नहीं चाहिए मुझे शर्तों में मोहब्बत
तुम चाहो तो किनारा कर लेना
हर फ़ैसला तुम्हारा मंज़ूर है मुझे
जो किनारा भी करना है अगर तुम्हें
तो बस तुम एक इशारा कर देना
༺❦༻
तुम्हें समझ नहीं आएगी ये बात पुरानी है
खामोशियों में कहीं दफ़्न एक ज़िंदगानी है
इन ख़ामोशियों को मेरी बेवजह जो समझो
तो फिर ये तुम्हारे दिल की नादानी है
हर लफ्ज़ जो मेरा ख़ामोश है
हर लफ्ज़ में एक कहानी है
༺❦༻
छोटी सी अहमियत है जो छोटा ही क़िरदार है
मग़र ख़ुदगर्ज़ी नहीं ये दिल ख़ुद्दार है
नफ़रत नहीं किसी से और ना ही किसी से प्यार है
ख़ुदगर्ज़ी हैं लोग यहाँ और कुछ यहाँ ग़द्दार हैं
इसलिए उम्मीद और विश्वास ये दोनों ही यहाँ बेकार है
༺❦༻
पूछो कभी उससे भी… वो दिल में अपने
तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है
समझते हो तुम उसके इशारे…
मगर क्या वो तुम्हारी खामोशियों की मुकम्मल मालूमात रखती है
༺❦༻
उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखने लग जाते हैं
उसकी यादें, उसकी बातें हम सुबह शाम लिखने लग जाते हैं
इक वो है जिसको मेरे ख्याल तक नहीं आते
इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुदको उसके नाम लिखने लग जाते हैं
༺❦༻
अभी भी तेरी यादों का बोझ लिए घूम रहा हूँ
हर रोज़ तेरी यादें साथ लिए घूम रहा हूँ
हर लम्हा तेरे इंतज़ार में गुज़ारा है
मगर तुझे खबर कहाँ…
मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ
༺❦༻
आँखों में बस नमी रह गई थी
उसके बाद तो बस उसकी कमी रह गई थी
कह ना सके हम उससे कुछ भी…
जुबान होठों में ही जमी रह गई थी
आँखें खुली… होठ खामोश…
धड़कनें भी जैसे थमी रह गई थीं
༺❦༻
कोई ऐसा नहीं मिला अब तक
जो मेरे दिल की बात समझ सके
या मेरे हालात समझ सके
मिले बहुत लोग इस ज़माने में
मगर वो ना मिला… जो मेरे जज़्बात समझ सके
मेरी आँखों की गहराइयों में झाँक कर
वो बरसात समझ सके
༺❦༻
क्या कहूँ मैं इश्क़ में मेरा मुक़द्दर ठीक नहीं था
इक तो मेरी ये बेचैनी दूसरा
उससे बिछड़ने का वो डर ठीक नहीं था
खुदसे नाराज़गी ठीक नहीं थी
और इस क़दर भटकना दर-बदर ठीक नहीं था
༺❦༻
डरता हूँ ऐसे की तेजाब हो तुम
लोग कहते हैं की गुलाब हो तुम
इश्क़ की मुक़्क़मल किताब हो तुम
गुलशन हो तुम या महताब हो तुम
इतना बताओ क्या ख़्वाब हो तुम
༺❦༻
ढेर हूँ खामोशियों का
मैं ख्वाहिशों की राख हूँ
अजीब इत्तेफ़ाक़ हूँ
उजड़ चुका मैं ख़्वाब हूँ
ख़ामियों की खायी हूँ मैं
इश्क़ में भी ख़ाक हूँ
༺❦༻
तन्हाइयों भरी
ये रातें क्या कहती हैं
तुम्हें ज़रा भी इल्म नहीं
मेरी बातें क्या कहती हैं
सुनते भी जो तुम दिल से अगर
तो हम भी बताते ये क्या कहती हैं
༺❦༻
सोचा था तुमसे बयाँ करेंगे वो ग़म
फिर सोचा बाद में की छोड़ो रहने देते हैं
ख़ामख़ाँ ही तो बह रही हैं आँखें इन्हें बहने देते हैं
उजड़ ही चुकी है ये ख्वाहिशों को दुनियाँ
इसे इसी तरह से यूँ ही ढहने देते हैं
༺❦༻
उससे रूठ जाना मुझे आता नहीं है
ऐसा नहीं की वो मुझे सताता नहीं है
उलझा कर रखता है वो मुझको दिलाशों में
हाल ऐ दिल वो अपना मुझे सुनाता नहीं है
रूठ जाऊँ मैं कैसे उससे वो बेख़बर है मुझको मानाता नहीं है
समेट कर रखता है वो अपनी बातें खामोशियों में
कमबख़्त वो मुझको बताता नहीं है
༺❦༻
मत ढूँड़ो खुदको हम मार चुके हैं
खामोशियों में खुदको ही उतार चुके हैं
खुदकी ख्वाहिशें हम ख़ुद ही उजाड़ चुके हैं
मत पूछो तुम सूरत ए हाल हमारा
जंग ऐ ज़िन्दगी ऐ दोस्त हम हार चुके हैं
༺❦༻
तुझे आना है तो आ जाना
तेरी ख़ातिर ये दिल
इंतज़ार में रहता है
तेरी यादों में महफ़ूज़
तेरे प्यार में रहता है
ख़फ़ा नाराज़गी है
तुझसे जरा भी नहीं
ये दिल तो तेरे ही
ख़ुमार में रहता है
༺❦༻
चलता रह ऐ वक्त
तू अपनी रफ़्तार से
मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता
अब मेरी जीत या हार से
तय कर चुका हूँ
मैं मंज़िल मेरी
गुज़र जाऊँगा मैं
अब तो हर मझधार से
༺❦༻
अजीब हूँ मैं जो हर शख़्स पर ऐतबार कर लेता हूँ
वो आए ना आए मैं इंतज़ार कर लेता हूँ
नहीं है मुझमें कोई ग़ुरूर या ख़लिश
कोई नफ़रत भी करे मुझसे तो उससे मैं प्यार कर लेता हूँ
मेरे अपने तौर तरीके हैं ज़िन्दगी के
इन्हीं तौर तरीकों से मैं अपनी ज़िंदगी गुज़ार लेता हूँ
कभी समझौते से काम चल जाता है
तो कभी ख्वाहिशें अपनी मैं मार देता हूँ
༺❦༻
अहमियत ना थी मेरी वहाँ इसलिए मैंने जाना छोड़ दिया
मुड़ कर ना पड़े फिर क़दम जहाँ का मैंने ठिकाना छोड़ दिया
बेरुख़ी इस क़दर थी तुम्हारी की हाल ए दिल मेरा मैंने जताना छोड़ दिया
मुंह फेर लिया मैंने तुम्हारे साये से और तुमसे दिल लगाना छोड़ दिया
नहीं रहा मेरा अब तुमसे कोई ताल्लुक
इसलिए तुमको मैंने कुछ भी बताना छोड़ दिया
छोड़ दी आशिक़ी और वो वहम पुराना छोड़ दिया
༺❦༻
फ़िसलन भरा है रास्ता यहाँ ख़ुद को संभालना पड़ता है
बदलती नहीं हैं परिस्थितियाँ यहाँ ख़ुद को ढालना पड़ता है
कितने ही हों पेंचीदा ये रास्ते यहाँ रास्ता ख़ुद को निकालना पड़ता है
मंज़िल इतनी आसान नहीं यहाँ ख़ुद को जोखिम में डालना पड़ता है
༺❦༻
तकलीफ़ होती है जब दिल तोड़ कर यूँ ही ज़ख्म लाइलाज दिया जाता है
करके गुमराह फिर इश्क़ में इसको नज़रंदाज़ किया जाता है
उजाड़ कर हर ख्वाहिश इस दिल की इसको बेआवाज़ किया जाता है
इसी बेरहमी या ग़लतफ़हमी को इश्क़ में नाम-ए-रिवाज़ दिया जाता है
༺❦༻
अफ़सोस इस बात का है की हम उनके खास नहीं हैं
नज़दीकियाँ मात्र हैं उनसे उनके इतने भी पास नहीं हैं
तलब सुकून या समझो की हम उनकी तलाश नहीं हैं
फिर भी हौसला है बुलंद उन्हें पाने का
उनकी तमाम बेरुखी के बावजूद भी हम हताश नहीं हैं
༺❦༻
कलम उठा कर उसे मैं आख़िरी सलाम लिखना चाहता हूँ
हाल ऐ दिल नहीं मेरा मैं उसको बस ये पैग़ाम लिखना चाहता हूँ
वो मेरा ना हो सका ये बदनसीबी है मेरी
मगर उसका हूँ मैं उसे ये पयाम लिखना चाहता हूँ
༺❦༻
मत पूछ मेरे दिल का क्या हाल चल रहा है
उसकी बेरुखी का ही हर पहर मलाल चल रहा है
बरस रही हैं आँखे ये उसका ही कमाल चल रहा है
उसकी यादों की चिंगारी से मेरा दिल फ़िलहाल जल रहा है
इश्क़ भी तो एक सतरंज ही है जिसमें बाज़ी उसकी है
वो अपनी चाल चल रहा है
༺❦༻
सफ़र अधूरा रह गया वो
जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे
बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं
वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे
दफ़न कर दिए हमने वो सारे
अब जज़्बात जो करके मुलाकात हम तुझे जताना चाहते थे
गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से
उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे
ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे
मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर
ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे
ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश
बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे
༺❦༻
दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं
शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं
कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें
दिल में तुम्हारें भी है ज़ख्म जानते हैं
तुम ना कहो चाहे हालात लफ़्ज़ों से
मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं
इनकी हर जुबाँ हम जानते हैं
तुम ही सोचते हो अजनबी हमें
कि तुम्हें हम कम जानते हैं
तुम कहो न कहो मगर तुम्हारी
तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के
दरमियाँ हम जानते हैं
༺❦༻
अहमियत ही ना हो जहाँ किरदार की
वहाँ से तो किनारा ही ज़रूरी होता है
कोई किस कदर अपना है ये जानने को
बस एक इशारा ही ज़रूरी होता है
यूँ तो महज़ कहने की बात है
कि जीना मुमकिन नहीं है तुम्हारे बिना
मगर हक़ीक़त तो ये है कि
उसके बिना भी गुज़ारा ज़रूरी होता है
इत्तफ़ाक़ से कुछ राज बे-राज हो जाते हैं
सच कहूँ तो ऐसा इत्तिफ़ाक़ भी दोबारा ज़रूरी होता है
कुछ तिनके भी काम आ जाते हैं मुसीबतों में
इसलिए डूबते को तिनके का सहारा ज़रूरी होता है
༺❦༻
तोड़ कर के दिल वो फ़रार हो गया है
मजबूर हूँ मैं कि उससे प्यार हो गया है
हर अदा उसकी बेवफ़ाओं सी है
मगर फिर भी ये दिल उसका तलबगार हो गया है
झूठ हो या सच हो वो बातें उसकी
उसकी हर बात पर इसे एतबार हो गया है
सुना है कि वो कातिल है कितनों के सुकून का
इत्तेफ़ाक़ ही तो है कि सुकून मेरा भी खो गया है
लाख शिकायतें करो तुम उसकी मुझसे आकर
मगर अब तो उसके इश्क़ का मुझपे जुनून हो गया है
टूट जाऊँ या बिखर जाऊँ मैं उसके प्यार में मुझे अब परवाह नहीं
उससे प्यार जो बेशुमार हो गया है
༺❦༻
शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं
यही वजह है जो इश्क़ में घबराये हुए हैं
रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं
जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने
