Wednesday, July 22, 2026

❀ ❀ ❀ ❀ ख़ामोश लफ़्ज़ ❀ ❀ ❀ ❀

|| कागज़ के जज़्बात ||


मुज़रिम हूँ क्या कोई मैं 

जो मेरे साथ में 

तुम ऐसा बर्ताव कर रहे हो 

हर बात को तुम 

मेरी नजरअंदाज करके 

क्यों मुझसे ही तुम 

भेदभाव कर रहे हो 

क्या नहीं है अब तुम्हें 

मुझसे हमदर्दी 

जो ग़ैरों से अब 

इतना लगाव कर रहे हो 



पूछोगे तुम उसका नाम 

फिर उसको बदनाम करोगे 

महफूज है इस दिल में जो मासूम 

उसका तुम कत्लेआम करोग़े 

संजीदा साज़िशें तुम उसकी ख़ातिर 

या फिर उसकी ख़िलाफ़त में 

ख़ुराफ़ातें तुम तमाम करोगे 

छीन कर उसका सुकून 

उसका जीना तुम हराम करोगे 


मुसाफ़िर हूँ मैं एक सफ़र का 

बस चलता ही जा रहा हूँ 

ठोकरों भरी है सड़क मैं 

बस संभलता ही जा रहा हूँ 

बदल दी हैं मैंने कितनी मंज़िलें 

और कितनी बदलता ही जा रहा हूँ

उजड़ी हुई यादों और 

उजड़े हुए ख्वाबों के जाल से 

फ़िलहाल मैं निकलता ही जा रहा हूँ 


इतने चेहरों में एक चेहरा बेनक़ाब ढूँड़ते रहे 

कल शाम ही वो मिला फिर उसका ख़्वाब ढूँड़ते रहे 

झील सी गहरी उसकी आँखें 

और उसकी खामोशी थी सवालों की किताब 

जिसका हम जवाब ढूँड़ते रहे 

ताल्लुक़ नहीं था कोई उससे 

मगर उसकी एक झलक से हुए 

हम बेताब इसीलिए उसे ढूँड़ते रहे



दर बदर से ठुकराया ये इश्क़ का मारा बन गया है 

उसे भी अहमियत नहीं थी जिसकी तलब में ये आवारा बन गया है 

क़त्ल कर कर के अपनी ही ख्वाहिशों का ये बेचारा बन गया है 

उजाड़ कर खुदका ही घर  कम्बख़्त ये दिल मेरा बंजारा बन गया है  




उसने ही अपनाया था उसकी खातिर अब अनजान हो गए 

बिखर गए मेरे जज़्बात उसकी इसी बेरुख़ी से हम बेजान हो गए 

खाक हो गईं मेरी सब ख्वाहिशें और दफ़्न मेरे सब अरमान हो गए 

हासिल कुछ ना होना था  फिर भी उसके इश्क़ में हम क़ुर्बान हो गए 



जाने दे उसे ऐ दिल अब और बहाने नहीं चाहिए 

अपनाया ही नहीं जब किसी ने तो फिर ये बेगाने भी नहीं चाहिए 

झूठी हमदर्दी इन ख़ुदग़र्ज़ियों की और इश्क़ के झूठे फ़साने नहीं चाहिए 

नहीं चाहिए अब दिलासे भी और वो फलाने भी नहीं चाहिए 


शिकायतें भी उसी से और उसी से प्यार है 

बेरुखी भी उसी से और उसी का इंतेजार है 

ख्वाहिश भी उसकी और उसी से दरकिनार है 

परहेज है उसी से और उसका ही खुमार है 

तलब नहीं किसी की अब वो ही बेशुमार है 


इश्क़ में शिकस्त कोई खाया हुआ हो 

या यूँ समझो की इश्क़ में कोई सताया हुआ हो

क्या उसका कोई वजूद नहीं जो जो इश्क़ में ठुकराया हुआ हो 


जो दिल के क़रीब हो उससे किनारा कैसे हो सकता है 

कभी सोचा है की वो इतना प्यारा कैसे हो सकता है 

फ़ुर्सत नहीं है उससे रूबरू होने की 

मगर उसके बिना कहीं गुजारा कैसे हो सकता है 


एक बात पर उसकी हम करार कर बैठे 

खुदसे नफ़रत कर ली और उससे प्यार कर बैठे 

अपनी इस नासमझी से अपना जीना दुस्वार कर बैठे 

अपनी हर ख्वाहिश को उसकी ख़ातिर तार-तार कर बैठे 


हँसने मुस्कुराने का ये जो मेरा तरीका है 

ये तुमसे मिलकर मैंने तुमसे सीखा है 

तुमसे मिलकर मुझको मिली है ख़ुशी 

तुमसे प्यार जताने का भी ये मेरा पहला सलीक़ा है 


आयेगा जो कोई मेरी तलाश में 

तो हूँ मैं गुमसुदा उसे तुम कह देना 

ढूँडे जो कोई मुझे उसके पास में 

तो उसके एहसास में हूँ गुम कह देना


अब तो मुझे भी ये महसूस होने लगा है 

की ये दिल मेरा कंजूस होने लगा है

उसकी तरफदारी उसकी हर बात पर 

ये कम्बख़्त उसका जासूस होने लगा है 


जख्म भी मलहम लगने लगते हैं 

जब दिल में हर ग़म सुलगने लगते हैं 

लगती है जिंदगी भी ज़हर 

दिल में जब जख्म चुभने लगते हैं 


बहुत हो चुकी इश्क़ में दरियादिली

अब उसे दिल की बेरहमी दिखाऊँगा 

न होगी उससे कोई तहज़ीब से बात अब

हर बात पर मैं अपनी बेशर्मी दिखाऊँगा 


रूठते हम उससे रहे जो मनाने वाला नहीं था 

ढूँडते हम उसे रहे जो आने वाला नहीं था 

कमी थी उसकी या ग़लतफ़हमी थी उसकी 

मुझको ये कोई समझानेवाला नहीं था 

इंसानियत तो थी दर बदर 

मगर कोई निभानेवाला नहीं था 


बेशक़ थोड़ा मन मुटाव रहता है

मग़र तुम्ही से मेरा लगाव रहता है 

तुम से ही हैं ये खुशियाँ मेरी 

वरना तो हर पहर तनाव रहता है 

बंजर से दिल में कहीं न कहीं 

ख्वाहिशों का बिखराव रहता है 

यही वजह है जो मेरी आँखों में 

 कहीं मेरे अश्कों का जलभराव रहता है 


कोई कलम उठायेगा तो अपना ख़ुमार लिखेगा 

इश्क़ वो अपना बेशुमार लिखेगा 

कुछ पल की बेचैनी या फिर फिर वो इंतज़ार लिखेगा 

हाल - ऐ - दिल ना होगा उससे बयाँ 

वो तनहाइयाँ ही बार बार लिखेगा 



हमने ही की थी गुस्ताखी इश्क़ की

सो उसके जो भी हों इल्ज़ाम 

वो तुम मेरे नाम कर देना 

क़ुसूर नहीं था इसमें उसका कोई 

सो उसके बदले मुझे तुम बदनाम कर देना 



ये आँखें उसका इंतज़ार कर रहीं थीं 

उसी का ये ज़िक्र हर बार कर रहीं थीं 

वो तो मुकर गया अपने वादों से 

जिसके वादों पर ये कम्बख़्त 

एतबार कर रहीं थी 



मिलों चला हूँ गिर गिर कर 

तब कहीं चलना सीखा है 

ख़ुद को हालातों से लड़ कर 

मैंने बदलना सीखा है 

आसान नहीं था हर सबक़ ज़िंदगी में 

कितनी ठोकरें ख़ाकर मैंने सँभलना सीखा है 


written  done 


उस गली से गुज़रने को ये दिल बेताब रहता था 

ढल जाती थी जब शामें तो इन आँखों में उसका ख़्वाब रहता था 

उसकी तलब इस क़दर थी दिल को 

की उससे मिलने को ये दिल बेहिसाब रहता था 

ढूँड़ता था उसे ख्वाबों में दिल जो हाथों में इसके गुलाब रहता था 


हम ना मिलेंगे हमारे अल्फ़ाज़ मिल जायेंगे 

हमारी खामोशियों में जो क़ैद थे तुम्हें वो राज़ मिल जायेंगे 

ना कर सके जो बयाँ हम अब तलक तुम्हें वो हमारे अल्फ़ाज़ मिल जायेंगे 

ढूंड रहे हो जिन सवालों के जवाब तुम इतने दिनों से 

मेरी आँखों में तो देखो तुम्हें वो सारे आज मिल जाएँगे 


तुम आँखों से बताया करो 

नाराज़गी हो भी अगर 

तो इशारों में जताया करो

नहीं लगता ये दिल 

तुमसे दूर हो कर 

कितनी भी हो तुम ख़फ़ा 

यूँ छोड़ कर ना जाया करो  


मुक़्क़मल ना हो सक़ी 

वो दास्ताँ अधूरी रह गई 

कर भी ना सके हम 

वो बयाँ जो मज़बूरी रह गई 

अक्स थी जो मेरी रूह की 

उससे ही मिलों की दूरी हो गई 

नफ़रत थी जिन तनहाइयों से 

वही अब ज़रूरी हो गई 


कितनी भी कर लो जासूसी 

मगर तुम समझ नहीं पाओगे 

कितनी है मायूसी मेरी ख़ामोसी में  

तुम समझ नहीं पाओगे 


देर से ही सही

एक रोज़ तुम आओगे 

अपनी उस खता पर 

एक रोज तुम पछताओगे 

ढूंड लो चाहे कहीं भी कोई भी ठिकाना 

पर देखना तुम आशियाना तो 

इस दिल में ही बनाओगे 


एक अधूरी सी आस 

अभी भी बाक़ी है 

उसकी यादें उसके अहसास

 अभी भी बाक़ी है 

मौज़ूद है वो मेरे अक्स में 

ज़ब तलक मेरे सीने में 

साँस कहीं बाक़ी है 


उसकी नफ़रत कैसी होनी चाहिए 

या फिर उसका प्यार कैसा होना चाहिए

तुम्हारी समझ से बताओ की 

हर शख़्स का किरदार कैसा होना चाहिए 


उसको देख कर हैरानी होती है 

की यार ऐसा कैसे हो सकता है 

अरसों बाद मिला वो अजनबी 

हम जैसा कैसे हो सकता है 


ये तय था की फ़ासला ही मुक्कमल होगा 

लेकिन ये फ़ैसला तय नहीं था 

की आज होगा या कल होगा 


तुम जैसा कोई और नहीं 

हम जैसे मालूम हैं बहुत हैं 

उनसे नहीं होती है जालसाज़ी 

हम जैसे मासूम बहुत हैं 


मत करना मेरा इंतज़ार तुम 

मैं आ नहीं सकूँगा 

कैसी उलझन में फँसा हूँ

मैं आकर समझा नहीं सकूँगा 


गुनगुनाते रहना हर पल इसे ये जिंदगी भी एक गाना है 

साज है ये खुशियों का और ग़मों का ये तराना है 

मंजिल नहीं है इस सफ़र की ना ही कोई ठिकाना है 

महफ़िल है ये चार दिन की फिर इसे छोड़ कर जाना है 


तुम जमाने की बातों में मत आया करो 

बातें जो भी हों तुम्हारे दिल में

बामोहलत उसे तुम आ कर बताया करो 

शक से ढह जाते हैं ढाँचे इश्क़ के 

इसलिए जिस बात पर हो एतराज तुम्हें 

वो बात तुम ख़ुद ही आकर समझाया करो 


लिखता हूँ जब भी मैं चुन चुन कर उसके एहसास लिखता हूँ 

यादें पिरो कर उसकी अल्फ़ाज़ों में 

हर लफ्ज़ बेहद खास लिखता हूँ

तुममें नहीं है समझ समझने की बस 

वरना मैं तो प्यार से प्यार का सरांस लिखता हूँ 


आँखों में मूँद लेते हो कितनी रातें 

और खामोशियों में कितनी बातें बंद कर देते हो 

कहाँ से सीखा है ये नायाब तरीका जरा मुझे भी बताओ ना 

कैसे इन आँखों  में इतनी बरसातें नज़रबंद कर लेते हो


लफ्ज़ ख़ामोश रह गए वो अल्फ़ाज़ न बन सके 

लाख कोशिशों के बावज़ूद वो मेरी आवाज़ न बन सके 

कैसे करते हम बयाँ हाल-ए-दिल उनसे 

जिनको भी अपनाया वो मेरे हमराज़ न बन सके 


अजीब था मैं जो उसमें कहीं मेरा क़िरदार ढूँड रहा था 

बेतुक़ी सी एक कहानी का मैं सार ढूंड रहा था 

उसकी आँखों में तो नफ़रत ही नफ़रत भरी थी 

जिसकी आँखों में कहीं मैं प्यार ढूंड रहा था 


फिर कुछ खास होने लगा था 

मौजूद थी वो मुझमें कहीं

उसके वजूद का एहसास होने लगा था 

मिटने लगे थे फिर फ़ासले सभी 

वो इतनी पास होने लगा था 


झूठी तसल्ली ना देना हमें 

बेशक तुम चाहो तो मार देना 

खंजर चलाना तुम सीने में अगर

तो नक़ाब ये हमदर्दियों का तुम उतार देना 


तेरी यादों की गिरप्त में 

मेरे दिन रात कट रहे हैं 

उसपर ये तेरी बेरुखी 

जिसकी हथकड़ियों में जकड़ कर 

मेरे जज़्बात सिमट रहे हैं 


तेरे आग़ोश में आकर मैं बेहोश सा हो जाता हूँ 

या यूँ कहूँ की तेरी मदहोशी में मैं भी मदहोश सा हो जाता हूँ 

हो जाता हूँ आवारा तेरे इश्क़ में और ख़ानाबदोश हो जाता हूँ 

इक पल भी तू जो होती है मायूस तो ख़ुद मैं भी ख़ामोश हो जाता हूँ 


इश्क़ में हारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं

बेशक आवारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं

तुम समंदर हो अगर

तो किनारा हूँ मैं 

फिर भी तुम्हारा हूँ मैं


हिस्से में तुम्हारे बेशक यार बहुत थे 

हर कमीं में तुम्हारी बेशक तलबगार बहुत थे 

समझते थे जो इशारे तुम्हारे समझदार बहुत थे 

फिर भी तुम मायूस क्यों हो तुम्हारे तो प्यार बहुत थे 


मत पूछ मेरे दिल का क्या 

हाल चल रहा है 

उसकी बेरुखी का ही हर पहर 

मलाल चल रहा है 

बरस रही हैं आँखे ये उसका ही 

कमाल चल रहा है 

उसकी यादों की चिंगारी से 

मेरा दिल फ़िलहाल जल रहा है 

मन ही मन में मेरे बस 

एक ही सवाल चल रहा है 

की वो बेवफ़ा भी है अगर 

तो इसमें इतना क्यों बवाल चल रहा है 

इश्क़ भी तो एक सतरंज ही है 

जिसमें बाजी उसकी है 

वो अपनी चाल चल रहा है 


तुम्हारी ख़ुशी है इसमें यही सोच कर 

मैं अपना जीना दुश्वार कर लेता हूँ 

मालूम हैं वो सारे झाँसे हैं और झूठे दिलासे हैं 

मगर फिर भी मैं उसपर ऐतबार कर लेता हूँ 

कितनी भी फ़रेबी बेरहमी या बेवफ़ा हो तुम 

दिल इस कदर तुम पर फ़िदा है की 

मैं भुला तुम्हारी हर खता तुमसे प्यार कर लेता हूँ 

कोई कितनी भी दे सफ़ाई या गवाही ख़िलाफ़त में तुम्हारे 

मैं आँख मीच कर सभी को इनकार कर देता हूँ 


क्या ही कहूँ की तेरा इश्क़ में क्या अंजाम होगा 

बेक़सूर निकलेगी वो , तेरे सर पर सारा इल्ज़ाम होगा 

इश्क़ में तू उसके बेवजह ही बदनाम होगा 

ज़लील होगा हर दफ़ा तू इश्क़ में 

बस इतना ही तेरा काम होगा 

ख्वाहिशें खुदकी तू दफ़ना कर 

उसकी ख्वाहिशों की ख़ातिर तू नीलाम होगा 

छोड़ देगी तुझे एक रोज़ वो एक मोड़ पर 

उसके बाद तेरा जीना हराम होगा 

रातों में रोना आँखें भीगोना 

उसके बाद  ये तो आम होगा 


चंद लफ्ज़ कहने दो मैं पूरी बात कह जाऊँगा 

तुम सुनो जो अगर तो मैं पूरी वारदात कह जाऊँगा 

किस्से कहानी में जो सिमट कर रह गई 

मैं वो अधूरी मुलाक़ात कह जाऊँगा 

कब कैसे क्यों बिगड़े थे उससे 

मैं ताल्लुक़ात कह जाऊँगा 

दिलचस्पी है जो तुम्हें जरा भी सुनने में 

तो मेरी आँखों में भरी है कैसे 

मैं ये बरसात कह जाऊँगा 


दिल में बेहद ग़म भरे हुए हैं 

हाल ए दिल बताने से डरता हूँ मैं 

जो जमाने में बेहद बेरहम भरे हुए हैं 


दूर होकर हमारी यादों से 

सच बताओ क्या गुजारा मुमकिन है 

हम भी कर लेंगे बसर 

जो अगर तुम्हारा मुमकिन है 


हर पल मुझे तेरी कमीं महसूस हो रही है 

यही वो वजह है जो आँखों में नमी महसूस हो रही है

सहमी हुई हैं ये धड़कने और ये साँसे मायूस हो रही हैं 


इश्क़ में दरबदर से हम ठुकराये हुए हैं

यही वजह है जो इश्क़ से हम घबराए हुए हैं 

मुक़्क़मल नहीं होतीं यहाँ दुआएँ साहब 

ख़ाली हाथ ही हर दफ़ा वहाँ से आए हुए हैं 


मिल जाऊँगा किसी मोड़ पर

मैं इसी आस में रहता हूँ 

खुदसे ही क्यों हैं इतने फ़ासले 

जबकि मैं खुदके पास रहता हूँ 


दिल ने कहा चल जाने दे 

जो छोड़ गए वो बेगाने थे 

वफ़ा नहीं थी दिल में उनके

नियत में साफ़ बहाने थे 


फ़ुर्सत में मिले कोई मुझे 

तो उसको मैं एक काम दूँगा 

गुमसुदा हूँ मैं ,ढूँड़ना है बस मुझे 

जो मिल गया कहीं 

तो उसे मैं इनाम दूँगा 


पूछने दो मुझसे हाल ऐ दिल मेरा 

कई और नहीं अब ये हक़ भी अदा करने को

ख़ुद ही मलाल ख़ुद ही सवाल 

कोई और नहीं यहाँ अब शक अदा करने को


नहीं चाहिए मुझे दस्तावेज़ लिखत में 

मैं तो तुम्हारी आँखों से जवाब मांगूँगा 

न्ही चाहिए तुम्हारे हमदर्दी भी 

मैं तो मेरे उजड़े हुए उन ख्वाबों का हिसाब माँगूँगा 


मंज़िल एक है तो बहाना क्या 

मौत मुक़र्रर है तो घबराना क्या 

चाहत है जो शिद्दत की 

तो रूह भी उसको सौंप दूँ 

पर बेरुख़ी जो हुई उससे 

तो कौन जाने फलाना क्या 


