" क्या हूँ मैं और कैसा हूँ मैं आखिर ये तहकीकात क्यों करनी है... "

4 Liner


कौन पूछता है हम जैसे पागलों को

ये दुनिया तो समझदारों की है

वफ़ाओं की अहमियत ही कहाँ

ये दुनिया तो गद्दारों की है

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हाँ दिखावे की मोहब्बत में एहसास नहीं होता

मिलती है ऐसी बेवफ़ाई की विश्वास नहीं होता

हर किसी से नहीं होती है सच्ची मोहब्बत

जो हर कोई यहाँ इतना ख़ास नहीं होता

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खामोशियाँ तुम समझ सको इतने तुम समझदार नहीं हो

इस निस्बत से तुम इस दिल के हक़दार नहीं हो

बेशक करो तुम ये दावे दिखावे मगर तुम वो यार नहीं हो

मेरी रूह से रूबरू हो सको कभी तुम इतने वफादार नहीं हो

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क्या कहती हैं ये ख़ामोशियाँ, हर लब तुम जानते हो

तुमसे क्या छुपाना यार, मेरा सब तुम जानते हो

मेरे हर एक लफ़्ज़ का मतलब तुम जानते हो

क्या है मेरी तलब, मेरा सुकून-ओ-सबब तुम जानते हो

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धोखाधड़ी नहीं चलती यहाँ जज्बातों को समझा जाता है

क्या कुछ कहती हैं खामोशियाँ यहाँ इनकी बातों को समझा जाता है

समझ बैठे हो इश्क़ को जालसाझी तुम

मगर यहाँ दिल के हालातों को समझा जाता है

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इस बार भी मैं हार नहीं मानूँगा

ऐ वक्त तुझे मैं क़सूरवार नहीं मानूँगा

कितना भी हो जाऊँ मैं तार तार

खुदको मैं बेकार नहीं मानूँगा

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जितनी उम्मीद थी तुमसे

तुमने तो उतना समझा ही नहीं

वहम था मैं सिर्फ़ तुम्हारा हूँ

तुमने तो अपना समझा ही नहीं

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किस कदर हुआ है मलाल ना पूछिए

इन आँखों से इनका हाल ना पूछिए

उसने जो बिछाया था जाल ना पूछिए

मेहरबानी करके उससे जुड़ा कोई सवाल ना पूछिए

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सारी बातें उसकी फ़िज़ूल थी

मगर फिर भी वो मुझे क़बूल थी

वफ़ायें भी मुक़म्मल ना हो सकीं वो नामाकूल थी

उससे दिल लगाना ही मेरी भूल थी

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मैं ही हूँ वो जिसमें इतनी कमी रहती है

शक से भरा हूँ मैं और ग़लतफ़हमी रहती है

नहीं हूँ महफ़ूज़ मैं तो खुदके साथ ही

हर कदम पर ये साँसें सहमी रहती हैं

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नहीं होगा तुम्हें महसूस

क्यों ये दिल मायूस हो गया है

ठुकरा कर बैठा हूँ मैं इसे जो

ये दिल तुम्हारा जासूस हो गया है

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बातें बताना नहीं आता इसलिए बोलता भी नहीं हूँ

मेरी खामोशियों के भेद अब बेवजह मैं खोलता भी नहीं हूँ

तुम ही रखो निगाहों में तराज़ू अपने

मैं किसी का नज़रिया निगाहों में तोलता ही नहीं हूँ

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नहीं रही अब कोई ग़लतफ़हमी

जो उसका अब प्यार समझ आ चुका है

करती तो थी वो हाँ

मगर उसका वो था इनकार अब समझ आ चुका है

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खता हो गई ये मुझसे अनजाने में

तोड़ बैठा हूँ मैं दिल तुझको मनाने में

वक़्त लगेगा ये सब समझाने में

दिल के दर्द तुझको दिखाने में

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अभिमान अहंकार से परे कहीं

प्रेम की अपार अनुभूति होनी चाहिए

इंसान हो अगर तो इंसानियत के

आधार पर सहानुभूति होनी चाहिए

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लिखता हूँ मैं चंद अल्फ़ाज़ों को जोड़ कर

दिल की गहराइयों से अपने जज्बातों को निचोड़ कर

मत समझना इसे तुम शायरी जो मैंने लिख दी है तोड़ मोड़ कर

हर अक्षर वो रातें हैं जो लिखता हूँ नींदें तोड़ कर

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मासूम है मेरा दिल जो वीरान रहता है

शातिर है तेरा दिल जहाँ चहलक़दमी रहती है

कितने के दिल टूटते हैं तेरे इश्क़ में

और कितनों को तेरे इश्क़ में ग़लतफ़हमीं रहती हैं

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ये आँखें उसका इंतज़ार कर रहीं थीं

उसी का ये ज़िक्र हर बार कर रहीं थीं

वो तो मुकर गया अपने वादों से

जिसके वादों पर ये कम्बख़्त एतबार कर रहीं थीं

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तुम आँखों से बताया करो

नाराज़गी हो भी अगर तो इशारों में जताया करो

नहीं लगता ये दिल तुमसे दूर होकर

कितनी भी हो तुम ख़फ़ा यूँ छोड़कर ना जाया करो

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कितनी भी कर लो जासूसी

मगर तुम समझ नहीं पाओगे

कितनी है मायूसी मेरी ख़ामोसी में

तुम समझ नहीं पाओगे

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देर से ही सही एक रोज़ तुम आओगे

अपनी उस ख़ता पर एक रोज़ तुम पछताओगे

ढूँढ़ लो चाहे कहीं भी कोई भी ठिकाना

पर देखना तुम आशियाना तो इस दिल में ही बनाओगे

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एक अधूरी सी आस अभी भी बाक़ी है

उसकी यादें, उसके अहसास अभी भी बाक़ी हैं

मौजूद है वो मेरे अक्स में

जब तलक मेरे सीने में साँस कहीं बाक़ी है

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उसकी नफ़रत कैसी होनी चाहिए

या फिर उसका प्यार कैसा होना चाहिए

तुम्हारी समझ से बताओ कि

हर शख़्स का किरदार कैसा होना चाहिए

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उसको देखकर हैरानी होती है

कि यार ऐसा कैसे हो सकता है

अरसों बाद मिला वो अजनबी

हम जैसा कैसे हो सकता है

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ये तय था कि फ़ासला ही मुकम्मल होगा

लेकिन ये फ़ैसला तय नहीं था

कि आज होगा या कल होगा

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तुम जैसा कोई और नहीं

हम जैसे मालूम हैं बहुत हैं

उनसे नहीं होती है जालसाज़ी

हम जैसे मासूम बहुत हैं

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मत करना मेरा इंतज़ार तुम

मैं आ नहीं सकूँगा

कैसी उलझन में फँसा हूँ

मैं आकर समझा नहीं सकूँगा

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लफ़्ज़ ख़ामोश रह गए, वो अल्फ़ाज़ न बन सके

