शायराना अंदाज़

|| कागज़ के जज़्बात || इश्क़ में शिकस्त कोई खाया हुआ हो या यूँ समझो की इश्क़ में कोई सताया हुआ हो क्या उसका कोई वजूद नहीं जो इश्क़ में ठुकराया हुआ हो ༺❦༻ उससे बिछड़ने की कोई ख़ास वजह नहीं थी ख़ुद मैं ही लौट आया हूँ उसके दिल से जो उतनी वहाँ पर जगह नहीं थी ༺❦༻ आ गए हम भी इश्क़ में हार कर कर्ज़ उनकी ख्वाहिशों का उतार कर अपने ही हाथों से अपने ख्वाब उजाड़ कर ༺❦༻ कितनी सिफ़ारिश की थी तब उसने बारिश की थी कैसे कहूँ कि हमदर्द है वो खुदा जिसने मेरे ख़िलाफ़ इतनी साज़िश की थी ༺❦༻ पूरा शहर ही तेरे नाम हो चुका है किससे करूँ मैं शिकायत तेरी ये शहर जो तेरा ग़ुलाम हो चुका है ༺❦༻ लाख नाराज़गी है उसको मुझसे फिर भी वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है ढूँढ सको तो ढूँढ लेना उसे ༺❦༻ हर पल मुझे तेरी कमी महसूस हो रही है यही वो वजह है जो आँखों में नमी महसूस हो रही है सहमी हुई हैं ये धड़कनें और ये साँसें मायूस हो रही हैं ༺❦༻ दिल में बेहद ग़म भरे हुए हैं हाल-ए-दिल बताने से डरता हूँ मैं जो ज़माने में बेहद बेरहम भरे हुए हैं ༺❦༻ आँखों में आँखें डाल कर मैंने पूछा था उससे बता क्या है… हर बात पर मेरी यूँ खामोश है क्यों मुझे...