खामोशी की आवाज़ 😕👀✍️📒
जायज़ा क्या ही दूँ मैं तुम्हारे सवालों का
सिलसिला मिटता ही नहीं है उसके खयालों का
दिल में उसके मुझे आज भी वफ़ा दिखती है
वो जो इस समाज को बेवफ़ा सी लगती है
दिल की गहराई में जाकर लोग वार करते हैं
फिर इन साजिशों को ये लोग प्यार कहते हैं
वो ज्यादती जनाब इस हिसाब से करता था
कि तोड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदें भी ख़राब करता था
खूबियाँ ना मिलेंगी मुझमें क्यूँकि मैं ख़ामियों से भरा हूँ
और परवाह भी नहीं है इसकी मुझे की क्यों मैं इतना सरफिरा हूँ
मत पूछना मुझसे तुम की किसका यहाँ कैसा किरदार है
क्यूंकि माथे पर किसके लिखा है की ये शख़्स ग़द्दार है
तलब थी हमें जिस शख्स की उसी ने हमसे किनारा किया था
सोचो कैसी होगी वो बेबसी जिसमें हमने गुजारा किया था
उसकी चाहत में मैं भी क्या क्या यूँ ही कर गया
वो दरिया सी थी बह गई और मैं साहिल सा वहीं ठहर गया
आख़िर मैं भी तो हूँ इंसान सो थक चुका हूँ
सबको दे देकर इम्तिहान मैं थक चुका हूँ
हश्र जो भी हो हमारा हमें मंज़ूर है
मगर दिल को कुछ भी ना कहना क्यूँकि वो बेक़सूर है
जाने वालों को मुड़ कर मत आने देना
हो चुकी है जो खता उसे मत दोहराने देना
बारीकियाँ मेरी क्या आपने छानी है
मेरी हर ख़ामोशी में कोई कहानी है
हौसलों से लाचार और क़िस्मतों के मारे हुए हैं
यूँ हीं तो नहीं यहाँ लोग हमसे किनारे हुए हैं
हमने सबकी सूरतों का हिसाब रखा है
की किस किसने यहाँ सूरतों पर नक़ाब रखा है
हक़ीक़त की दुनियाँ में कहाँ वो कदम रखते हैं
शायर तो सब सरफिरे हैं ,शायरी में अपने वो वहम लिखते हैं
की उजाड़ कर शहर यहाँ आशियाने बनाये जायेंगे
ये दोगली सरकार है यहाँ तो सिर्फ़ बहाने बनाये जाएँगे
इश्क़ वफ़ा तो महज़ झाँसे हैं
मत पड़ना तुम इनमें ये झूठे दिलासे हैं
उसके आने में ही इतनी देर हो गई
की मेरी सारी उम्मीदें ही ढेर हो गईं
समझ ही ना सकोगे तुम मेरे किरदार को
ना मेरी नफ़रत को और ना ही मेरे प्यार को
बेवजह नहीं हूँ मैं भी कोई बात तो मुझमें भी ख़ास होगी
मैं नहीं हूँ किसी की तलब तो क्या कभी मेरी भी तलाश होगी
ढूंढ लो जाकर जो हमसे कोई बेहतर मिल जाएगा
हमें भी ख़ुशी होगी जो अगर मिल जाएगा
आ गया हूं इस मोड़ पर मैं वो वहम सारे छोड़ कर
हर ज़ख्म हर ग़म मैं उसी किनारे पर छोड़ कर
टूट गईं वो उम्मीदें जो मैने उससे रखी थी
उसमें वफ़ा की कमी थी बाकी लड़की वो अच्छी थी
तजुर्बा इतना है की नक़ाब के पीछे की सूरत पहचान लेता हूँ
किस अंदाज़ से कौन पेश आयेगा मैं उसकी जरूरत पहचान लेता हूँ
शायद ही कोई इतना बदनसीब होगा
या यूं कहूं की मुझ सा अजीब होगा
देखा है मैने यहां सबकी शराफ़त को
शरीफों को और उनकी आदत को
वक्त अच्छा हो तो नज़राने पेश किए जाते हैं
वरना यहां तो बस ताने पेश किए जाते हैं
आइए एक दफ़ा आप ये दिल थाम लीजिए
फिर उसके बाद जो मर्जी आप इल्ज़ाम दीजिए
कहीं न कहीं कमी रह जाती है
कितना भी हो यकीं गलतफहमी रह जाती है
कितनी ख्वाहिशें अपनी मार के बैठा हूं
इश्क़ में आखिर में मैं हार के बैठा हूं
ये जिन्दगी ही है कमबख्त जो हर रोज सबको सताती है
वरना मौत तो मुक़र्रर है जो एक रोज सबको आती है
