" क्या हूँ मैं और कैसा हूँ मैं आख़िर ये तहक़ीक़ात क्यों करनी है, तुम्हारी समझ से बुरा ही हूँ अगर तो मुझसे बात क्यों करनी है "

अधूरी कहानी 😕🥲✍️

 कतरा जो अश्क का बह गया है 

तुम समझे नहीं ये क्या कुछ कह गया है 


तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था 

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था 


ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये 

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये 


ज़िस्म के निहायती तलबग़ार ही होते हैं 

इश्क़ में भी तो यार ख़रीददार ही होते हैं 



जमानत ना दो मुझे सलाखों में रहना है 

मेरी तो दुनिया है वहाँ मुझे उसकी आँखों में रहना है 


हर लम्हा हसीन है यहाँ इसे तुम हंस के गुजार दो 

न की उलझी हुई इस जिंदगी की तुम कश्मकश में गुजार दो 



नहीं है जो हमदर्दी ही दिल में तो इन दावों का क्या करूँगा 

अहमियत ही ना हो इश्क़ में तो दिखावों का क्या करूँगा



करनी थी जितनी बेरहमी और जितना सताना था वो सता चुका है 

नहीं होगा ऐ दिल अब सितम जो था बेरहम वो जा चुका है 


बस इतनी ही समझ है 

सबको अपना समझ लेते हैं 



क़ातिल ही था हमदर्द मैं जता नहीं पाऊँगा 

मत पूछो तुम मेरा दर्द मैं बता नहीं पाऊँगा 



इश्क़ में हमदर्दियों के दिखावे चलते रहते हैं

वफ़ाएँ भी कहाँ होती हैं यहाँ 

वफ़ाओं के भी यहाँ बस दावे चलते रहते हैं 


समझे नहीं तुम मैं जो समझाने आया था

रूठ कर बैठे हो कबसे मैं मनाने आया था

सबसे अहम हो इकलौती तुम तुमको ये बताने आया था 



हादसा एक ऐसा हुआ कि मैं संभल न सका

लोग तो बदल गए मगर खुदको मैं बदल न सका 


मायूसियों के दलदल में मैं  खुशियाँ तलाश कर रहा था 

हासिल कुछ भी ना हुआ फिर भी मैं प्रयास कर रहा था 



उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ 

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ 


मत पूछो तुम मेरी गहराई की कितना अंदर हूँ मैं 

खामोशियों में ठहरा हुआ समंदर हूँ मैं


किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया 

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया 


एक ही कहानी में दो किरदार निभाया हूँ

नफ़रत भी उसी से की मैं जिससे प्यार निभाया हूँ 


ऐसा है तो क्या तुम एक सवाल पूछ लोगे

आँखों से मिलाकर  आँखें मेरा तुम हाल पूछ लोगे 


ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ 


उसकी सहमति और उससे सहानुभूति चाहता हूँ

प्रेम का अंदेशा तो नहीं है उससे मगर उसी से ये अनुभूति चाहता हूँ 



आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


उम्मीदें तो मेरी तुमसे ज़्यादा हैं 

तुम भी बताओ ना क्या इरादा है 


आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ 

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ 



किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया 

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया 



ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ 


एक शख़्स को समझने में जरा सी देर हो गई

यही वजह है जो मेरे जज्बातों के साथ हेर फेर हो गई 


भटक रहे हैं अब तो हम उसकी यादों में लावारिश हो कर 

समेटकर अपने जज़्बात अपनी हर ख़्वाहिश खोकर 


नहीं कर सकता इसमें समझौता मैं किसी से 

तुम मेरे हो हर जन्म के लिए


सच नहीं था मगर सच जैसा लग रहा था 

इतना यकीन था जिसको उसको कैसा लग रहा था 


झूठे हैं वो सारे सबूत जानते थे 

तेरी मासूमियत के पीछे में छुपी लोग करतूत जानते थे 


बनते बनते बात बिगड़ने लगी थी 

और फिर तो ऐसा हुआ बिन बात वो लड़ने लगी थी 


कर लिए फ़ासले उसने और अपनी राह ही बदल ली 

ठुकरा की मेरी दहलीज़ उसने तो पनाह भी बदल ली 


हम ही ना समझ सके की वो जिंदगी के मायने सिखाती गई 

हर ठोकर हमें जिंदगी की जिंदगी के आईने दिखाती गई 


ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 


चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके 

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके 


आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं 


शौकीन तो बेशक नहीं वो आदत से मजबूर ही होगा 

जिसने भी क़त्ल किया है मेरे जज़्बातों का वो बेकसूर ही होगा 


मत दो ये इल्ज़ाम तुम उसे की मेरे जज्बातों की क़ातिल है 

मज़बूरी उसकी भी कोई है जो इस गुनाह में वो शामिल है 



सतरंज है ये जमाना यहाँ रिश्तों में भी चाल चली जायेंगी 

आज़मा कर देखना कभी बेमिशाल चली जायेंगी 


हाल-ए-दिल मैं तुमसे क्या कहूँ 

तुम समझोगे ही नहीं तो क्या बयाँ करूँ 


ढूँड़ता रहा मैं लाखों में जिसे तुम्हीं तो वो शख़्स हो 

देखता हूँ मैं हर रोज़ जिसे आईने में तुम्ही तो वो अक्स हो 


क़ैसे कहूँ की अंधविश्वास में हूँ 

वो किसी और का हो चुका हूँ मैं जिसकी तलाश में हूँ 


शहर में यूँ तो कितने विद्वान पड़े हैं 

उसके बावजूद भी शहर के विद्यालय यूँ ही बेजान पड़े हैं 



तेरी यादों ने मुझे कमज़ोर कर रखा है 

उलझा कर तेरे झाँसों में मुझे झकझोर कर रखा है 


उसकी ख़ातिर मैंने इतना सब किया 

वो ही अब पूछती है की इतना कब किया 


