चुका है


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एक तरफ़ तो ख़ामियों की किताब हूँ

खूबियाँ जो ढूँडोगे तो लाज़वाब हूँ


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उसी से है नाराज़गी मगर उसी से प्यार है

ये दिल भी कम्बख़्त उसके हाथों टूटने को तैयार है


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ये जिंदगी महज़ दिलासों पर चल रही है

हांसिल ना हुआ कुछ भी ये महज़ झाँसों पर चल रही है


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तुम्हें कैसे बतलाऊँ की मेरी खामोशी में कितना शोर होता है

लिखता हूँ कुछ और मगर लिखना कुछ और होता है


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झूठ सारे मेरे सामने हो रहे थे

लोग तोड़ कर मेरा दिल मेरे सामने रो रहे थे


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जंग तो आज भी ख्वाहिशों से जारी है

कितनी टूट गईं कितनों की बारी है


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चुप ही रहना बेहतर होता है

बोलने से विवाद अधिकतर होता है


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हांसिल क्या ही होना है इन झूठे दिलासों से

लिहाजा मुझे दूर ही रखना तुम अपने झाँसों से


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मेरे जज्बातों से भरी हुई है जो मेरी वो डायरी हो तुम

लिखता हूँ मैं बड़ी शिद्दत जिसे वो मेरी शायरी हो तुम


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वक्त बेहद खास है इसे बर्बाद मत करो

जो जा चुका है जाने दो उसे अब याद मत करो


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किसी की बद्दुआ तो असर लायी है

हवा भी अपने साथ ज़हर लायी है


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जिन्हें कुछ करना होता है वो कर जाते हैं

वरना दिलासों में कितने सपने मर जाते हैं


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गुस्ताखी ये हो गई हमसे की हम उससे वफ़ा कर बैठे

उसको मनाया हमने हर दफ़ा मगर खुद को हम ख़फ़ा कर बैठे


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ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फसलों की दूरी है

इसलिए घबराना क्यों जब दोनों ही जरूरी हैं


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आप वरदान थे और हम अभिशाप थे

मुक़द्दर हम दोनों के इस क़दर ख़िलाफ़ थे


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सोचा था तुम्हें मेरे जज्बातों की गहराई दिखायेंगे

दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब तुम्हें वो खायी दिखायेंगे


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उसकी मासूमियत उसकी मुस्कान की ख़ातिर

तैयार हैं हर उस इम्तिहान की ख़ातिर


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कोई इतना ग़लत कैसे कर सकता है

दिल को दिल से अलग कैसे कर सकता है


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मिल जाऊँगा मैं जो तुम मेरी तलाश में आओगे

ठहर जाना कुछ पल जो तुम मेरे पास में आओगे


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तुम्हारे गुनाहों की मैं सज़ा काट रहा था

अजीब था मैं जो तुमसे हमदर्दी बेवजह बांट रहा था


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सुख़न बेच रहा हूँ मैं ग़म ख़रीद रहा हूँ

एक दौर का मैं बेरहम मज़ीद रहा हूँ


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सबसे कर ली है दोस्ती बस खुदसे बैर रखने लगा हूँ

उससे भी अब कोई वास्ता नहीं मैं उसके बग़ैर रहने लगा हूँ


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यूँ मायूस से क्यों तुम हर दफ़ा रहते हो

मुझे बताओ ना क्यों यूँ ख़फ़ा रहते हो


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उसे नहीं ख़बर की उसकी परछाईं हूँ मैं

वो ना हो अगर तो तन्हाई हूँ मैं


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तुम्हारे साथ जो रहा तो गुम हो जाऊँगा

मैं ना रहूँगा मैं फिर तुम हो जाऊँगा


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तुम समझ न सके मैं कबसे इशारा कर रहा था

अहमियत नहीं थी वहाँ इसलिए मैं किनारा कर रहा था


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तोड़ कर मैं ख़्वाब देखो नींद में बैठा हूँ

आओगे इस मोड़ पे तुम मैं उम्मीद में बैठा हूँ


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तजुर्बा है इन आँखों का जो ये झूठ पहचान लेती हैं

अहसासों से असलियत के सबूत पहचान लेती हैं


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झूठे दिलासों में तुम उसकी जान ना लो

क़ायदे से कर लो तुम इश्क़ यूँ हर दफ़ा इम्तहान ना लो


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क़िस्मत लिखी उसने मेरी फिर कलम तोड़ दी

बेवजह मसूमों को सताने की उसने फिर रसम छोड़ दी


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कोई ढूँड कर ले आओ मुझको मेरे पास में

भटकता हूँ आज भी मैं खुदकी तलाश में


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इस जमाने में आशिकों की भरी पूरी महफ़िल है

जिसमें वफ़ा हो वो ढूँड़ना मुश्किल है


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एक शख़्स के ख्यालों में रहता हूँ मैं

उसकी खामोशियों में तो कभी उसके सवालों में रहता हूँ मैं


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ऐसा है तो क्या तुम एक सवाल पूछ लोगे

आँखों से मिलाकर आँखें मेरा तुम हाल पूछ लोगे


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एक ही कहानी में दो किरदार निभाया हूँ

नफ़रत भी उसी से की मैं जिससे प्यार निभाया हूँ


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किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया


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मत पूछो तुम मेरी गहराई की कितना अंदर हूँ मैं

खामोशियों में ठहरा हुआ समंदर हूँ मैं


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उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ


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मायूसियों के दलदल में मैं खुशियाँ तलाश कर रहा था

हासिल कुछ भी ना हुआ फिर भी मैं प्रयास कर रहा था


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हादसा एक ऐसा हुआ कि मैं संभल न सका

लोग तो बदल गए मगर खुदको मैं बदल न सका


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क़ातिल ही था हमदर्द मैं जता नहीं पाऊँगा

मत पूछो तुम मेरा दर्द मैं बता नहीं पाऊँगा


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बस इतनी ही समझ है

सबको अपना समझ लेते हैं


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करनी थी जितनी बेरहमी और जितना सताना था वो सता चुका है

नहीं होगा ऐ दिल अब सितम जो था बेरहम वो जा चुका है


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नहीं है जो हमदर्दी ही दिल में तो इन दावों का क्या करूँगा

अहमियत ही ना हो इश्क़ में तो दिखावों का क्या करूँगा


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हर लम्हा हसीन है यहाँ इसे तुम हंस के गुजार दो

न की उलझी हुई इस जिंदगी की तुम कश्मकश में गुजार दो


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जमानत ना दो मुझे सलाखों में रहना है

मेरी तो दुनिया है वहाँ मुझे उसकी आँखों में रहना है


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ज़िस्म के निहायती तलबग़ार ही होते हैं

इश्क़ में भी तो यार ख़रीददार ही होते हैं


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ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये


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तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था


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कतरा जो अश्क का बह गया है

तुम समझे नहीं ये क्या कुछ कह गया है


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कल तो टाला आज भी रहने दिया

और इस तरह वो राज राज ही रहने दिया


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ढूँड़ता रहा मैं लाखों में जिसे तुम्हीं तो वो शख़्स हो

देखता हूँ मैं हर रोज़ जिसे आईने में तुम्ही तो वो अक्स हो


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हाल-ए-दिल मैं तुमसे क्या कहूँ

तुम समझोगे ही नहीं तो क्या बयाँ करूँ


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सतरंज है ये जमाना यहाँ रिश्तों में भी चाल चली जायेंगी

आज़मा कर देखना कभी बेमिशाल चली जायेंगी


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मत दो ये इल्ज़ाम तुम उसे की मेरे जज्बातों की क़ातिल है

मज़बूरी उसकी भी कोई है जो इस गुनाह में वो शामिल है


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आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं


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चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके


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ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे


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पलट कर भी ना देखा उसने वो इस तरह बदल गई

उस रात वो ख़्वाब में आई मगर अगली सुबह वो बदल गई


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हम ही ना समझ सके की वो जिंदगी के मायने सिखाती गई

हर ठोकर हमें जिंदगी की जिंदगी के आईने दिखाती गई


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कर लिए फ़ासले उसने और अपनी राह ही बदल ली

ठुकरा की मेरी दहलीज़ उसने तो पनाह भी बदल ली


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बनते बनते बात बिगड़ने लगी थी

और फिर तो ऐसा हुआ बिन बात वो लड़ने लगी थी


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झूठे हैं वो सारे सबूत जानते थे

तेरी मासूमियत के पीछे में छुपी लोग करतूत जानते थे


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सच नहीं था मगर सच जैसा लग रहा था

इतना यकीन था जिसको उसको कैसा लग रहा था


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नहीं कर सकता इसमें समझौता मैं किसी से

तुम मेरे हो हर जन्म के लिए


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भटक रहे हैं अब तो हम उसकी यादों में लावारिश हो कर

समेटकर अपने जज़्बात अपनी हर ख़्वाहिश खोकर


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एक शख़्स को समझने में जरा सी देर हो गई

यही वजह है जो मेरे जज्बातों के साथ हेर फेर हो गई


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आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


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उम्मीदें तो मेरी तुमसे ज़्यादा हैं

तुम भी बताओ ना क्या इरादा है


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आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


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उसकी सहमति और उससे सहानुभूति चाहता हूँ

प्रेम का अंदेशा तो नहीं है उससे मगर उसी से ये अनुभूति चाहता हूँ


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ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ


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झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं


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तूफ़ानों में बुझते चिराग़ों को ढूँडते रहे

हम भी हम जैसे अभागों को ढूँडते रहे


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उम्र गुज़र गई हर शख़्स में एक ही किरदार ढूँडते ढूँडते

होनहार समझदार और हर शख़्स में कोई एक खुद्दार ढूँडते ढूँडते


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किसी ना किसी की कमी महसूस होगी

जब तक ना टूटेगा वहम ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी


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सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है


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बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ


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नहीं है आसान इस दिल को समझना

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना


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टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे


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आँखें जब भी उससे मिलीं वो घबरा रही थी

कोई बात तो थी जो वो मुझसे कतरा रही थी


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तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है

समझाऊँ भी कैसे दिल को समझाना मुश्किल है


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वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था


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बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ


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कर चुका हूँ तय की अब उससे प्यार में ख़िलाफ़त होगी

बहुत हो चुकी उससे मोहब्बत इस बार तो उससे बग़ावत होगी


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चल तेरे साथ इस गुनाह में मैं भी हिस्सेदार हो जाता हूँ

इकलौता तू ना बन गुनहगार तेरे साथ मैं भी साँझेदार हो जाता हूँ


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मंज़ूर नहीं जो तुम्हें मौज़ूदगी हमारी तो तुमसे हम दूर चले जाएँगे

मर्जी अगर यही है तुम्हारी तेरी तो हम ज़रूर चले जायेंगे


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लम्हें जो संभाल कर रखे थे वो तो फ़िज़ूल में उजड़ गए

सहजते सहजते उसकी यादों की भूल में गुज़र गए


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कर ले क़ैद तू मुझको तेरी निगाहों में

चाहिए उम्रक़ैद मुझको तेरी बाहों में


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उसकी ख़ातिर मैंने इतना सब किया