उसी की खातिर आज हम पराये हुए हैं
नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें
क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का
जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं
༺❦༻
जो पहले ना बदले वो इस बार बदल गए
इसी तरह ही कितनों के किरदार बदल गए
तलब भी बदल गई और तलबगार भी बदल गए
वफ़ाओं के करते थे जो दावे, दिखावे
वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए
होने लगी हैं अब तो मोहब्बतें भी फ़र्ज़ी
जो सच्ची मोहब्बतों के अब वो उम्मीदवार बदल गए
༺❦༻
कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक
जो मेरे दिल की बात समझ सके
या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके
यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस ज़माने में
मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके
झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में
वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके
༺❦༻
घड़ी है ये इम्तिहान की
सो इम्तिहान दे रहे हैं
वो माँगता है जब भी
तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं
किसी से न की कभी उसकी शिकायत
ना ही कभी उस रब से हम
ये सब बयान कर रहे हैं
उसके एक इशारे पर हम अपनी
हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं
༺❦༻
आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर
साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर
इरादा पक्का कर चुके हो क्या
यूँ मुझको तुम सताने का
जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर
अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर
और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर
༺❦༻
जरूरी था क्या दिल में आकर जाना
या फिर दिल को दुखाना जरूरी था
ठुकराना ही था आख़िर में अगर
तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था
वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था
तो फिर ये बताओ की क्या वो बहाना जरूरी था
༺❦༻
बातें बनाना या फिर छुपाना कोई तुमसे सीखे
इश्क़ में बहाना या ठुकराना कोई तुमसे सीखे
झूठे दिलासे या फिर झूठा फ़साना कोई तुमसे सीखे
इश्क़ में साज़िशें या सताना कोई तुमसे सीखे
झूठ को सच सा बताना कोई तुमसे सीखे
बेवफ़ाई में तुम हो सबसे अव्वल
बेवफ़ाई का हलफ़नामा कोई तुमसे सीखे
हमदर्दियों का झूठा नजराना कोई तुमसे सीखे
करके गुमराह छोड़ कर जाना कोई तुमसे सीखे
༺❦༻
वो चला गया लेकिन
उसके एहसास छोड़ गया है
यादें वो अपनी मेरे पास छोड़ गया है
ढूंड रहा हूँ मैं आज भी उसको उसके वादों में कहीं
जो देकर वो मुझको झूठी आस छोड़ गया है
༺❦༻
सिलसिला ये इश्क़ में आम हो गया है
इश्क़ में सितम सरेआम हो गया है
नहीं रही अब इश्क़ में जज्बातों की हिफ़ाज़त
जो ये बेवफ़ाई का पेशा और
बेवफ़ाओ का इंतज़ाम हो गया है
༺❦༻
किराए की है ये ज़िन्दगी
जो कभी तो ये चुकाना पड़ेगा
कितनी भी हो नाम पर वसीयत
सब यहीं पर छोड़ कर जाना पड़ेगा
रिश्ते कितनी भी ख़ास क्यों ना हों
मगर वो जो रिश्ता मौत से है
वो तो निभाना पड़ेगा
༺❦༻
दर्द-ए-दिल हर किसी से जताया नहीं जाता
दिल तोड़ कर हर किसी को दिखाया नहीं जाता
रखनी पड़तीं हैं कितनी बातें खामोशियों में समेट कर
यूँ बेवजह हर किसी को बताया नहीं जाता
फ़िक्र भी होनी चाहिए जज्बातों की इश्क़ में
करके मज़बूर किसी को इश्क़ में सताया नहीं जाता
༺❦༻
ख़ामोश रही ज़ुबान मगर आँखों ने अपना काम कर दिया
छुपा कर रखा था मैंने जो हाल-ए-दिल मेरा इसने वो सरे-आम कर दिया
ढेरो ख़्वाहिशों और ढेरों उम्मीदों को इसने आज नीलाम कर दिया
नहीं रहा अब ये दिल महफ़ूज़ इन आँखो ने इसे बदनाम कर दिया
༺❦༻
तोड़ कर रख देंगे तेरे ख्याल या फिर वो सवाल
या फिर इन आँखों में तेरे बाद बस नमी होगी
बंजर होगी तेरे बाद ये जिंदगी ना फिर इस तरह की ये सरज़मीं होगी
वसवसे होंगे वहाँ तेरी यादों के या हर बखत तेरी कमी होगी
मत पूछ तू मेरी तबियत को की कैसे रहूँगा मैं तेरे बग़ैर
जो तू ही ना रही तो ये सांस भी क्या लाज़मी होगी
༺❦༻
माना तेरे यार बहुत हैं
इश्क़ में तेरे हक़दार बहुत हैं
चहेते तेरी मुस्कान के
या फिर अश्कों के तेरे दावेदार बहुत हैं
ख़रीद सकें जो तेरे ग़म
ख़रीददार बहुत हैं
फिर भी तू रहना जरा संभल कर
जो यहाँ पर लोग ग़द्दार बहुत हैं
क़ातिल जज्बातों के
या इश्क़ में गुनहगार बहुत हैं
༺❦༻
कोई इतना बेवफ़ा कैसे हो सकता है
या इस क़दर वो ख़फ़ा कैसे हो सकता है
समझता है ना वो मुझे और मेरी ख़ामोशी को
तो फिर देकर मुझे ये मायूसी
ऐसे दफ़ा कैसे हो सकता है
༺❦༻
इश्क़ में मुकम्मल कोई मुक़ाम नहीं होता
वसवसे हैं बस यहाँ बेसब्री के
जिसका मुकम्मल कोई अंजाम नहीं होता
टूट जाती हैं यहाँ नींदें और उम्मीदें भी बिखर जाती हैं
इसके सिवा इश्क़ में और कोई काम नहीं होता
༺❦༻
रूठते हम उससे रहे जो मनाने वाला नहीं था
ढूँडते हम उसे रहे जो आने वाला नहीं था
कमी थी उसकी या ग़लतफ़हमी थी उसकी
मुझको ये कोई समझानेवाला नहीं था
इंसानियत तो थी दर-बदर
मगर कोई निभानेवाला नहीं था
༺❦༻
बेशक़ थोड़ा मनमुटाव रहता है
मगर तुम्हीं से मेरा लगाव रहता है
तुम से ही हैं ये खुशियाँ मेरी
वरना तो हर पहर तनाव रहता है
बंजर से दिल में कहीं न कहीं
ख्वाहिशों का बिखराव रहता है
यही वजह है जो मेरी आँखों में
कहीं मेरे अश्कों का जलभराव रहता है
༺❦༻
कोई कलम उठाएगा तो अपना ख़ुमार लिखेगा
इश्क़ वो अपना बेशुमार लिखेगा
कुछ पल की बेचैनी या फिर वो इंतज़ार लिखेगा
हाल-ए-दिल ना होगा उससे बयाँ
वो तनहाइयाँ ही बार-बार लिखेगा
༺❦༻
छूट कर तुझसे तेरी यादों में जी रहा है
अजीब है ये, अभी भी तेरे वादों में जी रहा है
नक़ाब ओढ़ कर इश्क़ का
ये फ़र्ज़ी लबादों में जी रहा है
इश्क़ का मारा ये कमबख़्त
तेरी फ़रियादों में जी रहा है
༺❦༻
शोर ना करें कहीं ये खामोशियाँ
इसलिए लिखना पड़ता है
हाल ऐ दिल पिरोना लफ़्ज़ों में
सीखना पड़ता है
कुछ दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता
तो फिर मज़बूर होकर चीखना पड़ता है
༺❦༻
फ़ुर्सत में मिले कोई मुझे
तो उसको मैं एक काम दूँगा
गुमसुदा हूँ मैं, ढूँढ़ना है बस मुझे
जो मिल गया कहीं
तो उसे मैं इनाम दूँगा
༺❦༻
तुम मेरे हो, मैं ये दावा नहीं कर सकता
हक़ीक़त यही, मैं दिखावा नहीं कर सकता
तुम समझो बात को मेरी
मैं छलावा नहीं कर सकता
तुम ही हो अगर मेरे
तो इश्क़ भी तुम्हारे अलावा नहीं कर सकता
༺❦༻
मंज़िल एक है तो बहाना क्या
मौत मुक़र्रर है तो घबराना क्या
चाहत है जो शिद्दत की
तो रूह भी उसको सौंप दूँ
पर बेरुख़ी जो हुई उससे
तो कौन जाने फ़लाना क्या
༺❦༻
नहीं थमेगा लम्हा
ये अफ़साने यूँ ही चलते रहेंगे
होंगी बयानबाज़ियाँ भी इश्क़ में मगर
ये बहाने यूँ ही चलते रहेंगे
हिस्सेदार हैं सरकार ही मयखानों की
इसलिए बंद होंगी दवाइयाँ
मगर मयखाने यूँ ही चलते रहेंगे
༺❦༻
किस हिसाब का है ये जमाना…
इस बार उसको हमने आज़माने दिया
उससे ना वफ़ा हुई… ना प्यार
सो इस बार उसको हमने जाने दिया
एक दफ़ा नहीं… कई दफ़ा सब दोहराने दिया
फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया
༺❦༻
ख़रीद-फ़रोख्त जो हुई ख्वाहिशों की
तो इस बार मैं होशियारी करूँगा
बेच दूँगा अपने हर ग़म
और दिल खोल कर ख़रीददारी करूँगा
न रहेगी कोई कशिश… ना कोई ख़लिश
इस बार मैं समझदारी करूँगा
༺❦༻
निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में
और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ
जो तुझे ना पसंद आए… हर आदत सुधारता हूँ
मगर तुझे नज़र ना आई मेरी आशिक़ी
कि तेरी ख़ातिर खुद को सँवारता रहता हूँ
༺❦༻
फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में
उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए
नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई
की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए
गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में
वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए
༺❦༻
मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा
मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा
ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ
तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा
जो आज तू मेरे लिए है
कल वो तू बदल जाएगा
मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा
༺❦༻
थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई
ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई
जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई
सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं
༺❦༻
मुज़रिम हूँ क्या कोई मैं
जो मेरे साथ में तुम ऐसा बर्ताव कर रहे हो
हर बात को तुम मेरी नजरअंदाज करके
क्यों मुझसे ही तुम भेदभाव कर रहे हो