कर ले क़ैद तू मुझको तेरी निगाहों में 

चाहिए उम्रक़ैद मुझको तेरी बाहों में 



लम्हें जो संभाल कर रखे थे वो तो फ़िज़ूल में उजड़ गए 

सहजते सहजते उसकी यादों की भूल में गुज़र गए 


मंज़ूर नहीं जो तुम्हें मौज़ूदगी हमारी तो तुमसे हम दूर चले जाएँगे 

मर्जी अगर यही है तुम्हारी तेरी तो हम ज़रूर चले जायेंगे 



चल तेरे साथ इस गुनाह में मैं भी हिस्सेदार हो जाता हूँ 

इकलौता तू ना बन गुनहगार तेरे साथ मैं भी साँझेदार हो जाता हूँ



कर चुका हूँ तय की अब उससे प्यार में ख़िलाफ़त होगी 

बहुत हो चुकी उससे मोहब्बत इस बार तो  उससे बग़ावत होगी 


बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ 

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ 


वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था 

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था 


तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है 

समझाऊँ भी कैसे दिल को,समझाना मुश्किल है 


आँखें जब भी उससे मिलीं वो घबरा रही थी 

कोई बात तो थी जो वो मुझसे कतरा रही थी 



टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे 

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे 


नहीं है आसान इस दिल को समझना 

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना 


बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ 

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ 


सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है 

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है 


किसी ना किसी की कमी महसूस होगी 

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी 


उम्र गुज़र गई हर शख़्स में एक ही किरदार ढूँडते ढूँडते 

होनहार समझदार और हर शख़्स में कोई एक खुद्दार ढूँडते ढूँडते 


ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 


तूफ़ानों में बुझते चिराग़ों को ढूँडते रहे 

हम भी हम जैसे अभागों को ढूँडते रहे 


झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं 

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं 


थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल 

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल 


भुला कर रंजिशें तमाम हम काम पर चल दिए 

मिलता है जहाँ दो पल का सुकून हम उस मुकाम पर चल दिए 


अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे 

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे 


मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का 

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का 


पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है 

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है 


चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर 

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर 


दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये 

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए 


क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है 

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है 


हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है 

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है 


भुलना तो नहीं चाहिए मग़र तुम वो बात भूल रहे हो 

खायी थी जो क़समों की वो सौग़ात भूल रहे हो 


फ़ितरत ही नहीं है हमारी किसी को ज़बरदस्ती जकड़ कर रखने की 

बहला फुसला कर रिश्तों की हथकड़ियों में पकड़ कर रखने की 


वो कहता है की सब समझता है 

खुदको वो रब समझता है 

मायूसी मेरी आँखों की 

और मेरी खामोशियों का 

मतलब समझता है 


तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ 

तू मान ना मान मगर मैं तेरा हूँ 

तू चमकती चाँदनी है अगर उस चाँद की 

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ 


बेतुके मेरे शब्दों में इतना बड़ा 

मैं सार कैसे कह सकता हूँ 

एक पिता की महानता और उसका

 मैं प्यार कैसे कह सकता हूँ 


मेरी बातों को मुलाक़ातों को ऐसे भुलाना नहीं था 

तुम्हें जाना ही था अगर तो ऐसे जाना नहीं था 

क्यूंकि तुम ही तो थे मंजिल मेरी मेरा 

तुम्हारे सिवा कोई और ठिकाना नहीं था 


उसे आज़माना भी था अगर हमें 

तो हम इम्तिहान भी देने वाले थे 

एक इशारा भी उसका काफ़ी था 

उसकी ख़ातिर हम तो अपनी जान भी देने वाले थे


तुझे खोने का इस दिल में मलाल चल रहा है 

तेरी यादों का सिलसिला अब तो फ़िलहाल चल रहा है 

अजीब सी है कश्मकश और अजीब सी हैं ये मजबूरियाँ 

की वक़्त भी बड़ी तेज़ी से अपनी चाल बदल रहा है 


वो कहती तो है की 

वो कहीं नहीं जाएगी

मगर फिर भी वो  

उसकी बेरुखी सही नहीं जाएगी


नाज़ुक होती हैं 

जज्बातों की डोर 

इसलिए इन पर 

इतना जोर नहीं करते 

जाने दे ऐ दिल 

इतना गौर नहीं करते 

यूँ छोटी छोटी बातों पर 

इतना शोर नहीं करते 

हांसिल नहीं होती हैं 

कुछ ख्वाहिशें भी 

इसलिए खुदको 

इतना कमज़ोर नहीं करते 



कितनी तो सिफारिस की थी तब उसने बारिश की थी 

