मेरे जज़्बात 💕✍️
मैंने दिल को मेरे इतने झाँसे दिए हैं
मत पूछो की कितने दिलासे दिए हैं
ख़ुद ही तोड़ कर बैठा हूँ मैं इसे
बावज़ूद इसके इतने तमाशे किए हैं
यकीन करो हम उसके सताए हुए हैं
अभी ना पूछना क्यूंकि घबराये हुए हैं
दर्द ए दिल ख़ामोशियों में दफ़नाये हुए हैं
किसको देंगे हम इश्क़ में चोट
ख़ुद हम ही इश्क़ में चोट खाये हुए हैं
सौदागर हूँ मैं ख्वाहिशों का
और ख्वाबों की ख़रीद करता हूँ
इत्तेफाक है की मैं क़ाबिल नहीं
मग़र सौदेबाज़ी मजीद करता हूँ
वो चला गया लेकिन
आपनी यादें छोड़ गया है
तौफ़े में देकर वो अपने वादे छोड़ गया है
इश्क़ में नसमझी और जालसाझियों भरे
वो अपने इरादे छोड़ गया है
किस काम की हैं वो मेरी
जो मुरादें छोड़ गया है
एक ख़्वाब है
जो मुझे बेताब कर रहा है
तोड़ कर मेरी नींदे ख़राब कर रहा है
हद होती इश्क़ में ज़्यादती की
इश्क़ में वो ज्यादती बेहिसाब कर रहा है
तेरी नज़ाकत
की आदत डाल रखी है
ना जाने क्यों मैंने
ये आफ़त पाल रखी है
तुझसे ना होगी बागवत मेरी
सो मैंने इसे इबादत
में डाल रखी है
जिम्मेदारियों से क्यों हूँ मैं दूर मत पूछो
किस कदर हूँ मैं अभी मज़बूर मत पूछो
हालात इस दिल के क्यों हैं चकनाचूर मत पूछो
या फिर किसका है इन सब में क़ुसूर मत पूछो
फिर भी ख़ामोश मैं क्यों हूँ तुम मेरा फ़ितूर मत पूछो
जिसने किया है ये सितम
उस सितमगर का मुझसे दस्तूर मत पूछो
ना दिखी कमियाँ तो उसने
नज़रंदाज़ करना शुरू कर दिया
मेरे हर फ़ैसले पर उसने
ऐतराज करना शुरू कर दिया
मेरी मोहब्बत को
बदल कर नफ़रत में
ज़्यादती का उसने
आगाज शुरू कर दिया
और इस तरह उस बेरहम ने
इश्क़ में बेवफ़ाई का
रिवाज शुरू कर दिया
तुम्हें तो बातें बनाना आता है
हमसे बेहतर बहाना आता है
इसलिए हक़दार हो तुम मोहब्बत के
जो मुक़्क़मल तुम्हें दिल बहलाना आता है
इन आँखों में सहेज कर मैंने कुछ राज़ रखे हैं
जो लफ़्ज़ों में ना हो सके बयाँ वो अल्फ़ाज़ रखे हैं
ख्वाबों में रखीं हैं मैंने अदायें तुम्हारी
और दिल में सहेज कर तुम्हारे हर अंदाज़ रखे हैं
ज़ुल्म और ज़्यादती इस नादाँ दिल पर बेवजह किया जाता है
देकर झूठे दिलासे इश्क़ में गुमराह किया जाता है
और क्या क्या गिनाऊँ मैं इश्क़ में क्या क्या किया जाता है
उजाड़ कर हर ख़ुशी जिंदगी को तबाह किया जाता है
कोई दिल की जुबान समझता है
कोई दिल को बेजुबान समझता है
किसी को मैं ढेर लगता हूँ राख का
तो कोई मुझको तूफ़ान समझता है
सबकी समझ को है सलाम मेरा
यहाँ जो भी मेरा दिल ऐ नादान समझता है
नहीं रहा वो क़ैद अब वो आजाद हो चुका है
उसकी ख़ातिर जो सजाया था ख़्वाब वो बर्बाद हो चुका है
नहीं बची अब वो समझ भी समझने की हर शख़्स यहाँ ना मुराद हो चुका है
और इस समाज का हर रिवाज भी अब बेबुनियाद हो चुका है
या यूँ कहीं की इस जमाने में हर शख़्स वहियात हो चुका है
इश्क़ में वफ़ाओं के झाँसे दिए जा रहे थे
बहला कर मासूमों को दिलासे दिए जा रहे थे
झूठी कसमें झूठे वादे भी इश्क़ में अच्छे ख़ासे दिए जा रहे थे