लाख कोशिशों के बावजूद वो मेरी आवाज़ न बन सके

कैसे करते हम बयाँ हाल-ए-दिल उनसे

जिनको भी अपनाया वो मेरे हमराज़ न बन सके

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अजीब था मैं जो उसमें कहीं मेरा किरदार ढूँढ़ रहा था

बेतुक़ी सी एक कहानी का मैं सार ढूँढ़ रहा था

उसकी आँखों में तो नफ़रत ही नफ़रत भरी थी

जिसकी आँखों में कहीं मैं प्यार ढूँढ़ रहा था

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झूठी तसल्ली ना देना हमें

बेशक तुम चाहो तो मार देना

खंजर चलाना तुम सीने में अगर

तो नक़ाब ये हमदर्दियों का तुम उतार देना

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दिल के करीब है वो अगर तो उसे जाने मत दो

जाना ही चाहता है अगर वो तो उसे अब बहाने मत दो

ये दिल तुम्हारी अमानत है इसे महफ़ूज़ रखो तुम

उसे सताने मत दो

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इतंज़ार कर रहा था मैं तो बस तुम्हारे जवाब का

तोड़ कर क़बसे बैठा हूँ मैं वो हिस्सा मेरे गुलाब का

तुम उलझी पड़ी हो किसी के ख़यालों में

मुझे भी भूलना है हर क़िस्सा उस ख़्वाब का

༺❦༻


बहुत कुछ बचा है अभी भी जो तुझको कभी बताना था

बातें वो जो तू कभी समझी नहीं वो भी तुझको समझाना था

लक़ीरों में ना थी, ना ही तक़दीरों में तू मिली

कह भी ना सका तुझे कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था

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वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ

फिर भी ना जाने किस बात पर मैं इतराता रहता हूँ

मुद्दतों से मुद्दा वो खामोशियों में दफ़्न था

जिसकी दास्ताँ मैं सभी को बतलाता रहता हूँ

༺❦༻


ज़िन्दगी ये मेरी अभी उदास चल रही है

धड़कनों से ख़फ़ा ये मेरी साँस चल रही है

नहीं रहा मैं अब मुझमें मौजूद कहीं

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है

༺❦༻


विश्वास ही टूटा हो जहाँ

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं

और आँखें ही रूठीं हों ख्वाबों से अगर

तो नींदें भी क्या कर सकती हैं

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कोई आयेगा और ख़्वाब दे जाएगा

मुझे मालूम है वो अपनी यादों की किताब दे जायेगा

छीन कर सुकून वो बेचैनी बेहिसाब दे जाएगा

झूठे झाँसे झूठे दिलासे और इसी फरेब में वो गुलाब दे जाएगा

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ज़ब तलक न मिला कोई उन्हें वो मुझसे हाल पूछते रहे

कैसे हो तुम मुझसे ये सवाल पूछते रहे

उम्मीदें टूटती रहीं वो मिसाल पूछते रहे

आँखों मायुषी और ये दिल क्यों है वो बेहाल पूछते रहे

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तेरी चाहत है मुझे इस जमाने की चाह नहीं है

क्या कहेगा कोई इसकी मुझको परवाह नहीं हैं

तेरे सजदे को है ये नज़र और किसी पर मेरी निगाह नहीं है

सौंप रखी है तुझको मैंने ये जिंदगी यूँ तो ये बेवजह नहीं है

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आँखों में अधूरी सी आस लिए हुए हूँ

ख़ुद समंदर होकर मैं प्यास लिए हुए हूँ

ख़ुद ही क़ातिल हूँ मैं अपनी ख्वाहिशों का

क़त्ल करके मैं पास में लाश लिए हुए हूँ

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कैसे करूँ बयाँ मैं वो शब्द

जो मेरे दिल में अधूरे रह गए

पसंद आ गया उसको ये सारा जमाना

एक हम ही उसकी ख़ातिर बुरे रह गए

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बदल गए हैं सब किरदार

और अब कहानी भी बदल गई है

नहीं रहे अब वो राजा और

अब रानी भी बदल गई है

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किस हिसाब का है ये जमाना इस बार

उसको हमने आजमाने दिया

उससे ना वफ़ा हुई ना प्यार

सो इस बार उसको हमने जाने दिया


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एक दफ़ा नहीं, जाने कितनी दफ़ा

हमने उसको सब कुछ दोहराने दिया

उससे ना वफ़ा हुई ना ही प्यार

फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया


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हमारे जज़्बातों की जहाँ हिफ़ाज़त नहीं है

ऐसी महफ़िलों की हमको चाहत नहीं है

मुंह फेर कर हम भीड़ से अक्सर तनहा चलते हैं

क्यूँकि भीड़ में हमें चलने की आदत नहीं है

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चल दिए ठुकराकर तुम हमें

एक दफ़ा तुम्हें ठहरना चाहिए था

किस हालत में था मेरा दिल

हाल-ए-दिल मेरा तुम्हें समझना चाहिए था

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नहीं करनी मुझे किसी से बराबरी

मैं सबसे पीछे ही रह लूँगा

मुबारक हो आपको आपकी ऊँचाई

मेरा क्या है, मैं सबसे नीचे भी रह लूँगा

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गुमराह रही है ये ज़िंदगी

क्योंकि मैं झाँसों में जीता रहा

तोड़ गए जो यक़ीन, मैं उन्हीं के

दिलासों में जीता रहा

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कोई तो ऐसा भी होगा जिसे हम पसंद आयेंगे

हमारे लहजे और हमारे हर ग़म पसंद आयेंगे

परहेज ना होगा जिसे हमारे किरदार से

कितने भी हों हम बेशर्म, उसे पसंद आयेंगे

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नहीं है कोई तुम जैसा हसीन

तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा

क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का

या हम जैसा कोई बदनसीब होगा

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मत पूछो इश्क़ की तुम

मैं भी वहाँ से होकर आया हूँ

लूट गए मेरे ख़्वाब सभी

और खाकर वहाँ से ठोकर आया हूँ

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मत पूछ मुझसे पहेलियों में

जो भी कहना है तुझे, तू वो साफ़ साफ़ कह दे

जरूरी नहीं हर बात मेरे ही हक़ की हो

तुझे जो कहना है मेरे ख़िलाफ़ तो कह दे

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आँखें पढ़ कर देखिए कभी

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे

ना हो सके जो खामोशियों में बयाँ

वो दिल के अल्फ़ाज़ मालूम हो जाएँगे

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लाख नारज़गी है उसको मुझसे

मगर वह इन सब के बावजूद रहती है

ढूंड सको तो ढूँड लेना तुम उसे

वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है

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तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं ही शामिल नहीं हूँ