अब तलाश शुरू की है हमने शुकून की
तुमको भुलाना भी पड़े तो भूला देंगे
बेहतर ये होगा की अब तुम फ़ासला कर लो
मेरी यादों से खुदका तबादला कर लो
इश्क़ में इस कदर हमें गुमराह किया गया है
की देकर झूठी उमीदें हमें तबाह किया गया है
उसकी समझ से परे हैं हम
इसलिए उसने समझा की बुरे हैं हम
जला आया मैं अपने ख़्वाब और उसको उसकी झूठी उम्मीदें देकर
फिर वहाँ से चला आया मैं टूटे ख़्वाब और टूटी नींदें लेकर
दो कदम चलो मेरे साथ ख़ुद ही तुम्हें एहसास हो जाएगा
कैसे टूटा था मेरा विश्वास तुम्हें भी विस्वास हो जाएगा
ख़त्म हो गया वो सिलसिला उसकी ना के बाद
नहीं रहा अब मसला कोई उसकी मना के बाद
शुकून के दो पल बस तेरे साथ में गुजर जाए
फिर उसके बाद चाहे ये मेरी जिंदगी क्यों ना उजड़ जाए
यादें आज भी उसकी बरकार हैं
वो जो शख़्स मुद्दतों से फ़रार है
वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में
गुज़र गए जमाने उसको मनाने में
ये इश्क़ भी साहब इतना आसान नहीं होता
ऐसा होता ही अगर तो ये दिल यूँ ही क़ुर्बान नहीं होता
आदत ही छोड़ दी हमने रूठने मनाने की
क्यूंकि ये दुनिया ही नहीं है दिल लगाने की
सोचा था तुम्हें मेरे जज्बातों की गहराई दिखायेंगे
दफ़्न हैं जहाँ मेरे ख़्वाब तुम्हें वो खायी दिखायेंगे
आप वरदान थे और हम अभिशाप थे
मुक़द्दर हम दोनों के इस क़दर ख़िलाफ़ थे
ज़िन्दगी से मौत की महज़ कुछ फसलों की दूरी है
इसलिए घबराना क्यों जब दोनों ही जरूरी हैं
गुस्ताखी ये हो गई हमसे की हम उससे वफ़ा कर बैठे
उसको मनाया हमने हर दफ़ा मगर खुद को हम ख़फ़ा कर बैठे
जिन्हें कुछ करना होता है वो कर जाते हैं
वरना दिलासों में कितने सपने मर जाते हैं
किसी की बद्दुआ तो असर लायी है
हवा भी अपने साथ ज़हर लायी है
वक्त बेहद खास है इसे बर्बाद मत करो
जो जा चुका है जाने दो उसे अब याद मत करो
मेरे जज्बातों से भरी हुई है जो मेरी वो डायरी हो तुम
लिखता हूँ मैं बड़ी शिद्दत जिसे वो मेरी शायरी हो तुम
हांसिल क्या ही होना है इन झूठे दिलासों से
लिहाजा मुझे दूर ही रखना तुम अपने झाँसों से
चुप ही रहना बेहतर होता है
बोलने से विवाद अधिकतर होता है
जंग तो आज भी ख्वाहिशों से जारी है
कितनी टूट गईं कितनों की बारी है
झूठ सारे मेरे सामने हो रहे थे
लोग तोड़ कर मेरा दिल मेरे सामने रो रहे थे
तुम्हें कैसे बतलाऊँ की मेरी खामोशी में कितना शोर होता है
लिखता हूँ कुछ और मगर लिखना कुछ और होता है
अंदाज़े ना लगाइए आप मेरी बातों की गहराईयों की
नहीं समझ सकते आप हालात मेरी रातों की तनहाइयों की
कोई रंग ही ना चढ़ा मुझपर
जब से तू मेरी रगों में मिला है
तेरे आने से सजी हैं
मेरी यादों की महफ़िलें
और तेरी ही सोहबत में
मेरी खुशियों का सिलसिला है
ढेर हूँ मैं महज़ ख्वाहिशों का
और इश्क़ में टूटी हुई शाख़ हूँ
माना मुझमें नहीं है ताजगी
मैं यादों की सुलगती सी राख हूँ
फिर भी कोई ख़ासियत होगी ही मुझमें
या बस ख़ाक ही ख़ाक हूँ
तड़प कर दर्द छुपाये हैं मैंने
इश्क़ में दर्द ही पाये हैं मैंने
ठोकर तो मिली थी मुफ्त में मुझे
बस सहारे के पैसे चुकाए हैं मैंने
उम्मीद भी देखो मैं किससे कर रहा था
तोड़ी भी उसी ने थी मैं जिससे कर रहा था