बातें बनाना या फिर छुपाना कोई तुमसे सीखे 

इश्क़ में बहाना या ठुकराना कोई तुमसे सीखे 

झूठे दिलासे या फिर झूठा फ़साना कोई तुमसे सीखे 

इश्क़ में साज़िशें या सताना कोई तुमसे सीखे 

झूठ को सच सा बताना कोई तुमसे सीखे 

बेवफ़ाई में तुम हो सबसे अव्वल 

बेवफ़ाई का हलफ़नामा कोई तुमसे सीखे 

हमदर्दियों का झूठा नजराना कोई तुमसे सीखे 

करके गुमराह छोड़ कर जाना कोई तुमसे सीखे


अजीब हूँ मैं जो हर शख़्स पर 

ऐतवार कर लेता हूँ

वो आए ना आए 

मैं इंतज़ार कर लेता हूँ 

नहीं है मुझमें कोई ग़ुरूर या ख़लिश 

कोई नफ़रत भी करे मुझसे 

तो उससे मैं प्यार कर लेता हूँ 

मेरे अपने तौर तरीके हैं ज़िन्दगी के 

इन्हीं तौर तरीकों से मैं 

अपनी ज़िंदगी गुजार लेता हूँ 

कभी समझौते से काम चल जाता है 

तो कभी ख्वाहिशें अपनी मैं मार देता हूँ 


एक तो तुम्हारी बेरुखी 

और दूसरी हम ये अफ़वाह बनाये बैठे थे 

तुम्हारी बग़ैर इजाज़त 

दिल में तुम्हारी जगह बनाये बैठे थे 

नहीं हो सकती वो  मुक़्क़मल 

जो ख्वाहिशें हम बेवजह बनाये बैठे थे 

मन ही मन हम तुमसे मिलने की चाह बनाये बैठे थे 


अहमियत ना थी मेरी वहाँ 

इसलिए मैंने जाना छोड़ दिया 

मुड़ कर ना पड़े फिर क़दम 

जहाँ का मैंने ठिकाना छोड़ दिया 

बेरुख़ी इस क़दर थी तुम्हारी 

की हाल ए दिल मेरा मैंने जताना छोड़ दिया 

मुंह फेर लिया मैंने तुम्हारे साये से 

और तुमसे दिल लगाना छोड़ दिया

नहीं रहा मेरा अब तुमसे कोई ताल्लुक 

इसलिए तुमको मैंने कुछ भी बताना छोड़ दिया 

छोड़ दी आशिक़ी और वो वहम पुराना छोड़ दिया 


एक क़लमकार हूँ मैं सो  क़लमकारी करता हूँ 

पिरो कर जज्बातों को 

अल्फाजों में अदाकारी करता हूँ 

फ़ैसला तुम पर है ये तय करो 

की क्या मैं समझदारी करता हूँ 

बेच कर मैं अपनी समूची ख़्वाहिशें 

चंद पलों की इश्क़ में ख़रीददारी करता हूँ 


कैसे होतीं इश्क़ में उससे नज़दीकियाँ 

वो तो ख़ुद ही हमसे दूरियाँ बनाये बैठा था 

कैसे मनाता मैं भला उसे 

वो जो बेवजह ही मुंह फुलाये बैठा था 


तुम मेरे हो मैं ये दावा नहीं कर सकता 

हक़ीक़त यही मैं दिखावा नहीं कर सकता 

तुम समझो बात को मेरी 

मैं छलावा नहीं कर सकता 

तुम ही हो अगर मेरे तो इश्क़ भी 

तुम्हारे अलावा नहीं कर सकता 


आज़माता रहा वो मुझे 

और मैं भी इम्तिहान देता रहा 

उसकी चंद ख्वाहिशों की ख़ातिर 

मैं खुदकी जान देता रहा 


भारत तो झूठे झाँसों का देश है 

झूठी उम्मीदें झूठे दिलाशों का देश है 

उन्नति के नाम पर बस वहम है यहाँ 

ये देश महज़ खेल तमाशों का देश है 


एहसानमंद समझ लो या ख़ुदगर्ज़ी समझ लो

ख़ुद्दार समझ लो या फ़र्जी समझ लो 

कोई एतराज नहीं मुझको तुम्हारे समझने से

जैसा समझ आये तुम्हारी मर्ज़ी समझ लो 


कभी फ़ुरसत मिले तो तुम मेरा एक काम कर देना 

नहीं बिक रहा है.तुम मेरा ये ग़म नीलाम कर देना 

लौटा दूँगा मैं तुमको तुम्हारी मोहब्बत भी 

बस मेरा दिल तुम मेरे नाम कर देना 



ना हो सकीं बयाँ खामोशियाँ 

वो राज राज ही रहे 

नहीं समझ सके तुम जज़्बात इनमें 

ये अल्फाज़ अल्फ़ाज़ ही रहे



एक शख़्स पर खुदको फ़ना कर बैठा था

उसकी बग़ैर मर्जी मैं इश्क़ बेपनाह कर बैठा था 

कायदे से कहूँ तो मैं गुनाह कर बैठा था 

जो बहवाजह ही इश्क़ मैं इस तरह कर बैठा था i



ख़ुराफ़ातें हैं मेरी ख़ामोशियों की 

जो आज अल्फ़ाज़ों में उतर आयीं हैं

ज़्यादा मत करना गौर तुम

इन लफ़्ज़ों में खाई सी गहराई है 



महफ़ूज़ हैं हम अकेले ही

ये इश्क़ का चस्का मत लगाओ 

बाक़ी बातें तो बाद में

यूँ हर बात में मस्का मत लगाओ 



छूट कर तुझसे तेरी यादों में जी रहा है 

अजीब है ये अभी भी तेरे वादों में जी रहा है 

नक़ाब ओढ़ कर इश्क़ का 

ये फर्जी लबादों में जी रहा है 

इश्क़ का मारा ये कमबख़्त 

तेरी फ़रियादों में जी रहा है



नहीं थमेगा लम्हा 

ये अफ़साने यूँ ही चलते रहेंगे 

होंगी बयानबाज़ियाँ भी इश्क़ में मगर

ये बहाने यूँ ही चलते रहेंगे 

हिस्सेदार हैं सरकार ही  मयखानों की 

इसलिए बंद होंगी दवाईयां 

मगर मयखाने यूँ ही चलते रहेंगे 



ये आख़िरी बार मैं पुकार रहा हूँ 

ऐ जिंदगी मैं हार रहा हूँ 

नहीं चाहिए मुझे ये बोझ अब और 

मैं अपनी ख्वाहिशें भी मार रहा हूँ 



उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है 

इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है 

घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है 

इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ 

ये उसी का कमाल चल रहा है 


written 2 liner 


कभी सहमति उसके सवालों पर तो कभी नाराज़गी रहती है 

उसे शिकायत है क्यों मेरे किरदार में इतनी सादगी रहती है 


हमने देखा है की अब इश्क़ में वफ़ाओं का उसूल नहीं है

इसलिए इन बेवफ़ाओ का ये इश्क़ हमें कबुल नहीं है 


हाँ भी कहना होता है अगर तो मैं ना कह देता हूँ 

मसला इश्क़ का हो अगर तो मैं मना कर देता हूँ 


इश्क़ करिए तो उसको आप हिफ़ाज़त से रखिए 

रिश्तों को निभाने की चाहत से रखिए 


नफ़रत है मुझे दिखावे से इसलिए मैं दिखावे नहीं करता 

करता हूँ मैं वफ़ाए बड़ी शिद्दत से मगर मैं दावे नहीं करता 


वो एक दफ़ा जो कह दे तो ताउम्र हारता ही रहूँ 

वो है वो सुकून जिसे  बस निहारता ही रहूँ 


तुम मुझे अपना समझ कर आना 

अश्क हूँ तुम्हारा इतना समझ कर आना 


ढूंड लाया हूँ मैं खुदको बड़ी मशक़्क़त के बाद उसकी यादों से 

गुमराह ही कर रखा था मुझको उसके वादों ने


निकालकर वो मुझमें कमी दूर हो गई 

चलो इसी बहाने वो ग़लतफ़हमीं जो थी दूर हो गई 


मत पूछ किस तरह ये दिन गुज़र रहे हैं 

तेरे ख़ातिर बेचैन तेरे बिन गुज़र रहे हैं 


दो मुहे लोग हैं ज़नाब 

मुंह पर भाई पीठ पर बुराई वाली फ़ितरत रखते हैं 


उम्मीदें टूट गईं मेरी उसकी ना के बाद 

मैंने रास्ता भी छोड़ दिया उसका उसकी मना के बाद 


इतनी तफ़तीश के बावजूद कोई कसर नज़र नहीं आती 

वो बेख़बर है भी तो बेख़बर नज़र नहीं आती 


बेकार की है दुनियादारी और रंग भेद भी सब बेवजह है 

मुसाफ़िर सब एक सफ़र के हैं और जाना एक ही जगह है 


वाक़िफ़ तो थे तुम मेरे इरादों से

सख़्त नफ़रत है मुझे झूठे वादों से 


परवाह नहीं थी किसीको की कोई उसकी चाह में मर गया 

इश्क़ में एक सिलसिला तो  इसी तरह से गुज़र गया 


तरक़ीब ना सिखाओ मुझे की प्यार कैसे किया जाता है

मुझमें ये समझ ही नहीं की झूठों पर एतबार कैसे किया जाता है 


इश्क़ में हम कभी अव्वल ना हुए 

जो अफ़साने थे हमारे इश्क़ में मुक़्क़मल ना हुए 


बस आख़िरी बार एक और तहक़ीक़ात करनी थी 

मुझे उस लापता से ज़रूरी एक बात करनी थी 


कोशिश तो पूरी की है तुझको भुलाने की 

बस वो हिम्मत ही ना जुटा सका मैं जो जुटानी थी 



झूठी हमदर्दी या झूठे दावे करता है 

किनारा रखता हूँ मैं उससे जो दिखावे करता है 


चाहूँ भी तो क्या... उससे बेहतर कोई है ही नहीं 

तुम्हारी समझ से कोई होगा मगर मेरी समझ से कोई है ही नहीं 


एक लंबी तहक़ीक़ात के बाद इसमें इसकी रज़ा मिलती है 

आँखें करती हैं गुस्ताखियाँ और दिल को सजा मिलती हैं


कोई आया इन आँखों में सपने दे गया

छीन कर वो मेरे अपने दे गया 


दर-बदर मैं भटक कर उसका पता ढूंड रहा था 

अरसों से मैं था लापता मगर उसे ढूँडता रहा 


सारे सवालों के जवाब मेरे मुझे तुझसे मिल जाते हैं 

तू बता ना बता मुझे खुदसे मिल जाते हैं 


झूठी तसल्ली ना दो झूठे दिलासे ना दो 

दे दो मौत बेशक मगर हमको ये झाँसे ना दो 


समझ से तुम्हारी तो बेफ़िज़ुल की बातों का है

मगर जो तुम समझ सको तो ये मसला जज्बातों का है 


आशिक़ी में तेरी ये इतरा उठते हैं 

तेरा नाम जब भी मैं पुकारूँ ये होठ मुस्कुरा उठते हैं 


ज़िन्दगी ये कम्बख़्त ज़िम्मेदारी में गुज़र गई 

संभालते संभालते ये ख्वाहिशों की खरीददारी में उजड़ गई 


संभाल कर रखा है उसको मैंने मेरे दिल में हिफ़ाज़त से

सजदा करता हूँ हर रोज़ मैं उसका बड़े शिद्दत की नज़ाकत से


यही सोच सोच कर दिल को बुरा लग रहा था 

कुछ अधूरा नहीं था मग़र अधूरा लग रहा था


एक शख़्स की शख़्सियत मुझे परखनी थी

उसकी बातों से उसकी हैसियत मुझे परखनी थी 


आँखों में तुम्हारे हम जो राज़ देखते हैं 

ख़ुद वो तुम क्यों नहीं कहते जो हम अल्फ़ाज़ देखते हैं 


क़ैद होठों की सलाख़ों में रह गई 

कितनी ख्वाहिशें आज भी आँखों में रह गईं 


वो इश्क़ में वफ़ाओं के दावे करते हैं 

उन्हें जज्बातों की समझ ही नहीं वो महज़ दिखावे करते हैं 


कितना भी कर तू सितम ऐ सनम मैं इंतक़ाम नहीं लूंगा 

कोई कितना भी पूछेगा मुझसे मैं तेरा नाम नहीं लूंगा 


यादें उसकी उधार की हैं जो वापस उसे लौटाना पड़ेगा 

समेट लो अब तुम ख्वाहिशें अपनी जो ख्वाबों से वापस भी आना पड़ेगा 


बनावटी हैं सभी रिश्ते यहाँ और रिश्तेदार भी सब बनावटी हैं 

ख़ुदगर्ज़ी हैं सभी फ़रिश्ते यहाँ और प्यार भी अब दिखावटी है


खामोशियों में क़ैद मुझे ख्वाहिशों के दर किनार रहने दो

मत पूछो तुम मेरी ख़्वाहिशें यार रहने दो


यूँ ही नहीं सच्ची मोहब्बत अफ़वाह बन चुकी है 

कितने घरों को ये तबाह कर चुकी है 


क़ायदा ही नहीं है मुझमें मेरी बात कहने का 

किसी अपने से अपने हालात कहने का 


उसकी मोहब्बत में उसकी नफ़रत अच्छी लगती हैं 

झूठ बोलती उसकी आँखें बेमुरौवत सच्ची लगती हैं 


हाल ए दिल कोई सुनने को तैयार न हुआ 

यही वजह है जो इस दिल को कभी प्यार न हुआ 


तुम ही थे एकलौते मैं जिसकी तलाश में था 

वरना तो हर सुकून मेरे पास में था 


आँशु पोछने के लिए या साथ में रोने के लिए

कुछ तो होना चाहिए उसमें कुछ होने के लिए 


उसकी बातों को मैं नज़रंदाज़ नहीं कर पाया 

उसने तो की थी नज़रंदाज़ी मगर मैं ऐतराज नहीं कर पाया 


बीते लोग बिती बातों से आप वास्ता न रखिए 

ये लौट कर वापस नहीं आते आप रास्ता न ताकिये 


तस्वीरे झूठीं हैं मेरी जो मुझे मुस्कुराता दिखा रही हैं 

ज़रा पूछो मेरे आईने से कितने ग़म मैं छुपा कर बैठा हूँ 


माँगते क्या मदद हमसे इशारे ना हो सके 

सो डूब गए उसकी आँखों में हम किनारे ना हो सके 


तुम्हें अपनाना है तो अपना लीजिए

वरना मेरी ख्वाहिशों को कहीं दफ़ना दीजिए



बेचैनियाँ भर चुकी हैं अब तो मेरी साँस में 

सब छोड़ कर क्यों आते नहीं तुम मेरे पास में 


मुद्दतों से मेरी एक मुश्किल का हाल नहीं मिल रहा है

सब्र कर रहा हूँ मैं कबसे मगर फल नहीं मिल रहा है 


पूरे सफ़र में हर शख़्स एक ही सवाल पूछता गया

मुझसे मेरे शब्दों में तेरा हाल पूछता गया 


नहीं चाहिए तुम और तुम्हारी ये खैरात नहीं चाहिए 

ले जाओ समेटकर तुम अपने ख़्वाब और मुझको ये सौगात नहीं चाहिए 


उसके हर शौक को हमने सिर आँखों पर रखा है 

मगर उसने हमारी अहमियत ना समझी हमको सलाख़ों पर रखा है 



हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है 

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है 



झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं 

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं 


वो तोड़ती रही मेरी उम्मीदें और मैंने उससे कोई जवाब नहीं लिया 

खता ये थी मेरी की उसकी इस खता का उससे कोई हिसाब नहीं लिया 


लिखने पर हमको हालातों ने मजबूर कर दिया 

टूटीं जब नींदें तो रातों ने मजबूर कर दिया 


मत रोक मुझे मेरे हालातों से लड़ने पर 

वरना कैसे सँभालूँगा मैं मेरे हालातों के बिगड़ने पर 


आँखों में ग़म लबों पर हँसी लिए बैठे हैं 

इश्क़ में अजीब सी ये  बेबसी लिए बैठे हैं 



मर्ज़ी का मालिक और जरा सा मसखरे मिज़ाज का हूँ 

बाक़ी तुम जो भी समझों मैं तो मेरे अंदाज़ का हूँ 




ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये 

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये 


तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था 

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था 



थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल 

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल 




नहीं है आसान इस दिल को समझना 

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना 



बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ 

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ 




सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है 

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है 



ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 



चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके 

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके 


आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं 


पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है 

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है 



अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे 

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे 



क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है 

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है 



मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का 

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का 