हमदर्दी तो इश्क़ में थी ही नहीं
हमदर्दियों के नाम पर बस तमाशे किए जा रहे थे
इनकार ना करना जो एकबार भी इक़रार किया है
इसमें क्या हर्ज है जो एक बार भी तुमने प्यार किया है
कौन सा कर दिया है ज़ुर्म या किसी का जीना दुस्वार किया है
ये मसला मोहब्बत का ही तो है जो तुमने इसबार किया है
किसी को सौंपा है तुमने दिल उसपे ऐतबार किया है
मुफ़्त में यहाँ बस वार किया जाता है
ऊँची क़ीमतों पर यहाँ प्यार किया जाता है
तौफ़े में धोखे मिल जाते हैं यहाँ
सौदा करना है जो अगर जज्बातों का
तो वो भी यहाँ बेशुमार किया जाता है
बिक जाती हैं सारी ख्वाहिशें
तोड़ कर ख़्वाब यहाँ ये कारोबार किया जाता है
झूठी उम्मीदें झूठे दिलासे
दिल के साथ यही हर बार किया जाता है
न पूछो कितने बेताब हो कर हम बैठे हैं
इन आँखों में लेकर हम ख़्वाब बैठे हैं
उसकी यादों की लेकर हम किताब बैठे हैं
ठुकराया था उसने फिर भी लेकर हम गुलाब बैठे हैं
झूठी उम्मीदें झूठे वादे लेकर हम बेहिसाब बैठे हैं
मालूम ही नहीं था
की आँखों में इतने इशारे होते हैं
क़ैद होती हैं इतनी ख्वाहिशें
और ख़्वाब भी इतने सारे होते हैं
मालूम नहीं था इश्क़ में
आँसू भी इसी किनारे होते हैं
वो पास थी पर पास ना रही
पाने की उसको अब वो आस ना रही
दिल से लगाये फिरता था उसको
सच कहूँ तो उतनी अब वो ख़ास ना रही
तोड़ दिया मैंने हर ख़्वाब मेरा
इतनी शिद्दत की अब वो तलाश ना रही
किस हद तक हो चुका हूँ तबाह दिख रहा है
झाँक कर देखो ना इन आँखों में क्या दिख रहा है
दर्द जो छुपाया था इन आँखों के दरमियाँ दिख रहा है
इन आँखों की गहराइयों में देखो ना
उजड़ गया है जो आशियाँ दिख रहा है
भूल सा गया है वो अब सताता नहीं है
हाल ए दिल वो अपना अब बताता नहीं है
नींद भी नहीं आती अक्सर ये सोच कर
की अब वो ख्वाबों में आता नहीं है
नहीं रही अब उसको मुझसे हमदर्दी
या ये समझूँ की उसका
अब मुझसे कोई नाता नहीं है
तुम्हारे एहसास में मौज़ूद हैं
कर लो कितना भी दूर हमको
तुम्हारी हर साँस में मौजूद हैं
नहीं होगा गुजारा हमारे बग़ैर
तुम्हारी हम आँखों की
हर प्यास में मौजूद हैं
एक मिला था सफ़र में
जो गुलाब दे गया
तोड़ कर मेरी नींदें
वो ख़्वाब दे गया
मुद्दतों से दफ़्न था दिल में एक सवाल
मुस्तक़िल वो उसका जवाब दे गया
मेरी ख़ामियों का मुझको हिसाब दे गया
अनगिनत दे कर वो ख्वाहिशें मुझे
खामोशियाँ बेहिसाब दे गया
बिकाऊ ही नहीं है मोहब्बत
बेवजह ही लोग ये बात लिख रहे थे
घूम कर देखा है मैंने भी उस बाजार में
जहाँ बिकाऊ थी मोहब्बत
और जज़्बात बिक रहे थे
वो शख़्स ना रूठ जाए इस लिहाज़ से
मैंने हर अंदाज़ बदल दिया
इकलौती उसकी रज़ामंदी में
मैंने रस्मों रिवाज बदल दिया
चाहत भी बदल ली
और ऐतराज भी बदल लिया
मैंने उसकी ख़ातिर
ये दुनिया समाज ही बदल लिया
ख़्वाब टूट रहे हैं और ख्वाहिशें चकना चूर हो रही हैं
हालात हैं जर जर जो साज़िशें भरपूर हो रही हैं
नहीं रहा मेरा किस्मतों से कोई वास्ता
सो ये मुंह मोड़ कर के मुझसे दूर हो रही हैं