वो ही अब पूछती है की इतना कब किया


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तेरी यादों ने मुझे कमज़ोर कर रखा है

उलझा कर तेरे झाँसों में मुझे झकझोर कर रखा है


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शहर में यूँ तो कितने विद्वान पड़े हैं

उसके बावजूद भी शहर के विद्यालय यूँ ही बेजान पड़े हैं


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क़ैसे कहूँ की अंधविश्वास में हूँ

वो किसी और का हो चुका हूँ मैं जिसकी तलाश में हूँ


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शौकीन तो बेशक नहीं वो आदत से मजबूर ही होगा

जिसने भी क़त्ल किया है मेरे जज़्बातों का वो बेकसूर ही होगा


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फ़ितरत ही नहीं है हमारी किसी को ज़बरदस्ती जकड़ कर रखने की

बहला फुसला कर रिश्तों की हथकड़ियों में पकड़ कर रखने की


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भुलना तो नहीं चाहिए मग़र तुम वो बात भूल रहे हो

खायी थी जो क़समों की वो सौग़ात भूल रहे हो


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हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है


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क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है


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दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए


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चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर


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पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है


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मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का


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अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे


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भुला कर रंजिशें तमाम हम काम पर चल दिए

मिलता है जहाँ दो पल का सुकून हम उस मुकाम पर चल दिए


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थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल


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दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है


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दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं

फिर इन साजिशों को ये लोग प्यार कहते हैं


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मत पूछना मुझसे तुम की किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है की ये शख़्स ग़द्दार है


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किसी ना किसी की कमी महसूस होगी

जब तक ना टूटेगा वहम ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी


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तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है

समझाऊँ भी कैसे दिल को समझाना मुश्किल है


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बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था


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आँखों में तुम्हारे हम जो राज़ देखते हैं

ख़ुद वो तुम क्यों नहीं कहते जो हम अल्फ़ाज़ देखते हैं


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क़ैद होठों की सलाख़ों में रह गई

कितनी ख्वाहिशें आज भी आँखों में रह गईं


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वो इश्क़ में वफ़ाओं के दावे करते हैं

उन्हें जज्बातों की समझ ही नहीं वो महज़ दिखावे करते हैं


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कभी सहमति उसके सवालों पर तो कभी नाराज़गी रहती है

उसे शिकायत है क्यों मेरे किरदार में इतनी सादगी रहती है


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हमने देखा है की अब इश्क़ में वफ़ाओं का उसूल नहीं है

इसलिए इन बेवफ़ाओ का ये इश्क़ हमें कबुल नहीं है


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हाँ भी कहना होता है अगर तो मैं ना कह देता हूँ

मसला इश्क़ का हो अगर तो मैं मना कर देता हूँ


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इश्क़ करिए तो उसको आप हिफ़ाज़त से रखिए

रिश्तों को निभाने की चाहत से रखिए


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नफ़रत है मुझे दिखावे से इसलिए मैं दिखावे नहीं करता

करता हूँ मैं वफ़ाए बड़ी शिद्दत से मगर मैं दावे नहीं करता


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वो एक दफ़ा जो कह दे तो ताउम्र हारता ही रहूँ

वो है वो सुकून जिसे बस निहारता ही रहूँ


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तुम मुझे अपना समझ कर आना

अश्क हूँ तुम्हारा इतना समझ कर आना


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ढूंड लाया हूँ मैं खुदको बड़ी मशक़्क़त के बाद उसकी यादों से

गुमराह ही कर रखा था मुझको उसके वादों ने


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निकालकर वो मुझमें कमी दूर हो गई

चलो इसी बहाने वो ग़लतफ़हमीं जो थी दूर हो गई


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मत पूछ किस तरह ये दिन गुज़र रहे हैं

तेरे ख़ातिर बेचैन तेरे बिन गुज़र रहे हैं


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दो मुहे लोग हैं ज़नाब

मुंह पर भाई पीठ पर बुराई वाली फ़ितरत रखते हैं


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उम्मीदें टूट गईं मेरी उसकी ना के बाद

मैंने रास्ता भी छोड़ दिया उसका उसकी मना के बाद


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इतनी तफ़तीश के बावजूद कोई कसर नज़र नहीं आती

वो बेख़बर है भी तो बेख़बर नज़र नहीं आती


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बेकार की है दुनियादारी और रंग भेद भी सब बेवजह है

मुसाफ़िर सब एक सफ़र के हैं और जाना एक ही जगह है


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वाक़िफ़ तो थे तुम मेरे इरादों से

सख़्त नफ़रत है मुझे झूठे वादों से


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परवाह नहीं थी किसीको की कोई उसकी चाह में मर गया

इश्क़ में एक सिलसिला तो इसी तरह से गुज़र गया


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थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल


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नहीं है आसान इस दिल को समझना

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना


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बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ


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सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है


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ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे


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तलब थी हमें जिस शख्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुजारा किया था


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कितनी ख्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूं

इश्क़ में आखिर में मैं हार के बैठा हूं


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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यकीं गलतफहमी रह जाती है


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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

की देकर झूठी उमीदें हमें तबाह किया गया है


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उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा की बुरे हैं हम


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यादें आज भी उसकी बरकार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए जमाने उसको मनाने में


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ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फसलों की दूरी है

इसलिए घबराना क्यों जब दोनों ही जरूरी हैं


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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सोचा था तुम्हें मेरे जज्बातों की गहराई दिखायेंगे

दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब तुम्हें वो खायी दिखायेंगे


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दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विस्वास हो जाएगा


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हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है


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झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं


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समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को


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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं


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जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो खता उसे मत दोहराने देना


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बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी है

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है


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हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ हीं तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्जी आप इल्ज़ाम दीजिए


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तजुर्बा इतना है की नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आयेगा मैं उसकी जरूरत पहचान लेता हूँ


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टूट गईं वो उम्मीदें जो मैने उससे रखी थी

उसमें वफ़ा की कमी थी बाकी लड़की वो अच्छी थी


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वक्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहां तो बस ताने पेश किए जाते हैं


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देखा है मैने यहां सबकी शराफ़त को

शरीफों को और उनकी आदत को


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टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे


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तू ही बता की ये मेरे किस काम की हैं

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं


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जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके खयालों का


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सारी शिकायतों का खुदसे गिला कीजिए

छोड़ कर ग़ैरों का साथ कभी ख़ुद से मिला कीजिए


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प्यार ही है अगर तो छुपाया क्यों जाये

जो नहीं है अगर तो निभाया क्यों जाये


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क्या आप मुझे इतना बतायेंगे

की इस दिल को और कितना सतायेंगे


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वहम पर वहम मैं दिल में पाले हुए था

मैं ही था उसे जो यादों में सँभाले हुए था


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कह दो ना तुम ये बात मेरी आँखों में आँखें डालकर

रख सकोगे तुम मेरे दिल को सम्भालकर


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मत दो तुम ये हवाला चाहतों का

जो ये ख़ामोशी भी ना समझे तो तुम हमदर्द कैसे


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आप इतनी कमी जो निकाल रहे हैं

कोई पुरानी दुश्मनी निकाल रहे हैं


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मैं क्या हूँ और कैसा हूँ आख़िर ये तहक़ीक़ात क्यों करनी है

तुम्हारी समझ से बुरा ही हूँ अगर तो मुझसे बात क्यों करनी है


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मत जाओ आप मेरी आँखों की गहराई में

दम घुटने लगेगा आपका मेरी तनहाई में


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रिश्ते निभाने का अगर इरादा हो

तो फ़र्क़ ही नहीं पड़ता प्यार कम हो या ज़्यादा हो


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इश्क़ में यूँ बिछड़ना क्या ज़रूरी है

यही तय भी है अगर तो क्या इश्क़ में पड़ना ज़रूरी है


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अज़ीब से हालात हैं मेरे जो कमबख़्त सुधर भी नहीं रहे हैं

कब से कोशिश रहा हूँ मैं ये कमबख़्त गुज़र भी नहीं रहे हैं


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यहाँ बातें सिर्फ़ झूठी अफ़वाहों के बारे में की जाती हैं

लगा कर झूठे इल्ज़ाम झूठे गवाहों के बारे में की जाती हैं


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जानता था दिल की ये ख़ता ज़रूर होगी

तोड़ कर वादे वो लापता ज़रूर होगी


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कुछ दिन और जो तुम मेरे ख़्वाबों में ठहर जाते

तो फिर बिछड़ने के सारे घाव मेरे भर जाते


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आना ही हैं तुम्हें जो मेरे ख़्वाबों में तो आ ज़ाया करो

मगर एक ही गुज़ारिश है तुमसे कि आकर फिर ना ज़ाया करो


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ख़रीद फ़रोसी तो प्यार में भी है तभी तो ये टिकाऊ नहीं है

झूठ कहते हैं ये दुनिया वाले कि प्यार ये बिकाऊ नहीं है


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चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके


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कितना भी कर तू सितम ऐ सनम मैं इंतक़ाम नहीं लूंगा

कोई कितना भी पूछेगा मुझसे मैं तेरा नाम नहीं लूंगा


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यादें उसकी उधार की हैं जो वापस उसे लौटाना पड़ेगा

समेट लो अब तुम ख्वाहिशें अपनी जो ख्वाबों से वापस भी आना पड़ेगा


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बनावटी हैं सभी रिश्ते यहाँ और रिश्तेदार भी सब बनावटी हैं

ख़ुदगर्ज़ी हैं सभी फ़रिश्ते यहाँ और प्यार भी अब दिखावटी है


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खामोशियों में क़ैद मुझे ख्वाहिशों के दर किनार रहने दो

मत पूछो तुम मेरी ख़्वाहिशें यार रहने दो


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यूँ ही नहीं सच्ची मोहब्बत अफ़वाह बन चुकी है

कितने घरों को ये तबाह कर चुकी है


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क़ायदा ही नहीं है मुझमें मेरी बात कहने का

किसी अपने से अपने हालात कहने का


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उसकी मोहब्बत में उसकी नफ़रत अच्छी लगती हैं

झूठ बोलती उसकी आँखें बेमुरौवत सच्ची लगती हैं


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हाल ए दिल कोई सुनने को तैयार न हुआ

यही वजह है जो इस दिल को कभी प्यार न हुआ


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तुम ही थे एकलौते मैं जिसकी तलाश में था

वरना तो हर सुकून मेरे पास में था


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आँशु पोछने के लिए या साथ में रोने के लिए

कुछ तो होना चाहिए उसमें कुछ होने के लिए


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उसकी बातों को मैं नज़रंदाज़ नहीं कर पाया

उसने तो की थी नज़रंदाज़ी मगर मैं ऐतराज नहीं कर पाया


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बीते लोग बिती बातों से आप वास्ता न रखिए

ये लौट कर वापस नहीं आते आप रास्ता न ताकिये


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तस्वीरे झूठीं हैं मेरी जो मुझे मुस्कुराता दिखा रही हैं

