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❝सफ़र अधूरा रह गया वो❞
❝जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे❞
❝बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं❞
❝वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे❞
❝दफ़न कर दिए हमने वो सारे❞
❝अब जज़्बात जो करके मुलाकात हम तुझे जताना चाहते थे❞
❝गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से❞
❝उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे❞
❝ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे❞
❝मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर❞
❝ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे❞
❝ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश❞
❝बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे❞
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❝दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं❞
❝शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं❞
❝कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें❞
❝दिल में तुम्हारें भी है ज़ख्म जानते हैं❞
❝तुम ना कहो चाहे हालात लफ़्ज़ों से❞
❝मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं❞
❝इनकी हर जुबाँ हम जानते हैं❞
❝तुम ही सोचते हो अजनबी हमें❞
❝कि तुम्हें हम कम जानते हैं❞
❝तुम कहो न कहो मगर तुम्हारी❞
❝तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के❞
❝दरमियाँ हम जानते हैं❞
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❝अहमियत ही ना हो जहाँ किरदार की❞
❝वहाँ से तो किनारा ही ज़रूरी होता है❞
❝कोई किस कदर अपना है ये जानने को❞
❝बस एक इशारा ही ज़रूरी होता है❞
❝यूँ तो महज़ कहने की बात है❞
❝कि जीना मुमकिन नहीं है तुम्हारे बिना❞
❝मगर हक़ीक़त तो ये है कि❞
❝उसके बिना भी गुज़ारा ज़रूरी होता है❞
❝इत्तफ़ाक़ से कुछ राज बे-राज हो जाते हैं❞
❝सच कहूँ तो ऐसा इत्तिफ़ाक़ भी दोबारा ज़रूरी होता है❞
❝कुछ तिनके भी काम आ जाते हैं मुसीबतों में❞
❝इसलिए डूबते को तिनके का सहारा ज़रूरी होता है❞
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❝तोड़ कर के दिल वो फ़रार हो गया है❞
❝मजबूर हूँ मैं कि उससे प्यार हो गया है❞
❝हर अदा उसकी बेवफ़ाओं सी है❞
❝मगर फिर भी ये दिल उसका तलबगार हो गया है❞
❝झूठ हो या सच हो वो बातें उसकी❞
❝उसकी हर बात पर इसे एतबार हो गया है❞
❝सुना है कि वो कातिल है कितनों के सुकून का❞
❝इत्तेफ़ाक़ ही तो है कि सुकून मेरा भी खो गया है❞
❝लाख शिकायतें करो तुम उसकी मुझसे आकर❞
❝मगर अब तो उसके इश्क़ का मुझपे जुनून हो गया है❞
❝टूट जाऊँ या बिखर जाऊँ मैं उसके प्यार में मुझे अब परवाह नहीं❞
❝उससे प्यार जो बेशुमार हो गया है❞
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❝शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं❞
❝यही वजह है जो इश्क़ में घबराये हुए हैं❞
❝रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं❞
❝जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने❞
❝उसी की खातिर आज हम पराये हुए हैं❞
❝नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें❞
❝क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का❞
❝जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं❞
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❝जो पहले ना बदले वो इस बार बदल गए❞
❝इसी तरह ही कितनों के किरदार बदल गए❞
❝तलब भी बदल गई और तलबगार भी बदल गए❞
❝वफ़ाओं के करते थे जो दावे, दिखावे❞
❝वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए❞
❝होने लगी हैं अब तो मोहब्बतें भी फ़र्ज़ी❞
❝जो सच्ची मोहब्बतों के अब वो उम्मीदवार बदल गए❞
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❝कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक❞
❝जो मेरे दिल की बात समझ सके❞
❝या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके❞
❝यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस ज़माने में❞
❝मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके❞
❝झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में❞
❝वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके❞
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❝घड़ी है ये इम्तिहान की❞
❝सो इम्तिहान दे रहे हैं❞
❝वो माँगता है जब भी❞
❝तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं❞
