अल्फ़ाज़ों का सिलसिला
अहमियत ही ना हो जहां किरदार की
वहाँ से तो किनारा ही ज़रूरी होता है
कोई किस कदर अपना है ये जानने को
बस एक इशारा ही ज़रूरी होता है
यूँ तो महज़ कहने की बात है
की जीना मुमकिन नहीं है तुम्हारे बिना
मगर हक़ीक़त तो ये है कि
उसके बिना भी गुज़ारा ज़रूरी होता है
इत्तफ़ाक़ से कुछ राज बे- राज हो जाते हैं
सच कहूँ तो ऐसा इत्तिफ़ाक़ भी दोबारा ज़रूरी होता है
कुछ तिनके भी काम आ जाते हैं मुसीबतों में
इसलिए डूबते को तिनके का सहारा ज़रूरी होता है
तोड़ कर के दिल वो फ़रार हो गया है
मजबूर हूँ मैं की उससे प्यार हो गया है
हर अदा उसकी बेवफ़ाओं सी है
मगर फिर भी ये दिल
उसका तलबगार हो गया है
झूठ हो या सच हो वो बातें उसकी
उसकी हर बात पर इसे एतबार हो गया है
सुना है कि वो कातिल है कितनो के शुकून का
इतेफ़ाक़ ही तो है की शुकून मेरा भी खो गया है
लाख शिकायतें करो तुम उसकी मुझसे आकर
मगर अब तो उसके इश्क़ का मुझपे जुनून हो गया है
टूट जाऊँ या बिखर जाऊँ मैं उसके प्यार में मुझे अब परवाह नहीं
उससे प्यार जो बेशुमार हो गया है
Done
चाहत थी जिसे पाने की मिला वही नहीं था
सच कहूँ तो मेरा मुक्कद्दर सही नहीं था
ढूँड़ने पर मिल जाते हैं भगवान एक कहावत है
मैंने भी ढूँडा मगर वो कहीं नहीं था
पूछते ही नहीं हो तुम और मैं बताता भी नहीं हूँ
टुकड़ों में बिखर रहा हूँ मैं मगर जताता नहीं हूँ
बेरुख़ी नहीं है मेरी और नहीं है कोई ख़फ़ा नाराज़गी तुमसे
बस चाहत ही है इतनी की तुम्हें सताता नहीं हूँ
रास्ते तो और भी थे तुझे पाने के
हक़ तुझपर अपना जताने के
मग़र दिल ने कहा चल जाने दे
टूटने दे तू तेरी ख्वाहिशें
और वो ख़्वाब भी तू जल जाने दे
नहीं हो सकती अब उससे वफ़ा
सो उसे इस दफा तू बदल जाने दे
घुटने नहीं टेके अभी मैंने हालातों के ख़िलाफ़
तो हर दफ़ा मैदान ए जंग मैं लड़ा हुआ हूँ
कैसे मान लूँ हार जब इन ठोकरों से ही मैं खड़ा हुआ हूँ
कहाँ सता सकीं हैं मुझको ये ठोकरें
इन ठोकरों को सता कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ
ज़िन्दगी वो गुलज़ार है
जहाँ कोई फूल बनकर आता है
कोई फ़िज़ूल बन कर आता है
किसी की फ़ितरत में होती है बेवफ़ाई
तो कोई वफ़ाओं का उसूल बन कर आता
बेरहम सी हैं ये धड़कने जो हर पल मुझको सताती रहती हैं
मालिकाना हक़ ये हर किसी पर जताती रहती हैं
बोर हो गया हूँ मैं अब इस जिंदगी की बेरुखी से
बड़ी बेमुरौत है ये जिंदगी जो हर मोड़ पर जुल्म ढाती रहती है
मायूसी भरी आँखों में टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ
समेटकर मैं दर्द दिल में उसकी ख़ातिर गुलाब लेकर बैठा हूँ
नहीं रहा मैं हिस्सा अब उसकी यादों का
मगर उसकी मैं यादों की किताब लेकर बैठा हूँ
पूछे तो कोई मुझसे मेरी मोहब्बत
जोड़ जोड़ कर मैं पूरा हिसाब लिए बैठा हूँ
फिर एक भूल हम इस बार कर बैठे हैं
बेफ़िज़ुल में हम जो तुमसे प्यार कर बैठे हैं
नहीं हो सकती अब इसमें कोई रियायत
इश्क़ में जो हम इकरार कर बैठे हैं
मेहरबानी करके तुम ये सवाल मत पूछना
की हमसे हमारा तुम हाल मत पूछना
कितनी मशक्कत से गुजारा तुम ये साल मत पूछना
किस किस ने बिछाया था तुम जाल मत पूछना
क्या ,क्यों ,कौन तुम ये फ़िलहाल मत पूछना
कोई इतना बेवफ़ा कैसे हो सकता है