कैसे कहूँ की मेरा हमदर्द है वो खुदा

 जिसने मेरे ख़िलाफ़ इतनी साज़िश की थी



आ गए हम भी इश्क में हार कर 

कर्ज़ उनकी ख्वाहिशों का उतार कर 

और अपने ख्वाबों को इन्हीं हाथों से  उजाड़ कर


सायर तो सारे के सारे झूठे होते हैं 

उनकी उम्मीदें और उनके सहारे भी झूठे होते हैं 

करते हैं वो बातें बयां अपनी इशारों में 

मगर उनके तो सारे  इशारे भी झूठे होते हैं

कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे 

सच की वजह से ही तो वे बेचारे टूटे होते हैं 

यूं हैं नहीं सारे सायर झूठे होते हैं


आँखों में अश्क़ होना चाहिए 

ऐसा नहीं है की हर शख़्स रोना चाहिए 

हो जाती हैं साफ़ नज़र और 

दिल साफ़ हो जाता है अगर 

तो फिर जायज़ है आँखें भिगोना चाहिए 


टूट गईं हैं नींदें तो क्या 

नींदें तो टूटती रहती हैं 

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या 

उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं 


प्रीत के दामन में 

मोती अहसासों के भरना 

वास्ता जिस्मों से कम 

हमेशा साँसों में उतरना 


उनकी याद आती रहती है 

उनसे मिलने की इस दिल से 

फ़रियाद आती रहती है 

क्या थी कमी हम में 

जो छोड़ गए वो हमें 

हर ख़बर हमें उनकी 

उनके बाद आती रहती है 


कहने दो ना मुझे जो उसको पैग़ाम कहना है 

अरसों से दिल मैं क़ैद हैं जो वो बातें उससे तमाम कहना है 

नहीं हो सकेंगी बयाँ मुझसे मेरी ये ख़ामोशियाँ 

सो इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है 


अभी भी तेरी यादों का 

मैं बोझ लिए घूम रहा हूँ 

एक तू ही तो है जिसकी यादें

 मैं हर रोज़ लिए घूम रहा हूँ 

तेरे ही इंतज़ार में मैंने हर लम्हा गुज़ारा है 

मगर तुझे ख़बर ही कहाँ की कितनी शिद्दत से 

मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ 



आँखों में बस नमीं रह गई थी 

उसके बाद तो बस उसकी कमीं रह गई थी 

कह ना सके हम उससे कुछ भी उसके जाने पर 

जुबान जो मेरी होठों में बस जमीं रह गई थी 

आँखें खुली होठ खामोश और 

धड़कने भी ये थमीं रह गई थी



मुरझाना ही था उसे आख़िर में 

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया 

हाथ में सबक़े छुरे थे यहाँ 

लिहाज़ा सबसे मिलना ही छोड़ दिया 


कोई इस पागल दिल को 

समझाने वाला नहीं है 

कैसे समझाऊँ मैं इसको 

की अब वो आनेवाला नहीं है 



पूरा शहर ही तेरे नाम हो चुका है 

किससे करूँ मैं शिकायत तेरी 

ये शहर जो तेरा ग़ुलाम हो चुका है 


उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखने लग जाते हैं 

उसकी यादें उसकी बातें हम सुबह शाम लिखने लग जाते हैं 

इक वो है जिसको मेरे ख्याल तक नहीं आते 

इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुदको 

उसके नाम लिखने लग जाते हैं 


खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं 

यादों की ये आवाज लिए ठहरे होते हैं 

पाबंदियाँ होतीं हैं खामोशियों में 

की कुछ भी बयाँ ना हो सके जुबान से 

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं 


छूट गए वो  लोग 

जो मेरे बेहद ख़ास हुआ करते थे 

जिनसे हमदर्दियाँ जुड़ चुकीं थीं मेरी 

जो मेरे दिल के बेहद पास हुआ करते थे 


तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में 

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ 

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं ही शामिल नहीं हूँ 


सीख रहा हूँ अभी 

की कैसे प्यार किया जाता है 

करके गुमराह दिल को कैसे 

इस झूठ का कारोबार किया जाता है 


किसी और जहाँ की है वो 

की उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा 

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 


क़लम का सिपाही हूँ 

मैं कलम की बात लिखता हूँ 

लिखते होंगे लोग मसख़रे 

मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ 


पूछो कभी उससे भी वो दिल में अपने 

तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है 

समझते हो तुम तो उसके इशारे 

मगर वो भी क्या तुम्हारी खामोशियों की 

मुक़्क़मल मालूमात रखती है 



सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं 

वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 


कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 


नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ 

सो हमने तो हार मान ली  

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर 

हमारी तो निगाहें भी हैं क़ुसूरवार हमने मान ली 


बहुत कुछ बचा है अभी भी जो तुझको कभी बताना था 

बातें वो जो तू कभी समझी नहीं वो भी तुझको समझाना था 

लक़ीरों में ना थी ना ही तक़दीरों में तू मिली 

कह भी ना सका तुझे कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था 


विश्वास ही टूटा हो जहाँ 

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं 

और आँखें ही रूठीं हों ख्वाबों से अगर 

तो नींदें भी  क्या कर सकती हैं 


ग़ैरों की अमानत थी वो जो दो पल की ख़ुशी मिली थी 

आख़िरकार उसे मोड़ कर आना था 

और वो यादें जो दो पल थी साथ मेरे उसे भी यार छोड़ कर आना था 