दीवाना था उसका इस कदर की
दर-बदर मैं उसके ही किस्से कह रहा था
हंस रहे थे वो सब के सब मैं जिससे भी कह रहा था
कभी ना कभी ये तुम्हें भी मलाल होगा
अभी जो हमारा हाल है कभी वो
तुम्हारा भी हाल होगा टूटेंगी जब नींदे
तो देखना कैसे हाल बेहाल होगा
कैसे गुजारा मैंने ये वक्त तुम्हारे ज़हन में
ये सवाल होगा फिर सोचोगे तुम मुझे इतना
की हर वक्त तुम्हारे दिल में मेरा ही ख्याल होगा
एहसान नहीं मुझे एहसास चाहिए
कोई भी हो मुझे दिल के पास चाहिए
गुफ़्तगू की इजाज़त नहीं है सबको
बातें ख़ास हों तो बंदा भी ख़ास चाहिए
ज़िन्दगी में कहीं भी राहत नहीं थी
सो जीने की हमको भी चाहत नहीं थी
तौफ़े में मिली थी तनहाइयाँ हमें
बस मरने की हमको इजाज़त नहीं थी
कुछ ख्वाहिशें भी उसके नाम कर दीं
और कुछ ख़्वाब भी मैंने नीलाम कर दिए
हश्र कुछ ऐसा हुआ मेरा इश्क़ में
की हर इल्ज़ाम वो मेरे नाम कर दिए
करके ग़ुमराह वो मेरी धड़कनों को
मेरे दिल को वो बदनाम कर दिए
शुकुन की उम्मीद हम उनसे खामखाँ कर बैठे
वो जो मेरे साथ में जुल्म तमाम कर गए
उम्मीदें कमज़ोर भी हों तो कोई बात नहीं
मगर हौसले तुम अपने भारी रखना
हार तो यार कुछ पल की ही है
फिर उसके बाद तुम जीत की तैयारी रखना
रुकना नहीं ना रोकना तुम अपने आप को
कैसे भी हों हालात तुम सफ़र ये अपना जारी रखना
किससे करते हो ज़िक्र मेरा
ज़रा भी जो मुझको जानते नहीं है
क्या पूछते हो तुम मेरी ख़ैरियत उनसे
जो ज़रा भी मुझको पहचानते नहीं हैं
ये दिल तो उसकी तरफ़दारी कर रहा है
मगर शायद ये मुझसे ग़द्दारी कर रहा है
मेरी ख़िलाफ़त में खड़ा है मुंह फेर कर मुझसे
मग़र उससे ये कमबख़्त यारी कर रहा है
कोई हाथों में गुलाब थमा गया
फिर तोड़ कर नींदे
रातों में ख़्वाब थमा गया
बेचैन तो हम पहले भी थे
मगर वो आया और बेचैनियाँ
बेहिसाब थमा गया
महज़ कुछ दिन ही चला
वो सिलसिला इश्क़ का
फिर टूट गए वो ख़्वाब
और इन आँखों में अश्कों
का तालाब समाँ गया
कोई सुनो मुझे भी मेरी कहानी कहनी है
ये मेरी ही कहानी है सो मेरी जुबानी कहनी है
जर्जर से मंज़र और हाथों में थे जो खंजर
चश्मदीद हैं ये निगाहें लहुलुहानी कहनी है
सुनोगे जो अगर तो दास्ताँ एक पुरानी कहनी है
ढूँड लेना कोई किरदार तुम अपने हिसाब का
जो मुझे वो कहानी जानी पहचानी कहनी है
बेबसी में बेबस है मुझे एक दीवानी कहनी है
खोई अरसों पुरानी एक निशानी कहनी है
बेज़ार सी ख्वाहिशें और बेबस ये धड़कनें
कशमकश में है ये ज़िंदगानी कहनी है
तोड़ कर बेड़ियां मुझे मजबूरियों की
फिर से वो पल लाना है
उजड़ चुकी मेरी उम्मीदों में
फिर से वो ख्वाहिशों का महल सजाना है
होने दो ऐतराज मेरे आज को मुझसे
मुझे तो मेरा वो बेहतर कल बनाना है
क्या फ़र्क़ पड़ता है
जिंदगी ये कितनी ही ख़ूबसूरत हो
जब पास में वो ही नहीं
जिसकी बेहद ज़रूरत हो
कितना है कर्ज तू बता ऐ जिंदगी
जो ताउम्र ये उतारना पड़ेगा
कब तक टूटेंगी ये नींदे
कब तक ख्वाहिशों को मारना पड़ेगा
वाक़िफ़ हूँ मैं उन सब से
जो ये दिखावे कर रहे हैं
हकीकत में तो उन्हें है नफ़रत
जो मुझसे हमदर्दियों के दावे कर रहे हैं
नहीं है कुछ भी मेरे पास देने को
तुम्हें तो सुकून के दो पल भी नहीं दे पाऊँगा
