मेरे एहसास ❤️💕✍️


उसकी गली से निकलकर आया हूँ मैं 

यकीन करो मैं चाँद से मिलकर आया हूँ 

उसकी याद में संजोय हैं मैंने ख़्वाब 

उसकी ख़ातिर अपनी ख्वाहिशें मैं सिलकर लाया हूँ 


ख़रीद फ़रोश जो हुई ख्वाहिशों की

तो इस बार मैं होशियारी करूँगा 

बेच दूँगा मैं अपने हर ग़म फिर 

दिल खोल के ख़रीददारी करूँगा 

नहीं रहेगी अब कोई कशिश ना ख़लिश

इसबार मैं इतनी समझदारी करूँगा 


निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ 

जो तुझे ना पसंद आए हर वो आदत मैं सुधारता रहता हूँ 

मगर फिर भी तुझे ना नज़र आई ये मेरी आशिक़ी 

की किस तरह तेरी ही ख़ातिर मैं खुदको सँवारता रहता हूँ 


सहेज़ कर मैं उसकी यादें उसके एहसास लिखता हूँ

किस क़दर है वो इस ज़िंदगी में ख़ास लिखता हूँ 

उसके नाम से है धड़कन और उसी के नाम से है हर साँस मैं लिखता हूँ 

बेरुख़ी भी उसी की और उसी की तलाश मैं लिखता हूँ 


किसी की ख़ातिर सवाल हूँ मैं 

कोई कहता है की कमाल हूँ मैं

फ़रेब हूँ किसी की नज़र का 

तो किसी कि ख़ातिर इस्तकबाल हूँ मैं 


मत झांको मेरी आँखों में तुम मेरे हालात नहीं पढ़ पाओगे 

इन आँखों की गहराई में जो दफ़्न हैं वो जज़्बात नहीं पढ़ पाओगे 

मत ढूँड़ो तुम मेरे दिल की बात नहीं पढ़ पाओगे 


फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में 

उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए 

नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई 

की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए 

गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में

वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए 


मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा 

मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा 

ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ 

तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा 

जो आज तू मेरे लिए है 

कल वो तू बदल जाएगा 

मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा 


थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई 

ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई 

जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई 

सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं 


एक दफ़ा हमसे भी ये गुनाह हुआ था 

जाने अनजाने में किसी से इश्क़ बेपनाह हुआ था 

नहीं रही अब उसकी ख्वाहिश इस दिल में 

ये दिल जिसके इश्क़ में कभी तबाह हुआ था 


इश्क़ में इश्क़ का दावा करते हैं 

जज्बातों से अक्सर ये छलावा करते हैं 

वफ़ायें तो इनसे होती नहीं 

ये वफ़ाओं का महज़ दिखावा करते हैं 


तुम्हें चाहूँगा तो इस क़दर चाहूँगा 

की छोड़ मैं इस जमाने की फ़िकर चाहूँगा 

सौंप कर ये ज़िंदगी तुझको सदक़े में 

मेरा वादा है तुझको उम्र भर चाहूँगा 


नहीं चाहिए मुझे शर्तों में मोहब्बत 

तुम चाहो तो किनारा कर लेना 

हर फ़ैसला तुम्हारा मंज़ूर है मुझे 

 जो किनारा भी करना है अगर तुम्हें 

 तो बस तुम एक इशारा कर देना 


तुम्हें समझ नहीं आएगी ये बात पुरानी है 

खामोशियों में कहीं दफ़्न एक ज़िंदगानी है 

इन ख़ामोशियों को मेरी बेवजह जो समझो 

तो फिर ये तुम्हारे दिल की नादानी है 

हर लफ्ज़ जो मेरा ख़ामोश है 

हर लफ्ज़ में एक कहानी है 


छोटी सी अहमियत है जो छोटा ही क़िरदार है 

मग़र ख़ुदगर्ज़ी नहीं ये दिल ख़ुद्दार है 

नफ़रत नहीं किसी से और ना ही किसी से प्यार है 

ख़ुदगर्ज़ी हैं लोग यहाँ और कुछ यहाँ ग़द्दार हैं 

