अधूरी कहानी 😕🥲✍️
कतरा जो अश्क का बह गया है तुम समझे नहीं ये क्या कुछ कह गया है तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये ज़िस्म के निहायती तलबग़ार ही होते हैं इश्क़ में भी तो यार ख़रीददार ही होते हैं जमानत ना दो मुझे सलाखों में रहना है मेरी तो दुनिया है वहाँ मुझे उसकी आँखों में रहना है हर लम्हा हसीन है यहाँ इसे तुम हंस के गुजार दो न की उलझी हुई इस जिंदगी की तुम कश्मकश में गुजार दो नहीं है जो हमदर्दी ही दिल में तो इन दावों का क्या करूँगा अहमियत ही ना हो इश्क़ में तो दिखावों का क्या करूँगा करनी थी जितनी बेरहमी और जितना सताना था वो सता चुका है नहीं होगा ऐ दिल अब सितम जो था बेरहम वो जा चुका है बस इतनी ही समझ है सबको अपना समझ लेते हैं क़ातिल ही था हमदर्द मैं जता नहीं पाऊँगा मत पूछो तुम मेरा दर्द मैं बता नहीं पाऊँगा इश्क़ में हमदर्दियों के दिखावे चलते रहते हैं वफ़ाएँ...