ख़ुद मेरा आज इतना बर्बाद है की
तुम्हें सुनहरा वो कल नहीं दे पाऊँगा
कितनी उलझनों में उलझा हूँ मैं
और कितनी उलझनों में उलझी हो तुम
मैं बेबस ही इतना हूँ की इन उलझनों
का हल नहीं दे पाऊँगा
जिंदगी मेरी जर्जर है और
हाल भी मेरा बदतर है
दर-बदर का ठहरा मैं मुसाफ़िर
तुमको महल नहीं दे पाऊँगा
थक चुका हूँ मैं दुनियादारी से
ऐ जिंदगी अब मेरा हिसाब कर दे
कर्ज जो बाक़ी हैं वो सब तू नक़दी ले
मगर बंद तू मेरी अब किताब कर दे
नया नहीं था कुछ भी
दरमियाँ हमारे
वही सब कुछ पुराना था
वही थी तेरी शिकायतें
और वही तेरा रूठ जाना था
वही थी मेरी खामोशियाँ
और वही मेरा यूँ टूट जाना था
दम तोड़ चुकी मेरी ख्वाहिशों की
एक ही दरख्वास्त बाक़ी थी
फिर भी पलट कर उसने देखा ही नहीं
उसे देखने को एक ही साँस बाक़ी थी
अब ना होगी कोई भी खता मुझसे
रखूँगा ना कोई अब मैं राब्ता तुझसे
ढूँड ले जा कोई मुझसे भी बेहतर
फिर ना पूछना अब मेरा पता मुझसे
मेरा सबकुछ तो मैंने तेरे नाम कर रखा है
तेरी ख्वाहिशों की ख़ातिर खुदको नीलाम कर रखा है
तू है की इश्क़ जताती नहीं और मैं हूँ की
तुझसे इश्क़ सरेआम कर रखा है
अजीब सी है ये बेरुख़ी तेरी
की तूने खुदको गुमनाम
और मुझको बदनाम कर रखा है
आइए आपसे खुलकर बात करते हैं
आप पराए हो की अपने
ये सब भूल कर बात करते हैं
ऐतराज नहीं होगा किसी बात का
ना ही होगी नाराज़गी किसी बात पर
जो भी है सच वो सब क़बूल कर बात करते हैं
सच तो सच है उसे स्वीकारना पड़ेगा
इश्क़ जो करना है तो हारना पड़ेगा
हर लम्हा वो ना होंगे साथ
कुछ पल अकेले भी गुजारना पड़ेगा
नहीं चलेंगी जिद या ज़्यादती इश्क़ में
ऐसे ख्याल भी जो आयें ज़हन में
तो उन्हें मारना पड़ेगा
आँखों में हम कितने ख़्वाब लेकर बैठे थे
उसकी ख़ातिर इन हाथों में गुलाब लेकर बैठे थे
उसने पलट कर देखा ही नहीं
हम अपने जज्बातों भरी किताब लेकर बैठे थे
ख़्वाब में उनके खोए हम
और यादें उनकी ताजा हो गईं
मौत हुई मेरे जज्बातों की
और मेरी ख्वाहिशें जनाज़ा हो गईं
गुजरने दो ना ये जो वक्त गुज़र रहा है
मेरे हर ज़ख्म हर ग़म को ये भर रहा है
मेरे हालात जैसे ठहर गए
ये कौन सा ठहर रहा है
शिकस्त ही मंज़ूर है
हमें इश्क़ में
मंजिलें मुक्कमल हों
ये ख्वाहिश नहीं है
जज्बातों भरा एक
एहसास है इश्क़
ये कोई साज़िश नहीं है
बेशक ना मिले
वो मेरे हिस्से में
फिर भी मैं उसका हूँ
मेरा इश्क़ ये
लावारिश नहीं है
कुछ भी नहीं कहना मुझे
की साजिशों की सुरुआत
किसने की थी
कुछ नहीं कहना मुझे
की पीठ पीछे घात
किसने दी थी
ख़ुद ही एहसास
होगा एक रोज़ उसे
ये क़रामात जिसने भी की थी
मंजिलें अलग़ थी हमारी पर एक ही क़ाफ़िले थे
सफ़र ही था वो जिसमें तुम मिले थे
कुछ पल के हम तुम हमसफ़र थे
और कुछ पल के वो सिलसिले थे
बेहतर ना थे हम उनकी समझ से
सो उनके दिल से निकाल दिए गए
नसीब ना हुई हमें उनकी आशिक़ी
बदनसीब थे हम जो बदक़िस्मतों की
महफ़िल में डाल दिए गए
सिल चुके थे होठ वरना वो दर्द तो
कई दफ़ा मेरी ज़ुबाँ पर आया था
आँखें भी ना बयाँ कर सकीं
वो दर्द जो मैंने दिल में दफ़नाया था
रूठ कर बैठा हूँ मैं अपने आप से
हर बार ये सोच कर की वो पराया था
ठुकरा कर गया है वो शख़्स