इसलिए उम्मीद और विश्वास ये दोनों ही यहाँ बेकार है 


हर घड़ी मैं तेरे इश्क़ में तेरा ख़्याल बुनता रहता हूँ 

अजीब हूँ मैं जो सवाल पर सवाल बुनता रहता हूँ 

सिलसिला ये मोहब्बत का महज़ कश्मकश में गुज़र गया जो 

तुझसे मिलने को तारीख़ मैं हर साल चुनता रहता हूँ 


किराए की है ये ज़िन्दगी 

जो कभी तो ये चुकाना पड़ेगा 

कितनी भी हो नाम पर वसीयत 

सब यहीं पर छोड़ कर जाना पड़ेगा 

रिश्ते कितनी भी ख़ास क्यों ना हों 

मगर वो जो रिश्ता मौत से है 

वो तो निभाना पड़ेगा 


दर्द-ए-दिल हर किसी से जताया नहीं जाता

दिल तोड़ कर हर किसी को दिखाया नहीं जाता

रखनी पड़तीं हैं कितनी बातें खामोशियों में समेट कर

यूँ बेवजह हर किसी को बताया नहीं जाता

फ़िक्र भी होनी चाहिए जज्बातों की इश्क़ में

करके मज़बूर किसी को इश्क़ में सताया नहीं जाता


ख़ामोश रही ज़ुबान मगर आँखों ने अपना काम कर दिया 

छुपा कर रखा था मैंने जो हाल-ए-दिल मेरा इसने वो सरे-आम कर दिया 

ढेरो ख़्वाहिशों और ढेरों उम्मीदों को इसने आज नीलाम कर दिया 

नहीं रहा अब ये दिल महफ़ूज़ इन आँखो ने इसे बदनाम कर दिया 


तोड़ कर रख देंगे तेरे ख्याल या फिर वो सवाल 

या फिर इन आँखों में तेरे बाद  बस नमी होगी 

बंजर होगी तेरे बाद ये जिंदगी ना फिर इस तरह की ये सरज़मीं होगी 

वसवसे होंगे वहाँ तेरी यादों के या हर बखत तेरी कमी होगी 

मत पूछ तू मेरी तबियत को की कैसे रहूँगा मैं तेरे बग़ैर 

जो तू ही ना रही तो ये सांस भी क्या लाज़मी होगी 


माना तेरे यार बहुत हैं 

इश्क़ में तेरे हक़दार बहुत हैं 

चहेते तेरी मुस्कान के 

या फिर अश्कों के तेरे दावेदार बहुत हैं 

ख़रीद सकें जो तेरे ग़म 

ख़रीददार बहुत हैं 

फिर भी तू रहना जरा संभल कर 

जो यहाँ पर लोग ग़द्दार बहुत हैं

क़ातिल जज्बातों के 

या इश्क़ में गुनहगार बहुत हैं 


नहीं समझ सका तू वो लहजा 

जो तुझको मैं समझाने आया था 

कितना बदल चुका हूँ  

कितनी शिद्दत से तुझको मैं बताने आया था 


उससे बिछड़ने की कोई ख़ास वजह नहीं थी

ख़ुद मैं ही लौट आया हूँ उसके दिल से 

जो उतनी वहाँ पर जगह नहीं थी 


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


कोई इश्क़ में वफ़ा करता है 

तो कोई दिलासे देकर जफ़ा करता है 

किसी से हमदर्दी बड़ी शिद्दत से होती है

तो इश्क़ में कोई जुल्म हर दफ़ा करता है 


वो चला गया लेकिन

उसके एहसास छोड़ गया है 

यादें वो अपनी मेरे पास छोड़ गया है 

ढूंड रहा हूँ मैं आज भी उसको उसके वादों में कहीं 

जो देकर वो मुझको झूठी आस छोड़ गया है 


अपने दिल में तुम मुझे पनाह दोगे 

और अपने ख़्वाबों में कहीं तुम मुझे जगह दोगे 

निभाओगे हर रस्म तुम वफ़ाओं की और 

मुझे उम्मीद है की इश्क़ तुम मुझे बेपनाह दोगे 


सिलसिला ये इश्क़ में आम हो गया है 

इश्क़ में सितम सरेआम हो गया है 

नहीं रही अब इश्क़ में जज्बातों की हिफ़ाज़त

जो ये बेवफ़ाई का पेशा और 

बेवफ़ाओ का इंतज़ाम हो गया है 


क़लम मेरी तुम्हें लिख रही है 

और मैं भी तुम्हें लिखना सीख रहा हूँ 

हर लफ्ज़ में तुम्हें मैं लिखता हूँ 

जितना भी मैं लिखना सीख रहा हूँ 


अहसास तब होगा जब ठोकर खाओगे 

इश्क़ में एक रोज़ जब रोकर आओगे 

अहमियत तब होगी तुम्हें भी मेरी 

एक मोड़ पर मुझे जब खोकर आओगे 


खामोशियाँ मैं अपनी तुम्हारे साथ कहना चाह रहा था 

जुटा कर मैं हौसला हालात कहना चाह रहा था 

तुम भी ना  समझ सके मैं जो बात कहना चाह रहा था 

पहली दफ़ा तो मैं जज़्बात कहना चाह रहा था 


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


