दिल की गहराई 🥲🥹

 कभी ना कभी वो दिन आयेगा 

उसने  चुराया था जो मेरा शुकून वो छिन जाएगा 


मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर 

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर 


आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं 

इश्क़ में अजीब सी ये  बेबसी लिए बैठे हैं 


एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं 

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं 


ये दिल आज भी उसके इंतेज़ार में पागल है 

हासिल कुछ भी ना हुआ मगर फिर भी ये उसके प्यार में पागल है


तू ही बता की ये मेरे किस काम की हैं 

दिल धड़कनें भी तो तेरे नाम की हैं 


लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया 

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया 


हमने तो हमारी हारी है 

अब ये बाजी तुम्हारी है 


वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया 

खता ये थी मेरी की उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया 



वो जो मेरी खिलाफत में था मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा 

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा 


सामने हो वो जब भी मेरे मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ 

इकलौता वो शख़्स है मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ 


कभी तो मेरे ग़म वो कम आंकता है तो कभी वो छुपकर मेरे ज़ख़्म झांकता है इतनी सी है उसमें कमी जो मेरा उससे 36 का आँकड़ा है


उसकी अपनी ये मर्ज़ी है को वो निहायती ख़ुदगर्ज़ी है 


समझौते कर लिए अब ख़्वाहिशों से हमने 

वरना वो वक़्त ही और था जब गिला था रब से 


ख़्वाबों और ख़्वाहिशों का जंगल है 

ये ज़िंदगी भी चुनौतियों भरा दंगल है 


झूठी हैं हमदर्दियाँ और ये रिश्ते भी झूठे हैं 

टूट रही हैं उम्मीदें क्योंकि फ़रिश्ते भी झूठे हैं 


बहुत कुछ था बर्बाद होने को मेरे क़िस्से में

 फिर भी बर्बाद वो हुआ जो कभी था ही नहीं मेरे हिस्से में


जब भी तुम मिलते हो तो बस मेरी कमी लेकर मिलते हो 

कभी कुछ सच तो कुछ ग़लतफ़हमी लेकर मिलते हो 


जब ये ग़म मेरा है तो सबसे ख़ुलासा क्यों करें 

चीख लेंगे खामोशियों में हम यूँ बेवजह तमाशा क्यों करें 


मत पढ़ तू मेरी खामोशियों को नासमझ 

मेरे अल्फ़ाज़ भी तेरी समझ से बाहर हैं 


दिल ही धोखेबाज़ निकला जो ये इतना कुछ करता रहा 

ख़ता तो सारी इसकी थी मगर ख़ामियाजा मैं भुगतता रहा 


मेरे ज़हन में ये बात यहीं आकर रुकी हुई है 

की उसकी आँखें आख़िर किस बात पर शर्माकर झुकी हुई हैं 


एक अजनबी को हमने अपना मान लिया था 

जान से ज़्यादा था वो अजीज़ हमने इतना मान लिया था


हैरान है ज़माना की ये कैसा मैं बर्ताव कर रहा हूँ 

लोग मुझे ज़ख़्मी कर रहे हैं और मैं बैठ कर घाव भर रहा हूँ


मलाल ये है कि हम तेरे काबिल ना हुए 

भीड़ थी तेरे पीछे हम उस भीड़ में शामिल ना हुए