जिसको मैंने दिल से अपनाया था
हर कोशिश हमने की थी जिसको हसाने में
कोई कसर ना छोड़ी उसने मेरे दिल को उकसाने में
नुक़सान ही नुक़सान था उससे दिल लगाने में
वो जो उस्ताद थी रूठ कर जाने में
आख़िर क्यों है वो ख़फ़ा मैं वजह ढूँड़ने लगा
खामोशियाँ उसकी मैं बेवजह ढूँड़ने लगा
उसकी नाराज़गी और उसकी रज़ा ढूँड़ने लगा
इश्क़ में चूर मैं उसको हर जगह ढूँड़ने लगा
ग़ैर कोई था ही नहीं सभी तो यहाँ अपने ही थे
मगर मुसीबत में साथ कोई निभाया नहीं
मेरे साथ अभी जितने भी थे
पलट गए वो भी अपनी बातों से
क्या वाक़िफ़ नहीं थे वो मेरे जज़्बातों से
तोड़ कर फेंका है मेरा दिल उन्होंने हाथों से
मुतासिर नहीं थे क्या वो मेरी आँखों की बरसातों से
अब ना रहेगा वो जो महफ़िल में
तुम्हारा इंतज़ार रहता है
ख़त्म कर देंगे हम जो दिल में
तुम्हारा ख़ुमार रहता है
कोशिश तो उसे भी है भुलाने की
जो इन ख़यालों में
जिक्र तुम्हारा बेशुमार रहता है
उनसे दिल लगाये बैठे हैं
हम ख्वाबों में महफ़िल सजाए बैठे हैं
वो मिले ना मिले ये मर्जी उसकी
उसे पाने की तमन्ना
हम मुस्तक़िल बनाये बैठे हैं
सिल गए मेरे होठ
इनमें अब कोई अल्फ़ाज़ ही ना रहा
मैं जो बोलता था सबसे
वो पहले वाला अब अंदाज़ ही ना रहा
रौंद कर फेंक दिए मैंने मेरे दिल के जज़्बात
जो क़दर ही ना रही इनको
सो इनका भी लिहाज ना रहा
अजीब हूँ मैं जो हर कहानी में अपना क़िरदार ढूँड लेता हूँ
मतलबपरस्ती ख़ुदगर्ज़ी इस दुनियाँ में मैं बेवजह ही कोई यार ढूँड लेता हूँ
रोकता हूँ मैं खुदको हर दफ़ा मग़र फिर भी आख़िरकार ढूँड लेता हूँ
खुदकी बेबसी मैं बेशुमार ढूँड लेता हूँ नंम हों आँखें तो ग़मों की बौछार मैं ढूँड लेता हूँ
मालूम है मुझे की सब दिखावा है यहाँ फिर भी मैं बेवजह कोई प्यार ढूँड लेता हूँ
तुमसे मिलना मुक्कद्दर था मेरा
तुमसे बिछड़ना मजबूरी हो गई
ख़ुद खुदा ही हो गया ख़िलाफ़ मेरे
सो तुमसे यूँ बेवजह ही दूरी हो गई
मुमकिन नहीं था गुजारा तनहाई में
तुम हुए ही यूँ थे गुमसुदा की
अब ये ही मुझे जरूरी हो गई
मुझसे तो ये आज ही रूठा हुआ है
पूरा का पूरा ये समाज रूठा हुआ है
समझना चाहता हूँ मैं जमाने के उसूल
मगर यहाँ तो सारा रिवाज ही झूठा हुआ है
सच्चे हो तुम हम झूठे ही सही
समूचे हो तुम हम टूटे ही सही
इतनी फ़िकर अब हमें भी नहीं
तुम रूठे हो हमसे तो रूठे ही सही
हर वक्त उस शख्स के बिछड़ने का मलाल चल रहा है
नहीं समझ सकते तुम मेरे दिल का जो हाल चल रहा है
क्यों हुआ वो मुझसे दूर यूँ अक्सर ये सवाल चल रहा है
और क्या ही बयाँ करूँ मैं जो दिल ही बेहाल चल रहा है
रातों में रोना पलकें भिगोना फ़िलहाल चल रहा है
आँखें सब जानती है किसकी कौन है तलब जानती है
खामोशियों की हर ज़ुबाँ इशारों का हर मतलब जानती है
मायूसी ख़ामोसी ये सब का सबब जानती है
सोना तो मुझे भी था तेरे साथ
मगर सोना था मुझे तेरा ख़्वाब बन कर
तकिया बनकर तेरे सिरहाने का
या फिर कोई शायरी की किताब बनकर
लबों की मुस्कान तेरी या फिर वो महताब बनकर
मुझे सोना था तेरे साथ में महकता हुआ गुलाब बनकर
आशिक़ी का आख़िरी अंजाम लिखता हूँ
इश्क़ का मैं अक्सर तकिया कलाम लिखता हूँ
चर्चा जब इश्क़ की होती है