या इस क़दर वो ख़फ़ा कैसे हो सकता है
समझता है ना वो मुझे
और मेरी खामोशी को
तो फिर देकर मुझे वो मायसी
ऐसे दफ़ा कैसे हो सकता है
इश्क़ में मुक़्क़मल कोई मुक़ाम नहीं होता
वसवसे हैं बस यहाँ बेसब्री के
जिसका मुक़्क़मल कोई अंजाम नहीं होता
टूट जाती हैं यहाँ नींदें और उम्मीदें भी बिखर जाती हैं
इसके सिवा इश्क़ में और कोई काम नहीं होता
तकलीफ़ होती है
ज़ब दिल तोड़ कर
यूँ ही ज़ख्म लाईलाज दिया जाता है
करके गुमराह फिर इश्क़ में
इसको नज़रंदाज़ किया जाता है
उजाड़ कर हर ख्वाहिश
इस दिल की इसको बेआवाज़ किया जाता है
इसी बेरहमी या ग़लतफ़हमी
को इश्क़ में नाम-ए-रिवाज़ दिया जाता है
अफ़सोस इस बात का है
की हम उनके खास नहीं हैं
नज़दीकियाँ मात्र हैं उनसे
उनके इतने भी पास नहीं हैं
तलब सुकून या समझो की
हम उनकी तलाश नहीं हैं
फिर भी हौसला है बुलंद उन्हें पाने का
उनकी तमाम बेरुखी के
बावजूद भी हम हताश नहीं हैं
किस कदर है इस दिल को तुम्हारी
मैं तलाश लिखने लग जाता हूँ
हाथ में कलम लेकर तुम्हारे
मैं एहसास लिखने लग जाता हूँ
साथ में बिताए वो लम्हें और
ख्वाहिशों की मैं दरख़वास लिखने लग जाता हूँ
लिखता हूँ तुम्हारी मैं यादें और
बातें खासमखास लिखना लग जाता हूँ
मूँदता हूँ अपनी आँखें और
तुमको अपने पास लिखने लग जाता हूँ
कलम उठा कर उसे मैं
आख़िरी सलाम लिखना चाहता हूँ
हाल ऐ दिल नहीं मेरा मैं उसको
बस ये पैग़ाम लिखना चाहता हूँ
वो मेरा ना हो सका ये बदनसीबी है मेरी
मगर उसका हूँ मैं उसे ये पयाम लिखना चाहता हूँ
हर लफ़्ज़ हर नब्ज़ और ये नफ़्ज़
मैं अपनी उसी के नाम लिखना चाहता हूँ
शोर ना करें कहीं ये खामोशियाँ
इसलिए लिखना पड़ता है
हाल ऐ दिल पिरोना लफ़्ज़ों में
सीखना पड़ता है
कुछ दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता
तो फिर मज़बूर होकर चीखना पड़ता है
उसके हर लहज़े का हमने ख्याल रखा है
उसकी ज़्यादती को भी हमने संभाल रखा है
अहमियत दी है उसकी ख्वाहिशों को अक्सर
अपनी ख्वाहिशों को मैने अभी टाल रखा है
इश्क़ ये उसका अजीब ही कश्मकश है
और मैं भी अजीब हूँ जो खुदको ही
मैंने इस कश्मकश में डाल रखा है
चल दिए ठुकरा कर तुम हमें
एक दफ़ा तुम्हें ठहरना चाहिए था
किस हालत में था मेरा दिल
हाल ए दिल मेरा
तुम्हें समझना चाहिए था
आया हूँ अधूरी सी मैं बात लेकर
आँखों में अधूरी मैं रात लेकर
मालूम है तुम पूछोगे सबूत मुझसे
इसलिए आया हूँ मैं वो काग़ज़ात लेकर
साथ में हुई थी जो वारदात लेकर
जर्जर जो हो चुके थे वो जज़्बात लेकर
तेरे एहसास में जी रहा हूँ
या तेरी तलाश में जी रहा हूँ
सहेज कर तेरी ख्वाहिशों
तेरी आस में जी रहा हूँ
एक दिलासा दे रखा है दिल को मैंने
इसी झाँसे से की तेरे पास में जी रहा हूँ
इकलौता मैं नहीं था उसके दिल में
वहाँ तो पूरी आशिक़ों की आबादी थी
ग़ुमराह कर रखा था उसने सबको
उसका शौक़ ही आशिक़ों की बर्बादी थी
फ़ना थे सब बेख़बर उस बेरहम पर
यही वजह है की उसे दिल तोड़ने की आज़ादी थी
फ़िसलन भरा है रास्ता
यहाँ ख़ुद को संभालना पड़ता है
बदलती नहीं हैं परिस्थितियाँ
यहाँ ख़ुद को ढालना पड़ता है
कितने ही हों पेंचीदा ये रास्ते
यहाँ रास्ता ख़ुद को निकालना पड़ता है
मंजिल इतनी आसान नहीं
यहाँ ख़ुद को जोखिम में डालना पड़ता है