क्या नहीं है अब तुम्हें मुझसे हमदर्दी
जो ग़ैरों से अब इतना लगाव कर रहे हो
༺❦༻
पूछोगे तुम उसका नाम
फिर उसको बदनाम करोगे
महफूज है इस दिल में जो मासूम
उसका तुम कत्लेआम करोगे
संजीदा साज़िशें तुम उसकी ख़ातिर
या फिर उसकी ख़िलाफ़त में ख़ुराफ़ातें तुम तमाम करोगे
छीन कर उसका सुकून उसका जीना तुम हराम करोगे
༺❦༻
मुसाफ़िर हूँ मैं एक सफ़र का
बस चलता ही जा रहा हूँ
ठोकरों भरी है सड़क मैं
बस संभलता ही जा रहा हूँ
बदल दी हैं मैंने कितनी मंज़िलें
और कितनी बदलता ही जा रहा हूँ
उजड़ी हुई यादों और उजड़े हुए ख्वाबों के जाल से
फ़िलहाल मैं निकलता ही जा रहा हूँ
༺❦༻
इतने चेहरों में एक चेहरा बेनक़ाब ढूँड़ते रहे
कल शाम ही वो मिला फिर उसका ख़्वाब ढूँड़ते रहे
झील सी गहरी उसकी आँखें
और उसकी खामोशी थी सवालों की किताब
जिसका हम जवाब ढूँड़ते रहे
ताल्लुक़ नहीं था कोई उससे
मगर उसकी एक झलक से हुए हम बेताब
इसीलिए उसे ढूँड़ते रहे
༺❦༻
दर बदर से ठुकराया ये इश्क़ का मारा बन गया है
उसे भी अहमियत नहीं थी जिसकी तलब में ये आवारा बन गया है
क़त्ल कर कर के अपनी ही ख्वाहिशों का ये बेचारा बन गया है
उजाड़ कर खुदका ही घर कम्बख़्त ये दिल मेरा बंजारा बन गया है
༺❦༻
उसने ही अपनाया था उसकी खातिर अब अनजान हो गए
बिखर गए मेरे जज़्बात उसकी इसी बेरुख़ी से हम बेजान हो गए
खाक हो गईं मेरी सब ख्वाहिशें और दफ़्न मेरे सब अरमान हो गए
हासिल कुछ ना होना था फिर भी उसके इश्क़ में हम क़ुर्बान हो गए
༺❦༻
जाने दे उसे ऐ दिल अब और बहाने नहीं चाहिए
अपनाया ही नहीं जब किसी ने तो फिर ये बेगाने भी नहीं चाहिए
झूठी हमदर्दी इन ख़ुदग़र्ज़ियों की और इश्क़ के झूठे फ़साने नहीं चाहिए
नहीं चाहिए अब दिलासे भी और वो फलाने भी नहीं चाहिए
༺❦༻
शिकायतें भी उसी से और उसी से प्यार है
बेरुखी भी उसी से और उसी का इंतजार है
ख्वाहिश भी उसकी और उसी से दरकिनार है
परहेज है उसी से और उसका ही खुमार है
तलब नहीं किसी की अब वो ही बेशुमार है
༺❦༻
नाज़ुक होती हैं जज्बातों की डोर
इसलिए इन पर इतना जोर नहीं करते
जाने दे ऐ दिल
इतना गौर नहीं करते
यूँ छोटी छोटी बातों पर इतना शोर नहीं करते
हांसिल नहीं होती हैं कुछ ख्वाहिशें भी
इसलिए खुदको इतना कमज़ोर नहीं करते
༺❦༻
सायर तो सारे के सारे झूठे होते हैं
उनकी उम्मीदें और उनके सहारे भी झूठे होते हैं
करते हैं वो बातें बयां अपनी इशारों में
मगर उनके तो सारे इशारे भी झूठे होते हैं
कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे
सच की वजह से ही तो वे बेचारे टूटे होते हैं
यूं हैं नहीं सारे सायर झूठे होते हैं
༺❦༻
आँखों में बस नमीं रह गई थी
उसके बाद तो बस उसकी कमीं रह गई थी
कह ना सके हम उससे कुछ भी उसके जाने पर
जुबान जो मेरी होठों में बस जमीं रह गई थी
आँखें खुली, होठ खामोश, और धड़कने भी ये थमीं रह गई थी
༺❦༻
समझा न पाया मैं
या फिर तुम्ही समझ न पाये
कि तुम ही मेरे साये की तरह हो
अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में
और तुम्हारा बर्ताव ये था कि जैसे पराए की तरह हो तुम
༺❦༻
अभी भी तेरी यादों का मैं बोझ लिए घूम रहा हूँ
एक तू ही तो है जिसकी यादें मैं हर रोज़ लिए घूम रहा हूँ
तेरे ही इंतज़ार में मैंने हर लम्हा गुज़ारा है
मगर तुझे ख़बर ही कहाँ की कितनी शिद्दत से मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ
༺❦༻
रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में
एक दफ़ा फिर से सुधार कर के वो गुलाब लाया हूँ
किराए की हैं ये नींदें और उधार के वो ख़्वाब लाया हूँ
हर पन्ने पर जिसमें लिखी हुई है वफ़ा-ए-इश्क़
बड़ी ही मशक़्क़त से ढूँढ कर के वो किताब लाया हूँ
༺❦༻
मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा
तुम तो जा चुके थे मगर तुम्हारे लौटने की
मैं फ़रियाद करता रहा
हँसी आई ख़ुद पर और
दिल पर रोना आया कि क्यों ही बेवजह
मैं वक्त बर्बाद करता रहा
༺❦༻
कितना भी गहरा क्यों ना हो
इसको छुपाना पड़ता है
इश्क़ में आख़िरकार पछताना पड़ता है
ठुकराये जाने पर भी जाना पड़ता है
अपने ही दिल को सताना पड़ता है
दिल तोड़ कर इश्क़ में दिखाना पड़ता है
अजीब है ये रस्म मगर निभाना पड़ता है
༺❦༻
सफ़र अधूरा रह गया वो जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे
बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं जो तुझे हम बताना चाहते थे
दफ़न कर दिए हमने वो सारे जज़्बात
अब जज़्बात जो करके मुलाकात, हम तुझे जताना चाहते थे
गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से
उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे
ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे
मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर
ब-मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे
ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश
बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे
༺❦༻
कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक जो मेरे दिल की बात समझ सके
या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके
यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में
मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके
झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में
वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके
༺❦༻
घड़ी है ये इम्तिहान की, सो इम्तिहान दे रहे हैं
वो माँगता है जब भी, तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं
किसी से न की कभी उसकी शिकायत, ना ही कभी उस रब से हम
ये सब बयान कर रहे हैं
उसके एक इशारे पर हम अपनी हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं
༺❦༻
आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर
साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर
इरादा पक्का कर चुके हो क्या
यूँ मुझको तुम सताने का
जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर
अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर
और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर
༺❦༻
जरूरी था क्या दिल में आकर जाना
या फिर दिल को दुखाना जरूरी था
ठुकराना ही था आख़िर में अगर
तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था
वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था
तो फिर ये बताओ कि क्या वो बहाना जरूरी था
༺❦༻
ख़्वाहिशों से समझौता और खामोशियों में मलाल चल रहा है
उलझी हुई है ज़िंदगी, कोई ना कोई जेहन में सवाल चल रहा है
मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा, वो तो बेहाल चल रहा है
ज़िंदगी चल रही बेबसी में, अभी तो यही फिलहाल चल रहा है
༺❦༻
ना जाने क्यों मैं खामोशी में ख्यालों को बुनता रहता हूँ
कोई कुछ भी बोले मैं खामोशी से सुनता रहता हूँ
ऐतराज, अफ़सोस या कहूँ कि परवाह ही नहीं मुझे इस जमाने की
मस्त मौला शख़्स मैं खुदकी ख़ामियों और खूबियों को ख़ुद में ही बुनता रहता हूँ
༺❦༻
चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर
आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुकाम पर
तकलीफ़ बस इस बात की है कि अब वो मुझे पहचानता नहीं है
ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ
वो कहता है कि मुझको जानता नहीं है
༺❦༻
चुभती है खामोशी
और साये भी चुभने लगे हैं
हालात अभी ऐसे हैं
कि अपने तो अपने
पराये भी चुभने लगे हैं
༺❦༻
उसके हर लहज़े का हमने ख़याल रखा है
उसकी ज़्यादती को भी हमने संभाल रखा है
अहमियत दी है उसकी ख़्वाहिशों को अक्सर
अपनी ख़्वाहिशों को मैंने अभी टाल रखा है
इश्क़ ये उसका अजीब ही कश्मकश है
और मैं भी अजीब हूँ जो ख़ुद को ही
मैंने इस कश्मकश में डाल रखा है
༺❦༻
आया हूँ अधूरी सी मैं बात लेकर
आँखों में अधूरी मैं रात लेकर
मालूम है तुम पूछोगे सबूत मुझसे
इसलिए आया हूँ मैं वो काग़ज़ात लेकर
साथ में हुई थी जो वारदात लेकर
जर्जर जो हो चुके थे वो जज़्बात लेकर
༺❦༻
तेरे एहसास में जी रहा हूँ
या तेरी तलाश में जी रहा हूँ
सहेज कर तेरी ख़्वाहिशों
तेरी आस में जी रहा हूँ
एक दिलासा दे रखा है दिल को मैंने
इसी झाँसे से कि तेरे पास में जी रहा हूँ
༺❦༻
इकलौता मैं नहीं था उसके दिल में
वहाँ तो पूरी आशिक़ों की आबादी थी
गुमराह कर रखा था उसने सबको
उसका शौक़ ही आशिक़ों की बर्बादी थी
फ़ना थे सब बेख़बर उस बेरहम पर
यही वजह है कि उसे दिल तोड़ने की आज़ादी थी
༺❦༻
पूछो कभी उससे भी वो दिल में अपने
तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है
समझते हो तुम तो उसके इशारे
मगर वो भी क्या तुम्हारी खामोशियों की मुक़्क़मल मालूमात रखती है
༺❦༻
चलने दो आज ये कलम
मुझे हर बात लिखनी है
खामोशियों तले दफ़्न थी जो मेरे
अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर वो वारदात लिखनी है