ज़रा पूछो मेरे आईने से कितने ग़म मैं छुपा कर बैठा हूँ


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माँगते क्या मदद हमसे इशारे ना हो सके

सो डूब गए उसकी आँखों में हम किनारे ना हो सके


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तुम्हें अपनाना है तो अपना लीजिए

वरना मेरी ख्वाहिशों को कहीं दफ़ना दीजिए


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बेचैनियाँ भर चुकी हैं अब तो मेरी साँस में

सब छोड़ कर क्यों आते नहीं तुम मेरे पास में


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मुद्दतों से मेरी एक मुश्किल का हाल नहीं मिल रहा है

सब्र कर रहा हूँ मैं कबसे मगर फल नहीं मिल रहा है


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उसके हर शौक को हमने सिर आँखों पर रखा है

मगर उसने हमारी अहमियत ना समझी हमको सलाख़ों पर रखा है


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पूरे सफ़र में हर शख़्स एक ही सवाल पूछता गया

मुझसे मेरे शब्दों में तेरा हाल पूछता गया


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नहीं चाहिए तुम और तुम्हारी ये खैरात नहीं चाहिए

ले जाओ समेटकर तुम अपने ख़्वाब और मुझको ये सौगात नहीं चाहिए


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आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं


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पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है


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अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे


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क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है


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मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का


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वो जो मेरी खिलाफत में था मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा


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एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं


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हमने तो हमारी हारी है

अब ये बाजी तुम्हारी है


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दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए


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सामने हो वो जब भी मेरे मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ

इकलौता वो शख़्स है मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ


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चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर


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वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया

खता ये थी मेरी की उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया


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लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया


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मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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मर्ज़ी का मालिक और जरा सा मसखरे मिज़ाज का हूँ

बाक़ी तुम जो भी समझों मैं तो मेरे अंदाज़ का हूँ


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ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये


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तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था


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तरक़ीब ना सिखाओ मुझे की प्यार कैसे किया जाता है

मुझमें ये समझ ही नहीं की झूठों पर एतबार कैसे किया जाता है


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इश्क़ में हम कभी अव्वल ना हुए

जो अफ़साने थे हमारे इश्क़ में मुक़्क़मल ना हुए


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बस आख़िरी बार एक और तहक़ीक़ात करनी थी

मुझे उस लापता से ज़रूरी एक बात करनी थी


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कोशिश तो पूरी की है तुझको भुलाने की

बस वो हिम्मत ही ना जुटा सका मैं जो जुटानी थी


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झूठी हमदर्दी या झूठे दावे करता है

किनारा रखता हूँ मैं उससे जो दिखावे करता है


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चाहूँ भी तो क्या… उससे बेहतर कोई है ही नहीं

तुम्हारी समझ से कोई होगा मगर मेरी समझ से कोई है ही नहीं


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एक लंबी तहक़ीक़ात के बाद इसमें इसकी रज़ा मिलती है

आँखें करती हैं गुस्ताखियाँ और दिल को सजा मिलती हैं


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कोई आया इन आँखों में सपने दे गया

छीन कर वो मेरे अपने दे गया


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दर-बदर मैं भटक कर उसका पता ढूंड रहा था

अरसों से मैं था लापता मगर उसे ढूँडता रहा


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सारे सवालों के जवाब मेरे मुझे तुझसे मिल जाते हैं

तू बता ना बता मुझे खुदसे मिल जाते हैं


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झूठी तसल्ली ना दो झूठे दिलासे ना दो

दे दो मौत बेशक मगर हमको ये झाँसे ना दो


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समझ से तुम्हारी तो बेफ़िज़ुल की बातों का है

मगर जो तुम समझ सको तो ये मसला जज्बातों का है


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आशिक़ी में तेरी ये इतरा उठते हैं

तेरा नाम जब भी मैं पुकारूँ ये होठ मुस्कुरा उठते हैं


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ज़िन्दगी ये कम्बख़्त ज़िम्मेदारी में गुज़र गई

संभालते संभालते ये ख्वाहिशों की खरीददारी में उजड़ गई


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संभाल कर रखा है उसको मैंने मेरे दिल में हिफ़ाज़त से

सजदा करता हूँ हर रोज़ मैं उसका बड़े शिद्दत की नज़ाकत से


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यही सोच सोच कर दिल को बुरा लग रहा था

कुछ अधूरा नहीं था मगर अधूरा लग रहा था


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एक शख़्स की शख़्सियत मुझे परखनी थी

उसकी बातों से उसकी हैसियत मुझे परखनी थी


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मत जताइये आप ये झूठी हमदर्दी जो निहायती फ़र्जी है

आपके इरादों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि ये ख़ुदगर्ज़ी है


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झूठे मुक़दमों के बाद फिर सबूत पेश किए जाते हैं

गवाह भी झूठे हैं यहाँ उसके बावजूद पेश किये जाते हैं


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रहने दे यार मैं झूठी उम्मीदों का क्या करूँगा

जो ख़्वाब ही ना रहे तो मैं नींदों का क्या करूँगा


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बेहतर होगा कि वो नींदे या वो ख़्वाब मिल जाये

या फिर तोड़ी क्यों उसने उम्मीदें ये जवाब मिल जाए


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ख़ामियाँ तुझमें भी हैं और ख़ामियाँ मुझमें भी हैं

गिला तू भी नहीं करता और गिला मैं भी नहीं करता


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ज़ख़्म तो यहाँ सबके दिल में रहते हैं

लोग यूँ ही नहीं शायरों की महफ़िल में रहते हैं


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उम्र की दहलीज़ पर ये पड़ाव तो आते रहेंगे

जब तक है ये ज़िंदगी उतर चढ़ाव तो आते रहेंगे


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इससे पहले कोई ख्वाहिश आप के दामन पर दाग लगा दे

आप ऐसी ख़्वाहिशों को ही आग लगा दें


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रिश्ते नये बनाते ही तुम पुराने रिश्ते छोड़ देते हो

आख़िर इतनी उम्मीदें तुम लोगों की कैसे तोड़ देते हो


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तुम्हीं से सीख कर तुम्हीं को ज्ञान देंगे

कुछ कंधे ऐसे हैं जो तुम्हीं पर बंदूक़ तान देंगे


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आख़िर ये अफ़वाह किसने फैलायी है

की हिंदू और मुस्लिम भाई भाई हैं


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बेवजह नहीं हूँ मैं भी कोई बात तो मुझमें भी ख़ास होगी

मैं नहीं हूँ किसी की तलब तो क्या कभी मेरी भी तलाश होगी


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समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को


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उसके आने में ही इतनी देर हो गई

की मेरी सारी उम्मीदें ही ढेर हो गईं


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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं


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की उजाड़ कर शहर यहाँ आशियाने बनाये जायेंगे

ये दोगली सरकार है यहाँ तो सिर्फ़ बहाने बनाये जाएँगे


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हक़ीक़त की दुनियाँ में कहाँ वो कदम रखते हैं

शायर तो सब सरफिरे हैं, शायरी में अपने वो वहम लिखते हैं


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हमने सबकी सूरतों का हिसाब रखा है

की किस किसने यहाँ सूरतों पर नक़ाब रखा है


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हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ हीं तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं


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बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी है

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है


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जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो खता उसे मत दोहराने देना


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हश्र जो भी हो हमारा हमें मंज़ूर है

मगर दिल को कुछ भी ना कहना क्यूँकि वो बेक़सूर है


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आख़िर मैं भी तो हूँ इंसान सो थक चुका हूँ

सबको दे देकर इम्तिहान मैं थक चुका हूँ


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उसकी चाहत में मैं भी क्या क्या यूँ ही कर गया

वो दरिया सी थी बह गई और मैं साहिल सा वहीं ठहर गया


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तलब थी हमें जिस शख्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुजारा किया था


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मत पूछना मुझसे तुम की किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है की ये शख़्स ग़द्दार है


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खूबियाँ ना मिलेंगी मुझमें क्यूँकि मैं ख़ामियों से भरा हूँ

और परवाह भी नहीं है इसकी मुझे की क्यों मैं इतना सरफिरा हूँ


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वो ज्यादती जनाब इस हिसाब से करता था

कि तोड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदें भी ख़राब करता था


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दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं

फिर इन साजिशों को ये लोग प्यार कहते हैं


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दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है


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जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके खयालों का


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कभी ना कभी वो दिन आयेगा

उसने चुराया था जो मेरा शुकून वो छिन जाएगा


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मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं


༺❦༻


ये दिल आज भी उसके इंतेज़ार में पागल है

हासिल कुछ भी ना हुआ मगर फिर भी ये उसके प्यार में पागल है


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तू ही बता की ये मेरे किस काम की हैं

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं


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लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया


༺❦༻


हमने तो हमारी हारी है

अब ये बाजी तुम्हारी है


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वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया

खता ये थी मेरी की उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया


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वो जो मेरी खिलाफत में था मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा


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सामने हो वो जब भी मेरे मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ

इकलौता वो शख़्स है मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ


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कभी तो मेरे ग़म वो कम आंकता है तो कभी वो छुपकर मेरे ज़ख़्म झांकता है

इतनी सी है उसमें कमी जो मेरा उससे 36 का आँकड़ा है


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उसकी अपनी ये मर्ज़ी है को वो निहायती ख़ुदगर्ज़ी है


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समझौते कर लिए अब ख़्वाहिशों से हमने

वरना वो वक़्त ही और था जब गिला था रब से


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ख़्वाबों और ख़्वाहिशों का जंगल है

ये ज़िंदगी भी चुनौतियों भरा दंगल है


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झूठी हैं हमदर्दियाँ और ये रिश्ते भी झूठे हैं

टूट रही हैं उम्मीदें क्योंकि फ़रिश्ते भी झूठे हैं


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बहुत कुछ था बर्बाद होने को मेरे क़िस्से में

फिर भी बर्बाद वो हुआ जो कभी था ही नहीं मेरे हिस्से में


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जब भी तुम मिलते हो तो बस मेरी कमी लेकर मिलते हो

कभी कुछ सच तो कुछ ग़लतफ़हमी लेकर मिलते हो


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जब ये ग़म मेरा है तो सबसे ख़ुलासा क्यों करें

चीख लेंगे खामोशियों में हम यूँ बेवजह तमाशा क्यों करें


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मत पढ़ तू मेरी खामोशियों को नासमझ

मेरे अल्फ़ाज़ भी तेरी समझ से बाहर हैं


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दिल ही धोखेबाज़ निकला जो ये इतना कुछ करता रहा

ख़ता तो सारी इसकी थी मगर ख़ामियाजा मैं भुगतता रहा


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मेरे ज़हन में ये बात यहीं आकर रुकी हुई है

की उसकी आँखें आख़िर किस बात पर शर्माकर झुकी हुई हैं


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एक अजनबी को हमने अपना मान लिया था

जान से ज़्यादा था वो अजीज़ हमने इतना मान लिया था


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हैरान है ज़माना की ये कैसा मैं बर्ताव कर रहा हूँ

लोग मुझे ज़ख़्मी कर रहे हैं और मैं बैठ कर घाव भर रहा हूँ


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मलाल ये है कि हम तेरे काबिल ना हुए