दिखावा मत करना सबकी तरह तुम
करना तो मुक्कमल मुझसे प्यार करना
इशारों की समझ इतनी नहीं है मुझमें
इसलिए मेरा हाथ पकड़ कर
अपने होठों से इज़हार करना तुम
साज़िशें तो जरा भी पसंद नहीं मुझको
सीधा सीने पर वार करना तुम
कोई तो होगा जो मेरे अल्फ़ाज़ समझता होगा
लिखता हूँ मैं कितनी शिद्दत से
वो मेरा लिहाज समझता होगा
समझ होगी उसे जज्बातों की
जो इश्क़ में वफ़ाओं का रिवाज समझता होगा
हर किसी में नहीं है समझ जो समझ सके
खामोशियों की ज़ुबान मगर कोई तो होगा
जो खामोशियों के हर राज समझता होगा
क्या कहती हैं खामोशियाँ
जो खामोशियों के अंदाज़ समझता होगा
उजाड़ कर मेरी खुशियाँ
मुझे इश्क़ में बंजर किया गया है
लफ़्ज़ों में ना हो सकेगा वो बयाँ
जो मेरे साथ में मंजर की गया है
अँधेरे में रखकर झूठे दिलासों में
मेरे जज्बातों को
इश्क़ में जर्ज़र किया गया है
अपना समझ कर जिसको मैंने दिल में बसाया था
उसी के हाथों हमें आज बेघर किया गया है
तौफ़े में हमने दिया था गुलाब जिनको
उनकी तरफ़ से हमें तौफ़े में
आज ये ख़ंजर दिया गया है
दिल के करीब है वो अगर
तो उसे जाने मत दो
जाना ही चाहता है अगर वो
तो उसे अब बहाने मत दो
ये दिल तुम्हारी अमानत है
इसे महफ़ूज़ रखो तुम
उसे सताने मत दो
राब्ता रखो उससे
मगर चंद फ़ासलों पर
ज़्यादा क़रीब उसे तुम आने मत दो
हमदर्दी इस जमाने में एक ग़लतफ़हमी है
सो इसे बेवजह किसी और को जताने मत दो
नहीं समझ सकता कोई तुम्हें
और किसको समझाना चाहते हो तुम
ये नासमझ लोग नहीं समझते इशारे तुम्हारे
तुम इशारों में जो भी जताना चाहते हो
क्या है कमी तुम्हारी जिंदगी में
जो बिलावजह तुम वो फलाना चाहते हो
क्या वाजिब नहीं वो शुकून जिसे तुम
बेवजह गँवाना चाहते हो
क़ातिल हैं ये लोग जज्बातों के
झूठी बातों में इनकी क्यों तुम आना चाहते हो
और समझ से परे हैं इनके रश्म-ओ-रिवाज इश्क़ के
किस वहम से तुम इश्क़ सूफियाना चाहते हो
फ़ितरत तू तेरी हर बार बदलता रहा
नज़रों से छुप छुप कर
तू किरदार बदलता रहा
हर वादे से मुकर गया तेरे
तू यार हर बार बदलता रहा
बदलने लगे तेरे तरीके सभी
और तेरा हर वार बदलता रहा
जायज़ थी इश्क़ में बेवफ़ाई
जो इश्क़ में हर रोज़
यहाँ उम्मीदवार बदलता रहा
मुद्दतों से हमने तो कपड़े भी ना बदले
जिस तरह हर रोज़
तू अपना प्यार बदलता रहा
written
उसकी गली से निकलकर आया हूँ मैं
यकीन करो मैं चाँद से मिलकर आया हूँ
उसकी याद में संजोय हैं मैंने ख़्वाब
उसकी ख़ातिर अपनी ख्वाहिशें मैं सिलकर लाया हूँ
ख़रीद फ़रोश जो हुई ख्वाहिशों की
तो इस बार मैं होशियारी करूँगा
बेच दूँगा मैं अपने हर ग़म फिर
दिल खोल के ख़रीददारी करूँगा
नहीं रहेगी अब कोई कशिश ना ख़लिश
इसबार मैं इतनी समझदारी करूँगा
निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ
जो तुझे ना पसंद आए हर वो आदत मैं सुधारता रहता हूँ
मगर फिर भी तुझे ना नज़र आई ये मेरी आशिक़ी
की किस तरह तेरी ही ख़ातिर मैं खुदको सँवारता रहता हूँ
सहेज़ कर मैं उसकी यादें उसके एहसास लिखता हूँ
किस क़दर है वो इस ज़िंदगी में ख़ास लिखता हूँ
उसके नाम से है धड़कन और उसी के नाम से है हर साँस मैं लिखता हूँ
बेरुख़ी भी उसी की और उसी की तलाश मैं लिखता हूँ
किसी की ख़ातिर सवाल हूँ मैं