डर नहीं रहा मुझे अब उसकी जुदायी का
इसलिए उससे जो मिली है वो रिहाई की सौगात लिखनी है
༺❦༻
कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक
जो मेरे दिल की बात समझ सके
या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके
यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में
मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके
झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में वहीँ पर मौजूद है जो बरसात समझ सके
༺❦༻
उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता
कितना भी करूँ मैं मगर उससे फ़ासला नहीं हो सकता
यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो
यहाँ से तो कभी वो लापता नहीं हो सकता
इश्क़ तो दिल की एक सौगात है, ये कोई मसला नहीं हो सकता
༺❦༻
एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं
ख्वाहिशें तेरे पास लेकर
उम्मीदों भरी निगाहें और दिल में विश्वास लेकर
आया था कुछ यादें तेरी साथ अपने खास लेकर
बातें वो तेरी मीठी मीठी और तेरे ही एहसास लेकर
आया था मैं पास तेरे हिस्से की अपनी साँस ले कर
༺❦༻
तोड़ तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को मैं बर्बाद करता रहा
बेक़सूर था ये मासूम दिल
उसके बाद भी मैं इसे बर्बाद करता रहा
छीन लिया मैंने इससे वो सारे जज़्बात प्यार के
और तेरी यादों को इस दिल से मैं आजाद करता रहा
हैरानी है मुझको इसकी इस बात पर कि टुकड़ों टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल
बावजूद उसके ये तुझको ही याद करता रहा
༺❦༻
ना जाओ दूर हमसे की अभी भी बात बाक़ी है
पूरी ना हुई ये हमारी अभी भी मुलाक़ात बाक़ी है
ख़त्म नहीं हुई अभी भी तेरी यादों में रात बाक़ी है
लिखने बैठा हूँ मैं मेरे जज़्बात बाक़ी हैं
कुछ तुझसे कुछ ख़ुदसे अनकहे सवालात बाक़ी हैं
༺❦༻
न चाह कर भी मुझे वहाँ जाना पड़ा
तेरी यादें वहाँ छोड़ कर आना पड़ा
ख़त्म हो चुकी मेरी सिफ़ारिशें तेरे इश्क़ की
सो ये इश्क़ तेरा दफ़नाना पड़ा
ना चाहते हुए भी तुझे भुलाना पड़ा
खुदका दिल इस दफ़ा दुखाना पड़ा
༺❦༻
मेरी मोहब्बत का मुझको अंजाम देखना था
कितना किसने दिया मुझे इल्ज़ाम देखना था
उसने तो सौंप दी अपने हिस्से की बेवफ़ाई
अब मुझे भी मेरा इंतज़ाम देखना था
सह गया मैं उसके सितम को हर दफ़ा बेवज़ह
मग़र इस दफ़ा तो मुझे भी मेरा इंतक़ाम देखना था
ग़ैरों की इनायत है वो या वो मेरी इबादत है
उसके लबों से निकला जो पहला मुझे नाम देखना था
करता मैं भी बहसबाजी तुम्हारी बेकार की बातों पर
मगर मुझे तो मेरा काम देखना था
༺❦༻
उसकी तलब में हम ये सब भी भूल गए
वादों से मुकरने का सबब ही भूल गए
होश ही ना रहा की ये अब भूल गए
इस क़दर हम हुए उसके की मजहब ही भूल गए
ख्यालों में उसके ये कब भूल गए
करना था जो ग़ौरतलब ही भूल गए
उससे मिले तो दिल लगाने का मतलब ही भूल गए
༺❦༻
कोई इतना बेवफ़ा कैसे हो सकता है
या इस क़दर वो ख़फ़ा कैसे हो सकता है
समझता है ना वो मुझे और मेरी ख़ामोशी को
तो फिर देकर मुझे ये मायूसी
ऐसे दफ़ा कैसे हो सकता है
༺❦༻
इश्क़ में मुकम्मल कोई मुक़ाम नहीं होता
वसवसे हैं बस यहाँ बेसब्री के
जिसका मुकम्मल कोई अंजाम नहीं होता
टूट जाती हैं यहाँ नींदें और उम्मीदें भी बिखर जाती हैं
इसके सिवा इश्क़ में और कोई काम नहीं होता
༺❦༻
रूठते हम उससे रहे जो मनाने वाला नहीं था
ढूँडते हम उसे रहे जो आने वाला नहीं था
कमी थी उसकी या ग़लतफ़हमी थी उसकी
मुझको ये कोई समझानेवाला नहीं था
इंसानियत तो थी दर-बदर
मगर कोई निभानेवाला नहीं था
༺❦༻
बेशक़ थोड़ा मनमुटाव रहता है
मगर तुम्हीं से मेरा लगाव रहता है
तुम से ही हैं ये खुशियाँ मेरी
वरना तो हर पहर तनाव रहता है
बंजर से दिल में कहीं न कहीं
ख्वाहिशों का बिखराव रहता है
यही वजह है जो मेरी आँखों में
कहीं मेरे अश्कों का जलभराव रहता है
༺❦༻
कोई कलम उठाएगा तो अपना ख़ुमार लिखेगा
इश्क़ वो अपना बेशुमार लिखेगा
कुछ पल की बेचैनी या फिर वो इंतज़ार लिखेगा
हाल-ए-दिल ना होगा उससे बयाँ
वो तनहाइयाँ ही बार-बार लिखेगा
༺❦༻
छूट कर तुझसे तेरी यादों में जी रहा है
अजीब है ये अभी भी तेरे वादों में जी रहा है
नक़ाब ओढ़ कर इश्क़ का
ये फ़र्ज़ी लबादों में जी रहा है
इश्क़ का मारा ये कमबख़्त
तेरी फ़रियादों में जी रहा है
༺❦༻
शोर ना करें कहीं ये खामोशियाँ
इसलिए लिखना पड़ता है
हाल ऐ दिल पिरोना लफ़्ज़ों में
सीखना पड़ता है
कुछ दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता
तो फिर मज़बूर होकर चीखना पड़ता है
༺❦༻
फ़ुर्सत में मिले कोई मुझे
तो उसको मैं एक काम दूँगा
गुमसुदा हूँ मैं ढूँढ़ना है बस मुझे
जो मिल गया कहीं
तो उसे मैं इनाम दूँगा
༺❦༻
तुम मेरे हो मैं ये दावा नहीं कर सकता
हक़ीक़त यही मैं दिखावा नहीं कर सकता
तुम समझो बात को मेरी
मैं छलावा नहीं कर सकता
तुम ही हो अगर मेरे
तो इश्क़ भी तुम्हारे अलावा नहीं कर सकता
༺❦༻
मंज़िल एक है तो बहाना क्या
मौत मुक़र्रर है तो घबराना क्या
चाहत है जो शिद्दत की
तो रूह भी उसको सौंप दूँ
पर बेरुख़ी जो हुई उससे
तो कौन जाने फ़लाना क्या
༺❦༻
नहीं थमेगा लम्हा
ये अफ़साने यूँ ही चलते रहेंगे
होंगी बयानबाज़ियाँ भी इश्क़ में मगर
ये बहाने यूँ ही चलते रहेंगे
हिस्सेदार हैं सरकार ही मयखानों की
इसलिए बंद होंगी दवाइयाँ
मगर मयखाने यूँ ही चलते रहेंगे
༺❦༻
किस हिसाब का है ये जमाना…
इस बार उसको हमने आज़माने दिया
उससे ना वफ़ा हुई… ना प्यार
सो इस बार उसको हमने जाने दिया
एक दफ़ा नहीं… कई दफ़ा सब दोहराने दिया
फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया
༺❦༻
ख़रीद-फ़रोख्त जो हुई ख्वाहिशों की
तो इस बार मैं होशियारी करूँगा
बेच दूँगा अपने हर ग़म
और दिल खोल कर ख़रीददारी करूँगा
न रहेगी कोई कशिश… ना कोई ख़लिश
इस बार मैं समझदारी करूँगा
༺❦༻
निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में
और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ
जो तुझे ना पसंद आए… हर आदत सुधारता हूँ
मगर तुझे नज़र ना आई मेरी आशिक़ी
कि तेरी ख़ातिर खुद को सँवारता रहता हूँ
༺❦༻
फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में
उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए
नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई
की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए
गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में
वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए
༺❦༻
मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा
मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा
ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ
तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा
जो आज तू मेरे लिए है
कल वो तू बदल जाएगा
मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा
༺❦༻
थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई
ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई
जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई
सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं
༺❦༻
मुज़रिम हूँ क्या कोई मैं
जो मेरे साथ में तुम ऐसा बर्ताव कर रहे हो
हर बात को तुम मेरी नजरअंदाज करके
क्यों मुझसे ही तुम भेदभाव कर रहे हो
क्या नहीं है अब तुम्हें मुझसे हमदर्दी
जो ग़ैरों से अब इतना लगाव कर रहे हो
༺❦༻
तुम ज़माने की बातों में मत आया करो
बातें जो भी हों तुम्हारे दिल में
बामौक़ा उसे तुम आकर बताया करो
शक से ढह जाते हैं ढाँचे इश्क़ के
इसलिए जिस बात पर हो एतराज़ तुम्हें
वो बात तुम ख़ुद ही आकर समझाया करो
༺❦༻
लिखता हूँ जब भी मैं चुन-चुन कर उसके एहसास लिखता हूँ
यादें पिरोकर उसकी अल्फ़ाज़ों में हर लफ़्ज़ बेहद ख़ास लिखता हूँ
तुममें नहीं है समझ समझने की बस
वरना मैं तो प्यार से प्यार का सारांश लिखता हूँ
༺❦༻
आँखों में मूँद लेते हो कितनी रातें
और खामोशियों में कितनी बातें बंद कर देते हो
कहाँ से सीखा है ये नायाब तरीका
ज़रा मुझे भी बताओ ना
कैसे इन आँखों में इतनी बरसातें नज़रबंद कर लेते हो
༺❦༻
रास्ते तो और भी थे तुझे पाने के
हक़ तुझ पर अपना जताने के
मगर दिल ने कहा चल जाने दे
टूटने दे तू तेरी ख़्वाहिशें
और वो ख़्वाब भी तू जल जाने दे
नहीं हो सकती अब उससे वफ़ा
सो उसे इस दफ़ा तू बदल जाने दे
༺❦༻
घुटने नहीं टेके अभी मैंने हालातों के ख़िलाफ़
तो हर दफ़ा मैदान-ए-जंग में लड़ा हुआ हूँ
कैसे मान लूँ हार जब इन ठोकरों से ही मैं खड़ा हुआ हूँ
कहाँ सता सकीं हैं मुझको ये ठोकरें
इन ठोकरों को सता कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ
༺❦༻
ज़िंदगी वो गुलज़ार है
जहाँ कोई फूल बनकर आता है
कोई फ़िज़ूल बनकर आता है
किसी की फ़ितरत में होती है बेवफ़ाई
तो कोई वफ़ाओं का उसूल बनकर आता है
༺❦༻