तो फिर उसकी तारीफ़ें मैं तमाम लिखता हूँ
बदनाम हो कहीं वो मासूम इसी लिहाज़ से
मैं अक्सर उसको गुमनाम लिखता हूँ
इश्क़ में मैं कई ख़िताब लेकर बैठा हूँ
उनकी यादों से भरी पूरी किताब लेकर बैठा हूँ
टूटी नींदे टूटी उम्मीदें और टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ
वो शख़्स जो मुड़ कर आया नहीं
उसी शख़्स की ख़ातिर मैं आज भी गुलाब लेकर बैठा हूँ
नजदीक से तो ना होगी महसूस
इसलिए अबकी दूर जाकर
तुमसे तुम्हारा प्यार देखेंगे
फ़ासले जब होंगे हम दोनों के दरमियाँ
तब हम तुम्हारा एतबार देखेंगे
कितनी है तुम्हें हमदर्दी मेरी
और कितनी अहमियत है
ये दोनों इस बार देखेंगे
उससे कोई प्यारा ना मिला हमें
वो बिछड़ा यूँ की मुड़ कर दोबारा ना मिला हमें
मोहब्बत का मेरी एक ही वो जरिया था
उसके बाद फिर कभी कोई सहारा ना मिला हमें
उसकी यादें तो जैसे समंदर थी
जबसे डूबा हूँ उसमें
अभी तक किनारा ना मिला हमें
तुम दूध सी गोरी हो
हम चायपत्ती से काले हैं
तुम महकता हुआ गुलाब हो
हम बदबूदार से नाले हैं
क़िरदार हो तुम किसी कहानी का
जबकि किस्सों में हम खुदको संभाले हैं
दुआओं की हकदार हो तुम
मगर हम बद्दुआओ के हवाले हैं
खुद ही मैं दिल तोड़ के बैठा हूं
इस बार उसकी यादें पीछे छोड़ के बैठा हूं
नतीजा कोई भी बेहतर न मिला मुझे इश्क़ का
हर तरफ़ से इश्क़ को मैं निचोड़ के बैठा हूं
वक्त है ही नहीं बर्बाद करने के लिए
ना उसकी शिकायतों के लिए
ना ही उसको याद करने के लिए
मेरे हर ज़ख्म में कोई मलहम सी हो तुम
समझती है जो मेरे हर ग़म मेरी कलम सी हो तुम
कोई और नहीं यहां तुमसा हंसी
कर लूं मैं वजू जो ज़मजम सी हो तुम
तुम्हारी अपनी कहानी में हजारों किरदार होंगे
जहाँ तुम्हारी दुनिया और तुम्हारे यार होंगे
करीबी भी होंगे कोई और तुम्हारे
और हम वहाँ दर किनार होंगे
दुनियाँ भी वो तुम्हारी ही होगी
सो तुम्हारे ही सब जानकार होंगे
जाहिर सी बात है की उनमें हम बेकार होंगे
देखना है मुझे की आख़िर कौन है वो
ख़ुशनसीब जो आपकी पसंद है
हमारे तो ख़िलाफ़ ही रहा है तुम्हारा दिल
देखना था की किसके साथ में रज़ामंद है
अकेले आए थे अकेले ही जाना है
तो फिर इतनी भीड़ इकट्ठी करके
यहाँ किसको दिखाना है
तरफदारी तुम्हारी और
ख़ुद की ख़िलाफ़त कर रहा हूँ
और वाक़िफ़ भी हूँ मैं की ये
खुदकी ही ख़ातिर मैं आफ़त कर रहा हूँ
किसने गले से लगाया और
किसने पीठ पर वार किया था
किसको कितनी नफ़रत हुई थी मुझसे
और किसने कितना प्यार किया था
सब सटीक याद है मुझे
की किसने कैसा वव्यहार किया था
खामोशियों छिपे हुए हर अल्फ़ाज़ समझ लेते हैं
हम आँखों की गहराइयों के राज समझ लेते हैं
किसकी फ़ितरत में क्या है यहाँ
हम सूरतों पर लिखे अंदाज़ समझ लेते हैं
सब समझता हूँ मैं तुम्हें
की तुम कैसी
फ़ितरत रखते हो
बस ज़ुबान पर ही है
हमदर्दी तुम्हारे
बाक़ी दिल में तो तुम
बस नफ़रत रखते हो
सिलसिला आशिक़ी का
यूँ ही चलता रहता है
लोग बदलते रहते हैं
और दिल यूँ ही
मचलता रहता है
मुबारक हो महफ़िलें तुम्हें
हमको तो ये तन्हाई
अच्छी लगती है
नहीं चाहिए हमें
ख़ुदगर्ज़ों की महफ़िल
ये जो साथ है खड़ी
हमें ये परछायीं
अच्छी लगती है
कुछ भी बुरा मत कहना उसे