❝किसी से न की कभी उसकी शिकायत❞
❝ना ही कभी उस रब से हम❞
❝ये सब बयान कर रहे हैं❞
❝उसके एक इशारे पर हम अपनी❞
❝हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं❞
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❝आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर❞
❝साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर❞
❝इरादा पक्का कर चुके हो क्या❞
❝यूँ मुझको तुम सताने का❞
❝जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर❞
❝अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर❞
❝और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर❞
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❝जरूरी था क्या दिल में आकर जाना❞
❝या फिर दिल को दुखाना जरूरी था❞
❝ठुकराना ही था आख़िर में अगर❞
❝तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था❞
❝वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था❞
❝तो फिर ये बताओ की क्या वो बहाना जरूरी था❞
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❝बातें बनाना या फिर छुपाना कोई तुमसे सीखे❞
❝इश्क़ में बहाना या ठुकराना कोई तुमसे सीखे❞
❝झूठे दिलासे या फिर झूठा फ़साना कोई तुमसे सीखे❞
❝इश्क़ में साज़िशें या सताना कोई तुमसे सीखे❞
❝झूठ को सच सा बताना कोई तुमसे सीखे❞
❝बेवफ़ाई में तुम हो सबसे अव्वल❞
❝बेवफ़ाई का हलफ़नामा कोई तुमसे सीखे❞
❝हमदर्दियों का झूठा नजराना कोई तुमसे सीखे❞
❝करके गुमराह छोड़ कर जाना कोई तुमसे सीखे❞
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❝अजीब हूँ मैं जो हर शख़्स पर ऐतबार कर लेता हूँ❞
❝वो आए ना आए मैं इंतज़ार कर लेता हूँ❞
❝नहीं है मुझमें कोई ग़ुरूर या ख़लिश❞
❝कोई नफ़रत भी करे मुझसे तो उससे मैं प्यार कर लेता हूँ❞
❝मेरे अपने तौर तरीके हैं ज़िन्दगी के❞
❝इन्हीं तौर तरीकों से मैं अपनी ज़िंदगी गुज़ार लेता हूँ❞
❝कभी समझौते से काम चल जाता है❞
❝तो कभी ख्वाहिशें अपनी मैं मार देता हूँ❞
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❝अहमियत ना थी मेरी वहाँ इसलिए मैंने जाना छोड़ दिया❞
❝मुड़ कर ना पड़े फिर क़दम जहाँ का मैंने ठिकाना छोड़ दिया❞
❝बेरुख़ी इस क़दर थी तुम्हारी की हाल ए दिल मेरा मैंने जताना छोड़ दिया❞
❝मुंह फेर लिया मैंने तुम्हारे साये से और तुमसे दिल लगाना छोड़ दिया❞
❝नहीं रहा मेरा अब तुमसे कोई ताल्लुक❞
❝इसलिए तुमको मैंने कुछ भी बताना छोड़ दिया❞
❝छोड़ दी आशिक़ी और वो वहम पुराना छोड़ दिया❞
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❝फ़िसलन भरा है रास्ता यहाँ ख़ुद को संभालना पड़ता है❞
❝बदलती नहीं हैं परिस्थितियाँ यहाँ ख़ुद को ढालना पड़ता है❞
❝कितने ही हों पेंचीदा ये रास्ते यहाँ रास्ता ख़ुद को निकालना पड़ता है❞
❝मंज़िल इतनी आसान नहीं यहाँ ख़ुद को जोखिम में डालना पड़ता है❞
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❝तकलीफ़ होती है जब दिल तोड़ कर यूँ ही ज़ख्म लाइलाज दिया जाता है❞
❝करके गुमराह फिर इश्क़ में इसको नज़रंदाज़ किया जाता है❞
❝उजाड़ कर हर ख्वाहिश इस दिल की इसको बेआवाज़ किया जाता है❞
❝इसी बेरहमी या ग़लतफ़हमी को इश्क़ में नाम-ए-रिवाज़ दिया जाता है❞
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❝अफ़सोस इस बात का है की हम उनके खास नहीं हैं❞
❝नज़दीकियाँ मात्र हैं उनसे उनके इतने भी पास नहीं हैं❞
❝तलब सुकून या समझो की हम उनकी तलाश नहीं हैं❞
❝फिर भी हौसला है बुलंद उन्हें पाने का❞
❝उनकी तमाम बेरुखी के बावजूद भी हम हताश नहीं हैं❞
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❝कलम उठा कर उसे मैं आख़िरी सलाम लिखना चाहता हूँ❞
❝हाल ऐ दिल नहीं मेरा मैं उसको बस ये पैग़ाम लिखना चाहता हूँ❞
❝वो मेरा ना हो सका ये बदनसीबी है मेरी❞
❝मगर उसका हूँ मैं उसे ये पयाम लिखना चाहता हूँ❞
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❝मत पूछ मेरे दिल का क्या हाल चल रहा है❞
❝उसकी बेरुखी का ही हर पहर मलाल चल रहा है❞
❝बरस रही हैं आँखे ये उसका ही कमाल चल रहा है❞
❝उसकी यादों की चिंगारी से मेरा दिल फ़िलहाल जल रहा है❞
❝इश्क़ भी तो एक सतरंज ही है जिसमें बाज़ी उसकी है❞
❝वो अपनी चाल चल रहा है❞
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❝दिल के करीब है वो अगर तो उसे जाने मत दो❞
❝जाना ही चाहता है अगर वो तो उसे अब बहाने मत दो❞
❝ये दिल तुम्हारी अमानत है इसे महफ़ूज़ रखो तुम❞
❝उसे सताने मत दो❞