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खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं

यादों की ये आवाज लिए ठहरे होते हैं

पाबंदियाँ होतीं हैं खामोशियों में कि कुछ भी बयाँ ना हो सके जुबान से

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं

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मुरझाना ही था उसे आख़िर में

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया

हाथ में सबक़े छुरे थे यहाँ

लिहाज़ा सबसे मिलना ही छोड़ दिया

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कहने दो ना मुझे जो उसको पैग़ाम कहना है

अरसों से दिल में क़ैद हैं जो वो बातें उससे तमाम कहना है

नहीं हो सकेंगी बयाँ मुझसे मेरी ये ख़ामोशियाँ

सो इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है

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उनकी याद आती रहती है

उनसे मिलने की इस दिल से फ़रियाद आती रहती है

क्या थी कमी हम में जो छोड़ गए वो हमें

हर ख़बर हमें उनकी उनके बाद आती रहती है

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मेरी बातों को, मुलाक़ातों को ऐसे भुलाना नहीं था

तुम्हें जाना ही था अगर तो ऐसे जाना नहीं था

क्यूंकि तुम ही तो थे मंजिल मेरी मेरा

तुम्हारे सिवा कोई और ठिकाना नहीं था

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नहीं चाहिए मुझे दस्तावेज़ लिखत में

मैं तो तुम्हारी आँखों से जवाब माँगूँगा

नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी भी

मैं तो मेरे उजड़े हुए उन ख़्वाबों का हिसाब माँगूँगा

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कैसे होतीं इश्क़ में उससे नज़दीकियाँ

वो तो ख़ुद ही हमसे दूरियाँ बनाए बैठा था

कैसे मनाता मैं भला उसे

वो जो बेवजह ही मुँह फुलाए बैठा था

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आज़माता रहा वो मुझे

और मैं भी इम्तिहान देता रहा

उसकी चंद ख़्वाहिशों की ख़ातिर

मैं खुद की जान देता रहा

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दिल ने कहा चल जाने दे

जो छोड़ गए वो बेगाने थे

वफ़ा नहीं थी दिल में उनके

नीयत में साफ़ बहाने थे

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पूछने दो मुझसे हाल-ए-दिल मेरा

कई और नहीं अब ये हक़ अदा करने को

ख़ुद ही मलाल, ख़ुद ही सवाल

कोई और नहीं यहाँ अब शक अदा करने को

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भारत तो झूठे झाँसों का देश है

झूठी उम्मीदें, झूठे दिलासों का देश है

उन्नति के नाम पर बस वहम है यहाँ

ये देश महज़ खेल-तमाशों का देश है

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एहसानमंद समझ लो या ख़ुदगर्ज़ी समझ लो

ख़ुद्दार समझ लो या फ़र्ज़ी समझ लो

कोई एतराज़ नहीं मुझको तुम्हारे समझने से

जैसा समझ आए तुम्हारी मर्ज़ी समझ लो

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कभी फ़ुरसत मिले तो तुम मेरा एक काम कर देना

नहीं बिक रहा है, तुम मेरा ये ग़म नीलाम कर देना

लौटा दूँगा मैं तुमको तुम्हारी मोहब्बत भी

बस मेरा दिल तुम मेरे नाम कर देना

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ना हो सकीं बयाँ खामोशियाँ

वो राज़, राज़ ही रहे

नहीं समझ सके तुम जज़्बात इनमें

ये अल्फ़ाज़, अल्फ़ाज़ ही रहे

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एक शख़्स पर ख़ुद को फ़ना कर बैठा था

उसकी बग़ैर मर्ज़ी मैं इश्क़ बेपनाह कर बैठा था

कायदे से कहूँ तो मैं गुनाह कर बैठा था

जो बेवजह ही इश्क़ मैं इस तरह कर बैठा था

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ख़ुराफ़ातें हैं मेरी ख़ामोशियों की

जो आज अल्फ़ाज़ों में उतर आई हैं

ज़्यादा मत करना गौर तुम

इन लफ़्ज़ों में गहरी सी खाई है

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महफ़ूज़ हैं हम अकेले ही

ये इश्क़ का चस्का मत लगाओ

बाक़ी बातें तो बाद में

यूँ हर बात में मस्का मत लगाओ

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ये आख़िरी बार मैं पुकार रहा हूँ

ऐ ज़िंदगी, मैं हार रहा हूँ

नहीं चाहिए मुझे ये बोझ अब और

मैं अपनी ख़्वाहिशें भी मार रहा हूँ

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चाहत थी जिसे पाने की, मिला वही नहीं था

सच कहूँ तो मेरा मुक़द्दर सही नहीं था

ढूँढ़ने पर मिल जाते हैं भगवान, एक कहावत है

मैंने भी ढूँढ़ा मगर वो कहीं नहीं था

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पूछते ही नहीं हो तुम और मैं बताता भी नहीं हूँ

टुकड़ों में बिखर रहा हूँ मैं मगर जताता नहीं हूँ

बेरुख़ी नहीं है मेरी, ना ही कोई ख़फ़ा नाराज़गी तुमसे

बस चाहत इतनी है कि तुम्हें सताता नहीं हूँ

༺❦༻


फिर एक भूल हम इस बार कर बैठे हैं

बेफ़िज़ूल में हम जो तुमसे प्यार कर बैठे हैं

नहीं हो सकती अब इसमें कोई रियायत

इश्क़ में जो हम इकरार कर बैठे हैं

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हमने ही की थी गुस्ताख़ी इश्क़ की

सो उसके जो भी हों इल्ज़ाम वो तुम मेरे नाम कर देना

क़ुसूर नहीं था इसमें उसका कोई

सो उसके बदले मुझे तुम बदनाम कर देना

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बदल गए हैं सब किरदार

और अब कहानी भी बदल गई है

नहीं रहे अब वो राजा…

अब रानी भी बदल गई है

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चुभती है खामोशी…

और साये भी चुभने लगे हैं

हालात ऐसे हैं कि…

अपने तो अपने… पराये भी चुभने लगे हैं

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हमारे जज़्बातों की जहाँ हिफ़ाज़त नहीं

ऐसी महफ़िलों की हमें चाहत नहीं

भीड़ में भी अक्सर तनहा चलते हैं हम

क्योंकि भीड़ में चलने की आदत नहीं

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उसकी गली से निकलकर आया हूँ मैं