वो आज भी मेरी जान है
तो क्या हुआ जो फ़ासले
हम दोनों के दरमियान हैं
मगर यकीनन ये हम दोनों के
सब्र का इम्तिहान है
बिकने को तो मोहब्बतें
भी खड़ीं हैं कतार में
निकल कर घरों से
कभी आओ बाज़ार में
पूछते नहीं हो हाल तुम भी
तभी तो हम बताते नहीं हैं
कैसी है चुभन मेरे दिल में
हर किसी से हम जताते नहीं हैं
रिश्ते इश्क़ के अब कोई निभाते ही नहीं
यही तो वजह है जो हम किसी को
अपने दिल में बसाते नहीं हैं
ये कैसा है एहसास की मैं तड़प रहा हूँ
एक उसी की तलाश में मैं तड़प रहा हूँ
वो बेख़बर मुंह फेर कर फरार हो गई
और मैं हूँ की उसी की आस में तड़प रहा हूँ
छोड़ कर मेरा दिल उसके पास में तड़प रहा हूँ
इतनी मासूम है वो
की उसे सताना भी नहीं आता
अपनी चाहत भरे जज्बातों को
बताना भी नहीं आता
जाती तो है हर दफा वो छोड़ कर मुझे
मगर उसे मुक्कमल जाना भी नहीं आता
झूठी हमदर्दी और हक़
मुझपर जताना नहीं आता
इतनी मासूमियत है उसमें
की उसे बहाना बनाना नहीं आता
बदल लो नक़ाब
या फिर चाहे किरदार बदल लो
फ़ितरत तो वही की वही रहेगी
तुम खुदको चाहे हर बार बदल लो
दे कर दर्द वो मुझे बड़ी जोर से
पूछते हैं मेरा दर्द वो किसी और से
नज़रंदाज़ कर रहे हैं वो मुझे और मेरी बातों को
देखते ही नहीं वो मेरे ज़ख़्मों को गौर से
आख़िर कितना ढूँड़ोगे तुम
मुझमें तो सब कमीं भरी है
इंसान ही तो हूँ मैं
सो ये लाज़मी भरी है
घर दूर नहीं है उसका
बस वो आना नहीं चाहता
फिर भी अजीब है वो
की अपनी चाहतों को
वो कभी छुपाना नहीं चाहता
मैं भी टाल रहा हूँ इस मसले को कबसे
मसला यही है कि
मैं उसको भुलाना नहीं चाहता
छोड़ कर उसको उसकी उलझनों में
मैं वादों से मुकर जाना नहीं चाहता
गुजरते हुए कल सफ़र में
मैंने एक शख़्स को देखा था
उसकी मायुषी और बेबसी
और उसके अश्क़ को देखा था
तुम नहीं जानते हो मगर
हम तुम्हें रब मानते हैं
एक तुम्हें ही छोड़ कर
बाक़ी सब ये जानते हैं
संजो कर जो रखीं हैं उनकी यादें
उन्हें अब विदा करना पड़ेगा
मुश्किल है कुछ ख्वाहिशों को हासिल करना
इसलिए उन्हें भी अलविदा करना पड़ेगा
आँखें पढ़ा करो आप दिल की बात पता चल जाती है
धड़कनों के छिपे हुए राज
और खामोशियों की सारी करमात पता चल जाती है
छिप जाते हैं खामोशियों में दिल के जज़्बात
मगर आँखों की नमीं से दिल में दफ़्न
ग़मों की बरसात पता चल जाती है
हाथ में खंजर थे आज उनके भी
जिनके हाथ में कभी फूल होते थे
उतर आए धोखेबाजी पर आज वो भी
जिनके वफ़ाओं के कभी उसूल होते थे
आँखों में आँखे डाल कर
मैंने पूछा था उससे की बता क्या है
की हर बात पर मेरी यूँ खामोश है क्यों
मुझे भी बता ना मेरी खता क्या है
टूट जाने दो उम्मीदें और
ख्वाहिशें भी अब बेज़ार होने दो
उजड़ जाने दो तुम मेरे ख़्वाब
और टूट कर नींदें भी मेरी तार तार होने दो
कब तक दूँ मैं ख़ुद को झूठे दिलासे हर बार
जो इस बार होता है आर पार तो यार होने दो
कोई तो ऐसा भी होगा जिसे हम पसंद आयेंगे
हमारे लहजे और हमारे हर ग़म पसंद आयेंगे
परहेज ना होगा जिसे हमारे किरदार से
कितने भी हों हम बेशर्म उसे पसंद आयेंगे
एक ही कमरे में दो इंसान रह रहे थे
इसके बावजूद भी मीलों के फासले दरमियान रह रहे थे