कोई कहता है की कमाल हूँ मैं
फ़रेब हूँ किसी की नज़र का
तो किसी कि ख़ातिर इस्तकबाल हूँ मैं
मत झांको मेरी आँखों में तुम मेरे हालात नहीं पढ़ पाओगे
इन आँखों की गहराई में जो दफ़्न हैं वो जज़्बात नहीं पढ़ पाओगे
मत ढूँड़ो तुम मेरे दिल की बात नहीं पढ़ पाओगे
फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में
उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए
नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई
की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए
गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में
वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए
मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा
मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा
ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ
तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा
जो आज तू मेरे लिए है
कल वो तू बदल जाएगा
मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा
थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई
ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई
जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई
सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं
एक दफ़ा हमसे भी ये गुनाह हुआ था
जाने अनजाने में किसी से इश्क़ बेपनाह हुआ था
नहीं रही अब उसकी ख्वाहिश इस दिल में
ये दिल जिसके इश्क़ में कभी तबाह हुआ था
इश्क़ में इश्क़ का दावा करते हैं
जज्बातों से अक्सर ये छलावा करते हैं
वफ़ायें तो इनसे होती नहीं
ये वफ़ाओं का महज़ दिखावा करते हैं
तुम्हें चाहूँगा तो इस क़दर चाहूँगा
की छोड़ मैं इस जमाने की फ़िकर चाहूँगा
सौंप कर ये ज़िंदगी तुझको सदक़े में
मेरा वादा है तुझको उम्र भर चाहूँगा
नहीं चाहिए मुझे शर्तों में मोहब्बत
तुम चाहो तो किनारा कर लेना
हर फ़ैसला तुम्हारा मंज़ूर है मुझे
जो किनारा भी करना है अगर तुम्हें
तो बस तुम एक इशारा कर देना
तुम्हें समझ नहीं आएगी ये बात पुरानी है
खामोशियों में कहीं दफ़्न एक ज़िंदगानी है
इन ख़ामोशियों को मेरी बेवजह जो समझो
तो फिर ये तुम्हारे दिल की नादानी है
हर लफ्ज़ जो मेरा ख़ामोश है
हर लफ्ज़ में एक कहानी है
छोटी सी अहमियत है जो छोटा ही क़िरदार है
मग़र ख़ुदगर्ज़ी नहीं ये दिल ख़ुद्दार है
नफ़रत नहीं किसी से और ना ही किसी से प्यार है
ख़ुदगर्ज़ी हैं लोग यहाँ और कुछ यहाँ ग़द्दार हैं
इसलिए उम्मीद और विश्वास ये दोनों ही यहाँ बेकार है
हर घड़ी मैं तेरे इश्क़ में तेरा ख़्याल बुनता रहता हूँ
अजीब हूँ मैं जो सवाल पर सवाल बुनता रहता हूँ
सिलसिला ये मोहब्बत का महज़ कश्मकश में गुज़र गया जो
तुझसे मिलने को तारीख़ मैं हर साल चुनता रहता हूँ
किराए की है ये ज़िन्दगी
जो कभी तो ये चुकाना पड़ेगा
कितनी भी हो नाम पर वसीयत
सब यहीं पर छोड़ कर जाना पड़ेगा
रिश्ते कितनी भी ख़ास क्यों ना हों
मगर वो जो रिश्ता मौत से है
वो तो निभाना पड़ेगा
दर्द-ए-दिल हर किसी से जताया नहीं जाता
दिल तोड़ कर हर किसी को दिखाया नहीं जाता
रखनी पड़तीं हैं कितनी बातें खामोशियों में समेट कर
यूँ बेवजह हर किसी को बताया नहीं जाता