वो जो मेरी खिलाफत में था मैं उसकी ही तरफ़दारी करता रहा 

उसकी ख़ातिर मैं अपनी ही ख्वाहिशों की गिरफ़्तारी करता रहा 



एक वो ही तो था जिसकी नज़रों से हम घायल हुए हैं 

छोड़ कर बाक़ी सबको एक उसी के हम क़ायल हुए हैं 



हमने तो हमारी हारी है 

अब ये बाजी तुम्हारी है 


दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये 

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए 


सामने हो वो जब भी मेरे मैं ख़ुद को संभाल नहीं पाता हूँ 

इकलौता वो शख़्स है मैं जिसकी बातों को टाल नहीं पाता हूँ 


चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर 

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर 



तकलीफ़ बस इस बात की है 

की अब वो मुझे पहचानता नहीं है 

ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ 

वो कहता है की मुझको जानता नहीं है 


सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं वो बातें 

जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 




कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 



घड़ी है ये इम्तिहान की 

सो इम्तिहान दे रहे हैं 

वो माँगता है जब भी 

तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं 

किसी से न की कभी उसकी शिकायत 

ना ही कभी उस रब से हम 

ये सब बयान कर रहे हैं 

उसके एक इशारे पर हम अपनी 

हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं 


आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर 

साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर 

इरादा पक्का कर चुके हो क्या 

यूँ मुझको तुम सताने का 

जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर 

अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर 

और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर 


जरूरी था क्या दिल में आकर जाना 

या फिर दिल को दुखाना जरूरी था 

ठुकराना ही था आख़िर में अगर 

तो फिर क्या मुझे अपनाना जरूरी था 

वादे भी जो निभाने का अगर इरादा नहीं था

तो फिर ये बताओ की क्या वो बहाना जरूरी था 


नहीं है कोई तुम जैसा हसीन 

तो क्या हम जैसा कोई अजीब होगा 

क़ातिल खुदकी ख्वाहिशों का 

या हम जैसा कोई बदनसीब होगा



मत पूछो इश्क़ की तुम 

मै भी वहाँ से होकर आया हूँ 

लूट गए मेरे ख़्वाब सभी 

और खाकर वहाँ से ठोकर आया हूँ 



रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में 

एक दफ़ा फिर से सुधार कर के वो गुलाब लाया हूँ 

किराए की हैं ये नींदें और उधार के वो ख़्वाब लाया हूँ 

हर पन्ने पर जिसमें लिखी हुई है वफ़ा-ए इश्क़ 

बड़ी ही मशक़्क़त से ढूँड कर के वो किताब लाया हूँ 



मत पूछ मुझसे पहेलियों में 

जो भी कहना है तुझे

तू वो साफ़ साफ़ कह दे न 

जरूरी नहीं हर बात मेरे ही हक़ की हो 

तुझे जो कहना है मेरे ख़िलाफ़ तो कह दे न 



आँखें पढ़ कर देखिए कभी 

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे 

ना हो सके जो खामोशियों में बयाँ 

वो दिल के अल्फ़ाज़ मालूम हो जाएँगे 



लाख नारजगी है उसको मुझसे 

मगर वह इन सब के बावजूद रहती है 

ढूंड सको तो ढूँड लेना तुम उसे 

वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है 



समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 



समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 



मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा 

तुम तो जा चुके थे मगर तुम्हारे लौटने की 

मैं फ़रियाद करता रहा 

हँसी आई ख़ुद पर और 

दिल पर रोना आया  की क्यों ही बेवजह 

मैं वक्त बर्बाद करता रहा 



कितना भी गहरा क्यों ना हो 

इसको छुपाना पड़ता है 

इश्क़ में आख़िरकार पछताना पड़ता है 

ठुकराये जाने पर भी जाना पड़ता है 

अपने ही दिल को सताना पड़ता है 

दिल तोड़ कर इश्क़ में दिखाना पड़ता है 

अजीब है ये रस्म मगर निभाना पड़ता है 




उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता 

कितना भी करूँ मैं मगर 

उससे फ़ासला नहीं हो सकता 

यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो 

यहाँ से तो कभी वो लापता नहीं हो सकता 

इश्क़ तो दिल की एक सौगात है 

ये कोई मसला नहीं हो सकता 





एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं ख्वाहिशें तेरे पास लेकर 

उम्मीदों भरी निगाहें और दिल में विश्वास लेकर 

आया था कुछ यादें तेरी साथ अपने खास लेकर 

बातें वो तेरी मीठी मीठी और तेरे ही एहसास लेकर 

आया था मैं पास तेरे हिस्से की अपनी साँस ले कर 



तोड़ तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को 

मैं बर्बाद करता रहा 

बेक़सूर था ये मासूम दिल 

उसके बाद भी मैं इसे बर्बाद करता रहा 

छीन लिया मैंने इससे वो सारे जज़्बात प्यार के 

और तेरी यादों को इस दिल से मैं आजाद करता रहा 

हैरानी है मुझको इसकी इस बात पर की 

टुकड़ों टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल

बावजूद उसके ये तुझको ही याद करता रहा 




कभी एक संकल्प थी तुम मेरी

 मगर अब मात्र एक कल्पना हो तुम

ठुकरा चुका हूँ अब तुम्हारी

 सारी लावारिस उन यादों को 

मेरी खातिर अब मात्र एक सपना हो तुम



बहुत कुछ बचा है अभी भी जो तुझको कभी बताना था 

बातें वो जो तू कभी समझी नहीं वो भी तुझको समझाना था 

लक़ीरों में ना थी ना ही तक़दीरों में तू मिली 

कह भी ना सका तुझे कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था 



वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ 

फिर भी ना जाने किस बात पर मैं इतराता रहता हूँ 

मुद्दतों से मुद्दा वो खामोशियों में दफ़्न था 

जिसकी दास्ताँ मैं सभी को बतलाता रहता हूँ 



चलने दो आज ये कलम 

मुझे हर बात लिखनी है 

खामोशियों तले दफ़्न थी जो मेरे 

अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर 

वो वारदात लिखनी है 

डर नहीं रहा मुझे अब उसकी जुदायी का 

इसलिए उससे जो मिली है 

वो रिहाई की सौगात लिखनी है 



ज़िन्दगी ये मेरी अभी उदास चल रही है 

धड़कनों से ख़फ़ा ये मेरी साँस चल रही है 

नहीं रहा मैं अब मुझमें मौजूद कहीं 

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है 



विश्वास ही टूटा हो जहाँ 

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं 

और आँखें ही रूठीं हों ख्वाबों से अगर 

तो नींदें भी  क्या कर सकती हैं 



ग़ैरों की अमानत थी वो जो दो पल की ख़ुशी मिली थी 

आख़िरकार उसे मोड़ कर आना था 

और वो यादें जो दो पल थी साथ मेरे उसे भी यार छोड़ कर आना था 




तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ 

तू मान ना मान मगर मैं तेरा हूँ 

तू चमकती चाँदनी है अगर उस चाँद की 

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ 



नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ 

सो हमने तो हार मान ली  

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर 

हमारी तो निगाहें भी हैं क़ुसूरवार हमने मान ली 



किसी और जहाँ की है वो 

की उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा 

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 




कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 




क़लम का सिपाही हूँ 

मैं कलम की बात लिखता हूँ 

लिखते होंगे लोग मसख़रे 

मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ 



पूछो कभी उससे भी वो दिल में अपने 

तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है 

समझते हो तुम तो उसके इशारे 

मगर वो भी क्या तुम्हारी खामोशियों की 

मुक़्क़मल मालूमात रखती है 



सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं 

वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 





सीख रहा हूँ अभी 

की कैसे प्यार किया जाता है 

करके गुमराह दिल को कैसे 

इस झूठ का कारोबार किया जाता है 




तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में 

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ 

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं ही शामिल नहीं हूँ 



खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं 

यादों की ये आवाज लिए ठहरे होते हैं 

पाबंदियाँ होतीं हैं खामोशियों में 

की कुछ भी बयाँ ना हो सके जुबान से 

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं 



उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखने लग जाते हैं 

उसकी यादें उसकी बातें हम सुबह शाम लिखने लग जाते हैं 

इक वो है जिसको मेरे ख्याल तक नहीं आते 

इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुदको 

उसके नाम लिखने लग जाते हैं 



पूरा शहर ही तेरे नाम हो चुका है 

किससे करूँ मैं शिकायत तेरी 

ये शहर जो तेरा ग़ुलाम हो चुका है 




मुरझाना ही था उसे आख़िर में 

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया 

हाथ में सबक़े छुरे थे यहाँ 

लिहाज़ा सबसे मिलना ही छोड़ दिया 



कोई इस पागल दिल को 

समझाने वाला नहीं है 

कैसे समझाऊँ मैं इसको 

की अब वो आनेवाला नहीं है 




आँखों में बस नमीं रह गई थी 

उसके बाद तो बस उसकी कमीं रह गई थी 

कह ना सके हम उससे कुछ भी उसके जाने पर 

जुबान जो मेरी होठों में बस जमीं रह गई थी 

आँखें खुली होठ खामोश और 

धड़कने भी ये थमीं रह गई थी



कहने दो ना मुझे जो उसको पैग़ाम कहना है 

अरसों से दिल मैं क़ैद हैं जो वो बातें उससे तमाम कहना है 

नहीं हो सकेंगी बयाँ मुझसे मेरी ये ख़ामोशियाँ 

सो इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है 





अभी भी तेरी यादों का 

मैं बोझ लिए घूम रहा हूँ 

एक तू ही तो है जिसकी यादें

 मैं हर रोज़ लिए घूम रहा हूँ 

तेरे ही इंतज़ार में मैंने हर लम्हा गुज़ारा है 

मगर तुझे ख़बर ही कहाँ की कितनी शिद्दत से 

मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ 



आँखों में अश्क़ होना चाहिए 

ऐसा नहीं है की हर शख़्स रोना चाहिए 

हो जाती हैं साफ़ नज़र और 

दिल साफ़ हो जाता है अगर 

तो फिर जायज़ है आँखें भिगोना चाहिए 



उनकी याद आती रहती है 

उनसे मिलने की इस दिल से 

फ़रियाद आती रहती है 

क्या थी कमी हम में 

जो छोड़ गए वो हमें 

हर ख़बर हमें उनकी 

उनके बाद आती रहती है 



टूट गईं हैं नींदें तो क्या 

नींदें तो टूटती रहती हैं 

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या 

उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं 



सायर तो सारे के सारे झूठे होते हैं 

उनकी उम्मीदें और उनके सहारे भी झूठे होते हैं 

करते हैं वो बातें बयां अपनी इशारों में 

मगर उनके तो सारे  इशारे भी झूठे होते हैं

कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे 

सच की वजह से ही तो वे बेचारे टूटे होते हैं 

यूं हैं नहीं सारे सायर झूठे होते हैं



आ गए हम भी इश्क में हार कर 

कर्ज़ उनकी ख्वाहिशों का उतार कर 

और अपने ख्वाबों को इन्हीं हाथों से  उजाड़ कर



कितनी तो सिफारिस की थी तब उसने बारिश की थी 

कैसे कहूँ की मेरा हमदर्द है वो खुदा

 जिसने मेरे ख़िलाफ़ इतनी साज़िश की थी



वो कहता है की सब समझता है 

खुदको वो रब समझता है 

मायूसी मेरी आँखों की 

और मेरी खामोशियों का 

मतलब समझता है 



नाज़ुक होती हैं 

जज्बातों की डोर 

इसलिए इन पर 

इतना जोर नहीं करते 

जाने दे ऐ दिल 

इतना गौर नहीं करते 

यूँ छोटी छोटी बातों पर 

इतना शोर नहीं करते 

हांसिल नहीं होती हैं 

कुछ ख्वाहिशें भी 

इसलिए खुदको 

इतना कमज़ोर नहीं करते 



मेरी बातों को मुलाक़ातों को ऐसे भुलाना नहीं था 

तुम्हें जाना ही था अगर तो ऐसे जाना नहीं था 

क्यूंकि तुम ही तो थे मंजिल मेरी मेरा 

तुम्हारे सिवा कोई और ठिकाना नहीं था 



उसे आज़माना भी था अगर हमें 

तो हम इम्तिहान भी देने वाले थे 

एक इशारा भी उसका काफ़ी था 

उसकी ख़ातिर हम तो अपनी जान भी देने वाले थे



तुझे खोने का इस दिल में मलाल चल रहा है 

तेरी यादों का सिलसिला अब तो फ़िलहाल चल रहा है 

अजीब सी है कश्मकश और अजीब सी हैं ये मजबूरियाँ 

की वक़्त भी बड़ी तेज़ी से अपनी चाल बदल रहा है 



वो कहती तो है की 

वो कहीं नहीं जाएगी

मगर फिर भी वो  

उसकी बेरुखी सही नहीं जाएगी



कैसे करूँ बयाँ मैं वो शब्द 

जो मेरे दिल में अधूरे रह गए 

पसंद आ गया उसको ये सारा जमाना 

एक हम ही उसकी ख़ातिर बुरे रह गए 



 बदल गए हैं सब किरदार 

और अब कहानी भी बदल गई है

नहीं रहे अब वो राजा और

  अब रानी भी बदल गई है 



चुभती है खामोशी 

और साये भी चुभने लगे हैं 

हालात अभी ऐसे हैं 

की अपने तो अपने 

पराये भी चुभने लगे हैं 



किस हिसाब का है ये जमाना इस बार उसको हमने आजमाने दिया 

उससे ना वफ़ा हुई ना प्यार सो इस बार उसको हमने जाने दिया 

एक दफ़ा नहीं जाने कितनी दफ़ा हमने उसको सब कुछ दोहराने दिया 

उससे ना वफ़ा हुई ना ही प्यार फिर भी उसे प्यार के बहाने दिया 




हमारे जज्बातों की  जहाँ हिफ़ाज़त नहीं है 

ऐसी महफ़िलों की हमको चाहत नहीं है 

मुंह फेर कर हम भीड़ से अक्सर तनहा चलते हैं 

क्यूंकि भीड़ में हमें चलने की आदत नहीं है 

अल्फ़ाज़ों का सिलसिला

 