मंजर भी कुछ ऐसे हैं अब की ये उम्मीदें भी मजबूर हो रही हैं
होठ थे ख़ामोश मग़र आँखे हाल पूछ रही थीं
खामोशियों की जुबान से ये सवाल पूछ रही थी
बेबसी ये मेरे दिल की और ये धड़कनें
क्यों हैं बेहाल पूछ रही थी
मायूसी इन होठों की
और दिल में जो है मलाल पूछ रही थी
इक तरफ़ा ही रहा वो इश्क़
उसे मंजूर ना हुआ
मेरे दिल में था एक वहम
सो मैं उससे दूर ना हुआ
उसकी भी अपनी दुनिया है
उसकी भी अपनी मर्जी है
उसने ठुकराया भी है
तो इसमें उसका कोई कसूर ना हुआ
झूठी मोहब्बत में खुदको कई बार सताते सताते
बिखर गया हूँ मैं इश्क़ में एक किरदार निभाते निभाते
झूठी उम्मीदों को इस दिल में इतनी बार दफनाते दफनाते
उजड़ गया हूँ मैं एक शख़्स को प्यार सिखाते सिखाते
तुम्हें तो बातें बनाना आता है
हमसे बेहतर बहाना आता है
इसलिए हक़दार हो तुम मोहब्बत के
जो मुक़्क़मल तुम्हें दिल बहलाना आता है
बहुत से मिले जो विश्वास घात कर गए
लगा कर गले वो पीठ पर वारदात कर गए
परख ना सके हम लोगों के इरादे
इसी वजह से वो ये करामात कर गए
सोचता हूँ की शायद इक गुनाह मैं संगीन कर बैठा हूँ
इक अजनबी पर इश्क़ में यकीन कर बैठा हूँ
हो भी सकता है की ये फ़ैसला मैं बेहतरीन कर बैठा हूँ
ये भी हो सकता है की खुदकी मैं इश्क़ में तौहीन कर बैठा हूँ
बहला फुसलाकर लाए गए हैं
तेरे इश्क़ में हम सताए गए हैं
अहमियत ना मिली हम ठुकराए गए हैं
हमें और ना सताओ हम ठोकर खाये हुए हैं
हासिल ना हो सकी वो तो उसको बेवफ़ा कह दिया
जालसाज़ी धोखेबाजी का उसको फ़लसफ़ा कह दिया
समझ ना सके तुम उसे तो दफ़ा कर दिया
तोड़ कर उसकी उम्मीदें उसको ख़फ़ा कर दिया
ज़िंदा हूँ मैं इतना काफ़ी नहीं हूँ
ऐ ज़िन्दगी तेरी उस खता की माफ़ी नहीं है
हर क़दम पर तूने ज़ुल्म किए हैं मेरे साथ
जायज़ ये तेरी नाइंसाफ़ी नहीं है
कुछ दिन चली उनकी वो नजरंदाज़ी
फिर एक रोज़ वो भी दूर हो गए
हांसिल ना हुआ कुछ भी इश्क़ में
जो ख़्वाब थे वो भी चकना चूर हो गए
न पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ
तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ
शायरी है तू मेरे ख्यालों की
तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ
खल रही है मुझको ये ख़ामोशी तुम्हारी,
और मेरे लफ़्ज़ों पर मुझको मलाल हो रहा है।
लहज़ा नहीं है मुझमें अल्फ़ाज़ों का,
वरना दिल तो आज भी तुम्हें बेहिसाब बोल रहा है।
इतनी शिकस्त खा कर बैठा हूँ
इसके बावजूद मैं ख़ुद को समझा कर बैठा हूँ
आसान नहीं था ये सफ़र ज़िंदगी का
ना पूछो मैं कितनी ठोकर खा कर बैठा हूँ
नहीं कर सकते वो बयाँ जो फ़िलहाल चल रहा है
कट तो रही है ज़िन्दगी मगर ज़िन्दगी में बवाल चल रहा है
सिमट गईं कितनी ख्वाहिशें बेबसी कि बंदिशों में
और कितनी ख्वाहिशों को बेवजह समेटने का मलाल चल रहा है
बेज़ार हो चुकी हैं मुस्कुराहटें भी हाल ए दिल भी अभी बेहाल चल रहा है
कश्मकश में हैं मेरी धड़कनें हर वक्त बस यही सवाल चल रहा है
क़सूर सब मेरा है या फिर उसकी नाराज़गी का ये कमाल चल रहा है