यकीन करो… चाँद से मिलकर आया हूँ

उसकी यादों में संजोए हैं मैंने ख़्वाब

उसकी ख़ातिर ख्वाहिशें सिलकर लाया हूँ

༺❦༻


सहेज़ कर उसकी यादें… उसके एहसास लिखता हूँ

किस क़दर है वो ख़ास… हर बार लिखता हूँ

उसके नाम से है धड़कन… उसी से हर साँस

बेरुख़ी भी उसकी… और उसी की तलाश लिखता हूँ

༺❦༻


किसी की ख़ातिर सवाल हूँ मैं

किसी के लिए कमाल हूँ मैं

फ़रेब हूँ किसी की नज़र का

तो किसी के लिए इस्तक़बाल हूँ मैं

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मत झांको मेरी आँखों में तुम मेरे हालात नहीं पढ़ पाओगे

इन आँखों की गहराई में जो दफ़्न हैं वो जज़्बात नहीं पढ़ पाओगे

मत ढूँड़ो तुम मेरे दिल की बात नहीं पढ़ पाओगे

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एक दफ़ा हमसे भी ये गुनाह हुआ था

जाने अनजाने में किसी से इश्क़ बेपनाह हुआ था

नहीं रही अब उसकी ख्वाहिश इस दिल में

ये दिल जिसके इश्क़ में कभी तबाह हुआ था

༺❦༻


इश्क़ में इश्क़ का दावा करते हैं

जज्बातों से अक्सर ये छलावा करते हैं

वफ़ायें तो इनसे होती नहीं

ये वफ़ाओं का महज़ दिखावा करते हैं

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तुम्हें चाहूँगा तो इस क़दर चाहूँगा

की छोड़ मैं इस जमाने की फ़िकर चाहूँगा

सौंप कर ये ज़िंदगी तुझको सदक़े में

मेरा वादा है तुझको उम्र भर चाहूँगा

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आँखों में अश्क़ होना ज़रूरी नहीं

हर शख़्स को रोना ज़रूरी नहीं

साफ़ हो जाती है नज़र… दिल भी साफ़ हो जाता है

तो कभी-कभी आँखें भिगोना भी ज़रूरी है

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उनकी याद आती रहती है

उनसे मिलने की इस दिल से फ़रियाद आती रहती है

क्या थी कमी हम में… जो छोड़ गए वो हमें

हर ख़बर हमें उनकी… उनके बाद आती रहती है

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टूट गईं हैं नींदें तो क्या

नींदें तो टूटती रहती हैं

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या

उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं

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मुरझाना ही था उसे आख़िर में

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया

हाथ में सबके छुरे थे यहाँ

लिहाज़ा सबसे मिलना छोड़ दिया

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कहने दो ना मुझे जो पैग़ाम कहना है

दिल में क़ैद जो बातें हैं… सब तमाम कहना है

बयाँ नहीं हो सकतीं ये ख़ामोशियाँ

इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है

༺❦༻


समझा न पाया मैं… या तुम ही समझ न पाये

तुम ही मेरे साये की तरह थे

अपनाता रहा तुम्हें हर अक्स में

और तुम पराये की तरह रहे

༺❦༻


एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं

ख्वाहिशें तेरे पास… उम्मीदों भरी निगाहें लेकर

तेरी यादें, तेरे एहसास साथ लेकर

आया था तेरे पास… अपनी साँस लेकर

༺❦༻


कभी एक संकल्प थी तुम मेरी

अब सिर्फ़ एक कल्पना हो तुम

ठुकरा चुका हूँ तेरी सारी लावारिस यादों को

मेरी खातिर अब बस एक सपना हो तुम

༺❦༻


बहुत कुछ बचा है अभी भी… जो तुझको कभी बताना था

बातें वो… जो तू कभी समझी नहीं, तुझको समझाना था

लकीरों में ना थी… ना ही तक़दीरों में तू मिली

कह भी ना सका… कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था

༺❦༻


वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ

फिर भी ना जाने किस बात पर इतराता रहता हूँ

मुद्दतों से दफ़्न था वो खामोशियों में

जिसकी दास्ताँ मैं सबको सुनाता रहता हूँ

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ज़िन्दगी मेरी अभी उदास चल रही है

धड़कनों से ख़फ़ा ये साँस चल रही है

नहीं रहा मैं अब मुझमें कहीं मौजूद

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है

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विश्वास ही टूटा हो जहाँ…

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं

आँखें ही रूठ जाएँ ख्वाबों से अगर

तो नींदें भी क्या कर सकती हैं

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ग़ैरों की अमानत थी वो दो पल की ख़ुशी

आख़िरकार उसे मोड़ कर आना था

और वो यादें भी… जो साथ थीं

उन्हें भी छोड़ कर आना था

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तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ

तू माने ना माने… मगर मैं तेरा हूँ

तू चाँदनी है अगर उस चाँद की

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ

༺❦༻


नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ

सो हमने तो हार मान ली

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर

हमारी निगाहें भी क़ुसूरवार मान ली

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किसी और जहाँ की है वो…

उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं

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तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं शामिल नहीं हूँ

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खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं

यादों की आवाज़ लिए ठहरे होते हैं

पाबंदियाँ होती हैं खामोशियों में…

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं

༺❦༻


उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखते हैं

उसकी यादें उसकी बातें… सुबह शाम लिखते हैं

इक वो है जिसे मेरे ख्याल तक नहीं आते

इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुद को उसके नाम लिखते हैं

༺❦༻


दूर होकर हमारी यादों से

सच बताओ क्या गुज़ारा मुमकिन है

हम भी कर लेंगे बसर

जो अगर तुम्हारा मुमकिन है

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इश्क़ में दर-बदर से हम ठुकराए हुए हैं

यही वजह है जो इश्क़ से हम घबराए हुए हैं

मुकम्मल नहीं होतीं यहाँ दुआएँ साहब

खाली हाथ ही हर दफ़ा वहाँ से आए हुए हैं

༺❦༻


मिल जाऊँगा किसी मोड़ पर

मैं इसी आस में रहता हूँ

खुदसे ही क्यों हैं इतने फ़ासले

जबकि मैं खुदके पास रहता हूँ

༺❦༻


तकलीफ़ बस इस बात की है

अब वो मुझे पहचानता नहीं है

ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ

वो कहता है की मुझको जानता नहीं है

༺❦༻


नहीं है कोई तुम जैसा हसीन

तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा

क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का

या हम जैसा कोई बदनसीब होगा

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मत पूछो इश्क़ की तुम…

मैं भी वहाँ से होकर आया हूँ

लूट गए मेरे ख़्वाब सभी

और ठोकर खाकर आया हूँ

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मत पूछ मुझसे पहेलियों में

जो कहना है साफ़ साफ़ कह दे न

जरूरी नहीं हर बात मेरे हक़ में हो

मेरे खिलाफ़ भी कहना है तो कह दे न

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आँखें पढ़ कर देखिए कभी

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे

जो खामोशियों में बयाँ ना हो सके

वो दिल के अल्फ़ाज़ समझ आ जायेंगे

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तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ

तू मान ना मान मगर मैं तेरा हूँ

तू चमकती चाँदनी है अगर उस चाँद की

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ

༺❦༻


नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ

सो हमने तो हार मान ली

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर

हमारी तो निगाहें भी हैं क़ुसूरवार हमने मान ली

༺❦༻


किसी और जहाँ की है वो

की उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है

༺❦༻


क़लम का सिपाही हूँ

मैं कलम की बात लिखता हूँ

लिखते होंगे लोग मसख़रे

मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ

༺❦༻


उसे आज़माना भी था अगर हमें

तो हम इम्तिहान भी देने वाले थे

एक इशारा भी उसका काफ़ी था

उसकी ख़ातिर हम तो अपनी जान भी देने वाले थे

༺❦༻


तुझे खोने का इस दिल में मलाल चल रहा है

तेरी यादों का सिलसिला अब तो फ़िलहाल चल रहा है

अजीब सी है कश्मकश और अजीब सी हैं ये मजबूरियाँ

की वक़्त भी बड़ी तेज़ी से अपनी चाल बदल रहा है

༺❦༻


एक बात पर उसकी हम करार कर बैठे

खुदसे नफ़रत कर ली और उससे प्यार कर बैठे

अपनी इस नासमझी से अपना जीना दुश्वार कर बैठे

अपनी हर ख्वाहिश को उसकी ख़ातिर तार-तार कर बैठे


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हँसने मुस्कुराने का ये जो मेरा तरीका है

ये तुमसे मिलकर मैंने तुमसे सीखा है

तुमसे मिलकर मुझको मिली है ख़ुशी

तुमसे प्यार जताने का भी ये मेरा पहला सलीक़ा है


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आयेगा जो कोई मेरी तलाश में

तो हूँ मैं गुमसुदा उसे तुम कह देना

ढूँडे जो कोई मुझे उसके पास में

तो उसके एहसास में हूँ गुम कह देना


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अब तो मुझे भी ये महसूस होने लगा है

कि ये दिल मेरा कंजूस होने लगा है

उसकी तरफदारी उसकी हर बात पर

ये कम्बख़्त उसका जासूस होने लगा है


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जख्म भी मलहम लगने लगते हैं

जब दिल में हर ग़म सुलगने लगते हैं

लगती है जिंदगी भी ज़हर

दिल में जब जख्म चुभने लगते हैं


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बहुत हो चुकी इश्क़ में दरियादिली

अब उसे दिल की बेरहमी दिखाऊँगा

न होगी उससे कोई तहज़ीब से बात अब

हर बात पर मैं अपनी बेशर्मी दिखाऊँगा


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वो मुड़ कर नहीं आई ये मलाल रह गया है

होठों पर ख़ामोशी और ज़हन में ये सवाल रह गया है

खता उसकी है या मेरी ये कश्मकश फ़िलहाल रह गया है

बयाँ ना हो सका मेरा ग़म, मेरा दिल ये बेहाल रह गया है


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मत पूछो हमको हमसे

हम इश्क़ में खुदको मार चुके हैं

तुम्हें महसूस हुआ या नहीं

हम इश्क़ में हार चुके हैं


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एक दफ़ा की मुलाक़ात

मैं एक दफ़ा चाहता हूँ

एक दफ़ा ही मिले एक दफ़ा ही सही

मैं वफ़ा के बदले वफ़ा चाहता हूँ


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ठुकराया गया हूँ मैं

बाक़ी ख़ास कोई वजह नहीं थी

उसने अपनाया नहीं मुझे

जो उसके दिल में कहीं शायद जगह नहीं थी


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पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ

तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ

शायरी है तू मेरे ख्यालों की

तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ


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क़लम मेरी तुम्हें लिख रही है

और मैं भी तुम्हें लिखना सीख रहा हूँ

हर लफ्ज़ में तुम्हें मैं लिखता हूँ

जितना भी मैं लिखना सीख रहा हूँ


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अहसास तब होगा जब ठोकर खाओगे

इश्क़ में एक रोज़ जब रोकर आओगे

अहमियत तब होगी तुम्हें भी मेरी

एक मोड़ पर मुझे जब खोकर आओगे


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खामोशियाँ मैं अपनी तुम्हारे साथ कहना चाह रहा था

जुटा कर मैं हौसला हालात कहना चाह रहा था

तुम भी ना समझ सके मैं जो बात कहना चाह रहा था

पहली दफ़ा तो मैं जज़्बात कहना चाह रहा था


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सर्दियों में सवेरे की नींद सी हो तुम

ज़िन्दगी की आख़िरी उम्मीद सी हो तुम

गुनाह भी हो मेरे इश्क़ का तुम

और इस गुनाह की इकलौती चश्मदीद भी हो तुम


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इस दिल के क़ैदख़ाने से तेरी ज़मानत है

तुझे जाना है अगर तो जा तुझे इजाज़त है

गलती नहीं तेरी कि बेवफ़ा है तू

जज्बातों से खेलने की तो तेरी पुरानी आदत है


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ख्वाहिशों का ख़ज़ाना और यादों की जायदाद हो तुम

मेरे दिल की दुआ और इस रूह की मुराद हो तुम

धड़कने भी करती हैं हर रोज़ तुम्हें सज़दा

मेरी साँसों की हर सुबह की फ़रियाद हो तुम


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अपने दिल में तुम मुझे पनाह दोगे

और अपने ख़्वाबों में कहीं तुम मुझे जगह दोगे

निभाओगे हर रस्म तुम वफ़ाओं की और

मुझे उम्मीद है कि इश्क़ तुम मुझे बेपनाह दोगे


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महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी

वहम में थे हम कितने अरसों से

जो महसूस ही ना हो सकी हमें बेरहमीं तुम्हारी


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कोई इश्क़ में वफ़ा करता है

तो कोई दिलासे देकर जफ़ा करता है

किसी से हमदर्दी बड़ी शिद्दत से होती है

तो इश्क़ में कोई जुल्म हर दफ़ा करता है


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नहीं समझ सका तू वो लहजा

जो तुझको मैं समझाने आया था

कितना बदल चुका हूँ

कितनी शिद्दत से तुझको मैं बताने आया था


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हर घड़ी मैं तेरे इश्क़ में तेरा ख़्याल बुनता रहता हूँ

अजीब हूँ मैं जो सवाल पर सवाल बुनता रहता हूँ

सिलसिला ये मोहब्बत का महज़ कश्मकश में गुज़र गया जो

तुझसे मिलने को तारीख़ मैं हर साल चुनता रहता हूँ


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वो कहता है कि सब समझता है

खुद को वो रब समझता है

मायूसी मेरी आँखों की…

और खामोशियों का मतलब समझता है


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मेरी बातों को… मुलाक़ातों को यूँ भुलाना नहीं था