|| कागज़ के जज़्बात ||


अहमियत ही ना हो जहां किरदार की 

वहाँ से तो किनारा ही ज़रूरी होता है 

कोई किस कदर अपना  है ये जानने को 

बस एक इशारा ही ज़रूरी होता है  

यूँ तो महज़ कहने की बात है 

की जीना मुमकिन नहीं है तुम्हारे बिना 

मगर हक़ीक़त तो ये है कि 

उसके बिना भी गुज़ारा ज़रूरी होता है 

इत्तफ़ाक़ से कुछ राज बे- राज हो जाते हैं

सच कहूँ तो ऐसा इत्तिफ़ाक़ भी दोबारा ज़रूरी होता है 

कुछ तिनके भी काम आ जाते हैं मुसीबतों में 

इसलिए डूबते को तिनके का सहारा ज़रूरी होता है 





तोड़ कर के दिल वो फ़रार हो गया है 

मजबूर हूँ मैं की उससे प्यार हो गया है 

हर अदा उसकी बेवफ़ाओं सी है 

मगर फिर भी ये दिल 

उसका तलबगार हो गया है 

झूठ हो या सच हो वो बातें उसकी 

उसकी हर बात पर इसे एतबार हो गया है 

सुना है कि वो कातिल है कितनो के शुकून का 

इतेफ़ाक़ ही तो है की शुकून मेरा भी खो गया है 

लाख शिकायतें करो तुम उसकी मुझसे आकर 

मगर अब तो उसके इश्क़ का मुझपे जुनून हो गया है 

टूट जाऊँ या बिखर जाऊँ मैं उसके प्यार में मुझे अब परवाह नहीं

उससे प्यार जो बेशुमार हो गया है 




Done


चाहत थी जिसे पाने की मिला वही नहीं था 

सच कहूँ तो मेरा मुक्कद्दर सही नहीं था 

ढूँड़ने पर मिल जाते हैं भगवान एक कहावत है 

मैंने भी ढूँडा मगर वो कहीं नहीं था 


पूछते ही नहीं हो तुम और मैं बताता भी नहीं हूँ 

टुकड़ों में बिखर रहा हूँ मैं मगर जताता नहीं हूँ 

बेरुख़ी नहीं है मेरी और नहीं है कोई ख़फ़ा नाराज़गी तुमसे 

बस चाहत ही है इतनी की तुम्हें सताता नहीं हूँ 


रास्ते तो और भी थे तुझे पाने के

हक़ तुझपर अपना जताने के 

मग़र दिल ने कहा चल जाने दे 

टूटने दे तू तेरी ख्वाहिशें 

और वो ख़्वाब भी तू जल जाने दे 

नहीं हो सकती अब उससे वफ़ा 

सो उसे इस दफा तू बदल जाने दे 


घुटने नहीं टेके अभी मैंने हालातों के ख़िलाफ़ 

तो हर दफ़ा मैदान ए जंग मैं लड़ा हुआ हूँ 

कैसे मान लूँ हार जब इन ठोकरों से ही मैं खड़ा हुआ हूँ 

कहाँ सता सकीं हैं मुझको ये ठोकरें 

इन ठोकरों को सता कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ 


ज़िन्दगी वो गुलज़ार है 

जहाँ कोई फूल बनकर आता है 

कोई फ़िज़ूल बन कर आता है 

किसी की फ़ितरत में होती है बेवफ़ाई 

तो कोई वफ़ाओं का उसूल बन कर आता 


बेरहम सी हैं ये धड़कने जो हर पल मुझको सताती रहती हैं 

मालिकाना हक़ ये हर किसी पर जताती रहती हैं 

बोर हो गया हूँ मैं अब इस जिंदगी की बेरुखी से 

बड़ी बेमुरौत है ये जिंदगी जो हर मोड़ पर जुल्म ढाती रहती है 


मायूसी भरी आँखों में टूटे ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

समेटकर मैं दर्द दिल में उसकी ख़ातिर गुलाब लेकर बैठा हूँ 

नहीं रहा मैं हिस्सा अब उसकी यादों का 

मगर उसकी मैं यादों की किताब लेकर बैठा हूँ 

पूछे तो कोई मुझसे मेरी मोहब्बत 

जोड़ जोड़ कर मैं पूरा हिसाब लिए बैठा हूँ 


फिर एक भूल हम इस बार कर बैठे हैं 

बेफ़िज़ुल में हम जो तुमसे प्यार कर बैठे हैं 

नहीं हो सकती अब इसमें कोई रियायत 

इश्क़ में जो हम इकरार कर बैठे हैं 


मेहरबानी करके तुम ये सवाल मत पूछना 

की हमसे हमारा तुम हाल मत पूछना 

कितनी मशक्कत से गुजारा तुम ये साल मत पूछना 

किस किस ने बिछाया था तुम जाल मत पूछना 

क्या ,क्यों ,कौन तुम ये फ़िलहाल मत पूछना 


कोई इतना बेवफ़ा कैसे हो सकता है 

या इस क़दर वो ख़फ़ा कैसे हो सकता है 

समझता है ना वो मुझे 

और मेरी खामोशी को

तो फिर देकर मुझे वो मायसी 

ऐसे दफ़ा कैसे हो सकता है 


इश्क़ में मुक़्क़मल कोई मुक़ाम नहीं होता 

वसवसे हैं बस यहाँ बेसब्री के 

जिसका मुक़्क़मल कोई अंजाम नहीं होता 

टूट जाती हैं यहाँ नींदें और उम्मीदें भी बिखर जाती हैं

इसके सिवा इश्क़ में और कोई काम नहीं होता 


तकलीफ़ होती है 

ज़ब दिल तोड़ कर 

यूँ ही ज़ख्म लाईलाज दिया जाता है 

करके गुमराह फिर इश्क़ में 

इसको नज़रंदाज़ किया जाता है 

उजाड़ कर हर ख्वाहिश 

इस दिल की इसको बेआवाज़ किया जाता है 

इसी बेरहमी या ग़लतफ़हमी 

को इश्क़ में नाम-ए-रिवाज़ दिया जाता है 


अफ़सोस इस बात का है 

की हम उनके खास नहीं हैं 

नज़दीकियाँ मात्र हैं उनसे 

उनके इतने भी पास नहीं हैं 

तलब सुकून या समझो की 

हम उनकी तलाश नहीं हैं 

फिर भी हौसला है बुलंद उन्हें पाने का 

उनकी तमाम बेरुखी के 

बावजूद भी हम हताश नहीं हैं 


किस कदर है इस दिल को तुम्हारी

 मैं तलाश लिखने लग जाता हूँ 

हाथ में कलम लेकर तुम्हारे

 मैं एहसास लिखने लग जाता हूँ 

साथ में बिताए वो लम्हें और 

ख्वाहिशों की मैं दरख़वास लिखने लग जाता हूँ 

लिखता हूँ तुम्हारी मैं यादें और 

बातें खासमखास लिखना लग जाता हूँ 

मूँदता हूँ अपनी आँखें और 

तुमको अपने पास लिखने लग जाता हूँ 


कलम उठा कर उसे मैं 

आख़िरी सलाम लिखना चाहता हूँ 

हाल ऐ दिल नहीं मेरा मैं उसको 

बस ये पैग़ाम लिखना चाहता हूँ 

वो मेरा ना हो सका ये बदनसीबी है मेरी 

मगर उसका हूँ मैं उसे ये पयाम लिखना चाहता हूँ 

हर लफ़्ज़ हर नब्ज़ और ये नफ़्ज़ 

मैं अपनी उसी के नाम लिखना चाहता हूँ 



शोर ना करें कहीं ये खामोशियाँ

इसलिए लिखना पड़ता है

हाल ऐ दिल पिरोना लफ़्ज़ों में

सीखना पड़ता है

कुछ दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं होता

तो फिर मज़बूर होकर चीखना पड़ता है



उसके हर लहज़े का हमने ख्याल रखा है 

उसकी ज़्यादती को भी हमने संभाल रखा है 

अहमियत दी है उसकी ख्वाहिशों को अक्सर 

अपनी ख्वाहिशों को मैने अभी टाल रखा है 

इश्क़ ये उसका अजीब ही कश्मकश है 

और मैं भी अजीब हूँ जो खुदको ही 

मैंने इस कश्मकश में डाल रखा है 


चल दिए ठुकरा कर तुम हमें 

एक दफ़ा तुम्हें ठहरना चाहिए था 

किस हालत में था मेरा दिल 

हाल ए दिल मेरा

तुम्हें समझना चाहिए था 


आया हूँ अधूरी सी मैं बात लेकर 

आँखों में अधूरी मैं रात लेकर 

मालूम है तुम पूछोगे सबूत मुझसे 

इसलिए आया हूँ मैं वो काग़ज़ात लेकर 

साथ में हुई थी जो वारदात लेकर 

जर्जर जो हो चुके थे वो जज़्बात लेकर 


तेरे एहसास में जी रहा हूँ 

या तेरी तलाश में जी रहा हूँ 

सहेज कर तेरी ख्वाहिशों 

तेरी आस में जी रहा हूँ 

एक दिलासा दे रखा है दिल को मैंने 

इसी झाँसे से की तेरे पास में जी रहा हूँ 


इकलौता मैं नहीं था उसके दिल में

वहाँ तो पूरी आशिक़ों की आबादी थी 

ग़ुमराह कर रखा था उसने सबको 

उसका शौक़ ही आशिक़ों की बर्बादी थी 

फ़ना थे सब बेख़बर उस बेरहम पर 

यही वजह है की उसे दिल तोड़ने की आज़ादी थी 


फ़िसलन भरा है रास्ता 

यहाँ ख़ुद को संभालना पड़ता है 

बदलती नहीं हैं परिस्थितियाँ 

यहाँ ख़ुद को ढालना पड़ता है 

कितने ही हों पेंचीदा ये रास्ते 

यहाँ रास्ता ख़ुद को निकालना पड़ता है 

मंजिल इतनी आसान नहीं 

यहाँ ख़ुद को जोखिम में डालना पड़ता है 


दिखावा मत करना सबकी तरह तुम 

करना तो मुक्कमल मुझसे प्यार करना 

इशारों की समझ इतनी नहीं है मुझमें 

इसलिए मेरा हाथ पकड़ कर 

अपने होठों से इज़हार करना तुम 

साज़िशें तो जरा भी पसंद नहीं मुझको

सीधा सीने पर वार करना तुम 


कोई तो होगा जो मेरे अल्फ़ाज़ समझता होगा 

लिखता हूँ मैं कितनी शिद्दत से 

वो मेरा लिहाज समझता होगा 

समझ होगी उसे जज्बातों की 

जो इश्क़ में वफ़ाओं का रिवाज समझता होगा 

हर किसी में नहीं है समझ जो समझ सके 

खामोशियों की ज़ुबान मगर कोई तो होगा 

जो खामोशियों के हर राज समझता होगा 

क्या कहती हैं खामोशियाँ

जो खामोशियों के अंदाज़ समझता होगा 


उजाड़ कर मेरी खुशियाँ 

मुझे इश्क़ में बंजर किया गया है 

लफ़्ज़ों में ना हो सकेगा वो बयाँ 

जो मेरे साथ में मंजर की गया है 

अँधेरे में रखकर झूठे दिलासों में 

मेरे जज्बातों को 

इश्क़ में जर्ज़र किया गया है 

अपना समझ कर जिसको मैंने दिल में बसाया था

उसी के हाथों हमें आज बेघर किया गया है 

तौफ़े में हमने दिया था गुलाब जिनको 

उनकी तरफ़ से हमें तौफ़े में 

आज ये ख़ंजर दिया गया है


दिल के करीब है वो अगर 

तो उसे जाने मत दो 

जाना ही चाहता है अगर वो 

तो उसे अब बहाने मत दो 

ये दिल तुम्हारी अमानत है 

इसे महफ़ूज़ रखो तुम 

उसे सताने मत दो 

राब्ता रखो उससे 

मगर चंद फ़ासलों पर 

ज़्यादा क़रीब उसे तुम आने मत दो 

हमदर्दी इस जमाने में एक ग़लतफ़हमी है 

सो इसे बेवजह किसी और  को जताने मत दो 


नहीं समझ सकता कोई तुम्हें 

और किसको समझाना चाहते हो तुम 

ये नासमझ लोग नहीं समझते इशारे तुम्हारे 

 तुम इशारों में जो भी जताना चाहते हो 

क्या है कमी तुम्हारी जिंदगी में 

जो बिलावजह तुम वो फलाना चाहते हो 

क्या वाजिब नहीं वो शुकून जिसे तुम 

बेवजह गँवाना चाहते हो 

क़ातिल हैं ये लोग जज्बातों के 

झूठी बातों में इनकी क्यों तुम आना चाहते हो 

और समझ से परे हैं इनके रश्म-ओ-रिवाज इश्क़ के 

किस वहम से तुम इश्क़ सूफियाना चाहते हो 


फ़ितरत तू तेरी हर बार बदलता रहा 

नज़रों से छुप छुप कर 

तू किरदार बदलता रहा 

हर वादे से मुकर गया तेरे 

तू यार हर बार बदलता रहा 

बदलने लगे तेरे तरीके सभी 

और तेरा हर वार बदलता रहा 

जायज़ थी इश्क़ में बेवफ़ाई 

जो इश्क़ में हर रोज़ 

यहाँ उम्मीदवार बदलता रहा 

मुद्दतों से हमने तो कपड़े भी ना बदले 

जिस तरह हर रोज़ 

तू अपना प्यार बदलता रहा 



written 


उसकी गली से निकलकर आया हूँ मैं 

यकीन करो मैं चाँद से मिलकर आया हूँ 

उसकी याद में संजोय हैं मैंने ख़्वाब 

उसकी ख़ातिर अपनी ख्वाहिशें मैं सिलकर लाया हूँ 


ख़रीद फ़रोश जो हुई ख्वाहिशों की

तो इस बार मैं होशियारी करूँगा 

बेच दूँगा मैं अपने हर ग़म फिर 

दिल खोल के ख़रीददारी करूँगा 

नहीं रहेगी अब कोई कशिश ना ख़लिश

इसबार मैं इतनी समझदारी करूँगा 


निहारता हूँ तुझे ख्वाबों में और यादों में तुझे पुकारता रहता हूँ 

जो तुझे ना पसंद आए हर वो आदत मैं सुधारता रहता हूँ 

मगर फिर भी तुझे ना नज़र आई ये मेरी आशिक़ी 

की किस तरह तेरी ही ख़ातिर मैं खुदको सँवारता रहता हूँ 


सहेज़ कर मैं उसकी यादें उसके एहसास लिखता हूँ

किस क़दर है वो इस ज़िंदगी में ख़ास लिखता हूँ 

उसके नाम से है धड़कन और उसी के नाम से है हर साँस मैं लिखता हूँ 

बेरुख़ी भी उसी की और उसी की तलाश मैं लिखता हूँ 


किसी की ख़ातिर सवाल हूँ मैं 

कोई कहता है की कमाल हूँ मैं

फ़रेब हूँ किसी की नज़र का 

तो किसी कि ख़ातिर इस्तकबाल हूँ मैं 


मत झांको मेरी आँखों में तुम मेरे हालात नहीं पढ़ पाओगे 

इन आँखों की गहराई में जो दफ़्न हैं वो जज़्बात नहीं पढ़ पाओगे 

मत ढूँड़ो तुम मेरे दिल की बात नहीं पढ़ पाओगे 


फँस गया हूँ मैं उसकी यादों के समंदर में 

उससे कह दो कोई मुझे किनारा चाहिए 

नहीं रहना अब इस क़दर मुझे उससे कह दो कोई 

की मुझे अब उससे छुटकारा चाहिए 

गुंजाइश नहीं है अब उस शख़्स की इस दिल में

वो शख़्स ना मुझे अब दोबारा चाहिए 


मुझसे बेहतर कोई तेरा दिल बहलायेगा 

मुझे मालूम है की तेरे दिल को वो भाएगा 

ज़रूरी नहीं तेरा मैं ही खास हूँ 

तेरा दिल है उसकी बातों से बहल जाएगा 

जो आज तू मेरे लिए है 

कल वो तू बदल जाएगा 

मेरे जाने के बाद कोई और आयेगा 


थमा कर वो मुझे अपनी यादें फिर फ़रार हो गई 

ना जाने कौन था ख़ुशनसीब वो जिसकी ख़ातिर यूँ बेक़रार हो गई 

जीत गयी उसकी ज़िद और इश्क़ में यूँ मेरी हार हो गई 

सहेज कर रखी थी जो उसकी ख़ातिर मैंने ख़्वाहिशें वो बेकार हो गईं 


एक दफ़ा हमसे भी ये गुनाह हुआ था 

जाने अनजाने में किसी से इश्क़ बेपनाह हुआ था 

नहीं रही अब उसकी ख्वाहिश इस दिल में 

ये दिल जिसके इश्क़ में कभी तबाह हुआ था 


इश्क़ में इश्क़ का दावा करते हैं 

जज्बातों से अक्सर ये छलावा करते हैं 

वफ़ायें तो इनसे होती नहीं 

ये वफ़ाओं का महज़ दिखावा करते हैं 


तुम्हें चाहूँगा तो इस क़दर चाहूँगा 