भीड़ थी तेरे पीछे हम उस भीड़ में शामिल ना हुए


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अब तो डर ही नहीं है मुझे इस तन्हाई से

ना समंदर से ना समंदर की गहराई से


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तुझ से सुरू होकर तुझ पर ख़त्म होती है

हर लफ़्ज में मेरे सिर्फ़ तेरी ही नज्म होती है


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खता आपकी तो माफ़ हो जाएगी मगर

मैंने जो की तो ये दुनियाँ मेरे ख़िलाफ़ हो जाएगी


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लगता है ये ज़िंदगी यूँ ही इम्तिहान में बीतेगी

खामोशियों में क़ैद तनहाइयों के तूफ़ान में बीतेगी


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हालात थोड़े और ख़राब होने दो उसके बाद ये साफ़ हो जाएगा

कौन देगा साथ और कौन ख़िलाफ़ हो जाएगा


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किससे कहें गिले शिकवे या फिर किससे कहना चाहिए

सब तो हैं बेरहम यहाँ लिहाज़ा अब ख़ामोश ही रहना चाहिए


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सबकी ज़िन्दगी यहाँ बस झूठी उम्मीदों पर टिकी रहती है

और ये भी महज़ अफ़वाह है की सबकी क़िस्मत लिखी रहती है


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इश्क़ है उसी से उसी से नफ़रत कर बैठा हूँ

हैरान हूँ मैं खुद पर की ये कैसी मैं जुर्रत कर बैठा हूँ


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हँसता हूँ मैं ख़ुद पर और खुदा पर नाराज भी होता हूँ

ये उसकी थी खता जो मैं आज भी रोता हूँ


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डरता हूँ मैं तुमसे एक बात कहने में

थाम कर हाथ तुम्हारा तुमसे जज़्बात कहने में


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ढल गया है सूरज अब शाम आने वाली है

सहेज कर रखी वो उसकी यादें अब काम आने वाली हैं


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गुज़र गई है ये ज़िंदगी उसके इंतज़ार में

ख़ुद मैंने ही इसको किया है तबाह उसके प्यार में


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टूट कर बिखर गया है एक हिस्सा मेरे जज़्बात का

किस किस को सुनाऊँ मैं ये क़िस्सा मेरे हालात का


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शर्म से झुकीं हुई उसकी आँखें भी ये बयाँ कर रही थी

की वो बेहया मेरे पीठ पीछे और क्या क्या कर रही थी


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नहीं हैं जो हम तुम्हारे जैसे तो तुम भी हमारे जैसे नहीं हो

अगर नहीं हैं सही जो हम तो तुम भी तो ऐसे नहीं हो


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झूठी हमदर्दियों का ये जो तमाशा चल रहा है

इसे चलने दो यूँ ही क्यूंकि ये अच्छा खासा चल रहा है


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थक चुका हूँ मैं ऐ ज़िंदगी तेरे झाँसो से

आख़िर हासिल ही क्या हुआ मुझे तेरे झूठे दिलासों से


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इन आँखों को भी गुमराह किया गया है

हमसे पूछो ना किस तरह किया गया है


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अब आप ही फ़ैसला करो न इस बात का

क्या जायज़ नहीं है मसला मेरे जज़्बात का


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मेरी कलम भी मेरी अब ख़िलाफ़त करने लगी है

लिख लिख कर ये तुझे अब आफ़त करने लगी है


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तेरे इश्क़ में इस कदर इतराये रहते हैं

की नेमतें ख़ुदा की भी ठुकराए बैठे हैं


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जबसे मिला हूँ तुमसे तबसे ये बात जानी है

की झरना है ये ज़िंदगी प्यार का जिसमें जज़्बातों का पानी है


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वक्त तो चलता रहेगा इसी चाल से

लमहें तुम्हें रखना पड़ेगा सँभाल के


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आँखें जब भर आतीं हैं तो कितनी बातें उभर आती हैं

वरना खामोशियों में तो अक्सर कितनी बातें मर जातीं हैं


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रिवाज तो टूटते हैं बनते हैं

समाज की इस माला के ये भी तो मनके हैं


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कुछ दिन मुकदमें और फिर पेशी होगी

फिर क्या होगा वही अनदेखी होगी


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शुक्रिया तो मुझे हर साँप का करना है

मगर सबसे पहले तो आप का करना है


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जो समझ में आ जाए तो दाद दे देना

पहले कह लूँ मैं ग़ज़ल उसके बाद दे देना


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टूट गईं हैं नींदें तो क्या, नींदें तो टूटती रहती हैं

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या, उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं


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वो कहती तो है कि… वो कहीं नहीं जाएगी

मगर फिर भी उसकी बेरुख़ी सही नहीं जाएगी


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कोई इस पागल दिल को समझाने वाला नहीं है

कैसे समझाऊँ इसे… अब वो आने वाला नहीं है


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सीख रहा हूँ अभी… कैसे प्यार किया जाता है

करके गुमराह दिल को… कैसे झूठ का कारोबार किया जाता है


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क़लम का सिपाही हूँ… मैं कलम की बात लिखता हूँ

लिखते होंगे लोग मसख़रे… मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ


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सोचा था तुम्हें मेरे जज़्बातों की गहराई दिखायेंगे

दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब तुम्हें वो खाई दिखायेंगे


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दो कदम चलो मेरे साथ, खुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा


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हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है

हम थे कुछ और, हमें कुछ और कर दिया है


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झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं


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वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया

खता ये थी मेरी कि उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया


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लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया


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मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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मर्ज़ी का मालिक और ज़रा सा मसखरे मिज़ाज का हूँ

बाक़ी तुम जो भी समझो, मैं तो मेरे अंदाज़ का हूँ


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ख्वाहिश थी कलम की कि कुछ खास लिखा जाए

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाए


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तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था


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थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल


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नहीं है आसान इस दिल को समझना

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना


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बेचैन था मैं कबसे कि तुझसे इज़हार करूँ

करे तू मना भी अगर, तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ


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सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है

दिल में दफ़्न चंद आवाज़ों का है


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ऐ कलम तू मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे


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चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदें भी तबाह करके


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आएगा इक रोज़ वो, इस आस में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं


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पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है


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अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँढते रहे

जो आज मिला उसे कल ढूँढते रहे


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क्या है कारोबार, इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है

जज़्बातों की फ़िक्र हो जहाँ, वहाँ किरदार देखा जाता है


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मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का

क्योंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का


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वो जो मेरी खिलाफत में था, मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा


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एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं

छोड़ कर बाकी सबको, एक उसी के हम क़ायल हुए हैं


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हमने तो हमारी हारी है

अब ये बाज़ी तुम्हारी है


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दुआ करना कि कोई ग़लत लत ना लग जाए

उसकी यादें, उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए


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सामने हो वो जब भी मेरे, मैं खुद को संभाल नहीं पाता हूँ

इकलौता वो शख़्स है, मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ


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किसी ना किसी की कमी महसूस होगी

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमियाँ महसूस होगी


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तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है

समझाऊँ भी कैसे दिल को, समझाना मुश्किल है


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बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ

कि तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था


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टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे


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तू ही बता कि ये मेरे किस काम की हैं

दिल की धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं


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जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके खयालों का


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दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है


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दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं

फिर इन साजिशों को ये लोग प्यार कहते हैं


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मत पूछना मुझसे तुम कि किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्योंकि माथे पर किसके लिखा है कि ये शख़्स गद्दार है


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तलब थी हमें जिस शख़्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुजारा किया था


༺❦༻


समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को


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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं


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जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो खता उसे मत दोहराने देना


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बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी है

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है


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हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ ही नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्ज़ी आप इल्ज़ाम दीजिए


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तजुर्बा इतना है कि नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आएगा मैं उसकी जरूरत पहचान लेता हूँ


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टूट गईं वो उम्मीदें जो मैंने उससे रखी थी

उसमें वफ़ा की कमी थी, बाकी लड़की वो अच्छी थी


༺❦༻


वक्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहाँ तो बस ताने पेश किए जाते हैं


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देखा है मैंने यहाँ सबकी शराफ़त को

शरीफों को और उनकी आदत को


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कितनी ख्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूँ

इश्क़ में आखिर में मैं हार के बैठा हूँ


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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यकीं, गलतफहमी रह जाती है


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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

कि देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है


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उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा कि बुरे हैं हम


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यादें आज भी उसकी बरक़रार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए ज़माने उसको मनाने में


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ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फ़ासलों की दूरी है

इसलिए घबराना क्यों, जब दोनों ही ज़रूरी हैं


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने-मनाने की

क्योंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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ये इश्क़ भी साहब इतना आसान नहीं होता

ऐसा होता ही अगर तो ये दिल यूँ ही क़ुर्बान नहीं होता


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए जमाने उसको मनाने में


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यादें आज भी उसकी बरकार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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शुकून के दो पल बस तेरे साथ में गुजर जाए

फिर उसके बाद चाहे ये मेरी जिंदगी क्यों ना उजड़ जाए


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ख़त्म हो गया वो सिलसिला उसकी ना के बाद

नहीं रहा अब मसला कोई उसकी मना के बाद


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दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा


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जला आया मैं अपने ख़्वाब और उसको उसकी झूठी उम्मीदें देकर

फिर वहाँ से चला आया मैं टूटे ख़्वाब और टूटी नींदें लेकर


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उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा की बुरे हैं हम


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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

की देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है


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बेहतर ये होगा की अब तुम फ़ासला कर लो

मेरी यादों से खुदका तबादला कर लो


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अब तलाश शुरू की है हमने शुकून की

तुमको भुलाना भी पड़े तो भूला देंगे


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ये ज़िंदगी ही है कमबख्त जो हर रोज सबको सताती है

वरना मौत तो मुक़र्रर है जो एक रोज सबको आती है


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कितनी ख्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूं

इश्क़ में आखिर में मैं हार के बैठा हूं


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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यकीं गलतफहमी रह जाती है


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्जी आप इल्ज़ाम दीजिए


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वक्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहां तो बस ताने पेश किए जाते हैं


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देखा है मैने यहां सबकी शराफ़त को

शरीफों को और उनकी आदत को


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शायद ही कोई इतना बदनसीब होगा

या यूं कहूं की मुझ सा अजीब होगा


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तजुर्बा इतना है की नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आयेगा मैं उसकी जरूरत पहचान लेता हूँ


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टूट गईं वो उम्मीदें जो मैने उससे रखी थी

उसमें वफ़ा की कमी थी बाकी लड़की वो अच्छी थी


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आ गया हूं इस मोड़ पर मैं वो वहम सारे छोड़ कर

हर ज़ख्म हर ग़म मैं उसी किनारे पर छोड़ कर


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ढूंढ लो जाकर जो हमसे कोई बेहतर मिल जाएगा

हमें भी ख़ुशी होगी जो अगर मिल जाएगा


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ना पूछ ऐ जिंदगी हालत किस क़दर बिगड़ने लगे हैं