तुम्हें जाना ही था अगर… तो ऐसे जाना नहीं था

तुम ही तो थे मेरी मंज़िल

तुम्हारे सिवा कोई ठिकाना नहीं था


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आज़माना था अगर… तो हम तैयार थे

इम्तिहान देने को भी तैयार थे

एक इशारा ही काफ़ी था उसका

हम तो जान देने को भी तैयार थे


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तुझे खोने का मलाल अब भी चल रहा है

तेरी यादों का सिलसिला फ़िलहाल चल रहा है

अजीब सी कश्मकश… अजीब सी मजबूरियाँ

और वक़्त भी अपनी चाल बदल रहा है


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कैसे करूँ बयाँ मैं वो शब्द

जो मेरे दिल में अधूरे रह गए

पसंद आ गया उसको ये सारा जमाना

एक हम ही उसकी ख़ातिर बुरे रह गए


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क्या फ़र्क़ पड़ता है 

जिंदगी ये कितनी ही ख़ूबसूरत हो 

जब पास में वो ही नहीं 

जिसकी बेहद ज़रूरत हो 


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ये दिल तो उसकी तरफ़दारी कर रहा है 

मगर शायद ये मुझसे ग़द्दारी कर रहा है 

मेरी ख़िलाफ़त में खड़ा है मुंह फेर कर मुझसे 

मग़र उससे ये कमबख़्त यारी कर रहा है 


༺❦༻


पलट गए वो भी अपनी बातों से 

क्या वाक़िफ़ नहीं थे वो मेरे जज़्बातों से 

तोड़ कर फेंका है मेरा दिल उन्होंने हाथों से 

मुतासिर नहीं थे क्या वो मेरी आँखों की बरसातों से 


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ग़ैर कोई था ही नहीं सभी तो यहाँ अपने ही थे 

मगर मुसीबत में साथ कोई निभाया नहीं 

मेरे साथ अभी  जितने भी थे 


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मंजिलें अलग़ थी हमारी पर एक ही क़ाफ़िले थे 

सफ़र ही था वो जिसमें तुम मिले थे 

कुछ पल के हम तुम हमसफ़र थे

और कुछ पल के वो सिलसिले थे 


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आख़िर क्यों है वो ख़फ़ा मैं वजह ढूँड़ने लगा 

खामोशियाँ उसकी मैं बेवजह ढूँड़ने लगा 

उसकी नाराज़गी और उसकी रज़ा ढूँड़ने लगा 

इश्क़ में चूर मैं उसको हर जगह ढूँड़ने लगा 


༺❦༻


हर कोशिश हमने की थी जिसको हसाने में 

कोई कसर ना छोड़ी उसने मेरे दिल को उकसाने में 

नुक़सान ही नुक़सान था उससे दिल लगाने में 

वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में 


༺❦༻


सच्चे हो तुम हम झूठे ही सही 

समूचे हो तुम हम टूटे ही सही 

इतनी फ़िकर अब हमें भी नहीं

तुम रूठे हो हमसे तो रूठे ही सही 


༺❦༻


मुझसे तो ये आज ही रूठा हुआ है 

पूरा का पूरा ये समाज रूठा हुआ है 

समझना चाहता हूँ मैं जमाने के उसूल 

मगर यहाँ तो सारा रिवाज ही झूठा हुआ है 


༺❦༻


आँखें सब जानती है किसकी कौन है तलब जानती है 

खामोशियों की हर ज़ुबाँ इशारों का हर मतलब जानती है 

मायूसी ख़ामोसी ये सब का सबब जानती है 


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ख़्वाहिशों से समझौता और ख़ामोशियों में मलाल चल रहा है

उलझी हुई है ज़िंदगी, कोई ना कोई ज़ेहन में सवाल चल रहा है

मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा, वो तो बेहाल चल रहा है

ज़िंदगी चल रही बेबसी में, अभी तो यही फ़िलहाल चल रहा है


༺❦༻


किससे करते हो ज़िक्र मेरा 

ज़रा भी जो मुझको जानते नहीं है 

क्या पूछते हो तुम मेरी ख़ैरियत उनसे

जो ज़रा भी मुझको पहचानते नहीं हैं 


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ज़िन्दगी में कहीं भी राहत नहीं थी 

सो जीने की हमको भी चाहत नहीं थी 

तौफ़े में मिली थी तनहाइयाँ हमें 

बस मरने की हमको इजाज़त नहीं थी 


༺❦༻


एहसान नहीं मुझे एहसास चाहिए 

कोई भी हो मुझे दिल के पास चाहिए 

गुफ़्तगू की इजाज़त नहीं है  सबको 

बातें ख़ास हों तो बंदा भी ख़ास चाहिए 


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तड़प कर दर्द छुपाये हैं मैंने 

इश्क़ में दर्द ही पाये हैं मैंने 

ठोकर तो मिली थी मुफ्त में मुझे 

बस सहारे के पैसे चुकाए हैं मैंने 


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हाँ तुझको मेरे साथ में देखा था 

तेरे हाथ भी मेरे हाथ में देखा था 

अफ़सोस मगर ये हकीकत नहीं

कल सपना ये मैंने रात में देखा था 


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लिखने पर आऊँ तो पूरी रात लिखता हूँ

खामोशियों में क़ैद थी जो अधूरी वो बात लिखता हूँ 

समेट कर अल्फ़ाज़ मैं हलात लिखता हूँ 

अधूरी ख़्वाहिशें दिल की गुजरीशें मैं साथ साथ लिखता हूँ


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फ़रेबियों की भरी हैं जमातें इश्क़ में 

और हमदर्दियों का यहाँ पे दिखावा चलता है 

महफ़ूज़ नहीं हैं इश्क़ में अहसास यहाँ बस दावा चलता है 


༺❦༻


मत सताओ तुम हमें हम सताए हुए हैं 

देकर दिलासे हम इश्क़ में ठुकराए हुए हैं 

हमारे साथ में ना हुई रहम दिली इश्क़ में 

दर बदर ज़ख्म दिल पर खाये हुए हैं 


༺❦༻


जीत के जश्न में हो तुम 

और मैं ग़मों के ग़ुबार में बैठा हूँ

जीत गए हो इश्क़ में तुम 

और मैं इश्क़ की  हार में  बैठा हूँ 


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तुमसे कोई उम्मीद लगाये बैठा है 

तुम हो की ग़ौर करते नहीं

कोई खुदकी नींद गवायें बैठा है 


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देकर ये ख़िताब दिल से दफ़ा नहीं करूँगा