की छोड़ मैं इस जमाने की फ़िकर चाहूँगा 

सौंप कर ये ज़िंदगी तुझको सदक़े में 

मेरा वादा है तुझको उम्र भर चाहूँगा 


नहीं चाहिए मुझे शर्तों में मोहब्बत 

तुम चाहो तो किनारा कर लेना 

हर फ़ैसला तुम्हारा मंज़ूर है मुझे 

 जो किनारा भी करना है अगर तुम्हें 

 तो बस तुम एक इशारा कर देना 


तुम्हें समझ नहीं आएगी ये बात पुरानी है 

खामोशियों में कहीं दफ़्न एक ज़िंदगानी है 

इन ख़ामोशियों को मेरी बेवजह जो समझो 

तो फिर ये तुम्हारे दिल की नादानी है 

हर लफ्ज़ जो मेरा ख़ामोश है 

हर लफ्ज़ में एक कहानी है 


छोटी सी अहमियत है जो छोटा ही क़िरदार है 

मग़र ख़ुदगर्ज़ी नहीं ये दिल ख़ुद्दार है 

नफ़रत नहीं किसी से और ना ही किसी से प्यार है 

ख़ुदगर्ज़ी हैं लोग यहाँ और कुछ यहाँ ग़द्दार हैं 

इसलिए उम्मीद और विश्वास ये दोनों ही यहाँ बेकार है 


हर घड़ी मैं तेरे इश्क़ में तेरा ख़्याल बुनता रहता हूँ 

अजीब हूँ मैं जो सवाल पर सवाल बुनता रहता हूँ 

सिलसिला ये मोहब्बत का महज़ कश्मकश में गुज़र गया जो 

तुझसे मिलने को तारीख़ मैं हर साल चुनता रहता हूँ 


किराए की है ये ज़िन्दगी 

जो कभी तो ये चुकाना पड़ेगा 

कितनी भी हो नाम पर वसीयत 

सब यहीं पर छोड़ कर जाना पड़ेगा 

रिश्ते कितनी भी ख़ास क्यों ना हों 

मगर वो जो रिश्ता मौत से है 

वो तो निभाना पड़ेगा 


दर्द-ए-दिल हर किसी से जताया नहीं जाता

दिल तोड़ कर हर किसी को दिखाया नहीं जाता

रखनी पड़तीं हैं कितनी बातें खामोशियों में समेट कर

यूँ बेवजह हर किसी को बताया नहीं जाता

फ़िक्र भी होनी चाहिए जज्बातों की इश्क़ में

करके मज़बूर किसी को इश्क़ में सताया नहीं जाता


ख़ामोश रही ज़ुबान मगर आँखों ने अपना काम कर दिया 

छुपा कर रखा था मैंने जो हाल-ए-दिल मेरा इसने वो सरे-आम कर दिया 

ढेरो ख़्वाहिशों और ढेरों उम्मीदों को इसने आज नीलाम कर दिया 

नहीं रहा अब ये दिल महफ़ूज़ इन आँखो ने इसे बदनाम कर दिया 


तोड़ कर रख देंगे तेरे ख्याल या फिर वो सवाल 

या फिर इन आँखों में तेरे बाद  बस नमी होगी 

बंजर होगी तेरे बाद ये जिंदगी ना फिर इस तरह की ये सरज़मीं होगी 

वसवसे होंगे वहाँ तेरी यादों के या हर बखत तेरी कमी होगी 

मत पूछ तू मेरी तबियत को की कैसे रहूँगा मैं तेरे बग़ैर 

जो तू ही ना रही तो ये सांस भी क्या लाज़मी होगी 


माना तेरे यार बहुत हैं 

इश्क़ में तेरे हक़दार बहुत हैं 

चहेते तेरी मुस्कान के 

या फिर अश्कों के तेरे दावेदार बहुत हैं 

ख़रीद सकें जो तेरे ग़म 

ख़रीददार बहुत हैं 

फिर भी तू रहना जरा संभल कर 

जो यहाँ पर लोग ग़द्दार बहुत हैं

क़ातिल जज्बातों के 

या इश्क़ में गुनहगार बहुत हैं 


नहीं समझ सका तू वो लहजा 

जो तुझको मैं समझाने आया था 

कितना बदल चुका हूँ  

कितनी शिद्दत से तुझको मैं बताने आया था 


उससे बिछड़ने की कोई ख़ास वजह नहीं थी

ख़ुद मैं ही लौट आया हूँ उसके दिल से 

जो उतनी वहाँ पर जगह नहीं थी 


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


कोई इश्क़ में वफ़ा करता है 

तो कोई दिलासे देकर जफ़ा करता है 

किसी से हमदर्दी बड़ी शिद्दत से होती है

तो इश्क़ में कोई जुल्म हर दफ़ा करता है 


वो चला गया लेकिन

उसके एहसास छोड़ गया है 

यादें वो अपनी मेरे पास छोड़ गया है 

ढूंड रहा हूँ मैं आज भी उसको उसके वादों में कहीं 

जो देकर वो मुझको झूठी आस छोड़ गया है 


अपने दिल में तुम मुझे पनाह दोगे 

और अपने ख़्वाबों में कहीं तुम मुझे जगह दोगे 

निभाओगे हर रस्म तुम वफ़ाओं की और 

मुझे उम्मीद है की इश्क़ तुम मुझे बेपनाह दोगे 


सिलसिला ये इश्क़ में आम हो गया है 

इश्क़ में सितम सरेआम हो गया है 

नहीं रही अब इश्क़ में जज्बातों की हिफ़ाज़त

जो ये बेवफ़ाई का पेशा और 

बेवफ़ाओ का इंतज़ाम हो गया है 


क़लम मेरी तुम्हें लिख रही है 

और मैं भी तुम्हें लिखना सीख रहा हूँ 

हर लफ्ज़ में तुम्हें मैं लिखता हूँ 

जितना भी मैं लिखना सीख रहा हूँ 


अहसास तब होगा जब ठोकर खाओगे 

इश्क़ में एक रोज़ जब रोकर आओगे 

अहमियत तब होगी तुम्हें भी मेरी 

एक मोड़ पर मुझे जब खोकर आओगे 


खामोशियाँ मैं अपनी तुम्हारे साथ कहना चाह रहा था 

जुटा कर मैं हौसला हालात कहना चाह रहा था 

तुम भी ना  समझ सके मैं जो बात कहना चाह रहा था 

पहली दफ़ा तो मैं जज़्बात कहना चाह रहा था 


महसूस ना हुई थी हमें वो कमीं हमारी 

खैर तुम्ही ने बता दी हमें ग़लतफ़हमी हमारी 

वहम में थे हम कितने अरसों से 

जो महसूस ही ना हो सक़ी हमें बेरहमीं तुम्हारी 


सर्दियों में सवेरे की नींद सी हो तुम 

ज़िन्दगी की आख़िरी उम्मीद सी हो तुम 

गुनाह भी हो मेरे इश्क़ का तुम

और इस गुनाह की इकलौती चश्मदीद भी हो तुम 


कुछ तो बात है तुझमें 

जो ये बागवत कर रहा है 

दिल मेरा मेरी ख़िलाफ़त कर रहा 

नहीं रही अब इसको क़दर मेरी 

कम्बख़्त ये सिर्फ़ 

तेरी हिफ़ाज़त कर रहा है 


या तन्हाई में उसको याद करता हूँ 

नफ़रत भी उसी से है मुझे 

हर रोज़ मैं जिसकी फ़रियाद करता हूँ 

बदल चुकी है वो या अब वो हालात ना रहे 

फिर भी उसकी याद में  मैं अपना हर वक्त बर्बाद करता हूँ 


मेरे इश्क़ का अभाव बनके  रह गई हो 

या कहूँ तुम दिल का लगाव बनके रह गई हो 

नज़दीकियाँ तुमसे इस कदर हुई हैं की 

इश्क़ में तुम पहला पड़ाव बनके रह गई हो 

गहराई ना नापो तुम दिल की मेरे 

ग़मों के समंदर में तुम मेरी नाव बनके रह गई हो 


सोचा था कि उससे मैं इस बार कह दूँगा 

दिल्लगी उसकी और अपना मैं ख़ुमार कह दूँगा 

बेचैन हूँ मैं उसके इंतज़ार में कह दूँगा 

इश्क़ में कितना हूँ उसके बेक़रार मैं कह दूँगा 

कश्मकश मैं जिंदगी की या मेरे दिल का ग़ुबार मैं कह दूँगा 

सोचता हूँ मैं हर बार की इस बार मैं कह दूँगा 


ये सच है की मुझे बहाना नहीं आता 

बातें भी क्या कहूँ बताना नहीं आता 

नज़रबंद ही हूँ जो नज़र आना नहीं आता 

दिल की बात होठों पर आ जाती है 

जो मुझे कुछ भी छुपाना नहीं आता 

आशिक़ी भी हम से ना हो सकेगी कमबख़्त 

जो अभी भी मुझको हक़ जताना नहीं आता

झूठी हमदर्दी दिखाना नहीं आता 

अव्वल नहीं हूँ मैं इश्क़ में 

जो मुझको बातें बनाना नहीं आता 


मोहब्बत मुझे तन्हाइयों का सफ़र लगता है 

फ़लसफ़ा दिल्लगी का या गलतफहमियों का घर लगता है 

टूट ना जाए कहीं ये दिल सो इस निस्बत से मुझे डर लगता है 

पहले पहल तो सब ठीक मगर बाद में फिर सब ज़हर लगता है 

कितना भी दो तुम मुझे इश्क़ की सफ़ाई मगर इश्क़ मुझे क़हर लगता है 


इस दिल के क़ैदख़ाने से तेरी ज़मानत है 

तुझे जाना  है अगर तो जा तुझे इजाज़त है 

गलती नहीं तेरी की बेवफ़ा है तू 

जज्बातों से खेलने की तो तेरी पुरानी आदत है 


ख्वाहिशों का ख़ज़ाना और यादों की जायदाद हो तुम 

मेरे दिल की दुआ और इस रूह की मुराद हो तुम 

धड़कने भी करती हैं हर रोज़ तुम्हें सज़दा 

मेरी साँसों की हर सुबह की फ़रियाद हो तुम 


वो मुड़ कर नहीं आई ये मलाल रह गया है 

होठों पर ख़ामोशी और ज़हन में ये सवाल रह गया है 

खता उसकी है या मेरी ये कश्मकश फ़िलहाल रह गया है 

बयाँ ना हो सका मेरा ग़म , मेरा दिल ये बेहाल रह गया है


मत पूछो हमको हमसे 

हम इश्क़ में खुदको मार चुके हैं

तुम्हें महसूस हुआ या नहीं

हम इश्क़ में हार चुके हैं


एक दफ़ा की मुलाक़ात 

मैं एक दफ़ा चाहता हूँ 

एक दफ़ा ही मिले एक दफ़ा ही सही 

मैं वफ़ा के बदले वफ़ा चाहता हूँ 


ठुकराया गया हूँ मैं 

बाक़ी ख़ास कोई वजह नहीं थी 

उसने अपनाया नहीं मुझे

जो उसके दिल में कहीं 

शायद जगह नहीं थी 


उससे बिछड़ने का मलाल फ़िलहाल चल रहा है 

इश्क़ में ख़ुद ही पड़ा था मैं सो ये हाल चल रहा है 

घुटन भरी हैं रातें और दिल भी ये बेहाल चल रहा है 

इश्क़ में उसने की थीं जो जफ़ाएँ 

ये उसी का कमाल चल रहा है 


न पूछ तू मुझसे मैं क्या चाहता हूँ 

तेरे लफ़्ज़ों में होना मैं बयाँ चाहता हूँ 

शायरी है तू मेरे ख्यालों की

तेरे लफ़्ज़ों की होना मैं दास्ताँ चाहता हूँ 

Tuesday, March 31, 2026

अधूरी कहानी 😕🥲✍️

 || कागज़ के जज़्बात ||



कतरा जो अश्क का बह गया है 

तुम समझे नहीं ये क्या कुछ कह गया है 


तेरी ख़ातिर ही तो मैं इतने गुनाह कर रहा था 

क़त्ल ख्वाहिशों का अपनी मैं बेपनाह कर रहा था 


ख्वाहिश थी कलम की की कुछ खास लिखा जाये 

पिरो कर शब्दों में तेरे एहसास लिखा जाये 


ज़िस्म के निहायती तलबग़ार ही होते हैं 

इश्क़ में भी तो यार ख़रीददार ही होते हैं 



जमानत ना दो मुझे सलाखों में रहना है 

मेरी तो दुनिया है वहाँ मुझे उसकी आँखों में रहना है 


हर लम्हा हसीन है यहाँ इसे तुम हंस के गुजार दो 

न की उलझी हुई इस जिंदगी की तुम कश्मकश में गुजार दो 



नहीं है जो हमदर्दी ही दिल में तो इन दावों का क्या करूँगा 

अहमियत ही ना हो इश्क़ में तो दिखावों का क्या करूँगा



करनी थी जितनी बेरहमी और जितना सताना था वो सता चुका है 

नहीं होगा ऐ दिल अब सितम जो था बेरहम वो जा चुका है 


बस इतनी ही समझ है 

सबको अपना समझ लेते हैं 



क़ातिल ही था हमदर्द मैं जता नहीं पाऊँगा 

मत पूछो तुम मेरा दर्द मैं बता नहीं पाऊँगा 



इश्क़ में हमदर्दियों के दिखावे चलते रहते हैं

वफ़ाएँ भी कहाँ होती हैं यहाँ 

वफ़ाओं के भी यहाँ बस दावे चलते रहते हैं 


समझे नहीं तुम मैं जो समझाने आया था

रूठ कर बैठे हो कबसे मैं मनाने आया था

सबसे अहम हो इकलौती तुम तुमको ये बताने आया था 



हादसा एक ऐसा हुआ कि मैं संभल न सका

लोग तो बदल गए मगर खुदको मैं बदल न सका 


मायूसियों के दलदल में मैं  खुशियाँ तलाश कर रहा था 

हासिल कुछ भी ना हुआ फिर भी मैं प्रयास कर रहा था 



उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ 

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ 


मत पूछो तुम मेरी गहराई की कितना अंदर हूँ मैं 

खामोशियों में ठहरा हुआ समंदर हूँ मैं


किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया 

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया 


एक ही कहानी में दो किरदार निभाया हूँ

नफ़रत भी उसी से की मैं जिससे प्यार निभाया हूँ 


ऐसा है तो क्या तुम एक सवाल पूछ लोगे

आँखों से मिलाकर  आँखें मेरा तुम हाल पूछ लोगे 


ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ 


उसकी सहमति और उससे सहानुभूति चाहता हूँ

प्रेम का अंदेशा तो नहीं है उससे मगर उसी से ये अनुभूति चाहता हूँ 



आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


उम्मीदें तो मेरी तुमसे ज़्यादा हैं 

तुम भी बताओ ना क्या इरादा है 


आँखों में ऐसे नमीं लेकर

कब तक घूमोंगे तुम ये ग़लतफ़हमीं लेकर


उससे भी अब मैं क्या गिला करूँ 

वो चाहती है कि उससे मैं ना मिला करूँ 



किस किस्म का है तू बेरहम मैं समझ नहीं पाया 

आख़िर क्यों देता है तू ये जख्म मैं समझ नहीं पाया 



ख़ुद ही हूँ मैं आवारा तो फिर सहारा कैसे हो जाऊँ

मैं ख़ुद मेरा ना हो सका फिर तुम्हारा कैसे हो जाऊँ 


एक शख़्स को समझने में जरा सी देर हो गई

यही वजह है जो मेरे जज्बातों के साथ हेर फेर हो गई 


भटक रहे हैं अब तो हम उसकी यादों में लावारिश हो कर 

समेटकर अपने जज़्बात अपनी हर ख़्वाहिश खोकर 


नहीं कर सकता इसमें समझौता मैं किसी से 

तुम मेरे हो हर जन्म के लिए


सच नहीं था मगर सच जैसा लग रहा था 

इतना यकीन था जिसको उसको कैसा लग रहा था 


झूठे हैं वो सारे सबूत जानते थे 

तेरी मासूमियत के पीछे में छुपी लोग करतूत जानते थे 


बनते बनते बात बिगड़ने लगी थी 

और फिर तो ऐसा हुआ बिन बात वो लड़ने लगी थी 


कर लिए फ़ासले उसने और अपनी राह ही बदल ली 

ठुकरा की मेरी दहलीज़ उसने तो पनाह भी बदल ली 


हम ही ना समझ सके की वो जिंदगी के मायने सिखाती गई 

हर ठोकर हमें जिंदगी की जिंदगी के आईने दिखाती गई 


ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 


चला गया वो शख़्स मुझे इश्क़ में गुमराह करके 