फ़िक्र भी होनी चाहिए जज्बातों की इश्क़ में
करके मज़बूर किसी को इश्क़ में सताया नहीं जाता
ख़ामोश रही ज़ुबान मगर आँखों ने अपना काम कर दिया
छुपा कर रखा था मैंने जो हाल-ए-दिल मेरा इसने वो सरे-आम कर दिया
ढेरो ख़्वाहिशों और ढेरों उम्मीदों को इसने आज नीलाम कर दिया
नहीं रहा अब ये दिल महफ़ूज़ इन आँखो ने इसे बदनाम कर दिया
तोड़ कर रख देंगे तेरे ख्याल या फिर वो सवाल
या फिर इन आँखों में तेरे बाद बस नमी होगी
बंजर होगी तेरे बाद ये जिंदगी ना फिर इस तरह की ये सरज़मीं होगी
वसवसे होंगे वहाँ तेरी यादों के या हर बखत तेरी कमी होगी
मत पूछ तू मेरी तबियत को की कैसे रहूँगा मैं तेरे बग़ैर
जो तू ही ना रही तो ये सांस भी क्या लाज़मी होगी
माना तेरे यार बहुत हैं
इश्क़ में तेरे हक़दार बहुत हैं
चहेते तेरी मुस्कान के
या फिर अश्कों के तेरे दावेदार बहुत हैं
ख़रीद सकें जो तेरे ग़म
ख़रीददार बहुत हैं
फिर भी तू रहना जरा संभल कर
जो यहाँ पर लोग ग़द्दार बहुत हैं
क़ातिल जज्बातों के
या इश्क़ में गुनहगार बहुत हैं
नहीं समझ सका तू वो लहजा
जो तुझको मैं समझाने आया था
कितना बदल चुका हूँ
कितनी शिद्दत से तुझको मैं बताने आया था
उससे बिछड़ने की कोई ख़ास वजह नहीं थी
ख़ुद मैं ही लौट आया हूँ उसके दिल से
जो उतनी वहाँ पर जगह नहीं थी
महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी
खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी
वहम में थे हम कितने अरसों से
जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी
कोई इश्क़ में वफ़ा करता है
तो कोई दिलासे देकर जफ़ा करता है
किसी से हमदर्दी बड़ी शिद्दत से होती है
तो इश्क़ में कोई जुल्म हर दफ़ा करता है
वो चला गया लेकिन
उसके एहसास छोड़ गया है
यादें वो अपनी मेरे पास छोड़ गया है
ढूंड रहा हूँ मैं आज भी उसको उसके वादों में कहीं
जो देकर वो मुझको झूठी आस छोड़ गया है
अपने दिल में तुम मुझे पनाह दोगे
और अपने ख़्वाबों में कहीं तुम मुझे जगह दोगे
निभाओगे हर रस्म तुम वफ़ाओं की और
मुझे उम्मीद है की इश्क़ तुम मुझे बेपनाह दोगे
सिलसिला ये इश्क़ में आम हो गया है
इश्क़ में सितम सरेआम हो गया है
नहीं रही अब इश्क़ में जज्बातों की हिफ़ाज़त
जो ये बेवफ़ाई का पेशा और
बेवफ़ाओ का इंतज़ाम हो गया है
क़लम मेरी तुम्हें लिख रही है
और मैं भी तुम्हें लिखना सीख रहा हूँ
हर लफ्ज़ में तुम्हें मैं लिखता हूँ
जितना भी मैं लिखना सीख रहा हूँ
अहसास तब होगा जब ठोकर खाओगे
इश्क़ में एक रोज़ जब रोकर आओगे
अहमियत तब होगी तुम्हें भी मेरी
एक मोड़ पर मुझे जब खोकर आओगे
खामोशियाँ मैं अपनी तुम्हारे साथ कहना चाह रहा था
जुटा कर मैं हौसला हालात कहना चाह रहा था
तुम भी ना समझ सके मैं जो बात कहना चाह रहा था
पहली दफ़ा तो मैं जज़्बात कहना चाह रहा था
महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी
खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी
वहम में थे हम कितने अरसों से
जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी
सर्दियों में सवेरे की नींद सी हो तुम
ज़िन्दगी की आख़िरी उम्मीद सी हो तुम
गुनाह भी हो मेरे इश्क़ का तुम
और इस गुनाह की इकलौती चश्मदीद भी हो तुम
कुछ तो बात है तुझमें