मेरे अपने ख़यालात मुझसे लड़ने लगे हैं


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खामोशियों में मचलता हुआ ख़याल हो तुम

क्या कहूँ मैं तुम्हें यार कमाल हो तुम


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करती है क्यों वो दिल्लगी दिल में ये सवाल रहता है

उसकी गुमसुदगी में ये दिल बेहाल रहता है


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देखूँ जो उसकी आँखों में तो कोई जादू या कमाल लगता है

दिल में सवाल ही सवाल रहता है


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ये हिस्सा मेरी ज़िन्दगी का

हमसे यूँ गुजारा ना जाएगा

तेरी तलब में तो यूँ दोबारा ना जाएगा


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इश्क़ में इतनी उधारी हो गई है

की साँसे थी जितनी सब तुम्हारी हो गईं हैं


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नहीं है कोई तेरे जैसा तो मेरे जैसा कोई कैसे होगा

उजाले तो हर तरह के होंगे मगर अंधेरे जैसे कोई कैसे होगा


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फ़िज़ूल में ही मैं तेरी बातों में आ गया था

तू महफ़ूज़ थी तेरे घर, मैं भीगता बरसातों में आ गया था


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मैं उस बग़ैरत के साथ में इंसाफ़ करने लगा हूँ

उसकी रज़ामंदी में खुदको खुदके ख़िलाफ़ करने लगा हूँ


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अजीब सी कश्मकश में हूँ

ख़ुद से दूर किसी के बस में हूँ


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उसकी बेवफ़ाई का आज पर्दाफ़ाश हो गया

वो बेवफ़ा है उसे भी आज एहसास हो गया


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बेरहम हो कितने तुम्हारी ये बेरहमी बता रही हैं

उसके बावजूद इन आँखों को तुम्हारी कमी सता रही है


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मेरे दिल की गहराई में दफ़्न हैं जो राज लिख रहा हूँ

जोड़ जोड़ कर मेरी ख़ामोशियों के अल्फ़ाज़ लिख रहा हूँ


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मौत ही मुक़र्रर है तो इसे नजरअंदाज क्यों करें

फ़िकर कल की कल हो, इसे आज क्यों करें


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ताउम्र इस मसले का हल ढूँड़ते रहे

हर ख़ुशी के पल को कल ढूँडते रहे


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मैं भी कम्बख़्त इश्क़ में वफ़ाएँ चाह रहा था

इक दर्जे की वो बेवफ़ा थी मैं जिससे वफ़ाएँ निभा रहा था


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अजीब था मैं जो दिल पर ये बोझ लिए घूम रहा था

उस अजनबी की खोज हर रोज़ लिए घूम रहा था


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मत करना तुम इश्क़

ये काम बुरा होता है

नतीजे बेहतर नहीं होते हैं यहाँ

आख़िर में अंजाम बुरा होता है


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देखो यार ऐसे नहीं होता है

मजबूरियों में उलझा हर कोई

हम जैसे नहीं होता है


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हम भी देखो कहाँ किस मुक़ाम पे खड़े हैं

कितनी बेबसी को दिल में थाम के खड़े हैं


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मेरे दिल की मरम्मत का ही अभी काम चल रहा है

चलने दो इस दिल पर जो भी इल्ज़ाम चल रहा है


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फ़ितरत यही है मेरी की मैं दावे नहीं करता

हकीकत ही पसंद हैं मैं दिखावे नहीं करता


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दोगे तुम जवाब एक सवाल पूछना था

कैसे हो तुम ये फ़िलहाल पूछना था


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काफ़ी कमी है मेरे क़िरदार में

तफ़तीस में इसके क्यों पड़े हो बेकार में


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खता मेरी है अगर तो बर्दास्त ना किया जाए

सज़ा मुक़र्रर हो मुझे बर्खास्त ना किया जाए


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खूबियाँ ना मिलेंगी मुझमें क्यूँकि मैं ख़ामियों से भरा हूँ

और परवाह भी नहीं है इसकी मुझे कि क्यों मैं इतना सरफिरा हूँ

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वो ज्यादती जनाब इस हिसाब से करता था

कि तोड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदें भी ख़राब करता था


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दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं

फिर इन साज़िशों को ये लोग प्यार कहते हैं


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दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है


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जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके ख़यालों का


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कभी ना कभी वो दिन आएगा

उसने चुराया था जो मेरा सुकून, वो छिन जाएगा


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मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर

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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं

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एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं

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ये दिल आज भी उसके इंतज़ार में पागल है

हासिल कुछ भी ना हुआ मगर फिर भी ये उसके प्यार में पागल है

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तू ही बता कि ये मेरे किस काम की हैं

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं

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लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया

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हमने तो हमारी हारी है

अब ये बाज़ी तुम्हारी है

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वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया

ख़ता ये थी मेरी कि उसकी इस ख़ता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया

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वो जो मेरी ख़िलाफ़त में था, मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख़्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा

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सामने हो वो जब भी मेरे, मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ

इकलौता वो शख़्स है, मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ

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कभी तो मेरे ग़म वो कम आँकता है, तो कभी वो छुपकर मेरे ज़ख़्म झाँकता है

इतनी सी है उसमें कमी, जो मेरा उससे छत्तीस का आँकड़ा है

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उसकी अपनी ये मर्ज़ी है कि वो निहायती ख़ुदगर्ज़ी है

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समझौते कर लिए अब ख़्वाहिशों से हमने

वरना वो वक़्त ही और था जब गिला था रब से

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ख़्वाबों और ख़्वाहिशों का जंगल है

ये ज़िंदगी भी चुनौतियों भरा दंगल है

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झूठी हैं हमदर्दियाँ और ये रिश्ते भी झूठे हैं

टूट रही हैं उम्मीदें क्योंकि फ़रिश्ते भी झूठे हैं

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बहुत कुछ था बर्बाद होने को मेरे क़िस्से में

फिर भी बर्बाद वो हुआ जो कभी था ही नहीं मेरे हिस्से में

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जब भी तुम मिलते हो तो बस मेरी कमी लेकर मिलते हो

कभी कुछ सच तो कुछ ग़लतफ़हमी लेकर मिलते हो

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जब ये ग़म मेरा है तो सबसे खुलासा क्यों करें

चीख लेंगे ख़ामोशियों में हम, यूँ बेवजह तमाशा क्यों करें

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मत पढ़ तू मेरी ख़ामोशियों को नासमझ

मेरे अल्फ़ाज़ भी तेरी समझ से बाहर हैं

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दिल ही धोखेबाज़ निकला जो ये इतना कुछ करता रहा

ख़ता तो सारी इसकी थी मगर ख़ामियाज़ा मैं भुगतता रहा

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मेरे ज़हन में ये बात यहीं आकर रुकी हुई है

कि उसकी आँखें आख़िर किस बात पर शर्माकर झुकी हुई हैं

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एक अजनबी को हमने अपना मान लिया था

जान से ज़्यादा था वो अज़ीज़, हमने इतना मान लिया था

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हैरान है ज़माना कि ये कैसा मैं बर्ताव कर रहा हूँ

लोग मुझे ज़ख़्मी कर रहे हैं और मैं बैठ कर घाव भर रहा हूँ

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मलाल ये है कि हम तेरे काबिल ना हुए

भीड़ थी तेरे पीछे, हम उस भीड़ में शामिल ना हुए

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अब तो डर ही नहीं है मुझे इस तन्हाई से

ना समंदर से, ना समंदर की गहराई से

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तुझ से शुरू होकर तुझ पर ख़त्म होती है

हर लफ़्ज़ में मेरे सिर्फ़ तेरी ही नज़्म होती है

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ख़ता आपकी तो माफ़ हो जाएगी मगर

मैंने जो की तो ये दुनिया मेरे ख़िलाफ़ हो जाएगी

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लगता है ये ज़िंदगी यूँ ही इम्तिहान में बीतेगी

ख़ामोशियों में क़ैद तन्हाइयों के तूफ़ान में बीतेगी

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हालात थोड़े और ख़राब होने दो, उसके बाद ये साफ़ हो जाएगा

कौन देगा साथ और कौन ख़िलाफ़ हो जाएगा

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किससे कहें गिले-शिकवे या फिर किससे कहना चाहिए

सब तो हैं बेरहम यहाँ, लिहाज़ा अब ख़ामोश ही रहना चाहिए

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सबकी ज़िंदगी यहाँ बस झूठी उम्मीदों पर टिकी रहती है

और ये भी महज़ अफ़वाह है कि सबकी क़िस्मत लिखी रहती है

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इश्क़ है उसी से, उसी से नफ़रत कर बैठा हूँ

हैरान हूँ मैं ख़ुद पर कि ये कैसी मैं जुर्रत कर बैठा हूँ

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हँसता हूँ मैं ख़ुद पर और ख़ुदा पर नाराज़ भी होता हूँ

ये उसकी थी ख़ता जो मैं आज भी रोता हूँ

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डरता हूँ मैं तुमसे एक बात कहने में

थाम कर हाथ तुम्हारा तुमसे जज़्बात कहने में

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ढल गया है सूरज, अब शाम आने वाली है

सहेज कर रखी वो उसकी यादें अब काम आने वाली हैं

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गुज़र गई है ये ज़िंदगी उसके इंतज़ार में 

ख़ुद मैंने ही इसको किया है तबाह उसके प्यार में 

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टूट कर बिखर गया है एक हिस्सा मेरे जज़्बात का 

किस किस को सुनाऊँ मैं ये क़िस्सा मेरे हालात का 

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शर्म से झुकीं हुई उसकी आँखें भी ये बयाँ कर रही थी

की वो बेहया मेरे पीठ पीछे और क्या क्या कर रही थी 

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नहीं हैं जो हम तुम्हारे जैसे तो तुम भी हमारे जैसे नहीं हो 

अगर नहीं हैं सही जो हम तो तुम भी तो ऐसे नहीं हो 

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झूठी हमदर्दियों का ये जो तमाशा चल रहा है 

इसे चलने दो यूँ ही क्यूंकि ये  अच्छा खासा चल रहा है 

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थक चुका हूँ मैं ऐ ज़िंदगी तेरे झाँसो से 

आख़िर हांसिल ही क्या हुआ मुझे तेरे झूठे दिलासों से 

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इन आँखों को भी गुमराह किया गया है 

हमसे पूछो ना किस तरह किया गया है 

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अब आप ही फ़ैसला करो न इस बात का 

क्या जायज़ नहीं है मसला मेरे जज़्बात का 

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मेरी कलम भी मेरी अब ख़िलाफ़त करने लगी है 

 लिख लिख कर ये तुझे अब आफ़त करने लगी है 

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तेरे इश्क़ में इस कदर इतराये रहते हैं

की नेमतें ख़ुदा की भी ठुकराए बैठे हैं 

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जबसे मिला हूँ तुमसे तबसे ये बात जानी है 

की झरना है ये ज़िंदगी प्यार का जिसमें जज़्बातों का पानी है

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वक्त तो चलता रहेगा इसी चाल से