उजाड़ कर मेरे ख़्वाब मेरी नींदे भी तबाह करके 


आयेगा इक रोज़ वो इस आसार में बैठे हैं

हम भी कम्बख़्त उसके इंतज़ार में बैठे हैं 


शौकीन तो बेशक नहीं वो आदत से मजबूर ही होगा 

जिसने भी क़त्ल किया है मेरे जज़्बातों का वो बेकसूर ही होगा 


मत दो ये इल्ज़ाम तुम उसे की मेरे जज्बातों की क़ातिल है 

मज़बूरी उसकी भी कोई है जो इस गुनाह में वो शामिल है 



सतरंज है ये जमाना यहाँ रिश्तों में भी चाल चली जायेंगी 

आज़मा कर देखना कभी बेमिशाल चली जायेंगी 


हाल-ए-दिल मैं तुमसे क्या कहूँ 

तुम समझोगे ही नहीं तो क्या बयाँ करूँ 


ढूँड़ता रहा मैं लाखों में जिसे तुम्हीं तो वो शख़्स हो 

देखता हूँ मैं हर रोज़ जिसे आईने में तुम्ही तो वो अक्स हो 


क़ैसे कहूँ की अंधविश्वास में हूँ 

वो किसी और का हो चुका हूँ मैं जिसकी तलाश में हूँ 


शहर में यूँ तो कितने विद्वान पड़े हैं 

उसके बावजूद भी शहर के विद्यालय यूँ ही बेजान पड़े हैं 



तेरी यादों ने मुझे कमज़ोर कर रखा है 

उलझा कर तेरे झाँसों में मुझे झकझोर कर रखा है 


उसकी ख़ातिर मैंने इतना सब किया 

वो ही अब पूछती है की इतना कब किया 


कर ले क़ैद तू मुझको तेरी निगाहों में 

चाहिए उम्रक़ैद मुझको तेरी बाहों में 



लम्हें जो संभाल कर रखे थे वो तो फ़िज़ूल में उजड़ गए 

सहजते सहजते उसकी यादों की भूल में गुज़र गए 


मंज़ूर नहीं जो तुम्हें मौज़ूदगी हमारी तो तुमसे हम दूर चले जाएँगे 

मर्जी अगर यही है तुम्हारी तेरी तो हम ज़रूर चले जायेंगे 



चल तेरे साथ इस गुनाह में मैं भी हिस्सेदार हो जाता हूँ 

इकलौता तू ना बन गुनहगार तेरे साथ मैं भी साँझेदार हो जाता हूँ



कर चुका हूँ तय की अब उससे प्यार में ख़िलाफ़त होगी 

बहुत हो चुकी उससे मोहब्बत इस बार तो  उससे बग़ावत होगी 


बात थोड़ी सी है अजीब मगर मैं कहना चाहता हूँ 

की तुझमें या तेरे दिल के क़रीब मैं रहना चाहता हूँ 


वो कल तो आया नहीं जिसकी मैं तलाश में था 

और आज भी मैं बिताया नहीं जो मेरे ही पास में था 


तलब भी उसकी है जिसको पाना मुश्किल है 

समझाऊँ भी कैसे दिल को,समझाना मुश्किल है 


आँखें जब भी उससे मिलीं वो घबरा रही थी 

कोई बात तो थी जो वो मुझसे कतरा रही थी 



टूट कर ख़्वाब अश्कों तले जायेंगे 

तोड़ कर ख़्वाब देखना लोग चले जायेंगे 


नहीं है आसान इस दिल को समझना 

इसके हालात या इसकी मुश्किल को समझना 


बेचैन था मैं कबसे की तुझसे इज़हार करूँ 

करे तू मना भी अगर तो ताउम्र मैं तेरा इंतज़ार करूँ 


सिलसिला ये चंद अल्फ़ाज़ों का है 

दिल में दफ़्न चन्द आवाजों का है 


किसी ना किसी की कमी महसूस होगी 

जब तक ना टूटेगा वहम, ये ग़लतफ़हमीं महसूस होगी 


उम्र गुज़र गई हर शख़्स में एक ही किरदार ढूँडते ढूँडते 

होनहार समझदार और हर शख़्स में कोई एक खुद्दार ढूँडते ढूँडते 


ऐ कलम तु मुझे अभी थोड़ा आराम करने दे 

भुला कर उसे कुछ पल मुझे मेरा काम करने दे 


तूफ़ानों में बुझते चिराग़ों को ढूँडते रहे 

हम भी हम जैसे अभागों को ढूँडते रहे 


झूठी उम्मीदें या फिर झूठे दिलासे दिए जाते हैं 

इश्क़ में आमतौर पर झाँसे दिए जाते हैं 


थाम कर तू हाथ में हाथ तो चल 

चल दो पल तू मेरे साथ तो चल 


भुला कर रंजिशें तमाम हम काम पर चल दिए 

मिलता है जहाँ दो पल का सुकून हम उस मुकाम पर चल दिए 


अजीब थे हम जो सुकून के पल ढूँडते रहे 

जो आज मिला उसे कल ढूँडते रहे 


मत माँग तू मुझसे सबूत मेरे प्यार का 

क्यूंकि सीखा ही नहीं मैंने सलीखा अभी तक इज़हार का 


पढ़ कर तेरी आँखों को हमने लिखना सीखा है 

तेरी यादों की ही बदौलत ये सलीखा सीखा है 


चल रही हैं साँसें भी उसी के नाम पर 

आ गया हूँ मैं इश्क़ के उस मुक़ाम पर 


दुआ करना की कोई ग़लत लत ना लग जाये 

उसकी यादें उसकी बातें या फिर उसकी सिफ़त ना लग जाए 


क्या है कारोबार इससे पहले कैसा है व्यवहार देखा जाता है 

जज्बातों की फिकर हो जहाँ वहाँ किरदार देखा जाता है 


हालातों ने हमें कमजोर कर दिया है 

हम थे कुछ और हमें कुछ और कर दिया है 


भुलना तो नहीं चाहिए मग़र तुम वो बात भूल रहे हो 

खायी थी जो क़समों की वो सौग़ात भूल रहे हो 


फ़ितरत ही नहीं है हमारी किसी को ज़बरदस्ती जकड़ कर रखने की 

बहला फुसला कर रिश्तों की हथकड़ियों में पकड़ कर रखने की 


वो कहता है की सब समझता है 

खुदको वो रब समझता है 

मायूसी मेरी आँखों की 

और मेरी खामोशियों का 

मतलब समझता है 


तेरी दहलीज़ से ठुकराया हुआ मैं सवेरा हूँ 

तू मान ना मान मगर मैं तेरा हूँ 

तू चमकती चाँदनी है अगर उस चाँद की 

तो मैं भी तुझसे लिपटा हुआ अँधेरा हूँ 


बेतुके मेरे शब्दों में इतना बड़ा 

मैं सार कैसे कह सकता हूँ 

एक पिता की महानता और उसका

 मैं प्यार कैसे कह सकता हूँ 


मेरी बातों को मुलाक़ातों को ऐसे भुलाना नहीं था 

तुम्हें जाना ही था अगर तो ऐसे जाना नहीं था 

क्यूंकि तुम ही तो थे मंजिल मेरी मेरा 

तुम्हारे सिवा कोई और ठिकाना नहीं था 


उसे आज़माना भी था अगर हमें 

तो हम इम्तिहान भी देने वाले थे 

एक इशारा भी उसका काफ़ी था 

उसकी ख़ातिर हम तो अपनी जान भी देने वाले थे


तुझे खोने का इस दिल में मलाल चल रहा है 

तेरी यादों का सिलसिला अब तो फ़िलहाल चल रहा है 

अजीब सी है कश्मकश और अजीब सी हैं ये मजबूरियाँ 

की वक़्त भी बड़ी तेज़ी से अपनी चाल बदल रहा है 


वो कहती तो है की 

वो कहीं नहीं जाएगी

मगर फिर भी वो  

उसकी बेरुखी सही नहीं जाएगी


नाज़ुक होती हैं 

जज्बातों की डोर 

इसलिए इन पर 

इतना जोर नहीं करते 

जाने दे ऐ दिल 

इतना गौर नहीं करते 

यूँ छोटी छोटी बातों पर 

इतना शोर नहीं करते 

हांसिल नहीं होती हैं 

कुछ ख्वाहिशें भी 

इसलिए खुदको 

इतना कमज़ोर नहीं करते 



कितनी तो सिफारिस की थी तब उसने बारिश की थी 

कैसे कहूँ की मेरा हमदर्द है वो खुदा

 जिसने मेरे ख़िलाफ़ इतनी साज़िश की थी



आ गए हम भी इश्क में हार कर 

कर्ज़ उनकी ख्वाहिशों का उतार कर 

और अपने ख्वाबों को इन्हीं हाथों से  उजाड़ कर


सायर तो सारे के सारे झूठे होते हैं 

उनकी उम्मीदें और उनके सहारे भी झूठे होते हैं 

करते हैं वो बातें बयां अपनी इशारों में 

मगर उनके तो सारे  इशारे भी झूठे होते हैं

कैसे होंगी बातें सच्ची उनसे 

सच की वजह से ही तो वे बेचारे टूटे होते हैं 

यूं हैं नहीं सारे सायर झूठे होते हैं


आँखों में अश्क़ होना चाहिए 

ऐसा नहीं है की हर शख़्स रोना चाहिए 

हो जाती हैं साफ़ नज़र और 

दिल साफ़ हो जाता है अगर 

तो फिर जायज़ है आँखें भिगोना चाहिए 


टूट गईं हैं नींदें तो क्या 

नींदें तो टूटती रहती हैं 

टूट गईं हैं उम्मीदें तो भी क्या 

उम्मीदें भी तो टूटती रहती हैं 


प्रीत के दामन में 

मोती अहसासों के भरना 

वास्ता जिस्मों से कम 

हमेशा साँसों में उतरना 


उनकी याद आती रहती है 

उनसे मिलने की इस दिल से 

फ़रियाद आती रहती है 

क्या थी कमी हम में 

जो छोड़ गए वो हमें 

हर ख़बर हमें उनकी 

उनके बाद आती रहती है 


कहने दो ना मुझे जो उसको पैग़ाम कहना है 

अरसों से दिल मैं क़ैद हैं जो वो बातें उससे तमाम कहना है 

नहीं हो सकेंगी बयाँ मुझसे मेरी ये ख़ामोशियाँ 

सो इसी लहज़े में उससे उसके इल्ज़ाम कहना है 


अभी भी तेरी यादों का 

मैं बोझ लिए घूम रहा हूँ 

एक तू ही तो है जिसकी यादें

 मैं हर रोज़ लिए घूम रहा हूँ 

तेरे ही इंतज़ार में मैंने हर लम्हा गुज़ारा है 

मगर तुझे ख़बर ही कहाँ की कितनी शिद्दत से 

मैं दिल में तेरी खोज लिए फिर रहा हूँ 



आँखों में बस नमीं रह गई थी 

उसके बाद तो बस उसकी कमीं रह गई थी 

कह ना सके हम उससे कुछ भी उसके जाने पर 

जुबान जो मेरी होठों में बस जमीं रह गई थी 

आँखें खुली होठ खामोश और 

धड़कने भी ये थमीं रह गई थी



मुरझाना ही था उसे आख़िर में 

इसलिए उसने खिलना छोड़ दिया 

हाथ में सबक़े छुरे थे यहाँ 

लिहाज़ा सबसे मिलना ही छोड़ दिया 


कोई इस पागल दिल को 

समझाने वाला नहीं है 

कैसे समझाऊँ मैं इसको 

की अब वो आनेवाला नहीं है 



पूरा शहर ही तेरे नाम हो चुका है 

किससे करूँ मैं शिकायत तेरी 

ये शहर जो तेरा ग़ुलाम हो चुका है 


उठाकर कलम हम एक ही पैग़ाम लिखने लग जाते हैं 

उसकी यादें उसकी बातें हम सुबह शाम लिखने लग जाते हैं 

इक वो है जिसको मेरे ख्याल तक नहीं आते 

इक हम हैं जो ख्वाबों में भी खुदको 

उसके नाम लिखने लग जाते हैं 


खामोशियों में भी अल्फ़ाज़ बड़े गहरे होते हैं 

यादों की ये आवाज लिए ठहरे होते हैं 

पाबंदियाँ होतीं हैं खामोशियों में 

की कुछ भी बयाँ ना हो सके जुबान से 

तभी तो सख़्त से सख़्त यहाँ अल्फ़ाज़ों के पहरे होते हैं 


छूट गए वो  लोग 

जो मेरे बेहद ख़ास हुआ करते थे 

जिनसे हमदर्दियाँ जुड़ चुकीं थीं मेरी 

जो मेरे दिल के बेहद पास हुआ करते थे 


तुम्हें भी खड़ा होना पड़ेगा उस कटघड़े में 

इकलौता मैं ही क़ातिल नहीं हूँ 

बराबर के हम दोनों गुनहगार हैं

उस गुनाह में अकेला मैं ही शामिल नहीं हूँ 


सीख रहा हूँ अभी 

की कैसे प्यार किया जाता है 

करके गुमराह दिल को कैसे 

इस झूठ का कारोबार किया जाता है 


किसी और जहाँ की है वो 

की उसे वफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 

या फिर ये दिल ही पागल है मेरा 

जिसे उस बेवफ़ा के बारे में कुछ मालूम नहीं है 


क़लम का सिपाही हूँ 

मैं कलम की बात लिखता हूँ 

लिखते होंगे लोग मसख़रे 

मगर मैं तो जज़्बात लिखता हूँ 


पूछो कभी उससे भी वो दिल में अपने 

तुम्हारे लिए क्या जज़्बात रखती है 

समझते हो तुम तो उसके इशारे 

मगर वो भी क्या तुम्हारी खामोशियों की 

मुक़्क़मल मालूमात रखती है 



सफ़र अधूरा रह गया वो 

जिसमें तुझे हम पाना चाहते थे 

बातें भी वो बयाँ ना हो सकीं 

वो बातें जो तुझे हम बताना चाहते थे 

दफ़न कर दिए हमने वो सारे 

अब जज़्बात जो करके मुलाकात 

हम तुझे जताना चाहते थे 

गया था तू ही यूँ मुझसे ख़फ़ा हो कर उस मोड़ से 

उस मोड़ पर हम तो कबका तुझे मनाना चाहते थे 

ना हो सकी इश्क़ में हम से ख़फ़ा नाराज़गी तुझसे 

मेरे दिल में थी ये जो कशमकश तेरी ख़ातिर 

ब मोहलत वो हम तुझे समझाना चाहते थे 

ज़्यादा कुछ नहीं थी मेरे दिल की ख़्वाहिश 

बस तेरे दिल में हम जरा सा ठिकाना चाहते थे 


कोई ऐसा तो नहीं मिला अभी तलक 

जो मेरे दिल की बात समझ सके 

या फिर कोई ऐसा जो मेरे हालात समझ सके 

यूँ तो मिले बहुत थे मुझे लोग इस जमाने में 

मगर वो ना मिला मुझको जो मेरे जज़्बात समझ सके 

झाँक कर मेरी आँखों की गहराइयों में

वहीं पर मौजूद है जो बरसात समझ सके 


नहीं हो सकतीं हमसे ये बयानबाज़ियाँ 

सो हमने तो हार मान ली  

तुम ही हो इकलौते बेक़सूर 

हमारी तो निगाहें भी हैं क़ुसूरवार हमने मान ली 


बहुत कुछ बचा है अभी भी जो तुझको कभी बताना था 

बातें वो जो तू कभी समझी नहीं वो भी तुझको समझाना था 

लक़ीरों में ना थी ना ही तक़दीरों में तू मिली 

कह भी ना सका तुझे कितनी मुद्दतों से तुझको पाना था 


विश्वास ही टूटा हो जहाँ 

वहाँ उम्मीदें भी क्या कर सकती हैं 

और आँखें ही रूठीं हों ख्वाबों से अगर 

तो नींदें भी  क्या कर सकती हैं 


ग़ैरों की अमानत थी वो जो दो पल की ख़ुशी मिली थी 

आख़िरकार उसे मोड़ कर आना था 

और वो यादें जो दो पल थी साथ मेरे उसे भी यार छोड़ कर आना था 



तकलीफ़ बस इस बात की है 

की अब वो मुझे पहचानता नहीं है 

ताउम्र गुज़ारी है मैंने जिसके साथ 

वो कहता है की मुझको जानता नहीं है 


वो सामने आ जाए तो मैं घबराता रहता हूँ 

फिर भी ना जाने किस बात पर मैं इतराता रहता हूँ 

मुद्दतों से मुद्दा वो खामोशियों में दफ़्न था 

जिसकी दास्ताँ मैं सभी को बतलाता रहता हूँ 


चलने दो आज ये कलम 

मुझे हर बात लिखनी है 

खामोशियों तले दफ़्न थी जो मेरे 

अल्फ़ाज़ों के ज़रिए उसकी हर 

वो वारदात लिखनी है 