बेरहम सी हैं ये धड़कनें जो हर पल मुझको सताती रहती हैं
मालिकाना हक़ ये हर किसी पर जताती रहती हैं
बोर हो गया हूँ मैं अब इस ज़िंदगी की बेरुख़ी से
बड़ी बेमुरव्वत है ये ज़िंदगी
जो हर मोड़ पर ज़ुल्म ढाती रहती है
༺❦༻
मायूसी भरी आँखों में टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ
समेटकर मैं दर्द दिल में उसकी ख़ातिर गुलाब लेकर बैठा हूँ
नहीं रहा मैं हिस्सा अब उसकी यादों का
मगर उसकी यादों की किताब लेकर बैठा हूँ
पूछे तो कोई मुझसे मेरी मोहब्बत
जोड़-जोड़ कर मैं पूरा हिसाब लिए बैठा हूँ
༺❦༻
मेहरबानी करके तुम ये सवाल मत पूछना
कि हमसे हमारा तुम हाल मत पूछना
कितनी मशक्कत से गुज़ारा ये साल मत पूछना
किस-किस ने बिछाया था जाल मत पूछना
क्या क्यों कौन — तुम ये फ़िलहाल मत पूछना
༺❦༻
सायर सारे झूठे होते हैं… ऐसा कहा जाता है
उनकी उम्मीदें और सहारे भी झूठे होते हैं
इशारों में बयां करते हैं अपनी बातें
मगर उनके इशारे भी झूठे होते हैं
कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे…
सच की वजह से ही तो वे टूटे होते हैं
यूँ नहीं… सारे सायर झूठे होते हैं
༺❦༻
नाज़ुक होती है जज़्बातों की डोर
इसलिए इन पर इतना ज़ोर नहीं करते
जाने दे ऐ दिल… इतना गौर नहीं करते
छोटी बातों पर इतना शोर नहीं करते
कुछ ख्वाहिशें पूरी नहीं होतीं
इसलिए खुद को इतना कमज़ोर नहीं करते
༺❦༻
आँखों में बस नमी रह गई थी
उसके बाद तो बस उसकी कमी रह गई थी
कह ना सके हम उससे कुछ भी…
जुबान होठों में ही जमी रह गई थी
आँखें खुली… होठ खामोश…
धड़कनें भी जैसे थमी रह गई थीं
༺❦༻
कोई ऐसा नहीं मिला अब तक
जो मेरे दिल की बात समझ सके
या मेरे हालात समझ सके
मिले बहुत लोग इस ज़माने में
मगर वो ना मिला… जो मेरे जज़्बात समझ सके
मेरी आँखों की गहराइयों में झाँक कर
वो बरसात समझ सके
༺❦༻
सायर सारे झूठे होते हैं… ऐसा कहा जाता है
उनकी उम्मीदें और सहारे भी झूठे होते हैं
इशारों में बयां करते हैं अपनी बातें
मगर उनके इशारे भी झूठे होते हैं
कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे…
सच की वजह से ही तो वे टूटे होते हैं
यूँ नहीं… सारे सायर झूठे होते हैं
༺❦༻
नाज़ुक होती है जज़्बातों की डोर
इसलिए इन पर इतना ज़ोर नहीं करते
जाने दे ऐ दिल… इतना गौर नहीं करते
छोटी बातों पर इतना शोर नहीं करते
कुछ ख्वाहिशें पूरी नहीं होतीं
इसलिए खुद को इतना कमज़ोर नहीं करते
༺❦༻
कुछ तो बात है तुझमें
जो ये बागवत कर रहा है
दिल मेरा मेरी ख़िलाफ़त कर रहा
नहीं रही अब इसको क़दर मेरी
कम्बख़्त ये सिर्फ़ तेरी हिफ़ाज़त कर रहा है
༺❦༻
या तन्हाई में उसको याद करता हूँ
नफ़रत भी उसी से है मुझे
हर रोज़ मैं जिसकी फ़रियाद करता हूँ
बदल चुकी है वो या अब वो हालात ना रहे
फिर भी उसकी याद में मैं अपना हर वक्त बर्बाद करता हूँ
༺❦༻
मेरे इश्क़ का अभाव बनके रह गई हो
या कहूँ तुम दिल का लगाव बनके रह गई हो
नज़दीकियाँ तुमसे इस कदर हुई हैं की
इश्क़ में तुम पहला पड़ाव बनके रह गई हो
गहराई ना नापो तुम दिल की मेरे
ग़मों के समंदर में तुम मेरी नाव बनके रह गई हो
༺❦༻
सोचा था कि उससे मैं इस बार कह दूँगा
दिल्लगी उसकी और अपना मैं ख़ुमार कह दूँगा
बेचैन हूँ मैं उसके इंतज़ार में कह दूँगा
इश्क़ में कितना हूँ उसके बेक़रार मैं कह दूँगा
कश्मकश मैं जिंदगी की या मेरे दिल का ग़ुबार मैं कह दूँगा
सोचता हूँ मैं हर बार की इस बार मैं कह दूँगा
༺❦༻
ये सच है की मुझे बहाना नहीं आता
बातें भी क्या कहूँ बताना नहीं आता
नज़रबंद ही हूँ जो नज़र आना नहीं आता
दिल की बात होठों पर आ जाती है
जो मुझे कुछ भी छुपाना नहीं आता
आशिक़ी भी हम से ना हो सकेगी कमबख़्त
जो अभी भी मुझको हक़ जताना नहीं आता
༺❦༻
मोहब्बत मुझे तन्हाइयों का सफ़र लगता है
फ़लसफ़ा दिल्लगी का या गलतफहमियों का घर लगता है
टूट ना जाए कहीं ये दिल सो इस निस्बत से मुझे डर लगता है
पहले पहल तो सब ठीक मगर बाद में फिर सब ज़हर लगता है
कितना भी दो तुम मुझे इश्क़ की सफ़ाई मगर इश्क़ मुझे क़हर लगता है
༺❦༻
उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है
इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है
घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है
इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ
ये उसी का कमाल चल रहा है
༺❦༻
आँखों में अश्क़ होना चाहिए
ऐसा नहीं है की हर शख़्स रोना चाहिए
हो जाती हैं साफ़ नज़र और दिल साफ़ हो जाता है अगर
तो फिर जायज़ है आँखें भिगोना चाहिए
༺❦༻
चलने दो आज ये कलम… मुझे हर बात लिखनी है
खामोशियों तले दफ़्न थी जो… वो हर बात लिखनी है
अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर वारदात लिखनी है
डर नहीं अब उसकी जुदाई का…
इसलिए उससे मिली रिहाई की सौगात लिखनी है
༺❦༻
तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को मैं बर्बाद करता रहा
बेक़सूर था ये दिल… फिर भी इसे सताता रहा
छीन लिए इससे सारे जज़्बात प्यार के
और तेरी यादों को आज़ाद करता रहा
टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल…
फिर भी तुझे ही याद करता रहा
༺❦༻
मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा
तुम तो जा चुके थे… मगर तुम्हारे लौटने की फ़रियाद करता रहा
हँसी आई ख़ुद पर… और दिल पर रोना आया
क्यों ही बेवजह मैं वक्त बर्बाद करता रहा
༺❦༻
कितना भी गहरा क्यों ना हो… इसे छुपाना पड़ता है
इश्क़ में आखिरकार पछताना पड़ता है
ठुकराए जाने पर भी जाना पड़ता है
अपने ही दिल को सताना पड़ता है
दिल तोड़ कर भी इश्क़ निभाना पड़ता है
अजीब है ये रस्म… मगर निभाना पड़ता है
༺❦༻
रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में
एक दफ़ा फिर से वो गुलाब लाया हूँ
किराए की हैं ये नींदें उधार के ख़्वाब लाया हूँ
हर पन्ने पर वफ़ा-ए इश्क़ लिखी हुई
मशक्कत से ढूँढ कर वो किताब लाया हूँ
༺❦༻
फिर कुछ ख़ास होने लगा था
मौजूद थी वो मुझमें कहीं
उसके वजूद का एहसास होने लगा था
मिटने लगे थे फिर फ़ासले सभी
वो इतनी पास होने लगा था
༺❦༻
उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता
कितना भी करूँ मैं… उससे फ़ासला नहीं हो सकता
यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो
यहाँ से कभी वो लापता नहीं हो सकता
इश्क़ दिल की एक सौगात है
ये कोई मसला नहीं हो सकता
༺❦༻
तेरी यादों की गिरफ़्त में
मेरे दिन-रात कट रहे हैं
उस पर ये तेरी बेरुख़ी
जिसकी हथकड़ियों में जकड़कर
मेरे जज़्बात सिमट रहे हैं
༺❦༻
तेरे आग़ोश में आकर मैं बेहोश सा हो जाता हूँ
या यूँ कहूँ कि तेरी मदहोशी में मैं भी मदहोश हो जाता हूँ
हो जाता हूँ आवारा तेरे इश्क़ में और ख़ानाबदोश हो जाता हूँ
इक पल भी तू जो होती है मायूस
तो ख़ुद मैं भी ख़ामोश हो जाता हूँ
༺❦༻
इश्क़ में हारा हूँ मैं
फिर भी तुम्हारा हूँ मैं
बेशक आवारा हूँ मैं
फिर भी तुम्हारा हूँ मैं
तुम समंदर हो अगर
तो किनारा हूँ मैं
फिर भी तुम्हारा हूँ मैं
༺❦༻
हिस्से में तुम्हारे बेशक यार बहुत थे
हर कमी में तुम्हारी बेशक तलबगार बहुत थे
समझते थे जो इशारे तुम्हारे समझदार बहुत थे
फिर भी तुम मायूस क्यों हो
तुम्हारे तो प्यार बहुत थे
༺❦༻
तुम्हारी ख़ुशी है इसमें यही सोचकर
मैं अपना जीना दुश्वार कर लेता हूँ
मालूम हैं वो सारे झाँसे और झूठे दिलासे
मगर फिर भी मैं उस पर ऐतबार कर लेता हूँ
कितनी भी फ़रेबी बेरहम या बेवफ़ा हो तुम
दिल इस क़दर तुम पर फ़िदा है कि
मैं भुला तुम्हारी हर ख़ता तुमसे प्यार कर लेता हूँ
कोई कितनी भी दे सफ़ाई या गवाही ख़िलाफ़त में तुम्हारे
मैं आँख मींचकर सभी को इनकार कर देता हूँ
༺❦༻
गुनगुनाते रहना हर पल इसे
ये ज़िंदगी भी एक गाना है
साज़ है ये खुशियों का और ग़मों का ये तराना है
मंज़िल नहीं है इस सफ़र की
ना ही कोई ठिकाना है
महफ़िल है ये चार दिन की
फिर इसे छोड़कर जाना है
༺❦༻
मुकम्मल ना हो सकी वो दास्ताँ अधूरी रह गई
कर भी ना सके हम वो बयाँ जो मज़बूरी रह गई
अक्स थी जो मेरी रूह की
उससे ही मिलों की दूरी हो गई
नफ़रत थी जिन तनहाइयों से
वही अब ज़रूरी हो गई
༺❦༻
मिलों चला हूँ गिर-गिर कर
तब कहीं चलना सीखा है
ख़ुद को हालातों से लड़कर
मैंने बदलना सीखा है
आसान नहीं था हर सबक़ ज़िंदगी में
कितनी ठोकरें खाकर मैंने सँभलना सीखा है
༺❦༻
उस गली से गुज़रने को ये दिल बेताब रहता था
ढल जाती थी जब शामें तो इन आँखों में उसका ख़्वाब रहता था
उसकी तलब इस क़दर थी दिल को
कि उससे मिलने को ये दिल बेहिसाब रहता था
ढूँढ़ता था उसे ख़्वाबों में दिल
जो हाथों में इसके गुलाब रहता था
༺❦༻
हम ना मिलेंगे हमारे अल्फ़ाज़ मिल जाएँगे
हमारी खामोशियों में जो क़ैद थे तुम्हें वो राज़ मिल जाएँगे
ना कर सके जो बयाँ हम अब तलक तुम्हें
वो हमारे अल्फ़ाज़ मिल जाएँगे
ढूँढ़ रहे हो जिन सवालों के जवाब तुम इतने दिनों से
मेरी आँखों में तो देखो तुम्हें वो सारे आज मिल जाएँगे
༺❦༻