लमहें तुम्हें रखना पड़ेगा सँभाल के 

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आँखें जब भर आतीं हैं तो कितनी बातें उभर आती हैं 

वरना खामोशियों में तो अक्सर कितनी बातें मर जातीं हैं 

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रिवाज तो टूटते हैं बनते हैं 

समाज की इस माला के ये भी तो मनके हैं 

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कुछ दिन मुकदमें और फिर पेशी होगी 

फिर क्या होगा . वही अनदेखी होगी 

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शुक्रिया तो मुझे हर साँप का करना है 

मगर सबसे पहले तो आप का करना है 

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मत जताइये आप ये झूठी हमदर्दी जो निहायती फ़र्जी है 

आपके इरादों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि ये ख़ुदगर्ज़ी है 

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झूठे मुक़दमों के बाद फिर सबूत पेश किए जाते हैं 

गवाह भी झूठे हैं यहाँ उसके बावजूद पेश किये जाते हैं 

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रहने दे यार मैं झूठी उम्मीदों का क्या करूँगा

जो ख़्वाब ही ना रहे तो मैं नींदों का क्या करूँगा

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बेहतर होगा कि वो नींदे या वो ख़्वाब मिल जाये

या फिर तोड़ी क्यों उसने उम्मीदें ये जवाब मिल जाए 

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ख़ामियाँ तुझमें भी हैं और ख़ामियाँ मुझमें भी हैं

गिला तू भी नहीं करता और गिला मैं भी नहीं करता 

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ज़ख़्म तो यहाँ सबके दिल में रहते हैं 

लोग यूँ ही नहीं शायरों की महफ़िल में रहते हैं 

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उम्र की दहलीज़ पर ये पड़ाव तो आते रहेंगे 

जब तक है ये ज़िंदगी उतर चढ़ाव तो आते रहेंगे 

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इससे पहले कोई ख्वाहिश आप के दामन पर दाग लगा दे 

आप ऐसी ख़्वाहिशों को ही आग लगा दें 

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रिश्ते नये बनाते ही तुम पुराने रिश्ते छोड़ देते हो 

आख़िर इतनी उम्मीदें तुम लोगों की कैसे तोड़ देते हो 

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तुम्हीं से सीख कर तुम्हीं को ज्ञान देंगे 

कुछ कंधे ऐसे हैं जो तुम्हीं पर बंदूक़ तान देंगे 

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आख़िर ये अफ़वाह किसने फैलायी है

की हिंदू और मुस्लिम भाई  भाई  हैं 

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सारी शिकायतों का खुदसे गिला कीजिए

छोड़ कर ग़ैरों का साथ कभी ख़ुद से मिला कीजिए

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प्यार ही है अगर तो छुपाया क्यों जाये 

जो नहीं है अगर तो निभाया क्यों जाये

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क्या आप मुझे इतना बतायेंगे

की इस दिल को और कितना  सतायेंगे

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वहम पर वहम मैं दिल में पाले हुए था 

मैं ही था उसे जो यादों में सँभाले हुए था 

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कह दो ना तुम ये बात मेरी आँखों में आँखें डालकर 

रख सकोगे तुम मेरे दिल को सम्भालकर

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मत दो तुम ये हवाला चाहतों का 

जो ये ख़ामोशी भी ना समझे तो तुम हमदर्द कैसे 

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आप इतनी कमी जो निकाल रहे हैं

कोई पुरानी दुश्मनी निकाल रहे हैं 

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मैं क्या हूँ और कैसा हूँ आख़िर ये तहक़ीक़ात क्यों करनी है 

तुम्हारी समझ से बुरा ही हूँ अगर तो मुझसे बात क्यों करनी है 

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मत जाओ आप मेरी आँखों की गहराई में 

दम घुटने लगेगा आपका मेरी तनहाई में 

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रिश्ते निभाने का अगर इरादा हो 

तो फ़र्क़ ही नहीं पड़ता प्यार कम हो या ज़्यादा हो 

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इश्क़ में यूँ बिछड़ना क्या ज़रूरी है 

यही तय भी है अगर तो क्या इश्क़ में पड़ना ज़रूरी है 

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अज़ीब से हालात हैं मेरे जो कमबख़्त सुधर भी नहीं रहे हैं 

कब से क़ोशिश रहा हूँ मैं ये कमबख़्त गुज़र भी नहीं रहे हैं 

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यहाँ बातें सिर्फ़ झूठी अफ़वाहों के बारे में की जाती हैं 

लगा कर झूठे इल्ज़ाम झूठे गवाहों के बारे में की जाती हैं 

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जानता था दिल की ये ख़ता ज़रूर होगी 

तोड़ कर वादे वो लापता ज़रूर होगी 

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कुछ दिन और जो तुम मेरे ख़्वाबों में ठहर जाते

तो फिर बिछड़ने के सारे घाव मेरे भर जाते 

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आना ही हैं तुम्हें जो मेरे ख़्वाबों में तो आ ज़ाया करो 

मगर एक ही गुज़ारिश है तुमसे कि आकर फिर ना ज़ाया करो 

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ख़रीद फ़रोसी तो प्यार में भी है तभी तो ये टिकाऊ नहीं है 

झूठ कहते हैं ये दुनिया वाले कि प्यार ये बिकाऊ नहीं है


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इश्क़ में ठुकराए हुए बुज़दिल का क्या किया

मत पूछ तू मुझसे मैंने दिल का क्या किया

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कर गया बेचैन वो मुझे इस क़दर 

ना सुकून मिल सकेगा अब मुझे उम्र भर 

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डर था जिस बात का वो ही दोहराने लगा हूँ 

भुला चुके हो तुम मुझे और मैं भी भूल जाने लगा हूँ 

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कोई आया जो जिंदगी में तो दिलाशा नहीं दूँगा 

झूठे वादे झूठी क़समों का उसको झाँसा नहीं दूँगा 

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कौन ऐसा है जिसको ग़म नहीं है 

शायद ही कोई होगा जिसको ये वहम नहीं है 

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इश्क़ में ख्वाहिशें मार-मार कर 

थक गया हूँ यार मैं हार -हार कर 

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हमसे न पुछो तुम नींदों के बारे में

तोड़ कर उम्मीदें उम्मीदों के बारे में 


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अज़ीब सी ये हरकत करने लगे थे हम 

उसकी ख़ातिर ख़ुदसे नफ़रत करने लगे थे हम 

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तुमसे न होगी हमदर्दी  तुम बस दावा करोगे 

समझते तो कुछ हो नहीं  तुम बस दिखावा करोगे

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तुझसे दूर किस्से कहानी में सिमट गया 

तेरी यादों से छूटा मैं आँखों के पानी में सिमट गया 

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तुमसे ही सीखा है मैंने तरीका मुस्कुराने का 

हंस कर हर ग़म अपनी हँसी में छुपाने का 

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आँखें तो झूठ बोलती हैं, वहम ये मैं जान न सका

ये सच है कि तुम फ़रेबी थे, उस फ़रेब को मैं पहचान न सका

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डर था जिस बात का वही हो गया 

सौंपा था उसे दिल मैंने जो कहीं खो गया 

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एक अजनबी था जिसके हम करीब होने लगे थे

खुदको भी भुला बैठे हम इतने अजीब होने लगे थे 

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अभी तो कहते हो खुदको फ़ना कर दोगे 

असल में एक मोड़ पर तुम भी मना कर दोगे 

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मालूम है मुझे की मैं उम्मीदे थोड़ा ज़्यादा करता हूँ 

मगर अब ना होगी तुम्हे ये शिकायतें मैं वादा करता हूँ 

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तुम हो की गौर करते नहीं

हम हैं की शोर करते नहीं 

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खता तुम करो तो गुनहगार मैं कैसे हो सकता हूँ 

चश्मदीद हैं ये निगाहें यार मैं कैसे हो सकता हूँ 

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वक़्त ही ना मिला तुझसे वो बात कहने को 

बेचैन था मैं क़बसे जो बात कहने को 

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कोई आए ले जाए छीन कर मेरे साये को 

जाने को क़बसे बेचैन है कमबख़्त, कोई बुलाये तो 

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एक आया और इन आँखों में बस गया

फ़ितरत उसकी साँप सी थी सो डँस गया 

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अहमियत कहाँ होती है हमारी हमें तो काफिरों में गिना जाता है 

मंज़िल भी हांसिल नहीं होती हमें तो मुसाफ़िरों में गिना जाता है 

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पलकों की दरख़्तों में अल्फ़ाज़ छुपाना 

मैंने तुमसे ही सीखा है हर राज छुपाना 

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तलब तो सिर्फ तुम्हारी है और किसी का ये दिल तलबगार नहीं है शक के दायरे में सब हैं मेरे तुम्हारे सिवा किसी और पे मुझे एतबार नहीं है 

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टूट चुका हूँ एक दफ़ा सो अब ये भूल नहीं करता हूँ 

कितनी भी शिद्दत से कोई इश्क़ करे मैं क़बूल नहीं करता हूँ 

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क्या ही कहूँ मैं अपनी  सफ़ाई में

कसर न छोड़ी कहीं उसने बेवफ़ाई में 

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हम नहीं हैं वो जो तुम्हारी दबिश में आ जायेंगे 

या बहला फुसलाकर तुम्हारी साजिश में आ जाएँगे 

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इश्क़ में इतना ज़्यादा जरूरी नहीं है 

दावे जरूरी नहीं है और कोई वादा जरूरी नहीं है 

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उस राज को राज रहने दो 

ना पूछो तुम आज रहने दो 

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मेरी ख़ामोशियों को तुमने कुछ और समझ लिया

 ज़ब तक ख़ामोश रहा तुमने कमज़ोर समझ लिया 

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तुम ही बता दो ना जो मेरी कमीं है 

सच को सच कहना ही क्या मेरी ग़लतफ़हमी है 

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अपने क़ातिलों को मैं अपना मददगार मान बैठा हूँ 

क़सूर किसी और का है मैं खुदको गुनहगार मान बैठा हूँ 

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उनके दरवाज़े पर मैं दिल रखकर आया हूँ

फिर भी ठुकरायेंगे वो मुझे मैं परखकर आया हूँ 

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रातें जब होतीं हैं तनहा तब ख्वाबों का सफ़र शुरू होता है 

मिट जाती हैं सब तनहाइयाँ जब यादों का शहर शुरू होता है 

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मुद्दतों से उसकी तस्वीर इस दिल में क़ैद कर रखी है 

उसकी यादें उसमें मुस्तैद कर रखी हैं

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एक लफ्ज़ भी ना सुन सकूँगा मैं उसके ख़िलाफ़ में 

मेरा क़त्ल कर भी दो तो वो माफ है 

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क्या ही कहूँ मैं इश्क़ में मेरे साथ क्या हुआ है

ग़ुमराह हुआ था ये दिल सो ये हादसा हुआ है 

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आँखें ना बयाँ कर सकी इन खामोशियों के अल्फ़ाज़ को

और तुम भी ना समझ ना समझ सके इन आँखों के राज़ को 

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तेरे साथ में गुज़रा हर पल कुछ पल की कहानी है 