सर्दियों में सवेरे की नींद सी हो तुम 

ज़िन्दगी की आख़िरी उम्मीद सी हो तुम 

गुनाह भी हो मेरे इश्क़ का तुम

और इस गुनाह की इकलौती चश्मदीद भी हो तुम 


कुछ तो बात है तुझमें 

जो ये बागवत कर रहा है 

दिल मेरा मेरी ख़िलाफ़त कर रहा 

नहीं रही अब इसको क़दर मेरी 

कम्बख़्त ये सिर्फ़ 

तेरी हिफ़ाज़त कर रहा है 


या तन्हाई में उसको याद करता हूँ 

नफ़रत भी उसी से है मुझे 

हर रोज़ मैं जिसकी फ़रियाद करता हूँ 

बदल चुकी है वो या अब वो हालात ना रहे 

फिर भी उसकी याद में  मैं अपना हर वक्त बर्बाद करता हूँ 


मेरे इश्क़ का अभाव बनके  रह गई हो 

या कहूँ तुम दिल का लगाव बनके रह गई हो 

नज़दीकियाँ तुमसे इस कदर हुई हैं की 

इश्क़ में तुम पहला पड़ाव बनके रह गई हो 

गहराई ना नापो तुम दिल की मेरे 

ग़मों के समंदर में तुम मेरी नाव बनके रह गई हो 


सोचा था कि उससे मैं इस बार कह दूँगा 

दिल्लगी उसकी और अपना मैं ख़ुमार कह दूँगा 

बेचैन हूँ मैं उसके इंतज़ार में कह दूँगा 

इश्क़ में कितना हूँ उसके बेक़रार मैं कह दूँगा 

कश्मकश मैं जिंदगी की या मेरे दिल का ग़ुबार मैं कह दूँगा 

सोचता हूँ मैं हर बार की इस बार मैं कह दूँगा 


ये सच है की मुझे बहाना नहीं आता 

बातें भी क्या कहूँ बताना नहीं आता 

नज़रबंद ही हूँ जो नज़र आना नहीं आता 

दिल की बात होठों पर आ जाती है 

जो मुझे कुछ भी छुपाना नहीं आता 

आशिक़ी भी हम से ना हो सकेगी कमबख़्त 

जो अभी भी मुझको हक़ जताना नहीं आता

झूठी हमदर्दी दिखाना नहीं आता 

अव्वल नहीं हूँ मैं इश्क़ में 

जो मुझको बातें बनाना नहीं आता 


मोहब्बत मुझे तन्हाइयों का सफ़र लगता है 

फ़लसफ़ा दिल्लगी का या गलतफहमियों का घर लगता है 

टूट ना जाए कहीं ये दिल सो इस निस्बत से मुझे डर लगता है 

पहले पहल तो सब ठीक मगर बाद में फिर सब ज़हर लगता है 

कितना भी दो तुम मुझे इश्क़ की सफ़ाई मगर इश्क़ मुझे क़हर लगता है 


इस दिल के क़ैदख़ाने से तेरी ज़मानत है 

तुझे जाना  है अगर तो जा तुझे इजाज़त है 

गलती नहीं तेरी की बेवफ़ा है तू 

जज्बातों से खेलने की तो तेरी पुरानी आदत है 


ख्वाहिशों का ख़ज़ाना और यादों की जायदाद हो तुम 

मेरे दिल की दुआ और इस रूह की मुराद हो तुम 

धड़कने भी करती हैं हर रोज़ तुम्हें सज़दा 

मेरी साँसों की हर सुबह की फ़रियाद हो तुम 


वो मुड़ कर नहीं आई ये मलाल रह गया है 

होठों पर ख़ामोशी और ज़हन में ये सवाल रह गया है 

खता उसकी है या मेरी ये कश्मकश फ़िलहाल रह गया है 

बयाँ ना हो सका मेरा ग़म , मेरा दिल ये बेहाल रह गया है


मत पूछो हमको हमसे 

हम इश्क़ में खुदको मार चुके हैं

तुम्हें महसूस हुआ या नहीं

हम इश्क़ में हार चुके हैं


एक दफ़ा की मुलाक़ात 

मैं एक दफ़ा चाहता हूँ 

एक दफ़ा ही मिले एक दफ़ा ही सही 

मैं वफ़ा के बदले वफ़ा चाहता हूँ 


ठुकराया गया हूँ मैं 

बाक़ी ख़ास कोई वजह नहीं थी 

उसने अपनाया नहीं मुझे

जो उसके दिल में कहीं 

शायद जगह नहीं थी 


उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है 

इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है 

घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है 

इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ 

ये उसी का कमाल चल रहा है 


न पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ 

तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ 

शायरी है तू मेरे ख्यालों की

तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ

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