एक शख़्स था मैं उससे प्यार करने लगा था
उसकी ख़ातिर मैं खुदकी
ख़्वाहिशें बेज़ार करने लगा था
ना जाने क्यों ये मैं यार करने लगा था
उम्मीदें मैं उससे बेशुमार करने लगा था
नज़रंदाज़ कर गया मैं ये भी
की वो इनकार करने लगा था
मेरी हर बात से ऐतराज
वो हर बार करने लगा था
सहम चुकीं थी ये धड़कनें
वो दिल का शिकार करने लगा था
करके क़त्ल वो मेरी मोहब्बत का
मेरे दिल से वो खिलवाड़ करने लगा था
अजीब था उसका वो लहजा इश्क़ में
जो तोड़ कर वो उम्मीदें तार तार करने लगा था
༺❦༻
इतनी खामोशी में इतने सवाल लेकर बैठा हूँ
इश्क़ में ठुकराया हूँ सो ये हाल लेकर बैठा हूँ
वैसे तो है ये ख़ामोशी मगर ज़हन में
यूँ इतने बवाल लेकर बैठा हूँ
आँखें भी मैं लालम लाल लेकर बैठा हूँ
तुम्हें अंदाजा ही नहीं कितने ग़म
और कितने मलाल लेकर बैठा हूँ
༺❦༻
सब अपने हो गए वो बेगाना लगने लगा था
उसके वादों में बहाना लगने लगा था
किसी की यादों मसरूफ़ था वो
उसकी यादों में कोई फलाना रहने लगा था
सो इस लिहाज से वो इश्क़ महज़
एक फ़साना लगने लगा था
लगने लगा वो अजनबी मगर
उसका हर तौर तरीका
जाना पहचाना लगने लगा था
༺❦༻
हम भी उस हलात से गुज़र चुके हैं
लेकर नींदें हम कई रातों से गुज़र चुके हैं
वाक़िफ़ हैं हम अब तो बेवफ़ाओं से भी
जो उनके दिलासों की सौगात से डर चुके हैं
कितनी दफ़ा हम उनके झाँसों में ठहर चुके हैं
༺❦༻
तेरे ख्यालों में डूबा मैं हर काम बेहतरीन कर लेता हूँ
तेरे एहसासों की मिठास से मैं खुदको नमकीन कर लेता हूँ
वैसे तो हूँ मैं भी शरीफ़ इक दर्जे का मगर
छुपकर तुझे ताकने ये तौहीन मैं कर लेता हूँ
बेरंग सी मेरी इस दुनियाँ को
तेरे ख्वाबों से मैं रंगीन कर देता हूँ
༺❦༻
ढूंड कर तुम हजारों में
कोई एक किरदार ले आते
समझ सके जो ख़ामोशियाँ
कोई एक समझदार ले आते
भीड़ तो यहाँ की सिर्फ़
ख़ुशियों की ख़रीद की है
मगर जो ख़रीद सके ग़म
कम से कम कोई एक ख़रीददार ले आते
༺❦༻
नजराना पेश करके तुझे खुशियों का
तेरे हिस्से जो आए मैं वो ग़म रख लेता
तू हो भी जाती जो किसी और की
तो भी तू मेरी है ये भरम मैं रख लेता
कहती जो इक दफ़ा की इश्क़ में आज़माना है तुझे
तो तेरी ख़ातिर मैं काँच पर क़दम रख देता
कहने को काफ़ी नहीं क्या मेरे दिल के हालात
तू नहीं मानती तो चल मैं खुदपे क़सम रख लेता
༺❦༻
एक शख़्स की आदत पड़ गई थी
दिल में उसकी हिफ़ाज़त बढ़ गई थी
था तो नहीं कुछ ख़ास उसमें उसके
बावजूद उससे चाहत बढ़ गई थी
उससे क्या मिला मेरी शराफ़त बढ़ गई थी
नज़रों से नजारों की नज़ाकत बढ़ गई थी
करने लगीं ये आँखें भी गुस्ताखियाँ
जो इन आँखों की हिमाक़त बढ़ गई थी
༺❦༻
ज़ालिमों का जमाना है मैं एतबार नहीं करता
यही एक कमीं है मेरी की मैं इजहार नहीं करता
मानता हूँ इक उसी शख़्स को मैं करीब मेरे
एक वो शख़्स जो मुझसे प्यार नहीं करता
झूठी हमदर्दियों का यूँ कारोबार नहीं करता
उसी से इश्क़ है मुझे जो इश्क़ में दावे बार बार नहीं करता
༺❦༻
तुम ना कहो चाहे हालात लफ़्ज़ों से
मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं
इनकी हर ज़ुबाँ हम जानते हैं
तुम ही सोचते हो अजनबी हमें
कि तुम्हें हम कम जानते हैं
तुम कहो न कहो मगर तुम्हारी
तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के
दरमियाँ हम जानते हैं
༺❦༻
शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं
यही वजह है जो इश्क़ में घबराए हुए हैं
रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं
जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने
उसी की ख़ातिर आज हम पराए हुए हैं
नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें
क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का
जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं
༺❦༻
जो पहले ना बदले वो
इस बार बदल गए
इसी तरह ही कितनों के
किरदार बदल गए
तलब भी बदल गई और
तलबगार भी बदल गए
वफ़ाओं के करते थे जो दावे, दिखावे
वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए
होने लगी हैं अब तो मोहब्बतें भी फ़र्ज़ी
जो सच्ची मोहब्बतों के
अब वो उम्मीदवार बदल गए
༺❦༻
ना जाने क्यों मैं ख़ामोशी में ख़यालों को बुनता रहता हूँ
कोई कुछ भी बोले, मैं ख़ामोशी से सुनता रहता हूँ
ऐतराज़, अफ़सोस या कहूँ कि परवाह ही नहीं मुझे इस ज़माने की
मस्त मौला शख़्स मैं खुद की ख़ामियों
और खूबियों को ख़ुद में ही बुनता रहता हूँ
༺❦༻
कुछ भी बुरा मत कहना उसे
वो आज भी मेरी जान है
तो क्या हुआ जो फ़ासले
हम दोनों के दरमियान हैं
मगर यकीनन ये हम दोनों के
सब्र का इम्तिहान है
༺❦༻
मुबारक हो महफ़िलें तुम्हें
हमको तो ये तन्हाई
अच्छी लगती है
नहीं चाहिए हमें
ख़ुदगर्ज़ों की महफ़िल
ये जो साथ है खड़ी
हमें ये परछायीं
अच्छी लगती है
༺❦༻
किसने गले से लगाया और
किसने पीठ पर वार किया था
किसको कितनी नफ़रत हुई थी मुझसे
और किसने कितना प्यार किया था
सब सटीक याद है मुझे
की किसने कैसा वव्यहार किया था
༺❦༻
तुम्हारी अपनी कहानी में हजारों किरदार होंगे
जहाँ तुम्हारी दुनिया और तुम्हारे यार होंगे
करीबी भी होंगे कोई और तुम्हारे
और हम वहाँ दर किनार होंगे
दुनियाँ भी वो तुम्हारी ही होगी
सो तुम्हारे ही सब जानकार होंगे
जाहिर सी बात है की उनमें हम बेकार होंगे
༺❦༻
सब समझता हूँ मैं तुम्हें
की तुम कैसी
फ़ितरत रखते हो
बस ज़ुबान पर ही है
हमदर्दी तुम्हारे
बाक़ी दिल में तो तुम
बस नफ़रत रखते हो
༺❦༻
तुम दूध सी गोरी हो
हम चायपत्ती से काले हैं
तुम महकता हुआ गुलाब हो
हम बदबूदार से नाले हैं
क़िरदार हो तुम किसी कहानी का
जबकि किस्सों में हम खुदको संभाले हैं
दुआओं की हकदार हो तुम
मगर हम बद्दुआओ के हवाले हैं
༺❦༻
उससे कोई प्यारा ना मिला हमें
वो बिछड़ा यूँ की मुड़ कर दोबारा ना मिला हमें
मोहब्बत का मेरी एक ही वो जरिया था
उसके बाद फिर कभी कोई सहारा ना मिला हमें
उसकी यादें तो जैसे समंदर थी
जबसे डूबा हूँ उसमें
अभी तक किनारा ना मिला हमें
༺❦༻
नजदीक से तो ना होगी महसूस
इसलिए अबकी दूर जाकर
तुमसे तुम्हारा प्यार देखेंगे
फ़ासले जब होंगे हम दोनों के दरमियाँ
तब हम तुम्हारा एतबार देखेंगे
कितनी है तुम्हें हमदर्दी मेरी
और कितनी अहमियत है
ये दोनों इस बार देखेंगे
༺❦༻
आशिक़ी का आख़िरी अंजाम लिखता हूँ
इश्क़ का मैं अक्सर तकिया कलाम लिखता हूँ
चर्चा जब इश्क़ की होती है
तो फिर उसकी तारीफ़ें मैं तमाम लिखता हूँ
बदनाम हो कहीं वो मासूम इसी लिहाज़ से
मैं अक्सर उसको गुमनाम लिखता हूँ
༺❦༻
इश्क़ में मैं कई ख़िताब लेकर बैठा हूँ
उनकी यादों से भरी पूरी किताब लेकर बैठा हूँ
टूटी नींदे टूटी उम्मीदें और टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ
वो शख़्स जो मुड़ कर आया नहीं
उसी शख़्स की ख़ातिर मैं आज भी गुलाब लेकर बैठा हूँ
༺❦༻
सोना तो मुझे भी था तेरे साथ
मगर सोना था मुझे तेरा ख़्वाब बन कर
तकिया बनकर तेरे सिरहाने का
या फिर कोई शायरी की किताब बनकर
लबों की मुस्कान तेरी या फिर वो महताब बनकर
मुझे सोना था तेरे साथ में महकता हुआ गुलाब बनकर
༺❦༻
हर वक्त उस शख्स के बिछड़ने का मलाल चल रहा है
नहीं समझ सकते तुम मेरे दिल का जो हाल चल रहा है
क्यों हुआ वो मुझसे दूर यूँ अक्सर ये सवाल चल रहा है
और क्या ही बयाँ करूँ मैं जो दिल ही बेहाल चल रहा है
रातों में रोना पलकें भिगोना फ़िलहाल चल रहा है
༺❦༻
अजीब हूँ मैं जो हर कहानी में अपना क़िरदार ढूँड लेता हूँ
मतलबपरस्ती ख़ुदगर्ज़ी इस दुनियाँ में मैं बेवजह ही कोई यार ढूँड लेता हूँ
रोकता हूँ मैं खुदको हर दफ़ा मग़र फिर भी आख़िरकार ढूँड लेता हूँ
खुदकी बेबसी मैं बेशुमार ढूँड लेता हूँ नंम हों आँखें तो ग़मों की बौछार मैं ढूँड लेता हूँ
मालूम है मुझे की सब दिखावा है यहाँ फिर भी मैं बेवजह कोई प्यार ढूँड लेता हूँ
༺❦༻
तुमसे मिलना मुक्कद्दर था मेरा
तुमसे बिछड़ना मजबूरी हो गई
ख़ुद खुदा ही हो गया ख़िलाफ़ मेरे
सो तुमसे यूँ बेवजह ही दूरी हो गई
मुमकिन नहीं था गुजारा तनहाई में
तुम हुए ही यूँ थे गुमसुदा की
अब ये ही मुझे जरूरी हो गई
༺❦༻
सिल गए मेरे होठ
इनमें अब कोई अल्फ़ाज़ ही ना रहा
मैं जो बोलता था सबसे
वो पहले वाला अब अंदाज़ ही ना रहा
रौंद कर फेंक दिए मैंने मेरे दिल के जज़्बात
जो क़दर ही ना रही इनको
सो इनका भी लिहाज ना रहा
༺❦༻
उनसे दिल लगाये बैठे हैं
हम ख्वाबों में महफ़िल सजाए बैठे हैं
वो मिले ना मिले ये मर्जी उसकी
उसे पाने की तमन्ना
हम मुस्तक़िल बनाये बैठे हैं
༺❦༻
अब ना रहेगा वो जो महफ़िल में
तुम्हारा इंतज़ार रहता है
ख़त्म कर देंगे हम जो दिल में
तुम्हारा ख़ुमार रहता है
कोशिश तो उसे भी है भुलाने की
जो इन ख़यालों में
जिक्र तुम्हारा बेशुमार रहता है
༺❦༻
सिल चुके थे होठ वरना वो दर्द तो
कई दफ़ा मेरी ज़ुबाँ पर आया था
आँखें भी ना बयाँ कर सकीं
वो दर्द जो मैंने दिल में दफ़नाया था
रूठ कर बैठा हूँ मैं अपने आप से
हर बार ये सोच कर की वो पराया था
ठुकरा कर गया है वो शख़्स