अब तो डर ही नहीं है मुझे इस तन्हाई से 

ना समंदर से ना समंदर की गहराई से 


तुझ से सुरू होकर तुझ पर ख़त्म होती है 

हर लफ़्ज में मेरे सिर्फ़ तेरी ही नज्म होती है 


खता आपकी तो माफ़ हो जाएगी मगर 

मैंने जो की तो ये दुनियाँ मेरे ख़िलाफ़ हो जाएगी


लगता है ये ज़िंदगी यूँ ही इम्तिहान में बीतेगी 

खामोशियों में क़ैद तनहाइयों के तूफ़ान में बीतेगी


हालात थोड़े और ख़राब होने दो उसके बाद ये साफ़ हो जाएगा 

कौन देगा साथ और कौन ख़िलाफ़ हो जाएगा 


किससे कहें गिले शिकवे या फिर किससे कहना चाहिए

सब तो हैं बेरहम यहाँ लिहाज़ा अब ख़ामोश ही रहना चाहिए 


सबकी ज़िन्दगी यहाँ बस झूठी उम्मीदों पर टिकी रहती है

और ये भी महज़ अफ़वाह है की सबकी क़िस्मत लिखी रहती है 


इश्क़ है उसी से उसी से नफ़रत कर बैठा हूँ 

हैरान हूँ मैं खुद पर की ये कैसी मैं जुर्रत कर बैठा हूँ 


हँसता हूँ मैं ख़ुद पर और खुदा पर नाराज भी होता हूँ 

ये उसकी थी खता जो मैं आज भी रोता हूँ 


डरता हूँ मैं तुमसे एक बात कहने में

थाम कर हाथ तुम्हारा तुमसे जज़्बात कहने में 


ढल गया है सूरज अब शाम आने वाली है 

सहेज कर रखी वो उसकी यादें अब काम आने वाली हैं 


गुज़र गई है ये ज़िंदगी उसके इंतज़ार में 

ख़ुद मैंने ही इसको किया है तबाह उसके प्यार में 


टूट कर बिखर गया है एक हिस्सा मेरे जज़्बात का 

किस किस को सुनाऊँ मैं ये क़िस्सा मेरे हालात का 


शर्म से झुकीं हुई उसकी आँखें भी ये बयाँ कर रही थी

की वो बेहया मेरे पीठ पीछे और क्या क्या कर रही थी 


नहीं हैं जो हम तुम्हारे जैसे तो तुम भी हमारे जैसे नहीं हो 

अगर नहीं हैं सही जो हम तो तुम भी तो ऐसे नहीं हो 


झूठी हमदर्दियों का ये जो तमाशा चल रहा है 

इसे चलने दो यूँ ही क्यूंकि ये  अच्छा खासा चल रहा है 


थक चुका हूँ मैं ऐ ज़िंदगी तेरे झाँसो से 

आख़िर हांसिल ही क्या हुआ मुझे तेरे झूठे दिलासों से 


इन आँखों को भी गुमराह किया गया है 

हमसे पूछो ना किस तरह किया गया है 


अब आप ही फ़ैसला करो न इस बात का 

क्या जायज़ नहीं है मसला मेरे जज़्बात का 


मेरी कलम भी मेरी अब ख़िलाफ़त करने लगी है 

 लिख लिख कर ये तुझे अब आफ़त करने लगी है 


तेरे इश्क़ में इस कदर इतराये रहते हैं

की नेमतें ख़ुदा की भी ठुकराए बैठे हैं 


जबसे मिला हूँ तुमसे तबसे ये बात जानी है 

की झरना है ये ज़िंदगी प्यार का जिसमें जज़्बातों का पानी है


वक्त तो चलता रहेगा इसी चाल से

लमहें तुम्हें रखना पड़ेगा सँभाल के 


आँखें जब भर आतीं हैं तो कितनी बातें उभर आती हैं 

वरना खामोशियों में तो अक्सर कितनी बातें मर जातीं हैं 


रिवाज तो टूटते हैं बनते हैं 

समाज की इस माला के ये भी तो मनके हैं 


कुछ दिन मुकदमें और फिर पेशी होगी 

फिर क्या होगा . वही अनदेखी होगी 


शुक्रिया तो मुझे हर साँप का करना है 

मगर सबसे पहले तो आप का करना है 


मत जताइये आप ये झूठी हमदर्दी जो निहायती फ़र्जी है 

आपके इरादों से साफ़ ज़ाहिर होता है कि ये ख़ुदगर्ज़ी है 