उसके बाद का इंतज़ार है कुछ यूँ की जैसे पूरी ज़िंदगानी है 

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गुज़र गई ये जिंदगी इसी जद्द ओ जिहाद में

कैसे जियूँगा मैं तन्हा तेरे जाने के बाद में 

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गौर से देखो जरा इन आँखों में तुम्हें क्या नज़र आता है 

उस शख़्स की परछायी या वो शख़्स जो छोड़ कर गया है नज़र आता है 

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वक़्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहाँ तो बस ताने पेश किए जाते हैं

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देखा है मैंने यहाँ सबकी शराफ़त को

शरीफ़ों को और उनकी आदत को

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शायद ही कोई इतना बदनसीब होगा

या यूँ कहूँ कि मुझ सा अजीब होगा

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समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को

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उसके आने में ही इतनी देर हो गई

कि मेरी सारी उम्मीदें ही ढेर हो गईं

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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं

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हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ ही तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं

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बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी हैं

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है

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जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो ख़ता उसे मत दोहराने देना

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हश्र जो भी हो हमारा हमें मंज़ूर है

मगर दिल को कुछ भी ना कहना क्यूंकि वो बेक़सूर है

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आख़िर मैं भी तो हूँ इंसान, सो थक चुका हूँ

सबको दे देकर इम्तिहान मैं थक चुका हूँ

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तजुर्बा इतना है कि नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आएगा, मैं उसकी ज़रूरत पहचान लेता हूँ

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टूट गईं वो उम्मीदें जो मैंने उससे रखी थीं

उसमें वफ़ा की कमी थी, बाकी लड़की वो अच्छी थी

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आ गया हूँ इस मोड़ पर मैं वो वहम सारे छोड़ कर

हर ज़ख़्म हर ग़म मैं उसी किनारे पर छोड़ कर

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ढूँढ लो जाकर जो हमसे कोई बेहतर मिल जाएगा

हमें भी ख़ुशी होगी जो अगर मिल जाएगा

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बेवजह नहीं हूँ मैं भी, कोई बात तो मुझमें भी ख़ास होगी

मैं नहीं हूँ किसी की तलब तो क्या कभी मेरी भी तलाश होगी

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कि उजाड़ कर शहर यहाँ आशियाने बनाए जाएँगे

ये दोगली सरकार है यहाँ तो सिर्फ़ बहाने बनाए जाएँगे

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हक़ीक़त की दुनिया में कहाँ वो कदम रखते हैं

शायर तो सब सरफिरे हैं, शायरी में अपने वो वहम लिखते हैं

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हमने सबकी सूरतों का हिसाब रखा है

कि किस-किसने यहाँ सूरतों पर नक़ाब रखा है

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उसकी चाहत में मैं भी क्या-क्या यूँ ही कर गया

वो दरिया सी थी बह गई और मैं साहिल सा वहीं ठहर गया

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तलब थी हमें जिस शख़्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुज़ारा किया था

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मत पूछना मुझसे तुम कि किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है कि ये शख़्स ग़द्दार है

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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने-मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की

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ये इश्क़ भी साहब इतना आसान नहीं होता

ऐसा होता ही अगर तो ये दिल यूँ ही क़ुर्बान नहीं होता

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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए ज़माने उसको मनाने में

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यादें आज भी उसकी बरक़रार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है

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शुकून के दो पल बस तेरे साथ में गुज़र जाएँ

फिर उसके बाद चाहे ये मेरी ज़िंदगी क्यों ना उजड़ जाए

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ख़त्म हो गया वो सिलसिला उसकी ना के बाद

नहीं रहा अब मसला कोई उसकी मना के बाद

༺❦༻


उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा कि बुरे हैं हम

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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

कि देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है

༺❦༻


बेहतर ये होगा कि अब तुम फ़ासला कर लो

मेरी यादों से खुद का तबादला कर लो

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अब तलाश शुरू की है हमने सुकून की

तुमको भुलाना भी पड़े तो भुला देंगे

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ये ज़िंदगी ही है कमबख़्त जो हर रोज़ सबको सताती है

वरना मौत तो मुक़र्रर है जो एक रोज़ सबको आती है

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कितनी ख़्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूँ

इश्क़ में आख़िर में मैं हार के बैठा हूँ

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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यक़ीं, ग़लतफ़हमी रह जाती है

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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्ज़ी आप इल्ज़ाम दीजिए

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दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास, तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा

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जला आया मैं अपने ख़्वाब और उसको उसकी झूठी उम्मीदें देकर

फिर वहाँ से चला आया मैं टूटे ख़्वाब और टूटी नींदें लेकर


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने-मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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ये इश्क़ भी साहब इतना आसान नहीं होता

ऐसा होता ही अगर तो ये दिल यूँ ही क़ुर्बान नहीं होता


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए ज़माने उसको मनाने में


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यादें आज भी उसकी बरक़रार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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शुकून के दो पल बस तेरे साथ में गुज़र जाएँ

फिर उसके बाद चाहे ये मेरी ज़िंदगी क्यों ना उजड़ जाए


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ख़त्म हो गया वो सिलसिला उसकी ना के बाद

नहीं रहा अब मसला कोई उसकी मना के बाद


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उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा कि बुरे हैं हम


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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

कि देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है


༺❦༻


बेहतर ये होगा कि अब तुम फ़ासला कर लो

मेरी यादों से खुद का तबादला कर लो


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अब तलाश शुरू की है हमने सुकून की

तुमको भुलाना भी पड़े तो भुला देंगे


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ये ज़िंदगी ही है कमबख़्त जो हर रोज़ सबको सताती है

वरना मौत तो मुक़र्रर है जो एक रोज़ सबको आती है


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कितनी ख़्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूँ

इश्क़ में आख़िर में मैं हार के बैठा हूँ


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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यक़ीं, ग़लतफ़हमी रह जाती है


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्ज़ी आप इल्ज़ाम दीजिए


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दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा


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जला आया मैं अपने ख़्वाब और उसको उसकी झूठी उम्मीदें देकर

फिर वहाँ से चला आया मैं टूटे ख़्वाब और टूटी नींदें लेकर


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किसी ना किसी की कमी महसूस होगी

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमी महसूस होगी


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तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है

समझाऊँ भी कैसे दिल को, समझाना मुश्किल है


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बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ

कि तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ


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आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं

इश्क़ में अजीब सी ये बेबसी लिए बैठे हैं


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वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था


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टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे


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तू ही बता कि ये मेरे किस काम की हैं

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं


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जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का

सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके ख़यालों का


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दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है

वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है


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दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं

फिर इन साज़िशों को ये लोग प्यार कहते हैं


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मत पूछना मुझसे तुम कि किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है कि ये शख़्स ग़द्दार है


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तलब थी हमें जिस शख़्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुज़ारा किया था


༺❦༻


समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को


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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं


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जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो ख़ता उसे मत दोहराने देना


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बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी हैं

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है


༺❦༻


हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ ही तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्ज़ी आप इल्ज़ाम दीजिए


༺❦༻


तजुर्बा इतना है कि नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आएगा, मैं उसकी ज़रूरत पहचान लेता हूँ


༺❦༻


टूट गईं वो उम्मीदें जो मैंने उससे रखी थीं

उसमें वफ़ा की कमी थी, बाकी लड़की वो अच्छी थी


༺❦༻


वक़्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहाँ तो बस ताने पेश किए जाते हैं


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देखा है मैंने यहाँ सबकी शराफ़त को

शरीफ़ों को और उनकी आदत को


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कितनी ख़्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूँ

इश्क़ में आख़िर में मैं हार के बैठा हूँ


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कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यक़ीं, ग़लतफ़हमी रह जाती है


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इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

कि देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है


༺❦༻


उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा कि बुरे हैं हम


༺❦༻


यादें आज भी उसकी बरक़रार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए ज़माने उसको मनाने में


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ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फ़ासलों की दूरी है

इसलिए घबराना क्यों जब दोनों ही ज़रूरी हैं


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने-मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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सोचा था तुम्हें मेरे जज़्बातों की गहराई दिखाएँगे

दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब, तुम्हें वो जगह दिखाएँगे


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दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास, तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा


༺❦༻


टालता रहा मैं खुद के ग़म खुद को उलझन में डाल कर

मुसीबत में डाल दिया तुमने मुझे उलझन से निकाल कर


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क्यों हूँ मैं यूँ परेशान, तुम मुसीबत मेरी जानने आओगे

ये ग़लतफ़हमी थी मेरी कि तुम हाथ मेरा थामने आओगे


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इश्क़ में हम एक भरम पाले हुए थे

हमदर्दी की चाह थी और बेरहम पाले हुए थे


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गवाही देंगे ये आईने, तुम सवाल तो पूछो

तस्वीर दिखाकर तुम मेरी उनसे हाल तो पूछो


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आहिस्ता-आहिस्ता वो वहम भी दूर होते गए

तोड़ कर रिश्ते तुम और हम भी दूर होते गए


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आदत ही छोड़ दी हमने रूठने-मनाने की

क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की


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ये इश्क़ भी साहब इतना आसान नहीं होता

ऐसा होता ही अगर तो ये दिल यूँ ही क़ुर्बान नहीं होता


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वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में

गुज़र गए ज़माने उसको मनाने में


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यादें आज भी उसकी बरक़रार हैं

वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है


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शुकून के दो पल बस तेरे साथ में गुज़र जाएँ

फिर उसके बाद चाहे ये मेरी ज़िंदगी क्यों ना उजड़ जाए


༺❦༻


ख़त्म हो गया वो सिलसिला उसकी ना के बाद

नहीं रहा अब मसला कोई उसकी मना के बाद


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उसकी समझ से परे हैं हम

इसलिए उसने समझा कि बुरे हैं हम


༺❦༻


बेहतर ये होगा कि अब तुम फ़ासला कर लो

मेरी यादों से खुद का तबादला कर लो


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अब तलाश शुरू की है हमने सुकून की

तुमको भुलाना भी पड़े तो भुला देंगे


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कितनी ख़्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूँ

इश्क़ में आख़िर में मैं हार के बैठा हूँ


༺❦༻


कहीं न कहीं कमी रह जाती है

कितना भी हो यक़ीं, ग़लतफ़हमी रह जाती है


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आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए

फिर उसके बाद जो मर्ज़ी आप इल्ज़ाम दीजिए


༺❦༻


वक़्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं

वरना यहाँ तो बस ताने पेश किए जाते हैं


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देखा है मैंने यहाँ सबकी शराफ़त को

शरीफ़ों को और उनकी आदत को


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शायद ही कोई इतना बदनसीब होगा

या यूँ कहूँ कि मुझ सा अजीब होगा


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समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को

ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को


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इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं

मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं


༺❦༻


जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना

हो चुकी है जो ख़ता उसे मत दोहराने देना


༺❦༻


दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा

कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विश्वास हो जाएगा


༺❦༻


जला आया मैं अपने ख़्वाब और उसको उसकी झूठी उम्मीदें देकर

फिर वहाँ से चला आया मैं टूटे ख़्वाब और टूटी नींदें लेकर


༺❦༻


इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है

कि देकर झूठी उम्मीदें हमें तबाह किया गया है


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ये ज़िंदगी ही है कमबख़्त जो हर रोज़ सबको सताती है

