अल्फ़ाज़ों का सिलसिला
अहमियत ही ना हो जहां किरदार की वहाँ से तो किनारा ही ज़रूरी होता है कोई किस कदर अपना है ये जानने को बस एक इशारा ही ज़रूरी होता है यूँ तो महज़ कहने की बात है की जीना मुमकिन नहीं है तुम्हारे बिना मगर हक़ीक़त तो ये है कि उसके बिना भी गुज़ारा ज़रूरी होता है इत्तफ़ाक़ से कुछ राज बे- राज हो जाते हैं सच कहूँ तो ऐसा इत्तिफ़ाक़ भी दोबारा ज़रूरी होता है कुछ तिनके भी काम आ जाते हैं मुसीबतों में इसलिए डूबते को तिनके का सहारा ज़रूरी होता है तोड़ कर के दिल वो फ़रार हो गया है मजबूर हूँ मैं की उससे प्यार हो गया है हर अदा उसकी बेवफ़ाओं सी है मगर फिर भी ये दिल उसका तलबगार हो गया है झूठ हो या सच हो वो बातें उसकी उसकी हर बात पर इसे एतबार हो गया है सुना है कि वो कातिल है कितनो के शुकून का इतेफ़ाक़ ही तो है की शुकून मेरा भी खो गया है लाख शिकायतें करो तुम उसकी मुझसे आकर मगर अब तो उसके इश्क़ का मुझपे जुनून हो गया है टूट जाऊँ या बिखर जाऊँ मैं उसके प्यार में मुझे अब...