तकलीफ़ बस इस बात की है 

की अब वो मुझे पहचानता नहीं है 

ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ 

वो कहता है की मुझको जानता नहीं है 


वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ 

फिर भी ना जाने किस बात पर मैं इतराता रहता हूँ 

मुद्दतों से मुद्दा वो खामोशियों में दफ़्न था 

जिसकी दास्ताँ मैं सभी को बतलाता रहता हूँ 


चलने दो आज ये कलम 

मुझे हर बात लिखनी है 

खामोशियों तले दफ़्न थी जो मेरे 

अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर 

वो वारदात लिखनी है 

डर नहीं रहा मुझे अब उसकी जुदायी का 

इसलिए उससे जो मिली है 

वो रिहाई की सौगात लिखनी है 


ज़िन्दगी ये मेरी अभी उदास चल रही है 

धड़कनों से ख़फ़ा ये मेरी साँस चल रही है 

नहीं रहा मैं अब मुझमें मौजूद कहीं 

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है 


तोड़ तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को 

मैं बर्बाद करता रहा 

बेक़सूर था ये मासूम दिल 

उसके बाद भी मैं इसे बर्बाद करता रहा 

छीन लिया मैंने इससे वो सारे जज़्बात प्यार के 

और तेरी यादों को इस दिल से मैं आजाद करता रहा 

हैरानी है मुझको इसकी इस बात पर की 

टुकड़ों टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल

बावजूद उसके ये तुझको ही याद करता रहा 



कभी एक संकल्प थी तुम मेरी

 मगर अब मात्र एक कल्पना हो तुम

ठुकरा चुका हूँ अब तुम्हारी

 सारी लावारिस उन यादों को 

मेरी खातिर अब मात्र एक सपना हो तुम



एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं ख्वाहिशें तेरे पास लेकर 

उम्मीदों भरी निगाहें और दिल में विश्वास लेकर 

आया था कुछ यादें तेरी साथ अपने खास लेकर 

बातें वो तेरी मीठी मीठी और तेरे ही एहसास लेकर 

आया था मैं पास तेरे हिस्से की अपनी साँस ले कर 



रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में 

एक दफ़ा फिर से सुधार कर के वो गुलाब लाया हूँ 

किराए की हैं ये नींदें और उधार के वो ख़्वाब लाया हूँ 

हर पन्ने पर जिसमें लिखी हुई है वफ़ा-ए इश्क़ 

बड़ी ही मशक़्क़त से ढूँड कर के वो किताब लाया हूँ 


मत पूछ मुझसे पहेलियों में 

जो भी कहना है तुझे

तू वो साफ़ साफ़ कह दे न 

जरूरी नहीं हर बात मेरे ही हक़ की हो 

तुझे जो कहना है मेरे ख़िलाफ़ तो कह दे न 


आँखें पढ़ कर देखिए कभी 

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे 

ना हो सके जो खामोशियों में बयाँ 

वो दिल के अल्फ़ाज़ मालूम हो जाएँगे 


लाख नारजगी है उसको मुझसे 

मगर वह इन सब के बावजूद रहती है 

ढूंड सको तो ढूँड लेना तुम उसे 

वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है 


समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 


मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा 

तुम तो जा चुके थे मगर तुम्हारे लौटने की 

मैं फ़रियाद करता रहा 

हँसी आई ख़ुद पर और 

दिल पर रोना आया  की क्यों ही बेवजह 

मैं वक्त बर्बाद करता रहा 


कितना भी गहरा क्यों ना हो 

इसको छुपाना पड़ता है 

इश्क़ में आख़िरकार पछताना पड़ता है 

ठुकराये जाने पर भी जाना पड़ता है 

अपने ही दिल को सताना पड़ता है 

दिल तोड़ कर इश्क़ में दिखाना पड़ता है 

अजीब है ये रस्म मगर निभाना पड़ता है 


मत पूछो इश्क़ की तुम 

मै भी वहाँ से होकर आया हूँ 

लुट गए मेरे ख़्वाब सभी 

और खाकर वहाँ से ठोकर आया हूँ 


कुछ अलग ही रिश्ता था 

उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता 

कितना भी करूँ मैं मगर 

उससे फ़ासला नहीं हो सकता 

यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो 

यहाँ से तो कभी वो लापता नहीं हो सकता 

इश्क़ तो दिल की एक सौगात है 

ये कोई मसला नहीं हो सकता 


चश्मदीद हैं निगाहें मेरी फिर भी वो कहतें हैं की इसमें मेरी खता नहीं है 

क़त्ल करके वो मेरे जज्बातों का कह रहे हैं की मुझे पता नहीं है 


तिजारत नहीं एक इबादत है इश्क़ 

अहसासों की महक और जज्बातों की हिफ़ाज़त है इश्क़ 

ना हो सके जो बयाँ अल्फ़ाज़ों में वो कहावत है इश्क़ 

रूह से रूह को जोड़ती है जो ऐसे रिश्तों की बनावट है इश्क़ 


वो ख़फ़ा होती है जो तो उसे ख़फ़ा हो जाने दे 

होती है वो जो बेवफ़ा तो उसे बेवफ़ा हो जाने दे 

अब इतनी हमदर्दी नहीं है उससे की उसे मनाऊँ मैं 

वो इस दफ़ा जो होती है दफ़ा तो उसे दफ़ा हो जाने दे 


घड़ी है ये इम्तिहान की 

सो इम्तिहान दे रहे हैं 

वो माँगता है जब भी 

तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं 

किसी से न की कभी उसकी शिकायत 

ना ही कभी उस रब से हम 

ये सब बयान कर रहे हैं 

उसके एक इशारे पर हम अपनी 

हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं 


आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर 

साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर 

इरादा पक्का कर चुके हो क्या 

यूँ मुझको तुम सताने का 

जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर 

अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर 