जिसको मैंने दिल से अपनाया था
༺❦༻
बेहतर ना थे हम उनकी समझ से
सो उनके दिल से निकाल दिए गए
नसीब ना हुई हमें उनकी आशिक़ी
बदनसीब थे हम जो बदक़िस्मतों की
महफ़िल में डाल दिए गए
༺❦༻
कुछ भी नहीं कहना मुझे
की साजिशों की सुरुआत
किसने की थी
कुछ नहीं कहना मुझे
की पीठ पीछे घात
किसने दी थी
ख़ुद ही एहसास
होगा एक रोज़ उसे
ये क़रामात जिसने भी की थी
༺❦༻
कोई हाथों में गुलाब थमा गया
फिर तोड़ कर नींदे
रातों में ख़्वाब थमा गया
बेचैन तो हम पहले भी थे
मगर वो आया और बेचैनियाँ
बेहिसाब थमा गया
महज़ कुछ दिन ही चला
वो सिलसिला इश्क़ का
फिर टूट गए वो ख़्वाब
और इन आँखों में अश्कों
का तालाब समाँ गया
༺❦༻
उम्मीदें कमज़ोर भी हों तो कोई बात नहीं
मगर हौसले तुम अपने भारी रखना
हार तो यार कुछ पल की ही है
फिर उसके बाद तुम जीत की तैयारी रखना
रुकना नहीं ना रोकना तुम अपने आप को
कैसे भी हों हालात तुम सफ़र ये अपना जारी रखना
༺❦༻
कुछ ख्वाहिशें भी उसके नाम कर दीं
और कुछ ख़्वाब भी मैंने नीलाम कर दिए
हश्र कुछ ऐसा हुआ मेरा इश्क़ में
की हर इल्ज़ाम वो मेरे नाम कर दिए
करके ग़ुमराह वो मेरी धड़कनों को
मेरे दिल को वो बदनाम कर दिए
शुकुन की उम्मीद हम उनसे खामखाँ कर बैठे
वो जो मेरे साथ में जुल्म तमाम कर गए
༺❦༻
कभी ना कभी ये तुम्हें भी मलाल होगा
अभी जो हमारा हाल है कभी वो
तुम्हारा भी हाल होगा टूटेंगी जब नींदे
तो देखना कैसे हाल बेहाल होगा
कैसे गुजारा मैंने ये वक्त तुम्हारे ज़हन में
ये सवाल होगा फिर सोचोगे तुम मुझे इतना
की हर वक्त तुम्हारे दिल में मेरा ही ख्याल होगा
༺❦༻
उम्मीद भी देखो मैं किससे कर रहा था
तोड़ी भी उसी ने थी मैं जिससे कर रहा था
दीवाना था उसका इस कदर की
दर-बदर मैं उसके ही किस्से कह रहा था
हंस रहे थे वो सब के सब मैं जिससे भी कह रहा था
༺❦༻
ढेर हूँ मैं महज़ ख्वाहिशों का
और इश्क़ में टूटी हुई शाख़ हूँ
माना मुझमें नहीं है ताजगी
मैं यादों की सुलगती सी राख हूँ
फिर भी कोई ख़ासियत होगी ही मुझमें
या बस ख़ाक ही ख़ाक हूँ
༺❦༻
कोई रंग ही ना चढ़ा मुझपर
जब से तू मेरी रगों में मिला है
तेरे आने से सजी हैं
मेरी यादों की महफ़िलें
और तेरी ही सोहबत में
मेरी खुशियों का सिलसिला है
༺❦༻
देखो मेरे ज़ख्मों पर
तुम मलहम दे देना
मुझे नहीं चाहिए ख़ुशी मुझे तुम ग़म दे देना
मैं वादा करता हूँ की इन पलकों पर आँशु ना होने दूँगा
किसी भी वजह से ना इनको मैं भिगोने दूँगा
बेशक समेट लूँ मैं ग़मों का समंदर
मगर तुमको ना रोने दूँगा
बाक़ी तुम जो चाहो मुझे ज़ख्म दे देना
भरोसा नहीं है जो अब भी
तो मुझे तुम क़सम दे देना
मोहब्बत भी तुम्हें फिर भी शिद्दत से करेंगे हम
बदले में तुम जो चाहो सितम दे देना
༺❦༻
यकीन करो हम उसके सताए हुए हैं
अभी ना पूछना क्यूंकि घबराये हुए हैं
दर्द ए दिल ख़ामोशियों में दफ़नाये हुए हैं
किसको देंगे हम इश्क़ में चोट
ख़ुद हम ही इश्क़ में चोट खाये हुए हैं
༺❦༻
वो चला गया लेकिन
आपनी यादें छोड़ गया है
तौफ़े में देकर वो अपने वादे छोड़ गया है
इश्क़ में नसमझी और जालसाझियों भरे
वो अपने इरादे छोड़ गया है
किस काम की हैं वो मेरी
जो मुरादें छोड़ गया है
༺❦༻
एक ख़्वाब है
जो मुझे बेताब कर रहा है
तोड़ कर मेरी नींदे ख़राब कर रहा है
हद होती इश्क़ में ज़्यादती की
इश्क़ में वो ज्यादती बेहिसाब कर रहा है
༺❦༻
तेरी नज़ाकत
की आदत डाल रखी है
ना जाने क्यों मैंने
ये आफ़त पाल रखी है
तुझसे ना होगी बागवत मेरी
सो मैंने इसे इबादत
में डाल रखी है
༺❦༻
जिम्मेदारियों से क्यों हूँ मैं दूर मत पूछो
किस कदर हूँ मैं अभी मज़बूर मत पूछो
हालात इस दिल के क्यों हैं चकनाचूर मत पूछो
या फिर किसका है इन सब में क़ुसूर मत पूछो
फिर भी ख़ामोश मैं क्यों हूँ तुम मेरा फ़ितूर मत पूछो
जिसने किया है ये सितम
उस सितमगर का मुझसे दस्तूर मत पूछो
༺❦༻
ना दिखी कमियाँ तो उसने
नज़रंदाज़ करना शुरू कर दिया
मेरे हर फ़ैसले पर उसने
ऐतराज करना शुरू कर दिया
मेरी मोहब्बत को
बदल कर नफ़रत में
ज़्यादती का उसने
आगाज शुरू कर दिया
और इस तरह उस बेरहम ने
इश्क़ में बेवफ़ाई का
रिवाज शुरू कर दिया
༺❦༻
कोई दिल की जुबान समझता है
कोई दिल को बेजुबान समझता है
किसी को मैं ढेर लगता हूँ राख का
तो कोई मुझको तूफ़ान समझता है
सबकी समझ को है सलाम मेरा
यहाँ जो भी मेरा दिल ऐ नादान समझता है
༺❦༻
नहीं रहा वो क़ैद अब वो आजाद हो चुका है
उसकी ख़ातिर जो सजाया था ख़्वाब वो बर्बाद हो चुका है
नहीं बची अब वो समझ भी समझने की हर शख़्स यहाँ ना मुराद हो चुका है
और इस समाज का हर रिवाज भी अब बेबुनियाद हो चुका है
या यूँ कहीं की इस जमाने में हर शख़्स वहियात हो चुका है
༺❦༻
इश्क़ में वफ़ाओं के झाँसे दिए जा रहे थे
बहला कर मासूमों को दिलासे दिए जा रहे थे
झूठी कसमें झूठे वादे भी इश्क़ में अच्छे ख़ासे दिए जा रहे थे
हमदर्दी तो इश्क़ में थी ही नहीं
हमदर्दियों के नाम पर बस तमाशे किए जा रहे थे
༺❦༻
इनकार ना करना जो एकबार भी इक़रार किया है
इसमें क्या हर्ज है जो एक बार भी तुमने प्यार किया है
कौन सा कर दिया है ज़ुर्म या किसी का जीना दुस्वार किया है
ये मसला मोहब्बत का ही तो है जो तुमने इसबार किया है
किसी को सौंपा है तुमने दिल उसपे ऐतबार किया है
༺❦༻
मुफ़्त में यहाँ बस वार किया जाता है
ऊँची क़ीमतों पर यहाँ प्यार किया जाता है
तौफ़े में धोखे मिल जाते हैं यहाँ
सौदा करना है जो अगर जज्बातों का
तो वो भी यहाँ बेशुमार किया जाता है
बिक जाती हैं सारी ख्वाहिशें
तोड़ कर ख़्वाब यहाँ ये कारोबार किया जाता है
झूठी उम्मीदें झूठे दिलासे
दिल के साथ यही हर बार किया जाता है
༺❦༻
न पूछो कितने बेताब हो कर हम बैठे हैं
इन आँखों में लेकर हम ख़्वाब बैठे हैं
उसकी यादों की लेकर हम किताब बैठे हैं
ठुकराया था उसने फिर भी लेकर हम गुलाब बैठे हैं
झूठी उम्मीदें झूठे वादे लेकर हम बेहिसाब बैठे हैं
༺❦༻
मालूम ही नहीं था
की आँखों में इतने इशारे होते हैं
क़ैद होती हैं इतनी ख्वाहिशें
और ख़्वाब भी इतने सारे होते हैं
मालूम नहीं था इश्क़ में
आँसू भी इसी किनारे होते हैं
༺❦༻
वो पास थी पर पास ना रही
पाने की उसको अब वो आस ना रही
दिल से लगाये फिरता था उसको
सच कहूँ तो उतनी अब वो ख़ास ना रही
तोड़ दिया मैंने हर ख़्वाब मेरा
इतनी शिद्दत की अब वो तलाश ना रही
༺❦༻
किस हद तक हो चुका हूँ तबाह दिख रहा है
झाँक कर देखो ना इन आँखों में क्या दिख रहा है
दर्द जो छुपाया था इन आँखों के दरमियाँ दिख रहा है
इन आँखों की गहराइयों में देखो ना
उजड़ गया है जो आशियाँ दिख रहा है
༺❦༻
भूल सा गया है वो अब सताता नहीं है
हाल ए दिल वो अपना अब बताता नहीं है
नींद भी नहीं आती अक्सर ये सोच कर
की अब वो ख्वाबों में आता नहीं है
नहीं रही अब उसको मुझसे हमदर्दी
या ये समझूँ की उसका
अब मुझसे कोई नाता नहीं है
༺❦༻
तुम्हारे एहसास में मौज़ूद हैं
कर लो कितना भी दूर हमको
तुम्हारी हर साँस में मौजूद हैं
नहीं होगा गुजारा हमारे बग़ैर
तुम्हारी हम आँखों की
हर प्यास में मौजूद हैं
༺❦༻
एक मिला था सफ़र में
जो गुलाब दे गया
तोड़ कर मेरी नींदें
वो ख़्वाब दे गया
मुद्दतों से दफ़्न था दिल में एक सवाल
मुस्तक़िल वो उसका जवाब दे गया
मेरी ख़ामियों का मुझको हिसाब दे गया
अनगिनत दे कर वो ख्वाहिशें मुझे
खामोशियाँ बेहिसाब दे गया
༺❦༻
बिकाऊ ही नहीं है मोहब्बत
बेवजह ही लोग ये बात लिख रहे थे
घूम कर देखा है मैंने भी उस बाजार में
जहाँ बिकाऊ थी मोहब्बत
और जज़्बात बिक रहे थे
༺❦༻
वो शख़्स ना रूठ जाए इस लिहाज़ से
मैंने हर अंदाज़ बदल दिया
इकलौती उसकी रज़ामंदी में
मैंने रस्मों रिवाज बदल दिया
चाहत भी बदल ली
और ऐतराज भी बदल लिया
मैंने उसकी ख़ातिर
ये दुनिया समाज ही बदल लिया
༺❦༻
ख़्वाब टूट रहे हैं और ख्वाहिशें चकना चूर हो रही हैं
हालात हैं जर जर जो साज़िशें भरपूर हो रही हैं
नहीं रहा मेरा किस्मतों से कोई वास्ता
सो ये मुंह मोड़ कर के मुझसे दूर हो रही हैं
मंजर भी कुछ ऐसे हैं अब की ये उम्मीदें भी मजबूर हो रही हैं
༺❦༻
होठ थे ख़ामोश मग़र आँखे हाल पूछ रही थीं
खामोशियों की जुबान से ये सवाल पूछ रही थी
बेबसी ये मेरे दिल की और ये धड़कनें
क्यों हैं बेहाल पूछ रही थी
मायूसी इन होठों की
और दिल में जो है मलाल पूछ रही थी
༺❦༻
इक तरफ़ा ही रहा वो इश्क़
उसे मंजूर ना हुआ
मेरे दिल में था एक वहम
सो मैं उससे दूर ना हुआ
उसकी भी अपनी दुनिया है
उसकी भी अपनी मर्जी है
उसने ठुकराया भी है
तो इसमें उसका कोई कसूर ना हुआ
༺❦༻
नहीं कर सकते वो बयाँ जो फ़िलहाल चल रहा है
कट तो रही है ज़िन्दगी मगर ज़िन्दगी में बवाल चल रहा है
सिमट गईं कितनी ख्वाहिशें बेबसी कि बंदिशों में
और कितनी ख्वाहिशों को बेवजह समेटने का मलाल चल रहा है
बेज़ार हो चुकी हैं मुस्कुराहटें भी हाल ए दिल भी अभी बेहाल चल रहा है
कश्मकश में हैं मेरी धड़कनें हर वक्त बस यही सवाल चल रहा है
क़सूर सब मेरा है या फिर उसकी नाराज़गी का ये कमाल चल रहा है
༺❦༻