जो ये बागवत कर रहा है
दिल मेरा मेरी ख़िलाफ़त कर रहा
नहीं रही अब इसको क़दर मेरी
कम्बख़्त ये सिर्फ़
तेरी हिफ़ाज़त कर रहा है
या तन्हाई में उसको याद करता हूँ
नफ़रत भी उसी से है मुझे
हर रोज़ मैं जिसकी फ़रियाद करता हूँ
बदल चुकी है वो या अब वो हालात ना रहे
फिर भी उसकी याद में मैं अपना हर वक्त बर्बाद करता हूँ
मेरे इश्क़ का अभाव बनके रह गई हो
या कहूँ तुम दिल का लगाव बनके रह गई हो
नज़दीकियाँ तुमसे इस कदर हुई हैं की
इश्क़ में तुम पहला पड़ाव बनके रह गई हो
गहराई ना नापो तुम दिल की मेरे
ग़मों के समंदर में तुम मेरी नाव बनके रह गई हो
सोचा था कि उससे मैं इस बार कह दूँगा
दिल्लगी उसकी और अपना मैं ख़ुमार कह दूँगा
बेचैन हूँ मैं उसके इंतज़ार में कह दूँगा
इश्क़ में कितना हूँ उसके बेक़रार मैं कह दूँगा
कश्मकश मैं जिंदगी की या मेरे दिल का ग़ुबार मैं कह दूँगा
सोचता हूँ मैं हर बार की इस बार मैं कह दूँगा
ये सच है की मुझे बहाना नहीं आता
बातें भी क्या कहूँ बताना नहीं आता
नज़रबंद ही हूँ जो नज़र आना नहीं आता
दिल की बात होठों पर आ जाती है
जो मुझे कुछ भी छुपाना नहीं आता
आशिक़ी भी हम से ना हो सकेगी कमबख़्त
जो अभी भी मुझको हक़ जताना नहीं आता
झूठी हमदर्दी दिखाना नहीं आता
अव्वल नहीं हूँ मैं इश्क़ में
जो मुझको बातें बनाना नहीं आता
मोहब्बत मुझे तन्हाइयों का सफ़र लगता है
फ़लसफ़ा दिल्लगी का या गलतफहमियों का घर लगता है
टूट ना जाए कहीं ये दिल सो इस निस्बत से मुझे डर लगता है
पहले पहल तो सब ठीक मगर बाद में फिर सब ज़हर लगता है
कितना भी दो तुम मुझे इश्क़ की सफ़ाई मगर इश्क़ मुझे क़हर लगता है
इस दिल के क़ैदख़ाने से तेरी ज़मानत है
तुझे जाना है अगर तो जा तुझे इजाज़त है
गलती नहीं तेरी की बेवफ़ा है तू
जज्बातों से खेलने की तो तेरी पुरानी आदत है
ख्वाहिशों का ख़ज़ाना और यादों की जायदाद हो तुम
मेरे दिल की दुआ और इस रूह की मुराद हो तुम
धड़कने भी करती हैं हर रोज़ तुम्हें सज़दा
मेरी साँसों की हर सुबह की फ़रियाद हो तुम
वो मुड़ कर नहीं आई ये मलाल रह गया है
होठों पर ख़ामोशी और ज़हन में ये सवाल रह गया है
खता उसकी है या मेरी ये कश्मकश फ़िलहाल रह गया है
बयाँ ना हो सका मेरा ग़म , मेरा दिल ये बेहाल रह गया है
मत पूछो हमको हमसे
हम इश्क़ में खुदको मार चुके हैं
तुम्हें महसूस हुआ या नहीं
हम इश्क़ में हार चुके हैं
एक दफ़ा की मुलाक़ात
मैं एक दफ़ा चाहता हूँ
एक दफ़ा ही मिले एक दफ़ा ही सही
मैं वफ़ा के बदले वफ़ा चाहता हूँ
ठुकराया गया हूँ मैं
बाक़ी ख़ास कोई वजह नहीं थी
उसने अपनाया नहीं मुझे
जो उसके दिल में कहीं
शायद जगह नहीं थी
उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है
इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है
घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है
इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ
ये उसी का कमाल चल रहा है
न पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ
तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ
शायरी है तू मेरे ख्यालों की
तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ
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