और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर 


इकलौती वो शख़्स थी

जिसकी मुझको तलब थी 

हुनर थी जो मेरे मुस्कुराने की 

या यूँ कहूँ की वो मेरी सब थी 

करता था मैं जिसकी इबादत 

ब -अदब वो मेरा रब थी 

जिसके होने से ज़िन्दगी 

जीने का सबब थी 

और जिसके ना होने से 

ये ज़िन्दगी भी बेमतलब थी  


समझ ले तू ही मेरी धड़कनों के इशारे 

जो दिल में है वो जुबान से कभी मैं कह नहीं पाऊँगा 

फ़ासला तुझे रखना है तो रख बेशक

मगर मैं तो तुझसे दूर रह नहीं पाऊँगा 

ये दूरी बेशक जरूरी है मैं समझता हूँ 

मगर ये भी तय है की ये दूरी मैं कभी सह नहीं पाऊँगा



तेरी बाहों के बिस्तर में 

फ़िर से सोना चाहता हूँ 

 जाल में तेरी ज़ुल्फ़ों के

मैं खुदको खोना चाहता हूँ 

चाहता हूँ लुटा दूँ मैं 

तुझपर ये जिंदगी 

और बदलें में जो कुछ दे तू 

तो तेरी चाहतों के हर ख़्वाब

 मैं संजोना चाहता हूँ 



दफ़ना कर अपनी ख्वाहिशें 

और अपने जज्बातों का गला

अपने हाथों से घोंट कर 

आ गए हम इश्क़ में हार कर

ख़ाली हाथ लौटकर 



मुक़्क़मल हर रिश्ते को उसने निभाया है 

और ये लोग अभी भी कह रहे हैं 

की वो पराया है 

मुकर गए जहाँ सभी अपने 

उस मोड़ पर भी वो दौड़ कर आया है 

उसे कैसे कह दूँ मैं अपना 

वो तो मेरा साया है 



ख़्वाहिशों से समझौता और खामोशियों में मलाल चल रहा है 

उलझी हुई है ज़िंदगी, कोई ना कोई जेहन में सवाल चल रहा है 

मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा वो तो बेहाल चल रहा है 

जिंदगी चल रही बेबसी में अभी तो यही फिलहाल चल रहा है 


याद आएगी जो मेरी तो 

ज़रा मुझे भी याद कर लेना 

हमने तो सौंप दी पूरी ये जिंदगी तुमको 

जरा सा वक्त तुम भी बर्बाद कर लेना 


ग़ुमराह रही है ये जिंदगी 

क्यूंकि मैं झाँसों में जीता रहा 

तोड़ गए जो यकीन मैं उन्हीं के 

दिलाशों में जीता रहा 


जो पहले ना बदले वो 

इस बार बदल गए 

इसी तरह ही कितनों के 

किरदार बदल गए 

तलब भी बदल गई और 

तलबगार भी बदल गए 

वफ़ाओं के करते थे जो दावे,दिखावे 

वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए 

होने लगीं हैं अब तो मोहब्बतें भी फर्जी 

जो सच्ची मोहब्बतों के 

अब वो उम्मीदवार बदल गए 



बातें तो उससे होती रहीं 

पर बयाँ उससे कुछ भी ना हुआ 

बेरुख़ी भी उसकी वही पुरानी थी  

नया उससे कुछ भी ना हुआ 



दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं 

शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं 

कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें 

दिल में तुम्हारें भी है जख्म जानते हैं 

तुम ना कहो चाहे हालात लफ्जों से 

मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं 

इनकी हर जुबाँ हम जानते हैं 

तुम ही सोचते हो अजनबी हमें

की तुम्हें हम कम जानते हैं 

तुम कहो न कहो मग़र तुम्हारी 

तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के 

दरमियाँ हम जानते हैं 



शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं 

यही वजह है जो इश्क़ में घबराये हुए हैं 

रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं 

जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने 

उसी की खातिर आज हम पराए हुए हैं 

नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें 

क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का 

जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं 



चार कदम पर लोगों के क़िरदार बदल जाते हैं 

कितने भी हों लोग मुक्कम्मल वफादार बदल जाते हैं 

कौन से वहम में हो तुम जो अभी भी इंतेजार में हो उसके 

ख़ुदरज़ों की इस दुनियाँ में हैं ये सब ख़ुदगर्ज़ी तलबगार बदल जाते हैं 

कुछ दिन का फ़ासला रख लो अगर तो यहाँ 

रिश्ते सभी और रिश्तेदार बदल जाते हैं 



गुनहगार हूँ मैं अगर तो मेरी सजा क्या है 

चल तू ही बता दे मुझको तेरी रज़ा क्या है 

क्यों मायूस,गुमसुम और उदास सी है तू 

आख़िर इन खामोशियों की तू बता दे वजह क्या है 


छुपा कर ख़ुदगर्ज़ी वो हमदर्दी की नुमाइश करता है 

हर शख्स कोई न कोई ख़्वाहिश रखता है 

मिलता है जो अगर तो मिलने से पहले ही कोई फ़रमाइश रखता है 


इश्क़ इस क़दर कर बैठे की आदत हो गई 

कितनी मेरी ख्वाहिशों की शहादत हो गई 

कहने को तो ये अब एक कहावत हो गई 

की इश्क़ में वो मेरी इबादत हो गई 



सावन की बरसात बनकर 

या सर्दी की कोई रात बन कर 

क़बसे हूँ इंतज़ार में मैं 

की आओगे तुम जज़्बात बनकर 



प्यार है मुझे उन यादों से 

जो तेरी मौजूदगी के सबूत लाती हैं 

याद दिलाती हैं वो तेरी बातें 

और ढूंड कर तेरी हर करतूत लाती हैं 


कब होंगी मेहरबान ये नज़र 

बस इंतज़ार मैं करता रहता हूँ 

सामने तो उससे कुछ कह ना सका 

बाक़ी ख़यालों में इज़हार मैं करता रहता हूँ 


वो प्यार में थी किसी और के 

और मैं पागल था जो उसे पाना चाहता था

बसा कर मैं उसको अपने दिल में 

हर रस्म मैं इश्क़ की निभाना चाहता था 

उसे तो थी नफ़रत मुझसे 

मग़र मैं ही था जो उसे मनाना चाहता था 


झूठी तसल्ली झूठे बिस्वास मत दो 

जो निभा ना सको अगर तो फिर झूठी आस मत दो 

मिलना ही नहीं हो जो दोबारा तुम्हें तो 