बख्शीश में नहीं चाहिए तुम्हारी हमदर्दी
और ना ही तुमसे उधार में प्यार चाहिए
समझौते भी मुझको मंज़ूर नहीं
मुझको तू बेशुमार चाहिए
देखना है तुझे हर पल यूँ ही
मुझे तू इन आँखों में हर बार चाहिए
शिकायत नहीं तुझसे और ना ही कोई गिला है
बस तेरे हर ग़म पर मुझको अधिकार चाहिए
दिल जिसपे आया
मैं उसको यार समझ बैठा
जिसने झूठी हमदर्दी जताई
उसको दिलदार समझ बैठा
ग़लतफ़हमी नासमझी
इस क़दर थी मुझमें की
एक ही वहम को मैं अहम
बार बार समझ बैठा
वो करती रही सितम
पर सितम
और मैं उसे
उसका प्यार समझ बैठा
इंतज़ार कर रहा हूँ
मैं जिस तरह
मैं हर बार नहीं करता हूँ
तुम पर जितना कर चुका हूँ
इतना मैं किसी पर
ऐतबार नहीं करता हूँ
हाँ मसखरी करता हूँ
मैं बेशक मगर
इज़हार नहीं करता हूँ
तुम यकीन करो ना करो
मगर तुम्हारे सिवा और कहीं
मैं प्यार नहीं करता हूँ
हाल-ए-दिल क्या कहूँ
मलाल चल रहा है
क़त्ल-ए-आम धड़कनों का
फ़िलहाल चल रहा है
किसको कहूँ गुनहगार है वो
हर बखत ये दिल में सवाल चल रहा है
खो गया हूँ मैं उसके ख्यालों में
सो उसका ठिकाना ढूंड रहा हूँ
इतना लगाव हो चुका है मुझे उससे
की मैं वो ही शख़्स पुराना ढूंड रहा हूँ
कबसे बेचैन हूँ इंतज़ार में उसके
की उससे मिलने को
हर रोज़ बहाना ढूँड रहा हूँ
फ़र्क़ करने लगो जो अहसासों में
तो वो समझदारी अच्छी नहीं लगती
बिक जाते जो ग़म बाज़ारों में
तो ख्वाहिशों की ख़रीदारी अच्छी नहीं लगती
मुकर जाते हैं लोग इश्क़ में अक्सर
जो इश्क़ में इतनी खुद्दारी अच्छी नहीं लगती
सौंप देना खुदको इश्क़ है
इश्क़ में दावेदारी अच्छी नहीं लगती
भरोसा कर लूंगा मैं तुझपर
हर बार मत समझना
झूठे झाँसों में हुई है जो ग़लतफ़हमी
उसे तू प्यार मत समझना
समझ ना हो जबतक
खामोशियाँ समझने की
तू खुदको समझदार मत समझना
तुम्हें क्या मालूम
कि तुम क्या चीज हो
निगाहों का आशियाँ हो
धड़कनों की दहलीज़ हो
बेढंग हूँ मैं इश्क़ में
तुम वफ़ाओं की तमीज़ हो
तराश कर बनाया है
तुमको उसने बड़ी फ़ुर्सत में
तभी तो इतनी अज़ीज़ हो
दोस्ती तुमसे हुई तो ये जमाना रूठ गया
ये सच है की उनसे अब मिलना मिलाना छूठ गया
तुम जबसे मिले हो हर दोस्ताना छूट गया
ख़ुद ही महफ़िलें छोड़ दीं मैंने और मयखाना छूट गया
आ मिले तुम एक मोड़ पर और ये सफ़रनामा छूट गया
अपना लिया तुमने और फिर जो था बेगाना छूट गया
ग़ैरों की नज़र में नज़र आना छूट गया
पलट पलट कर ग़ैरों से नज़र मिलाना छूट गया
छूट गई वो अवरागी और वो था जो मेरा ठिकाना छूट गया
तुमसे मिला हूँ जबसे हर बहाना छूट गया
खोखले नहीं हैं मेरे अल्फ़ाज़
मैं जज्बातों की गहराई लिखता हूँ
लिखते होंगे लोग तुकबाज़ी इश्क़ की
मग़र मैं तो उसकी यादों की दोहराई लिखता हूँ
कभी अपनी खामोशियों में उसके एहसास
तो कभी उसके अहसासों में अपनी तन्हाई लिखता हूँ
कोई एक ही भूल बार बार कैसे कर सकता है
कोई खुदकी ख्वाहिशें बेज़ार कैसे कर सकता है
धोखा एक दफ़ा ही मुनासिब है
कोई दोबारा एतबार कैसे कर सकता है
क़ातिलों की फ़ितरत में है मुकर जाना