झूठे मुक़दमों के बाद फिर सबूत पेश किए जाते हैं 

गवाह भी झूठे हैं यहाँ उसके बावजूद पेश किये जाते हैं 


रहने दे यार मैं झूठी उम्मीदों का क्या करूँगा

जो ख़्वाब ही ना रहे तो मैं नींदों का क्या करूँगा


बेहतर होगा कि वो नींदे या वो ख़्वाब मिल जाये

या फिर तोड़ी क्यों उसने उम्मीदें ये जवाब मिल जाए 


ख़ामियाँ तुझमें भी हैं और ख़ामियाँ मुझमें भी हैं

गिला तू भी नहीं करता और गिला मैं भी नहीं करता 


ज़ख़्म तो यहाँ सबके दिल में रहते हैं 

लोग यूँ ही नहीं शायरों की महफ़िल में रहते हैं 


उम्र की दहलीज़ पर ये पड़ाव तो आते रहेंगे 

जब तक है ये ज़िंदगी उतर चढ़ाव तो आते रहेंगे 


इससे पहले कोई ख्वाहिश आप के दामन पर दाग लगा दे 

आप ऐसी ख़्वाहिशों को ही आग लगा दें 


रिश्ते नये बनाते ही तुम पुराने रिश्ते छोड़ देते हो 

आख़िर इतनी उम्मीदें तुम लोगों की कैसे तोड़ देते हो 


तुम्हीं से सीख कर तुम्हीं को ज्ञान देंगे 

कुछ कंधे ऐसे हैं जो तुम्हीं पर बंदूक़ तान देंगे 


आख़िर ये अफ़वाह किसने फैलायी है

की हिंदू और मुस्लिम भाई  भाई  हैं 


सारी शिकायतों का खुदसे गिला कीजिए

छोड़ कर ग़ैरों का साथ कभी ख़ुद से मिला कीजिए


प्यार ही है अगर तो छुपाया क्यों जाये 

जो नहीं है अगर तो निभाया क्यों जाये


क्या आप मुझे इतना बतायेंगे

की इस दिल को और कितना  सतायेंगे


वहम पर वहम मैं दिल में पाले हुए था 

मैं ही था उसे जो यादों में सँभाले हुए था 


कह दो ना तुम ये बात मेरी आँखों में आँखें डालकर 

रख सकोगे तुम मेरे दिल को सम्भालकर


मत दो तुम ये हवाला चाहतों का 

जो ये ख़ामोशी भी ना समझे तो तुम हमदर्द कैसे 


आप इतनी कमी जो निकाल रहे हैं

कोई पुरानी दुश्मनी निकाल रहे हैं 


मैं क्या हूँ और कैसा हूँ आख़िर ये तहक़ीक़ात क्यों करनी है 

तुम्हारी समझ से बुरा ही हूँ अगर तो मुझसे बात क्यों करनी है 


मत जाओ आप मेरी आँखों की गहराई में 

दम घुटने लगेगा आपका मेरी तनहाई में 


रिश्ते निभाने का अगर इरादा हो 

तो फ़र्क़ ही नहीं पड़ता प्यार कम हो या ज़्यादा हो 


इश्क़ में यूँ बिछड़ना क्या ज़रूरी है 

यही तय भी है अगर तो क्या इश्क़ में पड़ना ज़रूरी है 


अज़ीब से हालात हैं मेरे जो कमबख़्त सुधर भी नहीं रहे हैं 

कब से क़ोशिश रहा हूँ मैं ये कमबख़्त गुज़र भी नहीं रहे हैं 


यहाँ बातें सिर्फ़ झूठी अफ़वाहों के बारे में की जाती हैं 

लगा कर झूठे इल्ज़ाम झूठे गवाहों के बारे में की जाती हैं 


जानता था दिल की ये ख़ता ज़रूर होगी 

तोड़ कर वादे वो लापता ज़रूर होगी 


कुछ दिन और जो तुम मेरे ख़्वाबों में ठहर जाते

तो फिर बिछड़ने के सारे घाव मेरे भर जाते 


आना ही हैं तुम्हें जो मेरे ख़्वाबों में तो आ ज़ाया करो 

मगर एक ही गुज़ारिश है तुमसे कि आकर फिर ना ज़ाया करो 


ख़रीद फ़रोसी तो प्यार में भी है तभी तो ये टिकाऊ नहीं है 

झूठ कहते हैं ये दुनिया वाले कि प्यार ये बिकाऊ नहीं है

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