बख्शीश में नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी
और ना ही तुमसे उधार में प्यार चाहिए
समझौते भी मुझको मंज़ूर नहीं
मुझको तू बेशुमार चाहिए
देखना है तुझे हर पल यूँ ही
मुझे तू इन आँखों में हर बार चाहिए
शिकायत नहीं तुझसे और ना ही कोई गिला है
बस तेरे हर ग़म पर मुझको अधिकार चाहिए
༺❦༻
दिल जिसपे आया
मैं उसको यार समझ बैठा
जिसने झूठी हमदर्दी जताई
उसको दिलदार समझ बैठा
ग़लतफ़हमी नासमझी
इस क़दर थी मुझमें की
एक ही वहम को मैं अहम
बार बार समझ बैठा
वो करती रही सितम
पर सितम
और मैं उसे
उसका प्यार समझ बैठा
༺❦༻
इंतज़ार कर रहा हूँ
मैं जिस तरह
मैं हर बार नहीं करता हूँ
तुम पर जितना कर चुका हूँ
इतना मैं किसी पर
ऐतबार नहीं करता हूँ
हाँ मसखरी करता हूँ
मैं बेशक मगर
इज़हार नहीं करता हूँ
तुम यकीन करो ना करो
मगर तुम्हारे सिवा और कहीं
मैं प्यार नहीं करता हूँ
༺❦༻
हाल-ए-दिल क्या कहूँ
मलाल चल रहा है
क़त्ल-ए-आम धड़कनों का
फ़िलहाल चल रहा है
किसको कहूँ गुनहगार है वो
हर बखत ये दिल में सवाल चल रहा है
༺❦༻
खो गया हूँ मैं उसके ख्यालों में
सो उसका ठिकाना ढूंड रहा हूँ
इतना लगाव हो चुका है मुझे उससे
की मैं वो ही शख़्स पुराना ढूंड रहा हूँ
कबसे बेचैन हूँ इंतज़ार में उसके
की उससे मिलने को
हर रोज़ बहाना ढूँड रहा हूँ
༺❦༻
फ़र्क़ करने लगो जो अहसासों में
तो वो समझदारी अच्छी नहीं लगती
बिक जाते जो ग़म बाज़ारों में
तो ख्वाहिशों की ख़रीदारी अच्छी नहीं लगती
मुकर जाते हैं लोग इश्क़ में अक्सर
जो इश्क़ में इतनी खुद्दारी अच्छी नहीं लगती
सौंप देना खुदको इश्क़ है
इश्क़ में दावेदारी अच्छी नहीं लगती
༺❦༻
भरोसा कर लूंगा मैं तुझपर
हर बार मत समझना
झूठे झाँसों में हुई है जो ग़लतफ़हमी
उसे तू प्यार मत समझना
समझ ना हो जबतक
खामोशियाँ समझने की
तू खुदको समझदार मत समझना
༺❦༻
तुम्हें क्या मालूम
कि तुम क्या चीज हो
निगाहों का आशियाँ हो
धड़कनों की दहलीज़ हो
बेढंग हूँ मैं इश्क़ में
तुम वफ़ाओं की तमीज़ हो
तराश कर बनाया है
तुमको उसने बड़ी फ़ुर्सत में
तभी तो इतनी अज़ीज़ हो
༺❦༻
दोस्ती तुमसे हुई तो ये जमाना रूठ गया
ये सच है की उनसे अब मिलना मिलाना छूठ गया
तुम जबसे मिले हो हर दोस्ताना छूट गया
ख़ुद ही महफ़िलें छोड़ दीं मैंने और मयखाना छूट गया
आ मिले तुम एक मोड़ पर और ये सफ़रनामा छूट गया
अपना लिया तुमने और फिर जो था बेगाना छूट गया
ग़ैरों की नज़र में नज़र आना छूट गया
पलट पलट कर ग़ैरों से नज़र मिलाना छूट गया
छूट गई वो अवरागी और वो था जो मेरा ठिकाना छूट गया
तुमसे मिला हूँ जबसे हर बहाना छूट गया
༺❦༻
खोखले नहीं हैं मेरे अल्फ़ाज़
मैं जज्बातों की गहराई लिखता हूँ
लिखते होंगे लोग तुकबाज़ी इश्क़ की
मग़र मैं तो उसकी यादों की दोहराई लिखता हूँ
कभी अपनी खामोशियों में उसके एहसास
तो कभी उसके अहसासों में अपनी तन्हाई लिखता हूँ
༺❦༻
कोई एक ही भूल बार बार कैसे कर सकता है
कोई खुदकी ख्वाहिशें बेज़ार कैसे कर सकता है
धोखा एक दफ़ा ही मुनासिब है
कोई दोबारा एतबार कैसे कर सकता है
क़ातिलों की फ़ितरत में है मुकर जाना
क़त्ल करके वो क़बूल यार कैसे कर सकता है
༺❦༻
लिखने पर आऊँ तो मैं सब लिखता हूँ
कुछ ख़ास तो कुछ बेमतलब लिखता हूँ
लिखता हूँ कभी मैं अपनी बेताबी
तो कभी उसकी कितनी है मैं तलब लिखता हूँ
लफ़्ज़ों में अपनी ख़ामोशी या फिर
दर्द ए दिल का सबब लिखता हूँ
༺❦༻
मुझे धोखा हर बार नहीं चाहिए
या यूँ समझो इक तरफ़ा प्यार नहीं चाहिए
ख़ुश हूँ मैं खुदकी परछाईं में
मुझे कोई जालीदार नहीं चाहिए
ख़ुदगर्ज़ी मतलबपरस्ती दावेदार नहीं चाहिए
बेशर्त मंजूर हो मुझे तुम
जो शर्त पर मिल रहे हो
तो छोड़ो यार नहीं चाहिए
༺❦༻
अजनबी ही तो थी वो
मैं जिसकी चाहत कर बैठा था
हर रोज मैं उसकी बातों
की आदत कर बैठा था
रूह के इतने करीब थी
वो की कई दफ़ा
मैं उसकी इबादत कर बैठा था
मगर महसूस ना हुआ
की बेवजह हूँ मैं उसकी ख़ातिर
खुदसे भी ज़्यादा
मैं जिसकी हिफ़ाज़त कर बैठा था
༺❦༻
शिकस्त ही मंज़ूर है
हमें इश्क़ में
मंजिलें मुक्कमल हों
ये ख्वाहिश नहीं है
जज्बातों भरा एक
एहसास है इश्क़
ये कोई साज़िश नहीं है
बेशक ना मिले
वो मेरे हिस्से में
फिर भी मैं उसका हूँ
मेरा इश्क़ ये
लावारिश नहीं है
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सच तो सच है उसे स्वीकारना पड़ेगा
इश्क़ जो करना है तो हारना पड़ेगा
हर लम्हा वो ना होंगे साथ
कुछ पल अकेले भी गुजारना पड़ेगा
नहीं चलेंगी जिद या ज़्यादती इश्क़ में
ऐसे ख्याल भी जो आयें ज़हन में
तो उन्हें मारना पड़ेगा
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आइए आपसे खुलकर बात करते हैं
आप पराए हो की अपने
ये सब भूल कर बात करते हैं
ऐतराज नहीं होगा किसी बात का
ना ही होगी नाराज़गी किसी बात पर
जो भी है सच वो सब क़बूल कर बात करते हैं
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मेरा सबकुछ तो मैंने तेरे नाम कर रखा है
तेरी ख्वाहिशों की ख़ातिर खुदको नीलाम कर रखा है
तू है की इश्क़ जताती नहीं और मैं हूँ की
तुझसे इश्क़ सरेआम कर रखा है
अजीब सी है ये बेरुख़ी तेरी
की तूने खुदको गुमनाम
और मुझको बदनाम कर रखा है
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नया नहीं था कुछ भी
दरमियाँ हमारे
वही सब कुछ पुराना था
वही थी तेरी शिकायतें
और वही तेरा रूठ जाना था
वही थी मेरी खामोशियाँ
और वही मेरा यूँ टूट जाना था
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नहीं है कुछ भी मेरे पास देने को
तुम्हें तो सुकून के दो पल भी नहीं दे पाऊँगा
ख़ुद मेरा आज इतना बर्बाद है की
तुम्हें सुनहरा वो कल नहीं दे पाऊँगा
कितनी उलझनों में उलझा हूँ मैं
और कितनी उलझनों में उलझी हो तुम
मैं बेबस ही इतना हूँ की इन उलझनों
का हल नहीं दे पाऊँगा
जिंदगी मेरी जर्जर है और
हाल भी मेरा बदतर है
दर-बदर का ठहरा मैं मुसाफ़िर
तुमको महल नहीं दे पाऊँगा
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तोड़ कर बेड़ियां मुझे मजबूरियों की
फिर से वो पल लाना है
उजड़ चुकी मेरी उम्मीदों में
फिर से वो ख्वाहिशों का महल सजाना है
होने दो ऐतराज मेरे आज को मुझसे
मुझे तो मेरा वो बेहतर कल बनाना है
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कोई सुनो मुझे भी मेरी कहानी कहनी है
ये मेरी ही कहानी है सो मेरी जुबानी कहनी है
जर्जर से मंज़र और हाथों में थे जो खंजर
चश्मदीद हैं ये निगाहें लहुलुहानी कहनी है
सुनोगे जो अगर तो दास्ताँ एक पुरानी कहनी है
ढूँड लेना कोई किरदार तुम अपने हिसाब का
जो मुझे वो कहानी जानी पहचानी कहनी है
बेबसी में बेबस है मुझे एक दीवानी कहनी है
खोई अरसों पुरानी एक निशानी कहनी है
बेज़ार सी ख्वाहिशें और बेबस ये धड़कनें
कशमकश में है ये ज़िंदगानी कहनी है
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होने को तो एक मुलाक़ात ही काफ़ी है
खोने को तो ये रात ही काफ़ी है
बारिशों का मौसम तुमको मुबारक
हमें तो इन आँखों की बरसात ही काफ़ी है
नहीं चाहिए दुनियादारी की समझ
लफ़्ज़ों में भरे एहसासों की मालूमात ही काफ़ी है
कोई समझ ले जो ये जज़्बात ही काफ़ी है
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अपनी कलम से इश्क़ को बेरहम लिखता हूँ
गलतफहमियों से भरा मैं इश्क़ को अपना भरम लिखता हूँ
गुज़र गया वो जो हादसा उसको मैं वहम लिखता हूँ
भर जाते हैं जब पन्ने उसकी यादों से
तो उसके बाद मैं अपने ग़म लिखता हूँ
उतारता हूँ गुस्सा मैं अपनी कलम पर
और उसके हर सितम मैं लिखता हूँ
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वो ना मिल सका हमें जिसको हम पाने चले थे
न हो सकी बयाँ वो दास्ताँ जो हम बताने चले थे
दर बदर से ठुकराये उस शख़्स को अपनाने चले थे
उसको चाहा है कितनी शिद्दत से
ये चाहत हम उसे जताने चले थे
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अस्तित्व को लगी ठेस
मैं ख़्वाबों में मिटाने लगा
हक़ीक़त में वो मेरी ना हुई
सो ख्वाबों में दिल बहलाने लगा
वादे करके वो मुकरता गया
और मैं अपने दिल को फ़ुसलाने लगा
झूठी उम्मीदें झूठे दिलासे
हर दफ़ा मैं दिल को दिलाने लगा
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इकलौता तू वो शख़्स था
मैं जिसकी चाहत में जी रहा था
जिसके इश्क़ में महफ़ूज़
मैं बड़ी हिफ़ाज़त से जी रहा था
इकलौता तू ही वो शख़्स था
मैं जिसकी आदत में जी रहा था
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ख़ामोश सी शाम उसपर तेरी यादें बे लगाम
जो मेरा जीना हराम कर रही हैं
कितना करूँ बर्दास्त तू बता
ये मेरे दिल के साथ में क़त्ल-ए-आम कर रही हैं
ज़्यादती ये इश्क़ में सरे आम कर रही है
लेजा तू मेरे पास से ये तेरी यादें
मुझे तो ये परेशान सुबह शाम कर रही हैं
उपर से ज़ालिम ये दुनिया
मेरे नाम ये तेरा हर इल्ज़ाम कर रही है
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