क़त्ल करके वो क़बूल यार कैसे कर सकता है
लिखने पर आऊँ तो मैं सब लिखता हूँ
कुछ ख़ास तो कुछ बेमतलब लिखता हूँ
लिखता हूँ कभी मैं अपनी बेताबी
तो कभी उसकी कितनी है मैं तलब लिखता हूँ
लफ़्ज़ों में अपनी ख़ामोशी या फिर
दर्द ए दिल का सबब लिखता हूँ
मुझे धोखा हर बार नहीं चाहिए
या यूँ समझो इक तरफ़ा प्यार नहीं चाहिए
ख़ुश हूँ मैं खुदकी परछाईं में
मुझे कोई जालीदार नहीं चाहिए
ख़ुदगर्ज़ी मतलबपरस्ती दावेदार नहीं चाहिए
बेशर्त मंजूर हो मुझे तुम
जो शर्त पर मिल रहे हो
तो छोड़ो यार नहीं चाहिए
अजनबी ही तो थी वो
मैं जिसकी चाहत कर बैठा था
हर रोज मैं उसकी बातों
की आदत कर बैठा था
रूह के इतने करीब थी
वो की कई दफ़ा
मैं उसकी इबादत कर बैठा था
मगर महसूस ना हुआ
की बेवजह हूँ मैं उसकी ख़ातिर
खुदसे भी ज़्यादा
मैं जिसकी हिफ़ाज़त कर बैठा था
होने को तो एक मुलाक़ात ही काफ़ी है
खोने को तो ये रात ही काफ़ी है
बारिशों का मौसम तुमको मुबारक
हमें तो इन आँखों की बरसात ही काफ़ी है
नहीं चाहिए दुनियादारी की समझ
लफ़्ज़ों में भरे एहसासों की मालूमात ही काफ़ी है
कोई समझ ले जो ये जज़्बात ही काफ़ी है
अपनी कलम से इश्क़ को बेरहम लिखता हूँ
गलतफहमियों से भरा मैं इश्क़ को अपना भरम लिखता हूँ
गुज़र गया वो जो हादसा उसको मैं वहम लिखता हूँ
भर जाते हैं जब पन्ने उसकी यादों से
तो उसके बाद मैं अपने ग़म लिखता हूँ
उतारता हूँ गुस्सा मैं अपनी कलम पर
और उसके हर सितम मैं लिखता हूँ
वो ना मिल सका हमें जिसको हम पाने चले थे
न हो सकी बयाँ वो दास्ताँ जो हम बताने चले थे
दर बदर से ठुकराये उस शख़्स को अपनाने चले थे
उसको चाहा है कितनी शिद्दत से
ये चाहत हम उसे जताने चले थे
अस्तित्व को लगी ठेस
मैं ख़्वाबों में मिटाने लगा
हक़ीक़त में वो मेरी ना हुई
सो ख्वाबों में दिल बहलाने लगा
वादे करके वो मुकरता गया
और मैं अपने दिल को फ़ुसलाने लगा
झूठी उम्मीदें झूठे दिलासे
हर दफ़ा मैं दिल को दिलाने लगा
इश्क़ में ख़ुदसे जफ़ा कर रहा हूँ
ख़ुद को सता कर मैं उससे वफ़ा कर रहा हूँ
इनकार कर दूँगा मैं उसकी ज़्यादतों को
ये बात मैं ख़ुदसे हर दफ़ा कह रहा हूँ
इकलौता तू वो शख़्स था
मैं जिसकी चाहत में जी रहा था
जिसके इश्क़ में महफ़ूज़
मैं बड़ी हिफ़ाज़त से जी रहा था
इकलौता तू ही वो शख़्स था
मैं जिसकी आदत में जी रहा था
बदनसीब हैं हम की हमें याद नहीं किया जाता,
बेवजह ही वक़्त हम पर बर्बाद नहीं किया जाता।
जो कभी दिल में थे, अब दुआओं में भी नहीं,
हमारा ज़िक्र भी अब किसी बात में नहीं किया जाता।
ख़ामोश सी शाम उसपर तेरी यादें बे लगाम
जो मेरा जीना हराम कर रही हैं
कितना करूँ बर्दास्त तू बता
ये मेरे दिल के साथ में क़त्ल-ए-आम कर रही हैं
ज़्यादती ये इश्क़ में सरे आम कर रही है
लेजा तू मेरे पास से ये तेरी यादें
मुझे तो ये परेशान सुबह शाम कर रही हैं
उपर से ज़ालिम ये दुनिया
मेरे नाम ये तेरा हर इल्ज़ाम कर रही है
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