इन आँखों को तुम प्यास मत दो 

झूठी हमदर्दी ,झूठे दिलासे और झूठे 

वो प्यार के तुम एहसास मत दो 


दम तोड़ चुकी उम्मीदों में एक आस पूरी हो गई 

तुम मिले हो जबसे मेरी तलाश पूरी हो गई 

नहीं रही अब नाराज़गी मेरे दिल को जो 

आँखों की बेचैनी और आँखों की प्यास पूरी हो गई 



मन ही मन में 

हम तुझे सोंच रहे हैं 

और तेरे ये ख्याल 

मेरे मन को अंदर ही 

अंदर खरोंच रहे हैं 

सिल चुके हैं हम 

अपने होंठ खामोशियों से 

बस ये आँखे हैं जो भर आती हैं 

बस इन्हें ही तो हम पोंछ रहे हैं 


नहीं रहा अब वो इश्क़ क्यूँकी इश्क़ में फ़ासला ही बढ़ गया है 

ख़त्म हो चुकीं हैं इसमें जज्बातों की समझ अब 

क्यूँकि इश्क़ में आशिकों का मुक़ाबला ही बढ़ गया है 



तक़दीरें ख़िलाफ़ हैं अभी इसलिए उनसे मुक़ाबला चल रहा है 

और नसीहत दी है मैंने मेरे ख्वाबों को 

फ़िलहाल अभी ख्वाहिशों से फ़ासला चल रहा है 



एक ही तो शख़्स है मैं जिससे इस क़दर प्यार कर सकता हूँ 

की उसकी ग़ैर मौज़ूदगी में उसका इंतज़ार कर सकता हूँ 

उसके हर झूठ पर बेझिझक एतबार कर सकता हूँ 

कितना भी हो कोई उससे बेहतर मैं उसे इनकार कर सकता हूँ 




की वादों से वो यूँ मुकर जाएगा 

जो हमने ख़्वाबों में बनाया है घर 

वो यूँ बिखर जाएगा 

टूट जायेंगी नींदें और दिल भी 

ना धड़केगा फिर कभी 

ये यूँ ही ठहर जाएगा 



आशुओं की तर्ज पर सरगम लिख दूँ 

लिखने पर आऊँ तो हर ग़म लिख दूँ 

धड़कनों में महफ़ूज़ हर ज़ख्म लिख दूँ 

कौन कितना है यहाँ बेरहम लिख दूँ 

इश्क़ कितना है यहाँ बेसरम लिख दूँ 


आयी थी वो ख़्वाबों में मेहमान बनकर 

नींदों में शुकून के अरमान बनकर 

ताल्लुक़ जुड़ चुके थे उससे यूँ दिल के 

की धड़कनों में समा गई थी वो जान बनकर 




मुझको उसकी कमीं खाये जा रही थी 

आँखों में उसकी नमीं सताये जा रही थी 

महज़ फ़रेब थी उसकी ये मायूसी 

मगर फिर भी मुझको ये 

ग़लतफ़हमी खाये जा रही थी 



आँखों में उम्मीदें या भरम लेकर बैठा हूँ 

और दिल में भी अजीब सा ज़ख्म लेकर बैठा हूँ 

ठुकरा दिया उसी ने मुझे जिसकी खाकर क़सम बैठा हूँ 

इश्क़ में ना मिली कोई ख़ुशी सो लेकर मैं ये ग़म बैठा हूँ 


वो कबका जा चुका है 

उसके बस क़दमों के निशान बाक़ी हैं 

नहीं रहा वो यादों में भी कहीं 

उसके बस ज़ख़्मों के निशान बाक़ी हैं

दफ़ा कर दिया है मैंने उसको 

मेरी जिंदगी से मुक़्क़मल इस बार 

इन ख्वाबों में फ़ासला बस 

उसके दरमियान अभी बाक़ी है 




फ़ुर्सत जब मिलेगी तो विस्तार से लिखेंगे 

उसकी हर याद को हम प्यार से लिखेंगे 

जिसमें शिकायतें ना होंगी उससे 

हर ख़ामी को उसकी हम सवाँरकर लिखेंगे 



होगा जो भी देखा 

जायेगा वो बाद में 

होने दो मुक़्क़मल बर्दबाद

 मुझे अभी उसकी याद में 



बिंदी उसके माथे पर तो वैसे ही क़ातिल थी

उसने आँखों में क़ाज़ल लगाया था 

मेरे दिल का फिसलना तो बात ही आम थी 

उसने तो पूरा शहर पागल बनया था 




ठुकरा कर जबसे वो गया हम आँखों में बारिश लिए बैठे हैं 

टूटे ख़्वाब टूटी नींदें और अधूरी ख्वाहिश लिए बैठे हैं 

कहाँ करेगा ये दिल मुझे माफ़ जो हम ये गुज़ारिश लिए बैठे हैं 

गुस्ताखी ये कम नहीं थी जो उसके के कहने पर 

ख़ुदसे ही साज़िश पर साज़िश किए बैठे हैं 




ज़िन्दगी मेरी कोई सर्कस नहीं 

इसलिए कोई भीड़ नहीं बुलानी है 

बुलाया है बस तुम्हें 

जो एक दास्ताँ सुनानी है 



तेरे हिस्से की तू ख़ुशी दे सकता है अगर 

तो मैं तेरे हिस्से के ग़म ले सकता हूँ 

नहीं दे सकता तुझे मैं जो खुशियों भरी झोली तो क्या 

कम से कम मैं तेरे जख्म तो ले सकता हूँ 



तेरे आने का इंतेजार बेशुमार रहता है 

तू आए ना आए पर ये ख़ुमार रहता है 

ये फ़ासले ये दायरे महज़ नज़रों के दरमियान हैं 

मगर इन्हें मूँद कर जो देखूँ तो हर बार तेरा दीदार रहता है 

इसीलिए तो मेरी हर धड़कन में यार तेरा प्यार रहता है 



जो यही मंजूर है तुम्हें तो तुम किनारा कर सकते हो 

छोड़ कर हमें किसी ग़ैर से तुम प्यार दोबारा कर सकते हो 

मंज़ूर नहीं जो तुम्हें हमारी मौजदूगी भी तो एक इशारा कर सकते हो 

छोड़ देंगे हम भी अगर तुम्हारी रज़ा है 

क्या यादों में हमारी तुम गुजारा कर सकते हो 



समझ नहीं पाओगे तुम की 

अपनी बातों में मैं क्या कहता हूँ 

टूट जाती हैं जब नींदें तो मैं रातों में क्या कहता हूँ 

दरिया हूँ मैं किसी के अश्क़ों का 

जो निकलकर जज़्बातों से अल्फ़ाज़ों में बहता हूँ 

तुम पढ़ो ना पढ़ो मगर इसी तरह मैं 

किसी के जज्बातों में रहता हूँ 



कोई कुछ भी कहे 

तुम गौर मत करना 

दिल टूटे भी अगर 

तो शोर मत करना 

आकर दूसरों की बातों में 

खुदको कभी कमज़ोर मत करना 

मान जाएगा मनाने से मासूम है ये 

तुम दिल के साथ कभी ज़ोर मत करना 

इश्क़ करो तो उसकी रूह से 

बहला कर बातों में कुछ और मत करना 





मैं वो रास्ते जो तेरे 

वास्ते मैं खोज रहा था 

तू ख़ुद ही ख़फ़ा हो कर 

जा चुकी थी दूर मुझसे 

और मैं तेरी तलाश में 

हर रोज़ रहा था 




ताज़ हो किसी महल की तुम 

और हम सड़कों के काँटे हैं 

स्पर्श हो तुम प्रेम भरा 

और हम गालों पे चाँटें हैं 




उम्मीद है कि एक रोज़ तो तुम मेरी बात समझ पाओगे 