डर नहीं रहा मुझे अब उसकी जुदायी का 

इसलिए उससे जो मिली है 

वो रिहाई की सौगात लिखनी है 


ज़िन्दगी ये मेरी अभी उदास चल रही है 

धड़कनों से ख़फ़ा ये मेरी साँस चल रही है 

नहीं रहा मैं अब मुझमें मौजूद कहीं 

हर तरफ़ मेरे वजूद की तलाश चल रही है 


तोड़ तोड़ कर टुकड़ों में इस दिल को 

मैं बर्बाद करता रहा 

बेक़सूर था ये मासूम दिल 

उसके बाद भी मैं इसे बर्बाद करता रहा 

छीन लिया मैंने इससे वो सारे जज़्बात प्यार के 

और तेरी यादों को इस दिल से मैं आजाद करता रहा 

हैरानी है मुझको इसकी इस बात पर की 

टुकड़ों टुकड़ों में बिखर गया था ये दिल

बावजूद उसके ये तुझको ही याद करता रहा 



कभी एक संकल्प थी तुम मेरी

 मगर अब मात्र एक कल्पना हो तुम

ठुकरा चुका हूँ अब तुम्हारी

 सारी लावारिस उन यादों को 

मेरी खातिर अब मात्र एक सपना हो तुम



एक अधूरी सी आस लेकर आया था मैं ख्वाहिशें तेरे पास लेकर 

उम्मीदों भरी निगाहें और दिल में विश्वास लेकर 

आया था कुछ यादें तेरी साथ अपने खास लेकर 

बातें वो तेरी मीठी मीठी और तेरे ही एहसास लेकर 

आया था मैं पास तेरे हिस्से की अपनी साँस ले कर 



रौंद दिए गए थे जो इश्क़ में 

एक दफ़ा फिर से सुधार कर के वो गुलाब लाया हूँ 

किराए की हैं ये नींदें और उधार के वो ख़्वाब लाया हूँ 

हर पन्ने पर जिसमें लिखी हुई है वफ़ा-ए इश्क़ 

बड़ी ही मशक़्क़त से ढूँड कर के वो किताब लाया हूँ 


मत पूछ मुझसे पहेलियों में 

जो भी कहना है तुझे

तू वो साफ़ साफ़ कह दे न 

जरूरी नहीं हर बात मेरे ही हक़ की हो 

तुझे जो कहना है मेरे ख़िलाफ़ तो कह दे न 


आँखें पढ़ कर देखिए कभी 

आपको बेहद राज मालूम हो जायेंगे 

ना हो सके जो खामोशियों में बयाँ 

वो दिल के अल्फ़ाज़ मालूम हो जाएँगे 


लाख नारजगी है उसको मुझसे 

मगर वह इन सब के बावजूद रहती है 

ढूंड सको तो ढूँड लेना तुम उसे 

वो मुझमें आज भी मौजूद रहती है 


समझा न पाया मैं 

या फिर तुम्ही समझ न पाये 

की तुम ही मेरे साये की तरह हो 

अपनाता रहा तुम्हें मैं तुम्हारे हर अक्स में 

और तुम्हारा बर्ताव ये था 

की जैसे पराये की तरह हो तुम 


मूँद ली आँखें और तुमको याद करता रहा 

तुम तो जा चुके थे मगर तुम्हारे लौटने की 

मैं फ़रियाद करता रहा 

हँसी आई ख़ुद पर और 

दिल पर रोना आया  की क्यों ही बेवजह 

मैं वक्त बर्बाद करता रहा 


कितना भी गहरा क्यों ना हो 

इसको छुपाना पड़ता है 

इश्क़ में आख़िरकार पछताना पड़ता है 

ठुकराये जाने पर भी जाना पड़ता है 

अपने ही दिल को सताना पड़ता है 

दिल तोड़ कर इश्क़ में दिखाना पड़ता है 

अजीब है ये रस्म मगर निभाना पड़ता है 


मत पूछो इश्क़ की तुम 

मै भी वहाँ से होकर आया हूँ 

लुट गए मेरे ख़्वाब सभी 

और खाकर वहाँ से ठोकर आया हूँ 


कुछ अलग ही रिश्ता था 

उससे जो लफ़्ज़ों में बयाँ नहीं हो सकता 

कितना भी करूँ मैं मगर 

उससे फ़ासला नहीं हो सकता 

यादों में मेरे महफ़ूज़ है आज भी वो 

यहाँ से तो कभी वो लापता नहीं हो सकता 

इश्क़ तो दिल की एक सौगात है 

ये कोई मसला नहीं हो सकता 


चश्मदीद हैं निगाहें मेरी फिर भी वो कहतें हैं की इसमें मेरी खता नहीं है 

क़त्ल करके वो मेरे जज्बातों का कह रहे हैं की मुझे पता नहीं है 


तिजारत नहीं एक इबादत है इश्क़ 

अहसासों की महक और जज्बातों की हिफ़ाज़त है इश्क़ 

ना हो सके जो बयाँ अल्फ़ाज़ों में वो कहावत है इश्क़ 

रूह से रूह को जोड़ती है जो ऐसे रिश्तों की बनावट है इश्क़ 


वो ख़फ़ा होती है जो तो उसे ख़फ़ा हो जाने दे 

होती है वो जो बेवफ़ा तो उसे बेवफ़ा हो जाने दे 

अब इतनी हमदर्दी नहीं है उससे की उसे मनाऊँ मैं 

वो इस दफ़ा जो होती है दफ़ा तो उसे दफ़ा हो जाने दे 


घड़ी है ये इम्तिहान की 

सो इम्तिहान दे रहे हैं 

वो माँगता है जब भी 

तो ख़ुशी से अपनी जान दे रहे हैं 

किसी से न की कभी उसकी शिकायत 

ना ही कभी उस रब से हम 

ये सब बयान कर रहे हैं 

उसके एक इशारे पर हम अपनी 

हर ख़ुशी को ख़ुशी से क़ुर्बान कर रहे हैं 


आख़िर क्यूँ आए हो तुम ये पैग़ाम लेकर 

साथ में यादें भी उसकी तमाम लेकर 

इरादा पक्का कर चुके हो क्या 

यूँ मुझको तुम सताने का 

जो आए हो मुक़्क़मल ये इंतज़ाम लेकर 

अरसों पुराना कोई इंतक़ाम लेकर 

और साथ में बेरहम सी ये शाम लेकर 


इकलौती वो शख़्स थी

जिसकी मुझको तलब थी 

हुनर थी जो मेरे मुस्कुराने की 

या यूँ कहूँ की वो मेरी सब थी 

करता था मैं जिसकी इबादत 

ब -अदब वो मेरा रब थी 

जिसके होने से ज़िन्दगी 

जीने का सबब थी 

और जिसके ना होने से 

ये ज़िन्दगी भी बेमतलब थी  


समझ ले तू ही मेरी धड़कनों के इशारे 

जो दिल में है वो जुबान से कभी मैं कह नहीं पाऊँगा 

फ़ासला तुझे रखना है तो रख बेशक

मगर मैं तो तुझसे दूर रह नहीं पाऊँगा 

ये दूरी बेशक जरूरी है मैं समझता हूँ 

मगर ये भी तय है की ये दूरी मैं कभी सह नहीं पाऊँगा



तेरी बाहों के बिस्तर में 

फ़िर से सोना चाहता हूँ 

 जाल में तेरी ज़ुल्फ़ों के

मैं खुदको खोना चाहता हूँ 

चाहता हूँ लुटा दूँ मैं 

तुझपर ये जिंदगी 

और बदलें में जो कुछ दे तू 

तो तेरी चाहतों के हर ख़्वाब

 मैं संजोना चाहता हूँ 



दफ़ना कर अपनी ख्वाहिशें 

और अपने जज्बातों का गला

अपने हाथों से घोंट कर 

आ गए हम इश्क़ में हार कर

ख़ाली हाथ लौटकर 



मुक़्क़मल हर रिश्ते को उसने निभाया है 

और ये लोग अभी भी कह रहे हैं 

की वो पराया है 

मुकर गए जहाँ सभी अपने 

उस मोड़ पर भी वो दौड़ कर आया है 

उसे कैसे कह दूँ मैं अपना 

वो तो मेरा साया है 



ख़्वाहिशों से समझौता और खामोशियों में मलाल चल रहा है 

उलझी हुई है ज़िंदगी, कोई ना कोई जेहन में सवाल चल रहा है 

मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा वो तो बेहाल चल रहा है 

जिंदगी चल रही बेबसी में अभी तो यही फिलहाल चल रहा है 


याद आएगी जो मेरी तो 

ज़रा मुझे भी याद कर लेना 

हमने तो सौंप दी पूरी ये जिंदगी तुमको 

जरा सा वक्त तुम भी बर्बाद कर लेना 


ग़ुमराह रही है ये जिंदगी 

क्यूंकि मैं झाँसों में जीता रहा 

तोड़ गए जो यकीन मैं उन्हीं के 

दिलाशों में जीता रहा 


जो पहले ना बदले वो 

इस बार बदल गए 

इसी तरह ही कितनों के 

किरदार बदल गए 

तलब भी बदल गई और 

तलबगार भी बदल गए 

वफ़ाओं के करते थे जो दावे,दिखावे 

वफ़ाओं के अब वो दावेदार बदल गए 

होने लगीं हैं अब तो मोहब्बतें भी फर्जी 

जो सच्ची मोहब्बतों के 

अब वो उम्मीदवार बदल गए 



बातें तो उससे होती रहीं 

पर बयाँ उससे कुछ भी ना हुआ 

बेरुख़ी भी उसकी वही पुरानी थी  

नया उससे कुछ भी ना हुआ 



दिल की गहराई में छुपे हर ग़म जानते हैं 

शुष्क आँखें भी हैं नम जानते हैं 

कहीं ना कहीं तो लगी है चोट दिल की तुम्हें 

दिल में तुम्हारें भी है जख्म जानते हैं 

तुम ना कहो चाहे हालात लफ्जों से 

मगर ये धड़कनें क्या कहती हैं 

इनकी हर जुबाँ हम जानते हैं 

तुम ही सोचते हो अजनबी हमें

की तुम्हें हम कम जानते हैं 

तुम कहो न कहो मग़र तुम्हारी 

तो हर दास्ताँ तुम्हारी आँखों के 

दरमियाँ हम जानते हैं 



शिकस्त इश्क़ में खाये हुए हैं 

यही वजह है जो इश्क़ में घबराये हुए हैं 

रूठ गया ये दिल और जिस्म से दूर ये साये हुए हैं 

जिसकी ख़ातिर हम थे कभी अपने 

उसी की खातिर आज हम पराए हुए हैं 

नहीं है कोई क़सूर उसका इसमें 

क़सूर तो सब है मेरी क़िस्मत का 

जो क़िस्मत के ही तो हम सताए हुए हैं 



चार कदम पर लोगों के क़िरदार बदल जाते हैं 

कितने भी हों लोग मुक्कम्मल वफादार बदल जाते हैं 

कौन से वहम में हो तुम जो अभी भी इंतेजार में हो उसके 

ख़ुदरज़ों की इस दुनियाँ में हैं ये सब ख़ुदगर्ज़ी तलबगार बदल जाते हैं 

कुछ दिन का फ़ासला रख लो अगर तो यहाँ 

रिश्ते सभी और रिश्तेदार बदल जाते हैं 



गुनहगार हूँ मैं अगर तो मेरी सजा क्या है 

चल तू ही बता दे मुझको तेरी रज़ा क्या है 

क्यों मायूस,गुमसुम और उदास सी है तू 

आख़िर इन खामोशियों की तू बता दे वजह क्या है 


छुपा कर ख़ुदगर्ज़ी वो हमदर्दी की नुमाइश करता है 

हर शख्स कोई न कोई ख़्वाहिश रखता है 

मिलता है जो अगर तो मिलने से पहले ही कोई फ़रमाइश रखता है 


इश्क़ इस क़दर कर बैठे की आदत हो गई 

कितनी मेरी ख्वाहिशों की शहादत हो गई 

कहने को तो ये अब एक कहावत हो गई 

की इश्क़ में वो मेरी इबादत हो गई 



सावन की बरसात बनकर 

या सर्दी की कोई रात बन कर 

क़बसे हूँ इंतज़ार में मैं 

की आओगे तुम जज़्बात बनकर 



प्यार है मुझे उन यादों से 

जो तेरी मौजूदगी के सबूत लाती हैं 

याद दिलाती हैं वो तेरी बातें 

और ढूंड कर तेरी हर करतूत लाती हैं 


कब होंगी मेहरबान ये नज़र 

बस इंतज़ार मैं करता रहता हूँ 

सामने तो उससे कुछ कह ना सका 

बाक़ी ख़यालों में इज़हार मैं करता रहता हूँ 


वो प्यार में थी किसी और के 

और मैं पागल था जो उसे पाना चाहता था

बसा कर मैं उसको अपने दिल में 

हर रस्म मैं इश्क़ की निभाना चाहता था 

उसे तो थी नफ़रत मुझसे 

मग़र मैं ही था जो उसे मनाना चाहता था 


झूठी तसल्ली झूठे बिस्वास मत दो 

जो निभा ना सको अगर तो फिर झूठी आस मत दो 

मिलना ही नहीं हो जो दोबारा तुम्हें तो 

इन आँखों को तुम प्यास मत दो 

झूठी हमदर्दी ,झूठे दिलासे और झूठे 

वो प्यार के तुम एहसास मत दो 


दम तोड़ चुकी उम्मीदों में एक आस पूरी हो गई 

तुम मिले हो जबसे मेरी तलाश पूरी हो गई 

नहीं रही अब नाराज़गी मेरे दिल को जो 

आँखों की बेचैनी और आँखों की प्यास पूरी हो गई 



मन ही मन में 

हम तुझे सोंच रहे हैं 

और तेरे ये ख्याल 

मेरे मन को अंदर ही 

अंदर खरोंच रहे हैं 

सिल चुके हैं हम 

अपने होंठ खामोशियों से 

बस ये आँखे हैं जो भर आती हैं 

बस इन्हें ही तो हम पोंछ रहे हैं 


नहीं रहा अब वो इश्क़ क्यूँकी इश्क़ में फ़ासला ही बढ़ गया है 

ख़त्म हो चुकीं हैं इसमें जज्बातों की समझ अब 

क्यूँकि इश्क़ में आशिकों का मुक़ाबला ही बढ़ गया है 



तक़दीरें ख़िलाफ़ हैं अभी इसलिए उनसे मुक़ाबला चल रहा है 

और नसीहत दी है मैंने मेरे ख्वाबों को 

फ़िलहाल अभी ख्वाहिशों से फ़ासला चल रहा है 



एक ही तो शख़्स है मैं जिससे इस क़दर प्यार कर सकता हूँ 

की उसकी ग़ैर मौज़ूदगी में उसका इंतज़ार कर सकता हूँ 

उसके हर झूठ पर बेझिझक एतबार कर सकता हूँ 

कितना भी हो कोई उससे बेहतर मैं उसे इनकार कर सकता हूँ 




की वादों से वो यूँ मुकर जाएगा 

जो हमने ख़्वाबों में बनाया है घर 

वो यूँ बिखर जाएगा 

टूट जायेंगी नींदें और दिल भी 

ना धड़केगा फिर कभी 

ये यूँ ही ठहर जाएगा 



आशुओं की तर्ज पर सरगम लिख दूँ 

लिखने पर आऊँ तो हर ग़म लिख दूँ 

धड़कनों में महफ़ूज़ हर ज़ख्म लिख दूँ 

कौन कितना है यहाँ बेरहम लिख दूँ 

इश्क़ कितना है यहाँ बेसरम लिख दूँ 


आयी थी वो ख़्वाबों में मेहमान बनकर 

नींदों में शुकून के अरमान बनकर 

ताल्लुक़ जुड़ चुके थे उससे यूँ दिल के 

की धड़कनों में समा गई थी वो जान बनकर 




मुझको उसकी कमीं खाये जा रही थी 

आँखों में उसकी नमीं सताये जा रही थी 

महज़ फ़रेब थी उसकी ये मायूसी 

मगर फिर भी मुझको ये 

ग़लतफ़हमी खाये जा रही थी 



आँखों में उम्मीदें या भरम लेकर बैठा हूँ 

और दिल में भी अजीब सा ज़ख्म लेकर बैठा हूँ 

ठुकरा दिया उसी ने मुझे जिसकी खाकर क़सम बैठा हूँ 

इश्क़ में ना मिली कोई ख़ुशी सो लेकर मैं ये ग़म बैठा हूँ 


वो कबका जा चुका है 

उसके बस क़दमों के निशान बाक़ी हैं 

नहीं रहा वो यादों में भी कहीं 

उसके बस ज़ख़्मों के निशान बाक़ी हैं

दफ़ा कर दिया है मैंने उसको 

मेरी जिंदगी से मुक़्क़मल इस बार 

इन ख्वाबों में फ़ासला बस 

उसके दरमियान अभी बाक़ी है 




फ़ुर्सत जब मिलेगी तो विस्तार से लिखेंगे 

उसकी हर याद को हम प्यार से लिखेंगे 

जिसमें शिकायतें ना होंगी उससे 

हर ख़ामी को उसकी हम सवाँरकर लिखेंगे 



होगा जो भी देखा 

जायेगा वो बाद में 