वरना मौत तो मुक़र्रर है जो एक रोज़ सबको आती है


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तजुर्बा इतना है कि नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ

किस अंदाज़ से कौन पेश आएगा, मैं उसकी ज़रूरत पहचान लेता हूँ


༺❦༻


टूट गईं वो उम्मीदें जो मैंने उससे रखी थीं

उसमें वफ़ा की कमी थी, बाकी लड़की वो अच्छी थी


༺❦༻


आ गया हूँ इस मोड़ पर मैं वो वहम सारे छोड़ कर

हर ज़ख़्म हर ग़म मैं उसी किनारे पर छोड़ कर


༺❦༻


ढूँढ लो जाकर जो हमसे कोई बेहतर मिल जाएगा

हमें भी ख़ुशी होगी जो अगर मिल जाएगा


༺❦༻


बेवजह नहीं हूँ मैं भी, कोई बात तो मुझमें भी ख़ास होगी

मैं नहीं हूँ किसी की तलब तो क्या कभी मेरी भी तलाश होगी


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उसके आने में ही इतनी देर हो गई

कि मेरी सारी उम्मीदें ही ढेर हो गईं


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कि उजाड़ कर शहर यहाँ आशियाने बनाए जाएँगे

ये दोगली सरकार है यहाँ तो सिर्फ़ बहाने बनाए जाएँगे


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हक़ीक़त की दुनिया में कहाँ वो कदम रखते हैं

शायर तो सब सरफिरे हैं, शायरी में अपने वो वहम लिखते हैं


༺❦༻


हमने सबकी सूरतों का हिसाब रखा है

कि किस-किसने यहाँ सूरतों पर नक़ाब रखा है


༺❦༻


हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं

यूँ ही तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं


༺❦༻


बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी हैं

मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है


༺❦༻


हश्र जो भी हो हमारा हमें मंज़ूर है

मगर दिल को कुछ भी ना कहना क्यूंकि वो बेक़सूर है


༺❦༻


आख़िर मैं भी तो हूँ इंसान, सो थक चुका हूँ

सबको दे देकर इम्तिहान मैं थक चुका हूँ


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उसकी चाहत में मैं भी क्या-क्या यूँ ही कर गया

वो दरिया सी थी बह गई और मैं साहिल सा वहीं ठहर गया


༺❦༻


तलब थी हमें जिस शख़्स की उसी ने हमसे किनारा किया था

सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुज़ारा किया था


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मत पूछना मुझसे तुम कि किसका यहाँ कैसा किरदार है

क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है कि ये शख़्स ग़द्दार है


༺❦༻


फ़ितरत ही नहीं है हमारी किसी को ज़बरदस्ती जकड़ कर रखने की 

बहला फुसला कर रिश्तों की हथकड़ियों में पकड़ कर रखने की 

༺❦༻


भुलना तो नहीं चाहिए मग़र तुम वो बात भूल रहे हो 

खायी थी जो क़समों की वो सौग़ात भूल रहे हो 

༺❦༻


हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है 

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है 

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क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है 

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है 

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दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये 

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए 

༺❦༻


चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर 

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर 

༺❦༻


पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है 

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है 

༺❦༻


मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का 

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का 

༺❦༻


अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे 

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे 

༺❦༻


भुला कर रंजिशें तमाम हम काम पर चल दिए 

मिलता है जहाँ दो पल का सुकून हम उस मुकाम पर चल दिए 

༺❦༻


थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल 

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल 

༺❦༻


झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं 

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं 

༺❦༻


तूफ़ानों में बुझते चिराग़ों को ढूँडते रहे 

हम भी हम जैसे अभागों को ढूँडते रहे 

༺❦༻


उम्र गुज़र गई हर शख़्स में एक ही किरदार ढूँडते ढूँडते 

होनहार समझदार और हर शख़्स में कोई एक खुद्दार ढूँडते ढूँडते 

༺❦༻


किसी ना किसी की कमी महसूस होगी 

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी 

༺❦༻


सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है 

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है 

༺❦༻


बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ 

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ 

༺❦༻


नहीं है आसान इस दिल को समझना 

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना 

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टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे 

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे 

༺❦༻


आँखें जब भी उससे मिलीं वो घबरा रही थी 

कोई बात तो थी जो वो मुझसे कतरा रही थी 

༺❦༻


तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है 

समझाऊँ भी कैसे दिल को,समझाना मुश्किल है 

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वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था 

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था 

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बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ 

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ 

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कर चुका हूँ तय की अब उससे प्यार में ख़िलाफ़त होगी 

बहुत हो चुकी उससे मोहब्बत इस बार तो  उससे बग़ावत होगी 

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चल तेरे साथ इस गुनाह में मैं भी हिस्सेदार हो जाता हूँ 

इकलौता तू ना बन गुनहगार तेरे साथ मैं भी साँझेदार हो जाता हूँ

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मंज़ूर नहीं जो तुम्हें मौज़ूदगी हमारी तो तुमसे हम दूर चले जाएँगे 

मर्जी अगर यही है तुम्हारी तेरी तो हम ज़रूर चले जायेंगे

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लम्हें जो संभाल कर रखे थे वो तो फ़िज़ूल में उजड़ गए 

सहजते सहजते उसकी यादों की भूल में गुज़र गए 

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कर ले क़ैद तू मुझको तेरी निगाहों में 

चाहिए उम्रक़ैद मुझको तेरी बाहों में 

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उसकी ख़ातिर मैंने इतना सब किया 

वो ही अब पूछती है की इतना कब किया 

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तेरी यादों ने मुझे कमज़ोर कर रखा है 

उलझा कर तेरे झाँसों में मुझे झकझोर कर रखा है 

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शहर में यूँ तो कितने विद्वान पड़े हैं 

उसके बावजूद भी शहर के विद्यालय यूँ ही बेजान पड़े हैं 

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क़ैसे कहूँ की अंधविश्वास में हूँ 

वो किसी और का हो चुका हूँ मैं जिसकी तलाश में हूँ 

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शौकीन तो बेशक नहीं वो आदत से मजबूर ही होगा 

जिसने भी क़त्ल किया है मेरे जज़्बातों का वो बेकसूर ही होगा 

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ढूँड़ता रहा मैं लाखों में जिसे तुम्हीं तो वो शख़्स हो 

देखता हूँ मैं हर रोज़ जिसे आईने में तुम्ही तो वो अक्स हो 

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हाल-ए-दिल मैं तुमसे क्या कहूँ 

तुम समझोगे ही नहीं तो क्या बयाँ करूँ 

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सतरंज है ये जमाना यहाँ रिश्तों में भी चाल चली जायेंगी 

आज़मा कर देखना कभी बेमिशाल चली जायेंगी 

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मत दो ये इल्ज़ाम तुम उसे की मेरे जज्बातों की क़ातिल है 

मज़बूरी उसकी भी कोई है जो इस गुनाह में वो शामिल है 

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आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं 

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चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके 

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके 

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ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 

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पलट कर भी ना देखा उसने वो इस तरह बदल गई 

उस रात वो ख़्वाब में आई मगर अगली सुबह वो बदल गई 

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हम ही ना समझ सके की वो जिंदगी के मायने सिखाती गई 

हर ठोकर हमें जिंदगी की जिंदगी के आईने दिखाती गई 

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कर लिए फ़ासले उसने और अपनी राह ही बदल ली 

ठुकरा की मेरी दहलीज़ उसने तो पनाह भी बदल ली 

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बनते बनते बात बिगड़ने लगी थी 

और फिर तो ऐसा हुआ बिन बात वो लड़ने लगी थी 

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झूठे हैं वो सारे सबूत जानते थे 

तेरी मासूमियत के पीछे में छुपी लोग करतूत जानते थे 

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सच नहीं था मगर सच जैसा लग रहा था 

इतना यकीन था जिसको उसको कैसा लग रहा था 

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नहीं कर सकता इसमें समझौता मैं किसी से 

तुम मेरे हो हर जन्म के लिए

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भटक रहे हैं अब तो हम उसकी यादों में लावारिश हो कर 

समेटकर अपने जज़्बात अपनी हर ख़्वाहिश खोकर 

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एक शख़्स को समझने में जरा सी देर हो गई

यही वजह है जो मेरे जज्बातों के साथ हेर फेर हो गई 

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आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर

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उम्मीदें तो मेरी तुमसे ज़्यादा हैं 

तुम भी बताओ ना क्या इरादा है 

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आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर

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उसकी सहमति और उससे सहानुभूति चाहता हूँ

प्रेम का अंदेशा तो नहीं है उससे मगर उसी से ये अनुभूति चाहता हूँ 

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ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ 

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ऐसा है तो क्या तुम एक सवाल पूछ लोगे

आँखों से मिलाकर  आँखें मेरा तुम हाल पूछ लोगे 

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एक ही कहानी में दो किरदार निभाया हूँ

नफ़रत भी उसी से की मैं जिससे प्यार निभाया हूँ 

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किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया 

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया 

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मत पूछो तुम मेरी गहराई की कितना अंदर हूँ मैं 

खामोशियों में ठहरा हुआ समंदर हूँ मैं

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उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ 

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ 

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मायूसियों के दलदल में मैं  खुशियाँ तलाश कर रहा था 

हासिल कुछ भी ना हुआ फिर भी मैं प्रयास कर रहा था 

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हादसा एक ऐसा हुआ कि मैं संभल न सका

लोग तो बदल गए मगर खुदको मैं बदल न सका 

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क़ातिल ही था हमदर्द मैं जता नहीं पाऊँगा 

मत पूछो तुम मेरा दर्द मैं बता नहीं पाऊँगा 

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बस इतनी ही समझ है 

सबको अपना समझ लेते हैं 


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करनी थी जितनी बेरहमी और जितना सताना था वो सता चुका है 

नहीं होगा ऐ दिल अब सितम जो था बेरहम वो जा चुका है 

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नहीं है जो हमदर्दी ही दिल में तो इन दावों का क्या करूँगा 

अहमियत ही ना हो इश्क़ में तो दिखावों का क्या करूँगा

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हर लम्हा हसीन है यहाँ इसे तुम हंस के गुजार दो 

न की उलझी हुई इस जिंदगी की तुम कश्मकश में गुजार दो 

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जमानत ना दो मुझे सलाखों में रहना है 

मेरी तो दुनिया है वहाँ मुझे उसकी आँखों में रहना है 

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ज़िस्म के निहायती तलबग़ार ही होते हैं 

इश्क़ में भी तो यार ख़रीददार ही होते हैं 

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ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये 

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये 

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तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था 

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था 

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कतरा जो अश्क का बह गया है 

तुम समझे नहीं ये क्या कुछ कह गया है 

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कल तो टाला आज भी रहने दिया 

और इस तरह वो राज राज ही रहने दिया 


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