खामोशी इस कदर थी की दोनों बेजुबान लग रहे थे
एक दूसरे के हाल खबर से भी अनजान लग रहे थे
नहीं है कोई तुम जैसा हसीन
तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा
क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का
या हम जैसा कोई बदनसीब होगा
ना जाने क्यों मैं खामोशी में ख्यालों को बुनता रहता हूँ
कोई कुछ भी बोले मैं खामोशी से सुनता रहता हूँ
ऐतराज अफ़सोस या कहूँ की परवाह ही नहीं मुझे इस जमाने की
मस्त मौला शख़्स मैं खुदकी ख़ामियों
और खूबियों को ख़ुद में ही बुनता रहता हूँ
सब कुछ जान कर भी
तुम अनजान बन रहे थे
एक दौर ऐसा भी था की
तुम मेरी जान बन रहे थे
कैसे रोक सकता था तुझे जाने से
जब तेरी ही जाने की मर्जी थी
इश्क़ था तुझसे बेइंतहा
न की मेरी ख़ुदगर्ज़ी थी
ख़ुदगर्ज़ तो तुम भी थे
मगर हमें एहसास ना हुआ
महसूस तो हुआ कई दफा
मगर हमें विश्वास ना हुआ
सोचा पूछ लूँ तुमसे मैं एक सवाल
मगर फिर दिल ने कहा की रहने दे
टूटने दे तू कुछ नींदे कुछ ख़्वाब भी यूँ ही ढहने दे
मत पूछ तू इसकी वजह उससे
वो बहती है जिस धार से उसे बहने दे
पूछना था तुमसे एक सवाल
जो तुम जवाब दे दो
कितना दुखाया है दिल
और कितने तोड़े हैं
ख़्वाब जो तुम हिसाब दे दो
इश्क़ गुस्ताखी है आँखों की
ये लोग यूँ ही करते जाएँगे
जब तलक क़दर नहीं होगी यहाँ जज्बातों की
इश्क़ में ये लोग यूँ ही मरते जाएँगे
मिलता है सुकून मुझे वो जगह हो तुम
मेरी बेचैन इन धड़कनों की पनाह हो तुम
होती है जो मेरी खामोशियों में हँसी
मेरी उस हसीन सी हँसी की वजह हो तुम
शाम हो तुम मेरी ख्वाहिशों की और
मेरी खुशियों की सुबह हो तुम
नहीं करनी मुझे किसी से बराबरी
मैं सबसे पीछे ही रह लूंगा
मुबारक हो आपको आपकी ऊँचाई
मेरा क्या है मैं सबसे नीचे भी रह लूँगा
नहीं है कोई तुम जैसा हसीन
तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा
क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का
या हम जैसा कोई बदनसीब होगा
जरूरी था क्या दिल में आकर जाना
या फिर दिल को दुखाना जरूरी था
ठुकराना ही था आख़िर में अगर
तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था
वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था
तो फिर ये बताओ की क्या वो बहाना जरूरी था
हमारे जज्बातों की जहाँ हिफ़ाज़त नहीं है
ऐसी महफ़िलों की हमको चाहत नहीं है
मुंह फेर कर हम भीड़ से अक्सर तनहा चलते हैं
क्यूंकि भीड़ में हमें चलने की आदत नहीं है
किस हिसाब का है ये जमाना इस बार उसको हमने आजमाने दिया
उससे ना वफ़ा हुई ना प्यार सो इस बार उसको हमने जाने दिया
एक दफ़ा नहीं जाने कितनी दफ़ा हमने उसको सब कुछ दोहराने दिया
उससे ना वफ़ा हुई ना ही प्यार फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया
बदल गए हैं सब किरदार
और अब कहानी भी बदल गई है
नहीं रहे अब वो राजा और
अब रानी भी बदल गई है
और साये भी चुभने लगे हैं
हालात अभी ऐसे हैं
की अपने तो अपने
पराये भी चुभने लगे हैं
कैसे करूँ बयाँ मैं वो शब्द
जो मेरे दिल में अधूरे रह गए
पसंद आ गया उसको ये सारा जमाना
एक हम ही उसकी ख़ातिर बुरे रह गए
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