होने दो मुक़्क़मल बर्दबाद

 मुझे अभी उसकी याद में 



बिंदी उसके माथे पर तो वैसे ही क़ातिल थी

उसने आँखों में क़ाज़ल लगाया था 

मेरे दिल का फिसलना तो बात ही आम थी 

उसने तो पूरा शहर पागल बनया था 




ठुकरा कर जबसे वो गया हम आँखों में बारिश लिए बैठे हैं 

टूटे ख़्वाब टूटी नींदें और अधूरी ख्वाहिश लिए बैठे हैं 

कहाँ करेगा ये दिल मुझे माफ़ जो हम ये गुज़ारिश लिए बैठे हैं 

गुस्ताखी ये कम नहीं थी जो उसके के कहने पर 

ख़ुदसे ही साज़िश पर साज़िश किए बैठे हैं 




ज़िन्दगी मेरी कोई सर्कस नहीं 

इसलिए कोई भीड़ नहीं बुलानी है 

बुलाया है बस तुम्हें 

जो एक दास्ताँ सुनानी है 



तेरे हिस्से की तू ख़ुशी दे सकता है अगर 

तो मैं तेरे हिस्से के ग़म ले सकता हूँ 

नहीं दे सकता तुझे मैं जो खुशियों भरी झोली तो क्या 

कम से कम मैं तेरे जख्म तो ले सकता हूँ 



तेरे आने का इंतेजार बेशुमार रहता है 

तू आए ना आए पर ये ख़ुमार रहता है 

ये फ़ासले ये दायरे महज़ नज़रों के दरमियान हैं 

मगर इन्हें मूँद कर जो देखूँ तो हर बार तेरा दीदार रहता है 

इसीलिए तो मेरी हर धड़कन में यार तेरा प्यार रहता है 



जो यही मंजूर है तुम्हें तो तुम किनारा कर सकते हो 

छोड़ कर हमें किसी ग़ैर से तुम प्यार दोबारा कर सकते हो 

मंज़ूर नहीं जो तुम्हें हमारी मौजदूगी भी तो एक इशारा कर सकते हो 

छोड़ देंगे हम भी अगर तुम्हारी रज़ा है 

क्या यादों में हमारी तुम गुजारा कर सकते हो 



समझ नहीं पाओगे तुम की 

अपनी बातों में मैं क्या कहता हूँ 

टूट जाती हैं जब नींदें तो मैं रातों में क्या कहता हूँ 

दरिया हूँ मैं किसी के अश्क़ों का 

जो निकलकर जज़्बातों से अल्फ़ाज़ों में बहता हूँ 

तुम पढ़ो ना पढ़ो मगर इसी तरह मैं 

किसी के जज्बातों में रहता हूँ 



कोई कुछ भी कहे 

तुम गौर मत करना 

दिल टूटे भी अगर 

तो शोर मत करना 

आकर दूसरों की बातों में 

खुदको कभी कमज़ोर मत करना 

मान जाएगा मनाने से मासूम है ये 

तुम दिल के साथ कभी ज़ोर मत करना 

इश्क़ करो तो उसकी रूह से 

बहला कर बातों में कुछ और मत करना 





मैं वो रास्ते जो तेरे 

वास्ते मैं खोज रहा था 

तू ख़ुद ही ख़फ़ा हो कर 

जा चुकी थी दूर मुझसे 

और मैं तेरी तलाश में 

हर रोज़ रहा था 




ताज़ हो किसी महल की तुम 

और हम सड़कों के काँटे हैं 

स्पर्श हो तुम प्रेम भरा 

और हम गालों पे चाँटें हैं 




उम्मीद है कि एक रोज़ तो तुम मेरी बात समझ पाओगे 

मेरी ख़ामोशियों में जो क़ैद हैं वो जज़्बात तुम समझ पाओगे 

समझ पाओगे तुम मेरे हालात और इस दिल के सवालात तुम समझ पाओगे 

मायूस सी ये हँसी के साथ साथ इन आँखों की बरसात भी तुम समझ जाओगे 




तेरे जाने के बाद एक कमी सी महसूस होती है 

कितना भी मुस्कुराऊँ मगर इन आँखों में 

कहीं नमीं से महसूस होती है 

जर्ज़र हो चुकी हैं मेरी नींदें और ये उम्मीदें भी 

किसी ग़लतफ़हमीं सी महसूस होती हैं 




मत पूछो कैसा मैं हाल लिए बैठा  हूँ

इतंजार में उसके मैं अंगुलियों पर साल लिए बैठा हूँ 

वो गुमसुदा है ये जहन में मलाल लिए बैठा हूँ 

उससे ताल्लुक़ रखता है हर वो सवाल जो फ़िलहाल मैं लिए बैठा हूँ 



तुम्हें भी ये एहसास नहीं है 

की तुम्हारी ग़ैर मौज़ूदगी में 

महफ़ूज़ ये साँस नहीं है 

तन्हाई की क़ैद में है ये दिल 

रिहाई की कोई अब आस नहीं है 

ग़ौरतलब है कि तु मेरे पास नहीं है 




हटा दी मैंने पाबंदियां 

मेरी ख्वाहिशों से 

और इन ख्वाबों को 

आजाद कर दिया

अफ़सोस भी नहीं 

मेरे दिल को अब 

की खुदको मैंने 

आबाद कर दिया या 

बर्बाद कर दिया 



समझो मेरी बात मुझे बेचारा नहीं बनना 

बदनसीब या किस्मत का मारा नहीं बनना 

तुम्हीं को मुबारक ये महफ़िल तुम्हारी 

मुझे हिस्सा इस महफ़िल का दोबारा नहीं बनना 

तन्हा ही रहना है मुझको गवारा 

सो जाओ तुम यार मुझे तुम्हारा नहीं बनना 



हो इस दिल की अहमियत जिसे 

वो एक रोज़ मिल जाएगा

फ़िलहाल तो जारी है 

मेरी खोज.वो मिल जाएगा ।



मत पूछो तुम  हाल इन आँखों से कम्बख़्त ये बयान कर देंगी

अंदाज़ा ही कहाँ तुम्हें कितना ये नुक़सान कर देंगीं 

छीन लेंगी ये तुम्हारा सुकून सच कहूँ तो परेशान कर देंगी

मत पूछो इन आँखों से ये तुमको हैरान  कर देंगी



तेरी मासूमियत पर बग़ावत 

कोई कैसे कर सकता है 

तुझे देखता हूँ तो सोचता हूँ 

तेरी खिलाफत कोई कैसे कर सकता है 

नज़रें तो तुझसे मैं ही ना  मिला सकूँ 

तेरा दिल तोड़ दे 

ऐसी हिमाक़त कोई कैसे कर सकता है 



इश्क़ में अजीब से ख़िताब लेकर बैठा हूँ

टूटी हुई उम्मीदें और टूटे हुए ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

हांसिल कुछ भी ना हुआ फिर भी ये दिल मैं बेताब लेकर बैठा हूँ 

फिर से समझना है अब मुझे ये इश्क़ 

सो इश्क़ की ये किताब लेकर बैठा हूँ 

कैसे करना है मुझे मुनाफ़ा इश्क़ में हर हिसाब लेकर बैठा हूँ

शुरुआत से ही देना है अब झाँसा इसलिए गुलाब लेकर बैठा हूँ 



समझे नहीं तुम मैं जो समझाने आया था

रूठ कर बैठे हो कबसे मैं मनाने आया था

सबसे अहम हो इकलौती तुम तुमको ये बताने आया था 



तेरी ख़ातिर ही मैं दिल से बैर कर बैठा हूँ 

मनाना जब भी चाहा तो कहता है की देर कर बैठा हूँ कैसे तुझे समझाऊँ कितनी ख्वाहिशों को अपनी मैं ढेर कर बैठा हूँ 

अब तो नींदे भी ख़फ़ा हैं मुझसे की उनसे मुँह फेर कर बैठा हूँ 



जहाँ दिल लगे तुम जाकर गुजारा कर सकते हो 

मैं नहीं रोकूँगा तुम्हें तुम चाहो तो किनारा कर सकते हो 

दिल में क्या है तुम्हारा कभी खुल के कहो ना मुझसे 

जो ये भी ना हो सके बयाँ तो बेशक तुम इशारा कर सकते हो 


होंगी जालसाझियाँ इश्क़ में मगर वफ़ाओं की दावेदारी होगी 

जिसने भी की हैं इश्क़ में साज़िशें उसकी ही यहाँ समझदारी होगी 

यहाँ ना होगी हमदर्दी और जरा भी ना कहीं ख़ुद्दारी होगी 

बेवफ़ाओं के दौर की है ये मोहब्बत  सो यहाँ तो बस ग़द्दारी होगी 


हटा दी मैंने पाबंदियां 

मेरी ख्वाहिशों से 

और इन ख्वाबों को 

आजाद कर दिया

अफ़सोस भी नहीं 

मेरे दिल को अब 

की खुदको मैंने 

आबाद कर दिया या 

बर्बाद कर दिया 



समझो मेरी बात मुझे बेचारा नहीं बनना 

बदनसीब या किस्मत का मारा नहीं बनना 

तुम्हीं को मुबारक ये महफ़िल तुम्हारी 

मुझे हिस्सा इस महफ़िल का दोबारा नहीं बनना 

तन्हा ही रहना है मुझको गवारा 

सो जाओ तुम यार मुझे तुम्हारा नहीं बनना 



हो इस दिल की अहमियत जिसे 

वो एक रोज़ मिल जाएगा

फ़िलहाल तो जारी है 

मेरी खोज.वो मिल जाएगा ।



बंध गईं मेरी ख्वाहिशें

 और मेरे हौसलों को भी 

खामोश कर दिया गया 

अहमियत भी ना रही कहीं 

मेरे जज्बातों की 

तुमने ही खानाबदोश कर दिया 



मत पूछो तुम  हाल इन आँखों से कम्बख़्त ये बयान कर देंगी

अंदाज़ा ही कहाँ तुम्हें कितना ये नुक़सान कर देंगीं 

छीन लेंगी ये तुम्हारा सुकून सच कहूँ तो परेशान कर देंगी

मत पूछो इन आँखों से ये तुमको हैरान  कर देंगी



तुम्हारी समझ से समझ लो मैं हार चुका हूँ 

बोझ ये सर से मैं उतार चुका हूँ 

क्यूँकि हर ख्वाहिश अब इश्क़ की मैं मार चुका हूँ 

महसूस ना होगा तुम्हें वो ग़म जो मैं गुजार चुका हूँ



किसी भी तरह का कोई वहम नहीं था 

ख़ुद मैने परखा है मैं कोई अहम नहीं था 

झूठी हमदर्दियाँ थीं महज़ दिखावे की 

दिल में असल में रहम नहीं था 



तेरी मासूमियत पर बग़ावत 

कोई कैसे कर सकता है 

तुझे देखता हूँ तो सोचता हूँ 

तेरी खिलाफत कोई कैसे कर सकता है 

नज़रें तो तुझसे मैं ही ना  मिला सकूँ 

तेरा दिल तोड़ दे 

ऐसी हिमाक़त कोई कैसे कर सकता है 



इश्क़ में अजीब से ख़िताब लेकर बैठा हूँ

टूटी हुई उम्मीदें और टूटे हुए ख़्वाब लेकर बैठा हूँ 

हांसिल कुछ भी ना हुआ फिर भी ये दिल मैं बेताब लेकर बैठा हूँ 

फिर से समझना है अब मुझे ये इश्क़ 

सो इश्क़ की ये किताब लेकर बैठा हूँ 

कैसे करना है मुझे मुनाफ़ा इश्क़ में हर हिसाब लेकर बैठा हूँ

शुरुआत से ही देना है अब झाँसा इसलिए गुलाब लेकर बैठा हूँ 




इश्क़ में कबसे ख़ाक हो कर बैठा हूँ

मैं अपनी ही ख्वाहिशों की राख हो कर बैठा हूँ

उड़ गए कितने परिंदे यहाँ से 

बेबसी का मारा मैं वो शाख़ हो कर बैठा हूँ 

ग़मों को तलब है मेरी

मैं उनकी इकलौती खुराक होकर बैठा हूँ 



लोग मानते ही नहीं हैं मेरा यक़ीन 

मानो मैं एक अफ़वाह हो गया हूँ 

इससे बुरा अब क्या होना है 

की मैं पूरी तरह से यहाँ तबाह हो गया हूँ 



तेरी ख़ातिर ही मैं दिल से बैर कर बैठा हूँ 

मनाना जब भी चाहा तो कहता है की देर कर बैठा हूँ कैसे तुझे समझाऊँ कितनी ख्वाहिशों को अपनी मैं ढेर कर बैठा हूँ 

अब तो नींदे भी ख़फ़ा हैं मुझसे की उनसे मुँह फेर कर बैठा हूँ 



क़ैद हो गया हूँ उसकी यादों में 

अब उससे छुटकारा मुश्किल है 

छूट भी गया जो उससे तो गुजारा मुश्किल है 




कहाँ हुए हैं मुझसे कोई गुनाह 

जो बेवजह पछताऊँगा मैं 

तुमसे क्या छुपा है जो छुपाऊँगा मैं 

वादा किया है तो यार निभाऊँगा मैं 

कुछ देर की होगी ख़फ़ा ये  नाराज़गी 

वापस तुम्हारे ही पास तो आऊँगा मैं 



अब और नहीं चाहिए दिल को दिलासे

 जो उससे अब झाँसे नहीं चाहिए 

ख़ुद ही अब किनारा कर रहा हूँ 

मैं उससे जो इश्क़ में तमाशे नहीं चाहिए 


एक आइना ही तो है 

जो मेरी हर बात समझता है 

बिन कहे मेरी खामोशियों के 

हालात समझता है 

कितना भी छुपाऊँ मैं अपने ग़म 

ये मेरे जज़्बात समझता है 

क्या क्या हुआ है 

ये मेरे साथ समझता है 


कितनों को तबाह करके इश्क़ को गुरूर हो गया है 

जो भी पड़ा इश्क़ में वो चूर चूर हो गया है 

बिखर गई यूँ जिंदगी. दिल में मानो नासूर हो गया है 

नहीं रहा अब इश्क़ में वफ़ाओं का रिवाज़ 

इश्क़ में ये अजीब सा दस्तूर हो गया है 




करने लगा हूँ उससे किनारा 

उसके बिन अब गुजारा करने लगा हूँ 

इतनी नाकाम कोशिशों के बावज़ूद 

मैं वही कोशिश दोबारा करने लगा हूँ 




किसी काम का नहीं हूँ मैं तुम्हारे 

तुम मेरे पास में मत आना 

उम्मीदों की जो राह गुज़र हो तुम 

तो मेरी तलाश में मत आना 



कुछ नहीं हुआ है खुदको समझाता रहा

ख़ाक हो गया हूँ ये सबको बताता रहा 

ठोकरें भी खायीं थी मैंने ग़ैरों की ख़ातिर 

ग़ैरों की ख़ातिर ही खुदको सताता रहा 

अजीब सा चस्का लगा मुझे जी हज़ूरी का 

दर-बदर से भटकता मैं ठोकरें खाता रहा 


सजदा किया है तुम्हारा, मानो कोई मूरत हो तुम

तड़पता है दिल बस तुम्हारी ही ख़ातिर

मेरी साँसों की वजह, दिल की ज़रूरत हो तुम



इन आँखों में देखो ज़रा तुम झाँक कर,

क्या तुम्हें गहराई नज़र आई है।

एक शख़्स का अक्स है इन आँखों में,

क्या उसकी परछाईं नज़र आई है।

कितनी ओझल रहीं हैं मेरी ख़ुशियाँ 

क्या तुम्हें मेरी तन्हाई नज़र आई है।



एक शख़्स से कल मुलाक़ात हुई थी 

आँखों से कहा था उसने कुछ 

इशारों में बात हुई थी 

आँखें खुल गईं इतने में 

अभी तो ख़्वाब की 

महज़ शुरुआत हुई थी 



बेबस हैं मेरे हालात और जिंदगी ये बेबसी की मारी चल रही है

ओझल हो रही हैं मेरी ख्वाहिशें, हर वक़्त तेरी खुमारी चल रही है

कश्मकश है अजीब सी की इश्क़ में उधारी चल रही है

नीलामी पर हैं मेरे ख़्वाब,और सीने में साँसें भी तुम्हारी चल रही हैं।




ऐ सितमगर तु सितम इसबार ना कर 

मासूम है दिल इसे यूँ बेजार ना कर 

तेरे रूठने से ही टूट जाता है ये 

इस तरह तू इसपे वॉर ना कर 

तेरे साये से लिपट कर रहना है इसे 

बेवजह तू इसे दरकिनार ना कर 



हर लम्हा अपनी जिंदगी का उसके इतंजार में गुज़ार कर बैठा हूँ

इससे तुम समझ लो मैं कितना उससे प्यार कर बैठा हूँ 

जीत गया वो बाजी दिल की मेरी उसकी ख़ातिर मैं हार कर बैठा हूँ 

कुछ भी नहीं है अब उससे अहम हर ख्वाहिश मैं दिल की मार कर बैठा हूँ 

शायराना अंदाज़

|| कागज़ के जज़्बात || इश्क़ में शिकस्त कोई खाया हुआ हो या यूँ समझो की इश्क़ में कोई सताया हुआ हो क्या उसका कोई वजूद नहीं जो इश्क़ में ठुकर...