कितनी भी की हो उसने ज़्यादती 

फिर भी उसे बेवफ़ा नहीं कहूँगा


༺❦༻


मैंने दिल को मेरे इतने झाँसे दिए हैं

मत पूछो की कितने दिलासे दिए हैं 

ख़ुद ही तोड़ कर बैठा हूँ मैं इसे 

बावज़ूद इसके इतने तमाशे किए हैं 


༺❦༻


सौदागर हूँ मैं ख्वाहिशों का 

और ख्वाबों की ख़रीद करता हूँ 

इत्तेफाक है की मैं क़ाबिल नहीं 

मग़र सौदेबाज़ी मजीद करता हूँ 


༺❦༻


तुम्हें तो बातें बनाना आता है 

हमसे बेहतर बहाना आता है 

इसलिए हक़दार हो तुम मोहब्बत के

जो मुक़्क़मल तुम्हें दिल बहलाना आता है 


༺❦༻


इन आँखों में सहेज कर मैंने कुछ राज़ रखे हैं 

जो लफ़्ज़ों में ना हो सके बयाँ वो अल्फ़ाज़ रखे हैं 

ख्वाबों में रखीं हैं मैंने अदायें तुम्हारी 

और दिल में सहेज कर तुम्हारे हर अंदाज़ रखे हैं 


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ज़ुल्म और ज़्यादती इस नादाँ दिल पर बेवजह किया जाता है 

देकर झूठे दिलासे इश्क़ में गुमराह किया जाता है 

और क्या क्या गिनाऊँ मैं इश्क़ में क्या क्या किया जाता है 

उजाड़ कर हर ख़ुशी जिंदगी को तबाह किया जाता है


༺❦༻


झूठी मोहब्बत में खुदको कई बार सताते सताते 

बिखर गया हूँ मैं इश्क़ में एक किरदार निभाते निभाते 

झूठी उम्मीदों को इस दिल में इतनी बार दफनाते दफनाते 

उजड़ गया हूँ मैं एक शख़्स को प्यार सिखाते सिखाते 


༺❦༻


तुम्हें तो बातें बनाना आता है 

हमसे बेहतर बहाना आता है 

इसलिए हक़दार हो तुम मोहब्बत के

जो मुक़्क़मल तुम्हें दिल बहलाना आता है 


༺❦༻


बहुत से मिले जो विश्वास घात कर गए 

लगा कर गले वो पीठ पर वारदात कर गए 

परख ना सके हम लोगों के इरादे

इसी वजह से वो ये करामात कर गए 


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सोचता हूँ की शायद इक गुनाह मैं संगीन कर बैठा हूँ 

इक अजनबी पर इश्क़ में यकीन कर बैठा हूँ 

हो भी सकता है की ये फ़ैसला मैं बेहतरीन कर बैठा हूँ

ये भी हो सकता है की खुदकी मैं इश्क़ में तौहीन कर बैठा हूँ


༺❦༻


बहला फुसलाकर लाए गए हैं 

तेरे इश्क़ में हम सताए गए हैं 

अहमियत ना मिली हम ठुकराए गए हैं 

हमें और ना सताओ हम ठोकर खाये हुए हैं 


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हासिल ना हो सकी वो तो उसको बेवफ़ा कह दिया 

जालसाज़ी धोखेबाजी का उसको फ़लसफ़ा कह दिया 

समझ ना सके तुम उसे तो दफ़ा कर दिया 

तोड़ कर उसकी उम्मीदें उसको ख़फ़ा कर दिया


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ज़िंदा हूँ मैं इतना काफ़ी नहीं हूँ 

ऐ ज़िन्दगी तेरी उस खता की माफ़ी नहीं है 

हर क़दम पर तूने ज़ुल्म किए हैं मेरे साथ

जायज़ ये तेरी नाइंसाफ़ी नहीं है 


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कुछ दिन चली उनकी वो नजरंदाज़ी