मेरी ख़ामोशियों में जो क़ैद हैं वो जज़्बात तुम समझ पाओगे 

समझ पाओगे तुम मेरे हालात और इस दिल के सवालात तुम समझ पाओगे 

मायूस सी ये हँसी के साथ साथ इन आँखों की बरसात भी तुम समझ जाओगे 




तेरे जाने के बाद एक कमी सी महसूस होती है 

कितना भी मुस्कुराऊँ मगर इन आँखों में 

कहीं नमीं से महसूस होती है 

जर्ज़र हो चुकी हैं मेरी नींदें और ये उम्मीदें भी 

किसी ग़लतफ़हमीं सी महसूस होती हैं 




मत पूछो कैसा मैं हाल लिए बैठा  हूँ

इतंजार में उसके मैं अंगुलियों पर साल लिए बैठा हूँ 

वो गुमसुदा है ये जहन में मलाल लिए बैठा हूँ 

उससे ताल्लुक़ रखता है हर वो सवाल जो फ़िलहाल मैं लिए बैठा हूँ 



तुम्हें भी ये एहसास नहीं है 

की तुम्हारी ग़ैर मौज़ूदगी में 

महफ़ूज़ ये साँस नहीं है 

तन्हाई की क़ैद में है ये दिल 

रिहाई की कोई अब आस नहीं है 

ग़ौरतलब है कि तु मेरे पास नहीं है 




हटा दी मैंने पाबंदियां 

मेरी ख्वाहिशों से 

और इन ख्वाबों को 

आजाद कर दिया

अफ़सोस भी नहीं 

मेरे दिल को अब 

की खुदको मैंने 

आबाद कर दिया या 

बर्बाद कर दिया 



समझो मेरी बात मुझे बेचारा नहीं बनना 

बदनसीब या किस्मत का मारा नहीं बनना 

तुम्हीं को मुबारक ये महफ़िल तुम्हारी 

मुझे हिस्सा इस महफ़िल का दोबारा नहीं बनना 

तन्हा ही रहना है मुझको गवारा 

सो जाओ तुम यार मुझे तुम्हारा नहीं बनना 



हो इस दिल की अहमियत जिसे 

वो एक रोज़ मिल जाएगा

फ़िलहाल तो जारी है 

मेरी खोज.वो मिल जाएगा ।



मत पूछो तुम  हाल इन आँखों से कम्बख़्त ये बयान कर देंगी

अंदाज़ा ही कहाँ तुम्हें कितना ये नुक़सान कर देंगीं 

छीन लेंगी ये तुम्हारा सुकून सच कहूँ तो परेशान कर देंगी

मत पूछो इन आँखों से ये तुमको हैरान  कर देंगी



तेरी मासूमियत पर बग़ावत 

कोई कैसे कर सकता है 

तुझे देखता हूँ तो सोचता हूँ 

तेरी खिलाफत कोई कैसे कर सकता है 

नज़रें तो तुझसे मैं ही ना  मिला सकूँ 

तेरा दिल तोड़ दे 

ऐसी हिमाक़त कोई कैसे कर सकता है 



इश्क़ में अजीब से ख़िताब लेकर बैठा हूँ

टूटी हुई उम्मीदें और टूटे हुए ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

हांसिल कुछ भी ना हुआ फिर भी ये दिल मैं बेताब लेकर बैठा हूँ 

फिर से समझना है अब मुझे ये इश्क़ 

सो इश्क़ की ये किताब लेकर बैठा हूँ 

कैसे करना है मुझे मुनाफ़ा इश्क़ में हर हिसाब लेकर बैठा हूँ

शुरुआत से ही देना है अब झाँसा इसलिए गुलाब लेकर बैठा हूँ 



समझे नहीं तुम मैं जो समझाने आया था

रूठ कर बैठे हो कबसे मैं मनाने आया था

सबसे अहम हो इकलौती तुम तुमको ये बताने आया था 



तेरी ख़ातिर ही मैं दिल से बैर कर बैठा हूँ 

मनाना जब भी चाहा तो कहता है की देर कर बैठा हूँ कैसे तुझे समझाऊँ कितनी ख्वाहिशों को अपनी मैं ढेर कर बैठा हूँ 

अब तो नींदे भी ख़फ़ा हैं मुझसे की उनसे मुँह फेर कर बैठा हूँ 



जहाँ दिल लगे तुम जाकर गुजारा कर सकते हो 

मैं नहीं रोकूँगा तुम्हें तुम चाहो तो किनारा कर सकते हो 

दिल में क्या है तुम्हारा कभी खुल के कहो ना मुझसे 

जो ये भी ना हो सके बयाँ तो बेशक तुम इशारा कर सकते हो 


होंगी जालसाझियाँ इश्क़ में मगर वफ़ाओं की दावेदारी होगी 

जिसने भी की हैं इश्क़ में साज़िशें उसकी ही यहाँ समझदारी होगी 

यहाँ ना होगी हमदर्दी और जरा भी ना कहीं ख़ुद्दारी होगी 

बेवफ़ाओं के दौर की है ये मोहब्बत  सो यहाँ तो बस ग़द्दारी होगी 


हटा दी मैंने पाबंदियां 

मेरी ख्वाहिशों से 

और इन ख्वाबों को 

आजाद कर दिया

अफ़सोस भी नहीं 

मेरे दिल को अब 

की खुदको मैंने 

आबाद कर दिया या 

बर्बाद कर दिया 



समझो मेरी बात मुझे बेचारा नहीं बनना 

बदनसीब या किस्मत का मारा नहीं बनना 

तुम्हीं को मुबारक ये महफ़िल तुम्हारी 

मुझे हिस्सा इस महफ़िल का दोबारा नहीं बनना 

तन्हा ही रहना है मुझको गवारा 

सो जाओ तुम यार मुझे तुम्हारा नहीं बनना 



हो इस दिल की अहमियत जिसे 

वो एक रोज़ मिल जाएगा

फ़िलहाल तो जारी है 

मेरी खोज.वो मिल जाएगा ।



बंध गईं मेरी ख्वाहिशें

 और मेरे हौसलों को भी 

खामोश कर दिया गया 

अहमियत भी ना रही कहीं 

मेरे जज्बातों की 

तुमने ही खानाबदोश कर दिया 



मत पूछो तुम  हाल इन आँखों से कम्बख़्त ये बयान कर देंगी

अंदाज़ा ही कहाँ तुम्हें कितना ये नुक़सान कर देंगीं 

छीन लेंगी ये तुम्हारा सुकून सच कहूँ तो परेशान कर देंगी

मत पूछो इन आँखों से ये तुमको हैरान  कर देंगी



तुम्हारी समझ से समझ लो मैं हार चुका हूँ 

बोझ ये सर से मैं उतार चुका हूँ 

क्यूँकि हर ख्वाहिश अब इश्क़ की मैं मार चुका हूँ 

महसूस ना होगा तुम्हें वो ग़म जो मैं गुजार चुका हूँ



किसी भी तरह का कोई वहम नहीं था 

ख़ुद मैने परखा है मैं कोई अहम नहीं था 

झूठी हमदर्दियाँ थीं महज़ दिखावे की 

दिल में असल में रहम नहीं था 



तेरी मासूमियत पर बग़ावत 

कोई कैसे कर सकता है 

तुझे देखता हूँ तो सोचता हूँ 

तेरी खिलाफत कोई कैसे कर सकता है 

नज़रें तो तुझसे मैं ही ना  मिला सकूँ 

तेरा दिल तोड़ दे 

ऐसी हिमाक़त कोई कैसे कर सकता है 



इश्क़ में अजीब से ख़िताब लेकर बैठा हूँ

टूटी हुई उम्मीदें और टूटे हुए ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

हांसिल कुछ भी ना हुआ फिर भी ये दिल मैं बेताब लेकर बैठा हूँ 

फिर से समझना है अब मुझे ये इश्क़ 

सो इश्क़ की ये किताब लेकर बैठा हूँ 

कैसे करना है मुझे मुनाफ़ा इश्क़ में हर हिसाब लेकर बैठा हूँ

शुरुआत से ही देना है अब झाँसा इसलिए गुलाब लेकर बैठा हूँ 




इश्क़ में कबसे ख़ाक हो कर बैठा हूँ

मैं अपनी ही ख्वाहिशों की राख हो कर बैठा हूँ

उड़ गए कितने परिंदे यहाँ से 

बेबसी का मारा मैं वो शाख़ हो कर बैठा हूँ 

ग़मों को तलब है मेरी

मैं उनकी इकलौती खुराक होकर बैठा हूँ 



लोग मानते ही नहीं हैं मेरा यक़ीन 

मानो मैं एक अफ़वाह हो गया हूँ 

इससे बुरा अब क्या होना है 

की मैं पूरी तरह से यहाँ तबाह हो गया हूँ 



तेरी ख़ातिर ही मैं दिल से बैर कर बैठा हूँ 

मनाना जब भी चाहा तो कहता है की देर कर बैठा हूँ कैसे तुझे समझाऊँ कितनी ख्वाहिशों को अपनी मैं ढेर कर बैठा हूँ 

अब तो नींदे भी ख़फ़ा हैं मुझसे की उनसे मुँह फेर कर बैठा हूँ 



क़ैद हो गया हूँ उसकी यादों में 

अब उससे छुटकारा मुश्किल है 

छूट भी गया जो उससे तो गुजारा मुश्किल है 




कहाँ हुए हैं मुझसे कोई गुनाह 

जो बेवजह पछताऊँगा मैं 

तुमसे क्या छुपा है जो छुपाऊँगा मैं 

वादा किया है तो यार निभाऊँगा मैं 

कुछ देर की होगी ख़फ़ा ये  नाराज़गी 

वापस तुम्हारे ही पास तो आऊँगा मैं 



अब और नहीं चाहिए दिल को दिलासे

 जो उससे अब झाँसे नहीं चाहिए 

ख़ुद ही अब किनारा कर रहा हूँ 

मैं उससे जो इश्क़ में तमाशे नहीं चाहिए 


एक आइना ही तो है 

जो मेरी हर बात समझता है 

बिन कहे मेरी खामोशियों के 

हालात समझता है 

कितना भी छुपाऊँ मैं अपने ग़म 

ये मेरे जज़्बात समझता है 

क्या क्या हुआ है 

ये मेरे साथ समझता है 


कितनों को तबाह करके इश्क़ को गुरूर हो गया है 

जो भी पड़ा इश्क़ में वो चूर चूर हो गया है 

बिखर गई यूँ जिंदगी. दिल में मानो नासूर हो गया है 

नहीं रहा अब इश्क़ में वफ़ाओं का रिवाज़ 

इश्क़ में ये अजीब सा दस्तूर हो गया है 




करने लगा हूँ उससे किनारा 

उसके बिन अब गुजारा करने लगा हूँ 

इतनी नाकाम कोशिशों के बावज़ूद 

मैं वही कोशिश दोबारा करने लगा हूँ 




किसी काम का नहीं हूँ मैं तुम्हारे 

तुम मेरे पास में मत आना 

उम्मीदों की जो राह गुज़र हो तुम 

तो मेरी तलाश में मत आना 



कुछ नहीं हुआ है खुदको समझाता रहा

ख़ाक हो गया हूँ ये सबको बताता रहा 

ठोकरें भी खायीं थी मैंने ग़ैरों की ख़ातिर 

ग़ैरों की ख़ातिर ही खुदको सताता रहा 

अजीब सा चस्का लगा मुझे जी हज़ूरी का 

दर-बदर से भटकता मैं ठोकरें खाता रहा 


सजदा किया है तुम्हारा, मानो कोई मूरत हो तुम

तड़पता है दिल बस तुम्हारी ही ख़ातिर

मेरी साँसों की वजह, दिल की ज़रूरत हो तुम



इन आँखों में देखो ज़रा तुम झाँक कर,

क्या तुम्हें गहराई नज़र आई है।

एक शख़्स का अक्स है इन आँखों में,

क्या उसकी परछाईं नज़र आई है।

कितनी ओझल रहीं हैं मेरी ख़ुशियाँ 

क्या तुम्हें मेरी तन्हाई नज़र आई है।



एक शख़्स से कल मुलाक़ात हुई थी 

आँखों से कहा था उसने कुछ 

इशारों में बात हुई थी 

आँखें खुल गईं इतने में 

अभी तो ख़्वाब की 

महज़ शुरुआत हुई थी 



बेबस हैं मेरे हालात और जिंदगी ये बेबसी की मारी चल रही है

ओझल हो रही हैं मेरी ख्वाहिशें, हर वक़्त तेरी खुमारी चल रही है

कश्मकश है अजीब सी की इश्क़ में उधारी चल रही है

नीलामी पर हैं मेरे ख़्वाब,और सीने में साँसें भी तुम्हारी चल रही हैं।




ऐ सितमगर तु सितम इसबार ना कर 

मासूम है दिल इसे यूँ बेजार ना कर 

तेरे रूठने से ही टूट जाता है ये 

इस तरह तू इसपे वॉर ना कर 

तेरे साये से लिपट कर रहना है इसे 

बेवजह तू इसे दरकिनार ना कर 



हर लम्हा अपनी जिंदगी का उसके इतंजार में गुज़ार कर बैठा हूँ

इससे तुम समझ लो मैं कितना उससे प्यार कर बैठा हूँ 

जीत गया वो बाजी दिल की मेरी उसकी ख़ातिर मैं हार कर बैठा हूँ 

कुछ भी नहीं है अब उससे अहम हर ख्वाहिश मैं दिल की मार कर बैठा हूँ 

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