फिर एक रोज़ वो भी दूर हो गए 

हांसिल ना हुआ कुछ भी इश्क़ में

जो ख़्वाब थे वो भी चकना चूर हो गए 


༺❦༻


न पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ 

तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ 

शायरी है तू मेरे ख्यालों की

तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ 


༺❦༻


खल रही है मुझको ये ख़ामोशी तुम्हारी,

और मेरे लफ़्ज़ों पर मुझको मलाल हो रहा है।

लहज़ा नहीं है मुझमें अल्फ़ाज़ों का,

वरना दिल तो आज भी तुम्हें बेहिसाब बोल रहा है।


༺❦༻


इतनी शिकस्त खा कर बैठा हूँ

इसके बावजूद मैं ख़ुद को समझा कर बैठा हूँ 

आसान नहीं था ये सफ़र ज़िंदगी का 

ना पूछो मैं कितनी ठोकर खा कर बैठा हूँ 


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लिखनी थी चंद खामोशियाँ 

इसलिए शब्दों की खोज  कर रहे हैं 

हासिल तो फ़िलहाल एक ना हुए 

प्रयास हम फिर भी हर रोज़ कर रहे हैं 


༺❦༻


एक तुम थे जो हमसे ही किनारा कर रहे थे

इक हम थे जो इंतेज़ार तुम्हारा कर रहे थे 

इक तुम थे जो मशरूफ़ थे ग़ैरों की महफ़िल में 

एक हम थे जो तुम्हरी चौखट पर गुजारा कर रहे थे 


༺❦༻


गुजरने दो ना ये जो वक्त गुज़र रहा है 

मेरे हर ज़ख्म हर ग़म को ये भर रहा है 

मेरे हालात जैसे ठहर गए

 ये कौन सा ठहर रहा है 


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ख़्वाब में उनके खोए हम 

और यादें उनकी ताजा हो गईं 

मौत हुई मेरे जज्बातों की 

और मेरी ख्वाहिशें जनाज़ा हो गईं 


༺❦༻


आँखों में हम कितने ख़्वाब लेकर बैठे थे 

उसकी ख़ातिर इन हाथों में गुलाब लेकर बैठे थे 

उसने  पलट कर देखा ही नहीं 

हम अपने जज्बातों भरी किताब लेकर बैठे थे 


༺❦༻


अब ना होगी कोई भी खता मुझसे 

रखूँगा ना कोई अब मैं राब्ता तुझसे 

ढूँड ले जा कोई मुझसे भी बेहतर 

फिर ना पूछना अब मेरा पता मुझसे 


༺❦༻


दम तोड़ चुकी मेरी ख्वाहिशों की 

एक ही दरख्वास्त बाक़ी थी 

फिर भी पलट कर उसने देखा ही नहीं 

उसे देखने को एक ही साँस बाक़ी थी 


༺❦༻


थक चुका हूँ मैं दुनियादारी से 

ऐ जिंदगी अब मेरा हिसाब कर दे 

कर्ज जो बाक़ी हैं वो सब तू नक़दी ले

मगर बंद तू मेरी अब किताब कर दे 


༺❦༻


वाक़िफ़ हूँ मैं उन सब से

जो ये दिखावे कर रहे हैं

हकीकत में तो उन्हें है नफ़रत 

जो मुझसे हमदर्दियों के दावे कर रहे हैं 


༺❦༻


कितना है कर्ज तू बता ऐ जिंदगी 

जो ताउम्र ये उतारना पड़ेगा 

कब तक टूटेंगी ये नींदे 

कब तक ख्वाहिशों को मारना पड़ेगा 


༺❦༻


इश्क़ में ख़ुदसे जफ़ा कर रहा हूँ 

ख़ुद को सता कर मैं उससे वफ़ा कर रहा हूँ 

इनकार कर दूँगा मैं उसकी ज़्यादतों को 

ये बात मैं ख़ुदसे हर दफ़ा कह रहा हूँ 


༺❦༻


बदनसीब हैं हम की हमें याद नहीं किया जाता,

बेवजह ही वक़्त हम पर बर्बाद नहीं किया जाता।

जो कभी दिल में थे, अब दुआओं में भी नहीं,

हमारा ज़िक्र भी अब किसी बात में नहीं किया जाता।


༺❦༻


खामोशियों छिपे हुए हर अल्फ़ाज़ समझ लेते हैं

हम आँखों की गहराइयों के राज समझ लेते हैं 

किसकी फ़ितरत में क्या है यहाँ 

हम सूरतों पर लिखे अंदाज़ समझ लेते हैं 


༺❦༻


तरफदारी तुम्हारी और 

ख़ुद की ख़िलाफ़त कर रहा हूँ 

और वाक़िफ़ भी हूँ मैं की ये 

खुदकी ही ख़ातिर मैं आफ़त कर रहा हूँ 


༺❦༻


अकेले आए थे अकेले ही जाना है 

तो फिर इतनी  भीड़ इकट्ठी करके 

यहाँ किसको दिखाना है 


༺❦༻


देखना है मुझे की आख़िर कौन है वो 

ख़ुशनसीब जो आपकी पसंद है 

हमारे तो ख़िलाफ़ ही रहा है तुम्हारा दिल

देखना था की किसके साथ में रज़ामंद है 


༺❦༻


मेरे हर ज़ख्म में कोई मलहम सी हो तुम

समझती है जो मेरे हर ग़म मेरी कलम सी हो तुम 

कोई और नहीं यहां तुमसा हंसी 

कर लूं मैं वजू जो ज़मजम सी हो तुम 


༺❦༻


वक्त है ही नहीं बर्बाद करने के लिए 

ना उसकी शिकायतों के लिए 

ना ही उसको याद करने के लिए 


༺❦༻


खुद ही मैं दिल तोड़ के बैठा हूं 

इस बार उसकी यादें पीछे छोड़ के बैठा हूं 

नतीजा कोई भी बेहतर न मिला मुझे इश्क़ का

हर तरफ़ से इश्क़ को मैं निचोड़ के बैठा हूं 


༺❦༻


सिलसिला आशिक़ी का 

यूँ ही चलता रहता है

लोग बदलते रहते हैं 

और दिल यूँ ही 

मचलता रहता है 


༺❦༻


दीजिए ज़ख्म मग़र इख़्तियार करते जाइए

इसी नफ़रत में ही कहीं प्यार करते जाइए

कर दीजिए सर कलम कोई शक हो अगर

यूँ आज़माइशों से बेहतर, एतवार करना चाहिए


༺❦༻


समझदारों से हटकर मैं वफादार ढूँडता हूँ

मतलबपरस्ती तुम ढूँडते हो मैं मददगार ढूँड़ता हूँ

परख हो जिसे जज़्बातों की मैं वो होनहार ढूँडता हूँ

इसलिए मैं सस्ते लिबासों में महँगा किरदार ढूँडता हूँ


༺❦༻


तेरा दिल एक खूबसूरत मकान सा है

ख़ुशबू है जहाँ इश्क़ की, जो खुशियों के रोशनदान सा है

और इक मैं हूँ जिसका दिल मानो क़ब्रिस्तान सा है

दफ़्न हैं यहाँ जज़्बात ये बंजर वीरान सा है


༺❦༻


बेबस थी ज़ुबाँ जो बता ना सक़ी

आँखें भी इशारों में जता ना सकीं

तुम ना समझ सकोगे उस दर्द की गहरायी को

जो खामोशियों में क़ैद थी बाहर आ ना सकीं


༺❦༻


ज़रा पढ़ कर तो देखते तुम हमें

हर कमी तुम्हें नजर आती

किस किस ने की है इस दिल से

बेरहमी तुम्हें नज़र आती


༺❦༻


मत पूछो यहाँ वफ़ाओं के नाम पर

कितने तमाशे किए जाते हैं

ख़ुद दिल ही टूट जाता है इनके झाँसों में

इश्क़ में यहाँ इतने झाँसे दिए जाते है


༺❦༻


हमसे हमारे हाल ना पूछिए

किस क़दर ये गुज़ारे हैं साल ना पूछिए

उसकी तफ़तीशीं में सवाल ना पूछिए

ना दूँगा मैं जवाब सो फ़िलहाल ना पूछिए


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फ़रेबियों की इस दुनिया में

फ़रेबों का व्यापार होता है

दिखावटी हैं हमदर्दी यहाँ

इश्क़ में झूठा क़रार होता है


༺❦༻


ग़मों को अपना निशाना बना लेंगे,

खुशियों को अपना बहाना बना लेंगे

तेरे आग़ोश में ख़ुद को सौंपकर,

तुझे ही अपना आशियाना बना लेंगे।


༺❦༻


मसला ना मेरी तन्हाई का है

ना मेरी रुसवाई का है

ये कसक है बस मेरे सीने में

जो ग़म बस तेरी जुदाई का है


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नहीं करनी मुझे किसी से बराबरी

मैं सबसे पीछे ही रह लूँगा

मुबारक हो आपको आपकी ऊँचाई

मेरा क्या है मैं सबसे नीचे भी रह लूँगा


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ग़ुमराह रही है ये ज़िंदगी

क्यूंकि मैं झाँसों में जीता रहा

तोड़ गए जो यक़ीन, मैं उन्हीं के

दिलासों में जीता रहा


༺❦༻


कोई तो ऐसा भी होगा जिसे हम पसंद आएंगे

हमारे लहजे और हमारे हर ग़म पसंद आएंगे

परहेज़ ना होगा जिसे हमारे किरदार से

कितने भी हों हम बेशर्म उसे पसंद आएंगे


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आँखों में आँखें डाल कर

मैंने पूछा था उससे कि बता क्या है

कि हर बात पर मेरी यूँ ख़ामोश है क्यों

मुझे भी बता ना मेरी ख़ता क्या है


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दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं

शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं

कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें

दिल में तुम्हारे भी है ज़ख्म जानते हैं